# रांची के जंगलों में मिलता है यह अनोखा पौधा: छूते ही मुरझा जाता है और बीमारियों के लिए है अचूक औषधि

> रांची और खूंटी के जंगलों में पाया जाने वाला एक विशेष पौधा अपनी छूते ही मुरझा जाने की अद्भुत क्षमता और औषधीय गुणों के कारण चर्चा में है। स्थानीय लोग इसे विभिन्न पेट और त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में बेहद कारगर मानते हैं।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-07-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/ranchi-ke-jngalon-men-milata-hai-yaha-anokha-paudha-chhute-hi-murajha-jata-hai-aura-bimariyon-ke-lie-hai-achuka-aushadhi-5890 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांची, खूंटी, जड़ी-बूटी, औषधीय पौधे, झारखंड वन, प्राकृतिक उपचार

झारखंड की राजधानी रांची और आसपास के खूंटी क्षेत्र के जंगलों में एक बेहद अनोखा और रहस्यमयी पौधा पाया जाता है, जो अपनी खास प्रकृति के कारण लोगों के बीच आकर्षण का मुख्य बिंदु बना हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह कोई साधारण वनस्पति नहीं है, बल्कि इसे एक जादुई पौधे के रूप में पहचाना जाता है क्योंकि जैसे ही कोई इसे स्पर्श करता है, इसके पत्ते तुरंत सिमट कर मुरझा जाते हैं। कुछ देर बाद ये पत्ते वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी यहां पहुंचते हैं और इसके वीडियो भी बनाते हैं।

## स्वास्थ्य समस्याओं के लिए रामबाण उपचार
स्थानीय निवासी सुजीत बताते हैं कि यह पौधा केवल देखने में ही रोमांचक नहीं है, बल्कि इसके औषधीय लाभ भी बहुत अधिक हैं। पेट संबंधी विकारों के लिए इसे बेहद प्रभावी माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को डायरिया, पेट दर्द, गैस या अपच जैसी समस्या हो, तो इस पौधे के पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करना बहुत फायदेमंद साबित होता है। सुजीत का कहना है कि इसके काढ़े की केवल दो चम्मच मात्रा का सेवन करने से पेट की गंभीर समस्याएं खुद-ब-खुद ठीक हो जाती हैं।

## त्वचा रोगों में भी है अत्यंत लाभकारी
केवल आंतरिक रोगों ही नहीं, बल्कि बाहरी चर्म रोगों के उपचार में भी इस वनस्पति का उपयोग रामबाण की तरह किया जाता है। त्वचा पर होने वाले दाग-धब्बे और खुजली जैसी परेशानियों से निजात पाने के लिए ग्रामीण इसके पत्तों का पेस्ट तैयार करते हैं। सुजीत के अनुसार, प्रभावित स्थान पर इस पेस्ट को लगाने से कुछ ही बार में त्वचा रोग धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। इसके औषधीय गुणों के कारण ही स्थानीय लोग इसे एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में संरक्षित रखते हैं।

## आकर्षण का केंद्र और अन्य उपयोग
खूंटी के जंगलों में मिलने वाले इस पौधे को लेकर पर्यटकों में भारी उत्साह रहता है, जो अक्सर स्थानीय लोगों से पूछते हैं कि आखिर यह 'छुईमुई' जैसा पौधा कहां मिलेगा। लोग इसे छूकर आनंद लेते हैं और इसकी अनूठी प्रकृति को देखकर दंग रह जाते हैं। इसके औषधीय और वैज्ञानिक महत्व के अलावा, स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल जैविक खाद के निर्माण में भी करते हैं। यह पौधा वास्तव में एक ऐसी अनमोल वनस्पति है जिसके फायदे अनेक हैं और जो प्रकृति की अनमोल देन मानी जाती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** इस प्रकार के औषधीय पौधों की जानकारी पारंपरिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, लेकिन किसी भी वनस्पति का उपयोग करने से पहले स्थानीय जानकार या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

**रांची में:** यदि आप खूंटी या रांची के जंगलों में भ्रमण कर रहे हैं, तो इन दुर्लभ पौधों को नुकसान न पहुंचाएं और उन्हें उनके प्राकृतिक परिवेश में ही रहने दें।

## सवाल-जवाब

### 1. यह पौधा छूने पर कैसा व्यवहार करता है?
इस पौधे की पत्तियां छूते ही तुरंत सिमट कर मुरझा जाती हैं और कुछ देर बाद वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती हैं।

### 2. किन शारीरिक समस्याओं में यह पौधा फायदेमंद है?
यह पौधा मुख्य रूप से डायरिया, पेट दर्द, गैस और अपच जैसी समस्याओं के साथ-साथ त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

### 3. इस पौधे का उपयोग दवा के रूप में कैसे किया जाता है?
पेट की समस्याओं के लिए इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर दो चम्मच पिया जाता है, जबकि चर्म रोगों के लिए इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर प्रभावित हिस्से पर लगाया जाता है।

### 4. यह पौधा मुख्य रूप से कहां पाया जाता है?
यह पौधा झारखंड की राजधानी रांची के आसपास और खूंटी जिले के जंगलों में पाया जाता है।

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