प्लास्टिक की पुरानी और पीली कुर्सियों को फिर से नया बनाने के आसान घरेलू उपाय धूप और धूल से बेरंग हुई प्लास्टिक की कुर्सियों का पीलापन हटाने के लिए बेकिंग सोडा, सिरका और ब्लीच के सुरक्षित उपाय बेहद असरदार साबित होते हैं। घर की बालकनी, खुली छत, बगीचे या खाने की मेज के पास रखी प्लास्टिक की कुर्सियां कुछ समय बाद अपनी चमक खोने लगती हैं। तेज धूप, धूल-मिट्टी, बारिश का पानी और लगातार इस्तेमाल इनके मूल रंग को हल्का कर देता है और उन पर जिद्दी पीलापन जम जाता है। कई बार लोग मान लेते हैं कि प्लास्टिक एक बार बदरंग हो जाए तो उसे पहले जैसा साफ नहीं किया जा सकता, जबकि रसोई में मौजूद कुछ साधारण चीजों की मदद से इन कुर्सियों को दोबारा बेदाग बनाया जा सकता है। साबुन और गुनगुने घोल से प्राथमिक सफाई सफाई की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कुर्सी पर बैठी सूखी धूल और गर्द को किसी साफ सूखे कपड़े से अच्छी तरह झाड़ लें। इसके बाद एक बाल्टी में गुनगुना पानी लेकर उसमें थोड़ा लिक्विड डिशवॉश जेल या सामान्य डिटर्जेंट घोलें। एक स्पंज या नर्म ब्रिसल वाले ब्रश को इस झागदार पानी में डुबोकर कुर्सी के हर हिस्से, कोनों और पायदानों को रगड़ें। इस सामान्य धुलाई से प्लास्टिक की ऊपरी परत पर जमा रोजमर्रा का मैल आसानी से कटकर बह जाता है। जिद्दी दागों पर बेकिंग सोडा पेस्ट का असर यदि कुर्सी पर तेल, कालिख या पुराने जिद्दी पीले चकत्ते मौजूद हैं, तो बेकिंग सोडा का इस्तेमाल सबसे मुफीद रहता है। एक कटोरी में बेकिंग सोडा लें और उसमें जरूरत के मुताबिक हल्का पानी मिलाकर एक गाढ़ा लेप तैयार कर लें। इस पेस्ट को उन सभी जगहों पर अच्छी तरह लगाएं जहां पीलापन गहरा है। पेस्ट को लगभग 15 से 20 मिनट तक ऐसे ही लगा रहने दें ताकि वह मैल को ढीला कर सके। इसके बाद ब्रश से हल्के हाथों से गोलाई में रगड़ते हुए साफ ताजे पानी से धो लें, जिससे सतह का पीलापन काफी हद तक हल्का हो जाता है। सिरके और नींबू के रस का प्राकृतिक स्प्रे सफेद सिरका और ताजा नींबू प्राकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण सफाई के बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। एक स्प्रे बोतल में बराबर अनुपात में सफेद सिरका और पानी भरें, फिर उसमें थोड़ा नींबू का रस निचोड़ लें। इस तैयार घोल को पूरी कुर्सी पर अच्छी तरह स्प्रे करें और लगभग 10 मिनट के लिए छोड़ दें। निर्धारित समय बीतने के बाद एक साफ सूती कपड़े या ब्रश से पोंछकर रगड़ें। यह तरीका न केवल सख्त दागों को गायब करता है, बल्कि सीलन या फफूंद से आने वाली बदबू को भी पूरी तरह खत्म कर देता है। सफेद टूथपेस्ट से हटाएं छोटे निशान प्लास्टिक के फर्नीचर पर लगे हल्के दाग-धब्बों को दूर करने में साधारण सफेद टूथपेस्ट भी बहुत मददगार रहता है। जिस हिस्से पर निशान दिख रहे हों, वहां थोड़ा सा टूथपेस्ट सीधे लगाएं। इसके बाद एक पुराने टूथब्रश की सहायता से उस जगह को थोड़ी देर आहिस्ता-आहिस्ता घिसें। कुछ मिनट रगड़ने के बाद साफ पानी से धोकर पोछ लें, इससे निशान साफ हो जाते हैं। गहरे पीलेपन पर ब्लीच का एहतियाती इस्तेमाल धूप के असर से पूरी तरह बदरंग और बहुत ज्यादा पीली पड़ चुकी कुर्सियों के लिए हल्का ब्लीच का घोल तैयार किया जा सकता है। एक बाल्टी साफ पानी में बहुत मामूली मात्रा में ब्लीच मिलाएं और स्पंज से इस घोल को कुर्सी पर लगाएं। घोल को कुर्सी पर केवल 5 से 10 मिनट तक ही लगा रहने दें और फिर ढेर सारे साफ पानी से पूरी तरह धो लें। ब्लीच के इस्तेमाल के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए हाथों में रबर के दस्ताने जरूर पहनें और यह पूरी प्रक्रिया हमेशा खुले व हवादार स्थान पर ही करें। फर्नीचर को दोबारा पीला होने से बचाने के नियम प्लास्टिक के फर्नीचर को लंबे समय तक नया बनाए