रसोई में ही तैयार करें खास बिरयानी मसाला, हर निवाले में मिलेगा लाजवाब स्वाद बाजार के पैकेट वाले मसालों पर निर्भर रहने के बजाय आप घर में मौजूद खड़े मसालों से खुशबूदार बिरयानी मसाला बना सकते हैं। धीमी आंच पर भुने खड़े मसालों और सही अनुपात से तैयार यह मिश्रण हर तरह की बिरयानी का जायका दोगुना कर देता है। शाकाहारी हो या मांसाहारी, एक उम्दा बिरयानी की असली पहचान उसकी सम्मोहक सुगंध और संतुलित मसालों के मिश्रण में छिपी होती है। जब भी चावल की इस लोकप्रिय डिश का जिक्र छिड़ता है, तो भूख खुद-ब-खुद बढ़ जाती है। अधिकांश लोग इस विशिष्ट स्वाद को पाने के लिए बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद मसालों का सहारा लेते हैं। हालांकि, रसोई में मौजूद बुनियादी और सुगंधित साबुत सामग्रियों को मिलाकर घर पर ही पारंपरिक बिरयानी मसाला बहुत सरलता से तैयार किया जा सकता है। मसाला बनाने के लिए जरूरी सामग्री और उनकी मात्रा इस खास मसाले को तैयार करने के लिए खड़े और गरम मसालों का एक संतुलित मिश्रण चाहिए होता है। इसमें साबुत धनिया 4 चम्मच, शाही जीरा 2 चम्मच तथा सौंफ 1 चम्मच की जरूरत पड़ती है। इनके साथ हरी इलायची 10-12 दाने, बड़ी इलायची 4 दाने, दालचीनी के 1-1 इंच के 3-4 टुकड़े, लौंग 10-12 नग, चक्रफूल 3 नग और जावित्री के 2 फूल लिए जाते हैं। मिश्रण में आधा टुकड़ा कद्दूकस किया हुआ जायफल, तेजपत्ता 3-4 पत्ते, काली मिर्च 1.5 चम्मच और पत्थर का फूल 1 छोटा चम्मच शामिल किया जाता है। रंग और अतिरिक्त स्वाद उभारने के लिए कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच तथा हल्दी पाउडर आधा चम्मच लिया जाता है। मसालों की तैयारी और भूनने का सही तरीका मसाला तैयार करने की प्रक्रिया में स्वच्छता और सही तापमान सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। सबसे पहले सभी खड़े मसालों को अच्छी तरह साफ कर लें ताकि धूल या अतिरिक्त सीलन निकल जाए। दालचीनी, तेजपत्ता और जायफल को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर लेना चाहिए, जिससे उन्हें भूनते और पीसते समय कोई असुविधा न हो। इसके बाद मोटे तले वाले बर्तन अथवा कड़ाही को गैस पर चढ़ाएं। इसमें धनिया, जीरा, सौंफ, इलायची, लौंग, दालचीनी, तेजपत्ता, चक्रफूल, जावित्री और काली मिर्च एक साथ डालें। गैस की आंच को धीमा ही रखना जरूरी है। इन मसालों को लगातार हिलाते हुए 2 से 3 मिनट की अवधि तक ही सेकना चाहिए। इस प्रक्रिया का मकसद मसालों का रंग बदलना नहीं, बल्कि उनकी नमी दूर करके उनके प्राकृतिक तेलों और महक को सक्रिय करना होता है। जायफल और पत्थर का फूल सबसे आखिर में पैन में मिलाया जाता है। ठंडा करने और पीसने की विधि जैसे ही धीमी आंच पर सिक रहे मसालों से हल्की और मीठी सुगंध उठने लगे, बर्नर को फौरन बंद कर दें। भुने हुए गर्म मसालों को तुरंत एक समतल प्लेट में फैलाएं और सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। गर्म अवस्था में मसालों को कभी नहीं पीसना चाहिए, क्योंकि इससे उनके स्वाद में कड़वाहट आ सकती है। पूरी तरह ठंडे हो चुके मसालों को ग्राइंडर के जार में पलटें। इसी समय जार में हल्दी पाउडर और कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर भी मिला दें। मिक्सी को एक गति में लगातार चलाने के बजाय पल्स मोड पर रुक-रुक कर घुमाएं। अपनी पसंद के मुताबिक इसे बारीक या हल्का दरदरा पीस लें। इस तरह