राजस्थान की पारंपरिक केरूंदे की सब्जी बनाने का आसान तरीका, कम तेल में तैयार होगी यह खट्टी-मीठी डिश जब हरी सब्जियां समझ न आएं, तो राजस्थान की पारंपरिक केरूंदे की सब्जी एक सेहतमंद और चटपटा विकल्प बनती है जिसे बेहद कम तेल में बनाया जा सकता है। रोजमर्रा के भोजन में हरी सब्जियों का विकल्प चुनना कई बार कठिन हो जाता है, खासकर तब जब परिवार में हर कोई एक ही तरह की सब्जियां खाकर ऊब चुका हो। ऐसे समय में राजस्थान की पारंपरिक रसोई का यह देसी स्वाद खाने की मेज पर नया स्वाद लेकर आता है। पाली और आसपास के क्षेत्रों में बेहद पसंद की जाने वाली केरूंदे की सब्जी न सिर्फ जीभ को तीखा और चटपटा स्वाद देती है, बल्कि इसे बहुत कम तेल या बिना तेल सिर्फ पानी के इस्तेमाल से भी पकाया जा सकता है। आज के समय में जब हाइजीन और संतुलित खानपान लोगों की दिनचर्या में सबसे महत्वपूर्ण बन चुके हैं, तब यह डिश स्वास्थ्य और स्वाद दोनों कसौटियों पर खरी उतरती है। कम तेल और सेहतमंद गुणों से भरपूर पारंपरिक स्वाद इस व्यंजन की सबसे प्रमुख विशेषता इसका पकाने का तरीका है। इसे सामान्य सब्जियों की तरह अधिक घी या तेल की आवश्यकता नहीं होती। आवश्यकता पड़ने पर इसे महज एक-दो चम्मच तेल या फिर सीधे पानी के छींटों और प्यूरी की मदद से भी तैयार किया जा सकता है। लहसुन, बारीक कटी प्याज, टमाटर और ताजी हरी मिर्च का देसी तड़का जब केरूंदे के साथ मिलता है, तो इसकी खुशबू ही खाने की इच्छा जगा देती है। पोषक तत्वों की दृष्टि से भी केरूंदा अत्यंत गुणकारी माना जाता है। इसमें विटामिन सी, आयरन और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो शरीर के पाचन तंत्र को सुदृढ़ रखने और सामान्य भूख बढ़ाने में सहायता करते हैं। सब्जी तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री इस पारंपरिक राजस्थानी सब्जी को पकाने के लिए घर में आसानी से उपलब्ध होने वाली साधारण सामग्री की आवश्यकता होती है • केरूंदे: 250 ग्राम (इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और बीच में चीरा लगा लें) • टमाटर: 2 मध्यम आकार के (इन्हें बारीक काट लें या मिक्सी में पीस लें) • लहसुन: 7 से 8 कलियाँ (खलबट्टे में कुटी हुई या बारीक पेस्ट के रूप में) • तेल: 1 से 2 चम्मच (वैकल्पिक, स्वास्थ्य कारणों से आप बिना तेल सीधे पानी के साथ भी छौंक लगा सकते हैं) तड़के और ग्रेवी के लिए जरूरी मसाले सब्जी को उचित राजस्थानी रंगत और तीखापन देने के लिए निम्नलिखित मसालों का सही अनुपात में उपयोग किया जाता है • लाल मिर्च पाउडर: स्वादानुसार अथवा कश्मीरी लाल मिर्च • राई या जीरा: आधा छोटा चम्मच (तड़के में छौंक लगाने हेतु) • पानी: आधा से एक कप (मसाला भूनने और ग्रेवी पकाने के लिए) • अन्य मसाले: हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, नमक और एक चुटकी हींग कदम-दर-कदम पकाने की संपूर्ण विधि सब्जी बनाने की शुरुआत सबसे पहले केरूंदों की तैयारी से होती है। 250 ग्राम केरूंदों को साफ पानी में धो लें और उनके ऊपरी डंठल को अलग कर दें। इसके बाद प्रत्येक केरूंदे के बीच में एक चीरा या कट लगा लें, जिससे पकाते समय मसाले अंदर तक अच्छी तरह समा सकें। अब गैस पर कड़ाही चढ़ाएं और उसमें एक से दो चम्मच तेल गर्म करें। यदि तेल का उपयोग नहीं करना चाहते, तो कड़ाही में थोड़ा सा पानी लेकर भी शुरुआत की जा सकती है। गर्म माध्यम में आधा छोटा चम्मच जीरा या राई और एक चुटकी हींग का छौंक लगाएं। इसके तुरंत बाद कड़ाही में कुटा हुआ लहसुन और बारीक कटी प्याज डालें। प्याज को धीमी और मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक वह हल्की सुनहरी न दिखने लगे। इसके बाद इसमें बारीक कटे टमाटर और हरी मिर्च डालें। साथ ही हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक मिला दें। इस