# राकेश कुमार का खास गार्डनिंग फॉर्मूला, 90% रेत में पौधे लगाएंगे तो कभी नहीं सड़ेंगी जड़ें

> 20 साल का अनुभव रखने वाले गार्डनर राकेश कुमार ने पौधों को बचाने का आसान तरीका बताया है। गमले की मिट्टी में 90 प्रतिशत छनी हुई रेत और 10 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट या मिट्टी मिलाने से पौधे की जड़ें कभी नहीं सड़तीं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/rakesha-kumara-ka-khasa-gardaninga-phormula-90-reta-men-paudhe-lagaenge-to-kabhi-nahin-sarengi-jaren-31774 · **Language:** Hindi
**Tags:** गार्डनिंग टिप्स, पौधों की देखभाल, रेत का इस्तेमाल, गमले की मिट्टी, बागवानी, जड़ सड़ना

छत पर बागवानी करने वाले लोगों के लिए पौधों की सही देखभाल करना सबसे बड़ा टास्क होता है। गार्डनिंग के शौकीन राकेश कुमार अपनी छत पर एडेनियम, उड़हुल और कैक्टस जैसे 150 से ज्यादा शानदार पौधे उगा चुके हैं। उनका इस क्षेत्र में दो दशक यानी 20 साल का लंबा अनुभव रहा है, जिसके आधार पर वे पौधों की सेहत को लेकर कई अहम जानकारियां साझा करते हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई नया व्यक्ति भी गार्डनिंग शुरू कर रहा है, तो उसे हमेशा रेत का इस्तेमाल करना चाहिए। ये छोटे-छोटे गार्डनिंग टिप्स पौधों की जिंदगी बचा लेते हैं और आपकी सारी मेहनत बेकार नहीं जाती।

## जड़ में पानी रुकना है सबसे बड़ा दुश्मन
राकेश कुमार का अनुभव बताता है कि पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान उनकी जड़ों में ज्यादा देर तक पानी टिकने से पहुंचता है। जब पौधे की जड़ें लंबे समय तक पानी में डूबी रहती हैं, तो वे गलने लगती हैं। एक बार जड़ें सड़ने के बाद पौधा मुरझाकर पूरी तरह खराब हो जाता है। इसलिए बागवानी करते समय यह बेहद जरूरी है कि गमले की मिट्टी में पानी कभी भी लंबे समय तक जमा न रहे, बल्कि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाए।

## बेकार समझकर फेंकी जाने वाली रेत का सही इस्तेमाल
घरों या इमारतों की दीवारों पर प्लास्टर करते समय मसाले में जिस रेत का उपयोग किया जाता है, उसे पहले छलनी से अच्छी तरह छाना जाता है। छपाई के बाद जो मोटा और बचा हुआ कचरा या रेत का हिस्सा बच जाता है, उसे लोग अमूमन बेकार समझकर कचरे में फेंक देते हैं। लेकिन राकेश कुमार के अनुसार, अगर इसी फेंकी जाने वाली रेत को पौधों को उगाने और विकसित करने में काम में लिया जाए, तो यह गार्डनिंग के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।

## मिट्टी के कड़े होने से रुक जाता है पौधों का विकास
पौधों को गमले में रोपते समय सही अनुपात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। राकेश कुमार सलाह देते हैं कि गमला तैयार करते समय उसमें 90 प्रतिशत रेत और मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा वर्मी कंपोस्ट और सामान्य मिट्टी का होना चाहिए। इस खास अनुपात में पौधे लगाने से उनका विकास बहुत तेजी और बेहतर तरीके से होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि जब हम पौधे को बहुत ज्यादा चिकनी या भारी मिट्टी में लगा देते हैं, तो खाद मिलने के बाद वह मिट्टी सूखकर बेहद कड़ी हो जाती है।

## जड़ों को बेहतर फैलाव देती है रेत
जब गमले की मिट्टी पूरी तरह कठोर हो जाती है, तो पौधों की ग्रोथ अपने आप रुक जाती है। कड़ी मिट्टी की वजह से न तो नई जड़ें बन पाती हैं और न ही तना मजबूत हो पाता है, जिससे पौधों को भारी नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत, रेत का मुख्य गुण यह है कि वह कभी भी जड़ों को जकड़ कर नहीं रखती। रेत का इस्तेमाल करने से जड़ों को अंदर फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और उनमें हवा का संचार भी बना रहता है, जिससे पौधे की जड़ें सुरक्षित रहती हैं और कभी नहीं सड़तीं।

## इसका आप पर असर
यह गार्डनिंग फॉर्मूला उन सभी लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो घर की छत या बालकनी में पौधे उगाते हैं।

- **घर और छत पर बागवानी करने वालों के लिए:** इस तरीके को अपनाने से आपके महंगे और सुंदर पौधे अत्यधिक पानी और कड़क मिट्टी के कारण खराब नहीं होंगे। गमले में 90 प्रतिशत रेत और 10 प्रतिशत खाद का यह अनुपात आपके पौधों की उम्र बढ़ाएगा और उनकी ग्रोथ को तेज करेगा।
- **शुरुआती गार्डनर्स के लिए:** जो लोग गार्डनिंग की शुरुआत कर रहे हैं और अक्सर इस शिकायत से परेशान रहते हैं कि उनके पौधे सूख जाते हैं या उनकी जड़ें गल जाती हैं, वे इस आसान फॉर्मूले से अपनी मेहनत बचा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पौधों की जड़ें सड़ने और उनके विकास के रुकने के पीछे मुख्य वजह मिट्टी की गलत बनावट और पानी की निकासी का अभाव है।

- **जड़ों में पानी का रुकना:** जब गमले की मिट्टी लंबे समय तक नमी को रोककर रखती है, तो जड़ों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है और फंगस या सड़न पैदा हो जाती है।
- **कड़ी मिट्टी का जमना:** सामान्य मिट्टी में जब खाद मिलाई जाती है, तो बार-बार पानी देने से वह टाइट हो जाती है, जिससे जड़ें फैल नहीं पातीं।
- **रेत की ढीली बनावट:** रेत कभी भी आपस में चिपककर कड़क नहीं होती, इसलिए यह जड़ों के आसपास पोरस जगह बनाए रखती है जिससे हवा और पानी का संतुलन सही रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राकेश कुमार को गार्डनिंग का कितना अनुभव है?
राकेश कुमार को गार्डनिंग का 20 साल का लंबा अनुभव है।

### 2. उन्होंने छत पर कुल कितने पौधे लगाए हुए हैं?
उन्होंने अपनी छत पर 150 से अधिक पौधे लगाए हुए हैं।

### 3. गमला तैयार करते समय रेत और खाद का अनुपात क्या होना चाहिए?
गमले में 90 प्रतिशत रेत और 10 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट व मिट्टी होनी चाहिए।

### 4. पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान किस चीज से होता है?
पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान उनकी जड़ में पानी रुकने से होता है।

### 5. किस प्रकार की रेत का उपयोग करने की सलाह दी गई है?
दीवारों पर प्लास्टर के मसाले को छानने के बाद जो रेत बच जाती है, उसका उपयोग करने की सलाह दी गई है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._