शुद्ध और ताजे मसालों से बना यह मिश्रण जब बिरयानी में इस्तेमाल होगा, तो उसकी खुशबू पूरे घर में महक उठेगी। इसका आप पर असर घर पर ताजा मसाला तैयार करने से खाने का स्वाद बढ़ता है और डिब्बाबंद उत्पादों में मौजूद मिलावट व प्रिजर्वेटिव्स से बचाव होता है। • स्वाद और गुणवत्ता: ताजे भुने मसालों के प्राकृतिक तेल सुरक्षित रहते हैं, जिससे बिरयानी में गहरा और प्रामाणिक स्वाद मिलता है। बाजार के पुराने पैकेटों की तुलना में यह मिश्रण भोजन को अधिक सुगंधित बनाता है। • आर्थिक बचत: रसोई में मौजूद बुनियादी खड़े मसालों का उपयोग करके इसे कम खर्च में तैयार किया जा सकता है। महंगे ब्रांडेड बिरयानी मसाला पैकेट खरीदने का अतिरिक्त खर्च बचता है। • स्वास्थ्य लाभ: घर पर मसाला पीसने से कृत्रिम रंगों, स्टार्च और रसायनों का खतरा नहीं रहता। आप पूरी तरह शुद्ध और स्वच्छ सामग्री का सेवन सुनिश्चित कर सकते हैं। • भंडारण और उपयोग: एयरटाइट कंटेनर में रखने पर यह मसाला लंबे समय तक अपनी खुशबू बरकरार रखता है। इसे वेज पुलाव या अन्य ग्रेवी वाली सब्जियों में भी सुगंध बढ़ाने के लिए डाला जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ बिरयानी में बाजार के पैकेटों जैसा स्वाद न आ पाने का मुख्य कारण मसालों के प्राकृतिक तेलों का उड़ जाना और उनका गलत अनुपात होता है। खड़े मसालों को सही विधि से धीमी आंच पर भूनने से उनकी आंतरिक नमी समाप्त होती है और सुगंधित यौगिक सक्रिय हो जाते हैं। • सीलन और तेल का असर: खड़े मसालों में वातावरण की नमी सोखने की प्रवृत्ति होती है, जिससे उनका स्वाद दब जाता है। हल्की सिकाई से नमी हटती है और दबे हुए एसेंशियल ऑयल उभरकर सामने आते हैं। • धीमी आंच की अहमियत: तेज आंच पर भूनने से मसालों की बाहरी परत जल जाती है और कड़वाहट आ जाती है। धीमी आंच पर केवल दो से तीन मिनट भूनने से रंग बदले बिना सही खुशबू मिल पाती है। • पीसने का तापमान: गर्म अवस्था में ग्राइंडर चलाने से ब्लेड की गर्मी मसालों के तेल को नष्ट कर देती है। इसलिए मिश्रण को पूरी तरह ठंडा करके रुक-रुक कर पीसना जरूरी माना जाता है। सवाल-जवाब 1. बिरयानी मसाला बनाने में कुल कितने साबुत मसालों का उपयोग होता है? इसमें धनिया, जीरा, सौंफ, दो प्रकार की इलायची, दालचीनी, लौंग, चक्रफूल, जावित्री, जायफल, तेजपत्ता, काली मिर्च और पत्थर का फूल मिलाकर खड़े मसाले इस्तेमाल होते हैं। 2. मसालों को भूनते समय गैस की आंच कैसी रखनी चाहिए और कितने समय तक भूनना चाहिए? गैस की आंच को बिल्कुल धीमा रखना चाहिए और मसालों को लगातार चलाते हुए केवल 2 से 3 मिनट तक ही भूनना चाहिए। 3. जायफल और पत्थर का फूल पैन में कब मिलाना चाहिए? जायफल और पत्थर का फूल अन्य खड़े मसालों की सिकाई के सबसे अंत में पैन में डाला जाता है। 4. गर्म मसालों को तुरंत मिक्सी में पीसने से क्यों बचना चाहिए? गर्म मसालों को तुरंत पीसने से उनका स्वाद कड़वा हो सकता है, इसलिए उन्हें पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही पीसना चाहिए। 5. मसाला पीसते समय कौन से पिसे हुए पाउडर मिलाए जाते हैं? मिक्सी के जार में ठंडे खड़े मसालों के साथ 1 चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाया जाता है। https://trendkia.com/lifestyle/rasoi-men-hi-taiyara-karen-khasa-biryani-masala-hara-nivale-men-milega-lajavaba-svada-44141 TrendKia — Har trend, sabse pehle.