पूरे मिश्रण को तब तक लगातार चलाते हुए भूनें जब तक कि मसाले अच्छी तरह पक न जाएं और तेल या पानी छोड़ने न लगें। जब मसाला अच्छी तरह भुन जाए, तब इसमें पहले से चीरा लगाकर रखे गए केरूंदे डालें। कलछी से चलाते हुए केरूंदों को मसालों के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि ग्रेवी की परत उन पर पूरी तरह लिपट जाए। इसके बाद कड़ाही में आधा से एक कप पानी डालें और ढक्कन लगाकर आंच को धीमा कर दें। इसे 7 से 10 मिनट तक पकने दें। इस अवधि में केरूंदे पानी की भाप में पूरी तरह नरम हो जाते हैं और मसालों का खट्टा-तीखा अर्क उनके भीतर तक समा जाता है। जब केरूंदे पूरी तरह मुलायम हो जाएं और पानी सूखकर गाढ़ी लटपटी ग्रेवी का रूप ले ले, तो गैस बंद कर दें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर सजाएं। इस स्वादिष्ट सब्जी को गरमा-गरम बाजरे की रोटी, सामान्य चपाती या पराठे के साथ परोसा जा सकता है। इसका आप पर असर यह रेसिपी रोजमर्रा के भोजन में तेल की खपत घटाने और पारंपरिक पोषण को आसानी से शामिल करने का व्यावहारिक विकल्प देती है। • रसोई बजट और सेहत: बहुत कम तेल या बिना तेल पानी में पकने के कारण यह सब्जी खाद्य तेल के दैनिक खर्च को घटाती है और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद करती है। • आहार में विविधता: सामान्य हरी सब्जियों से ऊब चुके परिवारों के लिए यह एक तुरंत बनने वाला नया विकल्प देती है। • पोषण का लाभ: विटामिन सी और आयरन से भरपूर होने के कारण यह प्राकृतिक रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन सुधारने में उपयोगी साबित होती है। • तैयारी का समय: केवल 7 से 10 मिनट के धीमी आंच पर पकने के समय के साथ यह व्यस्त समय में भी आसानी से तैयार हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ यह व्यंजन राजस्थान के शुष्क मौसम और सीमित संसाधनों में पौष्टिक एवं लंबे समय तक टिकने वाला भोजन तैयार करने की पारंपरिक आवश्यकता से उपजा है। • प्राकृतिक अनुकूलन: राजस्थान के गर्म और शुष्क इलाकों में हरी सब्जियों की मौसमी कमी के दौरान झाड़ियों में उगने वाले खट्टे केरूंदे का उपयोग सब्जी और अचार के रूप में किया जाता रहा है। • कम तेल में पकाने की तकनीक: भारी चिकनाई के बजाय पानी और भाप आधारित तकनीक से पकाने की परंपरा इसलिए बनी ताकि भोजन सुपाच्य रहे और पेट की समस्याओं से राहत दे। • मसालों का संतुलन: केरूंदे के तीखे खट्टेपन को संतुलित करने के लिए प्याज, टमाटर और कुटे लहसुन के संयोजन का उपयोग पारंपरिक रसोई में लगातार आजमाया जाता रहा है। सवाल-जवाब 1. केरूंदे की सब्जी बनाने में कितना समय लगता है? मसाला भूनने के बाद केरूंदे को धीमी आंच पर ढककर पकने में लगभग 7 से 10 मिनट का समय लगता है। 2. क्या इस सब्जी को बिना तेल के भी पकाया जा सकता है? हाँ, इसे बिना तेल के सीधे थोड़े से पानी में राई, जीरा और लहसुन का छौंक लगाकर आसानी से बनाया जा सकता है। 3. केरूंदे में कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं? केरूंदा विटामिन सी, आयरन और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो पाचन और भूख बढ़ाने में सहायक हैं। 4. पकाने से पहले केरूंदों को काटना क्यों आवश्यक है? केरूंदों के बीच में चीरा लगाने से मसाला और ग्रेवी अंदर तक आसानी से समा जाते हैं और वे जल्दी नरम हो जाते हैं। 5. यह सब्जी किस रोटी के साथ सबसे अच्छी लगती है? यह चटपटी सब्जी गरमा-गरम बाजरे की रोटी, सामान्य गेहूं की चपाती या पराठे के साथ सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। https://trendkia.com/lifestyle/rajasthan-ki-parnparika-kerunde-ki-sabji-banane-ka-asana-tarika-kama-tela-men-taiyara-hogi-yaha-khatti-mithi-disha-54492 TrendKia — Har trend, sabse pehle.