प्रेशर कुकर में चावल चिपचिपे होने से बचाने के आसान नियम प्रेशर कुकर में पानी के सटीक अनुपात, सीमित धुलाई और सीटी के सही समय का ध्यान रखकर खिले-खिले चावल तैयार किए जा सकते हैं। भारतीय भोजन की थाली चावल के बिना अधूरी मानी जाती है। चाहे रोजमर्रा की दाल हो, कढ़ी हो या फिर राजमा, अधिकांश घरों में चावल नियमित भोजन का अनिवार्य अंग होते हैं। जब पके हुए चावल के दाने बिल्कुल अलग-अलग, नरम और खिले-खिले रहते हैं, तब भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। इसके विपरीत, थोड़ी सी लापरवाही या हड़बड़ी में तैयार किए गए चावल अक्सर चिपचिपे, गीले या फिर बर्तन की तली में जलकर खराब हो जाते हैं। व्यस्त दिनचर्या में प्रेशर कुकर का उपयोग चावल पकाने का सबसे तेज और सुलभ साधन माना जाता है। हालांकि, कुकर में पकाते वक्त पानी का सटीक संतुलन और आंच पर सीटी का प्रबंधन सबसे संवेदनशील पहलू होते हैं। पानी की थोड़ी सी भी अधिकता या कमी चावल की बनावट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। रसोई के कुछ बुनियादी नियमों का पालन करके हर बार बिल्कुल सटीक और स्वादिष्ट चावल तैयार किए जा सकते हैं। पानी का सही माप और अनुपात कुकर में चावल चढ़ाते वक्त सबसे आम गलती अंदाजे से पानी डालने की होती है। पानी की मात्रा तय करने के लिए हमेशा किसी एक गिलास या कटोरी का पैमाना तय करना चाहिए। यदि आप 1 गिलास चावल पका रहे हैं, तो उसमें लगभग 1.5 गिलास पानी मिलाना सबसे सटीक रहता है। इसी फार्मूले के अनुसार 2 गिलास चावल पकाने के लिए करीब 3 गिलास पानी की जरूरत होती है। जब पानी की मात्रा इस अनुपात में रहती है, तो चावल न तो कड़े या सूखे रहते हैं और न ही अत्यधिक नमी के कारण आपस में चिपकते हैं। चावल धोने की प्रक्रिया को सीमित रखें अक्सर लोग चावल को बहुत ज्यादा बार धोने की आदत रखते हैं, जो उसकी बनावट को नुकसान पहुंचा सकती है। चावल पकाने से ठीक पहले दानों को केवल 1 से 2 बार ही हल्के हाथों से धोना सबसे बेहतर माना जाता है। जरूरत से ज्यादा बार धोने पर चावल के दाने आवश्यकता से अधिक नमी सोख लेते हैं। इस अतिरिक्त नमी के कारण सीटी लगते ही दाने टूटने और आपस में चिपककर दलिया जैसे गीले होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। आंच का नियंत्रण और सीटी की गिनती प्रेशर कुकर में चावल पकाते समय बहुत अधिक सीटियां लगवाने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती है। यदि आप 1 या 2 गिलास चावल बना रहे हैं, तो स्टोव की आंच मध्यम रखें और केवल एक सीटी आने के बाद गैस बंद कर दें। इसके विपरीत, यदि आप 3 गिलास या उससे अधिक मात्रा में चावल तैयार कर रहे हैं, तो आंच तेज रखी जा सकती है और एक सीटी बजते ही बर्नर बंद कर देना चाहिए। आवश्यकता से अधिक सीटी लगाने से दाने अंदर से पिघलने लगते हैं और स्वाद प्रभावित होता है। भाप को खुद से निकलने का समय दें चावल पकने के तुरंत बाद कुकर का ढक्कन जबरन खोलने की गलती कभी न करें। सीटी को उठाकर भाप निकालने के बजाय कुकर का प्रेशर स्वाभाविक रूप से पूरी तरह खत्म होने देना चाहिए। भीतर मौजूद बची हुई भाप में चावल के दाने अपनी संरचना में अच्छी तरह सेट हो जाते हैं, जिससे परोसते समय दाने एक-दूसरे से पूरी तरह अलग और खिले नजर आते हैं। किस्म के आधार पर परीक्षण करें चावल की बनावट इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप किस किस्म या वैरायटी का इस्तेमाल कर रहे हैं। अलग-अलग किस्मों की नमी सोखने की क्षमता अलग होती है। इसलिए बाजार से जब भी कोई नए किस्म का चावल लाएं, तो किसी खास अवसर