रखने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। कुर्सियों को कई दिनों तक सीधी और तीखी धूप में खुला न छोड़ें, क्योंकि पराबैंगनी किरणों से प्लास्टिक तेजी से पीला पड़ता है। इसके अलावा समय-समय पर उनकी सामान्य धुलाई करते रहें। जब कुर्सियों का इस्तेमाल न हो रहा हो, तो उन्हें किसी कवर से ढककर रखें और बारिश में भीगने के तुरंत बाद सूखे कपड़े से पोंछकर सुखा लें। इसका आप पर असर इन आसान घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप पुराने और बदरंग प्लास्टिक फर्नीचर को फेंकने या बदलने के खर्च से बच सकते हैं। • पैसे की बचत: नए प्लास्टिक फर्नीचर की खरीदारी पर होने वाले गैर-जरूरी खर्च से बचा जा सकता है। रसोई में पहले से मौजूद बेकिंग सोडा और सिरके जैसी सस्ती चीजों से कुर्सियां बिल्कुल नई जैसी चमक जाती हैं। • फर्नीचर की उम्र: धूप और बारिश से होने वाले नुकसान को समय रहते ठीक करने से कुर्सियां सालों-साल चलती हैं। नियमित रखरखाव से प्लास्टिक की मजबूती बनी रहती है और वह चटकने या टूटने से बचती है। • सुरक्षित रखरखाव: ब्लीच का इस्तेमाल करते समय दस्ताने पहनने और खुली हवा में काम करने से त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचता। प्राकृतिक तत्वों जैसे नींबू और सिरके के प्रयोग से घर के वातावरण में हानिकारक रसायन नहीं फैलते। • घर की सुंदरता: बालकनी और बगीचे में रखी कुर्सियों का पीलापन हटने से घर का बाहरी हिस्सा साफ-सुथरा दिखता है। अचानक आने वाले मेहमानों के सामने गंदे फर्नीचर की वजह से असहज नहीं होना पड़ता। ऐसा क्यों हुआ प्लास्टिक की कुर्सियों का रंग उड़ने और उन पर पीलापन जमने की मुख्य वजह मौसम का निरंतर प्रभाव और प्लास्टिक में मौजूद रासायनिक संरचना होती है। • धूप और मौसम की मार: लंबे समय तक सीधी धूप में रखे रहने से पराबैंगनी किरणें प्लास्टिक के बहुलक को प्रभावित करती हैं। लगातार धूप, धूलकण और बारिश के पानी के संपर्क में आने से सतह की चमक खत्म होकर पीलापन उभर आता है। • सतह पर गंदगी का जमाव: प्लास्टिक में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों में वातावरण की गर्द, ग्रीस और पसीना समा जाता है। जब समय पर सामान्य धुलाई नहीं की जाती, तो यह मैल प्लास्टिक की ऊपरी सतह में समाकर पक्के दाग बना देता है। • कवर और छांव की कमी: बगीचों या खुली छतों पर फर्नीचर को बिना किसी सुरक्षात्मक आवरण के छोड़ देना इस स्थिति को तेज करता है। बारिश के बाद पानी का जमाव और नमी सीलन और बदबू को भी न्योता देती है। सवाल-जवाब 1. प्लास्टिक की कुर्सियों से गहरा पीलापन हटाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कैसे करें? बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं और पीले हिस्सों पर लगाकर 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद ब्रश से हल्के हाथों से रगड़कर साफ पानी से धो लें। 2. क्या सिरका और नींबू का मिश्रण प्लास्टिक के दाग हटाने में सुरक्षित है? हां, बराबर मात्रा में पानी और सफेद सिरके में नींबू का रस मिलाकर स्प्रे करने से दाग और बदबू दोनों सुरक्षित रूप से साफ हो जाते हैं। 3. ब्लीच का इस्तेमाल करते समय किन सावधानियों का पालन करना जरूरी है? ब्लीच को हमेशा पानी में हल्का घोलकर 5 से 10 मिनट के लिए ही लगाएं। इस दौरान हाथों में ग्लव्स पहनें और सफाई हमेशा खुले व हवादार स्थान पर करें। 4. प्लास्टिक के फर्नीचर को पीला होने से रोकने के लिए क्या करना चाहिए? कुर्सियों को तेज धूप में ज्यादा देर न रखें, इस्तेमाल न होने पर कवर से ढकें और बारिश के बाद सूखे कपड़े से तुरंत पोंछ लें। https://trendkia.com/lifestyle/plastika-ki-purani-aura-pili-kursiyon-ko-phira-se-naya-banane-ke-asana-gharelu-upaya-37136 TrendKia — Har trend, sabse pehle.