पर बनाने से पहले उसे एक बार साधारण तरीके से पकाकर जरूर परख लें। इसका आप पर असर रसोई में चावल बनाते समय इन बुनियादी तकनीकों को अपनाने से भोजन की बर्बादी रुकेगी और रोज़मर्रा का खाना अधिक स्वादिष्ट बनेगा। • सामग्री की बचत: सही माप से खाना बनाने पर अनाज और पानी का अपव्यय नहीं होता है। सही मात्रा में पानी डालने से चावल न तो नीचे से जलेंगे और न ही अत्यधिक गीले होकर बेकार होंगे। • समय का प्रबंधन: केवल एक सीटी के नियम से रसोई गैस और तैयारी के समय दोनों की बचत होती है। अनावश्यक सीटियों का इंतजार न करने से खाना जल्दी और व्यवस्थित रूप से तैयार होता है। • भोजन का बेहतर स्वाद: खिले-खिले दाने भोजन के समग्र अनुभव और प्रस्तुति को बेहतर बनाते हैं। परिवार के सदस्यों या मेहमानों के लिए तैयार की गई थाली अधिक आकर्षक और स्वादिष्ट लगती है। • किचन के बर्तनों की सुरक्षा: नीचे से चावल जलने की समस्या खत्म होने से बर्तनों को रगड़ने की झंझट समाप्त होती है। इससे कुकर की सफाई आसानी से हो जाती है और बर्तनों की उम्र बढ़ती है। ऐसा क्यों हुआ प्रेशर कुकर में चावल के चिपचिपे या जलने की समस्या मुख्य रूप से पानी के अनियंत्रित अनुपात, अत्यधिक धुलाई और अत्यधिक सीटियों के कारण उत्पन्न होती है। • अतिरिक्त नमी का प्रभाव: चावल को आवश्यकता से अधिक धोने या अनुपात से ज्यादा पानी डालने से दानों की भीतरी संरचना टूट जाती है। इसके परिणामस्वरूप स्टार्च तेजी से बाहर निकलकर दानों को चिपचिपा बना देता है। • अत्यधिक भाप और ताप: जरूरत से ज्यादा सीटी लगवाने से कुकर का अंदरूनी तापमान दानों को गला देता है। मध्यम या उच्च आंच पर केवल एक सीटी दानों को पकाने के लिए पर्याप्त दबाव बनाती है। • जल्दबाजी में ढक्कन खोलना: कृत्रिम रूप से सीटी उठाकर भाप निकालने से दानों का प्राकृतिक ठहराव रुक जाता है। भाप के खुद शांत होने से दाने अपनी बाहरी परत को बिना चिपके ठोस रूप दे पाते हैं। • अनाज की किस्मगत भिन्नता: अलग-अलग अनाजों के पकने की नमी सोखने की सीमा अलग होती है। नए या पुराने अनाज के अनुसार पानी को समायोजित न करने से नतीजे बिगड़ जाते हैं। सवाल-जवाब 1. प्रेशर कुकर में 1 गिलास चावल के लिए कितना पानी डालना चाहिए? 1 गिलास चावल पकाने के लिए लगभग 1.5 गिलास पानी का इस्तेमाल करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। 2. कुकर में 2 गिलास चावल के लिए पानी की क्या मात्रा होनी चाहिए? 2 गिलास चावल के लिए कुकर में करीब 3 गिलास पानी डालना चाहिए। 3. चावल पकाने से पहले उन्हें कितनी बार धोना सही रहता है? चावल को पकाने से पहले केवल 1 से 2 बार ही हल्के हाथों से धोना सबसे सही माना जाता है। 4. 1 या 2 गिलास चावल पकाते समय कितनी सीटी लगवानी चाहिए? 1 या 2 गिलास चावल पकाने के लिए मध्यम आंच पर केवल एक सीटी लगवाना पर्याप्त होता है। 5. 3 गिलास या उससे अधिक चावल पकाते समय गैस की आंच कैसी रखनी चाहिए? 3 गिलास या उससे अधिक चावल के लिए गैस की आंच तेज रखें और एक सीटी आने के बाद गैस बंद कर दें। 6. चावल पकने के बाद कुकर का ढक्कन कब खोलना चाहिए? कुकर का प्रेशर अपने आप पूरी तरह से खत्म होने के बाद ही ढक्कन खोलना चाहिए ताकि चावल अच्छे से सेट हो जाएं। 7. बाजार से नया चावल लाने पर क्या सावधानी रखनी चाहिए? नई किस्म का चावल लाने पर पहले उसे एक बार सामान्य तरीके से बनाकर चेक कर लेना चाहिए ताकि उसकी पानी सोखने की क्षमता समझ आ सके। https://trendkia.com/lifestyle/preshara-kukara-men-rice-chipachipe-hone-se-bachane-ke-asana-niyama-34656 TrendKia — Har trend, sabse pehle.