# रेजिन में सुरक्षित असली फूलों के गहने बने दिल्ली एक्सपो का आकर्षण, शुरुआती दाम ₹150

> दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर आयोजित ग्रैंड एक्सपो में असली प्राकृतिक फूलों से बनी हैंडमेड ज्वेलरी ग्राहकों को खूब आकर्षित कर रही है। पहाड़ों और कश्मीर के फूलों को रेजिन में ढालकर तैयार किए गए इन गहनों की शुरुआती कीमत मात्र ₹150 है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/rejina-men-surakshita-asali-phulon-ke-gahane-bane-delhi-expo-ka-akarshana-shuruati-dama-150-54339 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली एक्सपो, हैंडमेड ज्वेलरी, रेजिन आर्ट, बाबा खड़क सिंह मार्ग, सोनू, कश्मीरी फूल, प्रगति मैदान

ताजे फूलों की कोमलता और प्राकृतिक रंग हर किसी का मन मोह लेते हैं, मगर समय के साथ उनकी ताजगी मुरझा जाना स्वाभाविक माना जाता है। राजधानी दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर आयोजित ग्रैंड एक्सपो में इसी धारणा को बदलकर फूलों की खूबसूरती को गहनों के रूप में सहेजकर पेश किया गया है। प्रदर्शनी में विक्रेता सोनू प्राकृतिक फूलों से तैयार की गई विशेष ज्वेलरी के साथ पहुंचे हैं। इन आभूषणों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें असली फूलों की बनावट और रंगों को ज्यों का त्यों संभालकर झुमके, इयररिंग्स और पेंडेंट तैयार किए जाते हैं, जिससे फूलों का आकर्षण लंबे समय तक बरकरार रहता है।

## पहाड़ों और कश्मीर के प्राकृतिक फूलों का चयन
इस अनूठी ज्वेलरी की बनावट और उसमें प्रयुक्त सामग्री के बारे में सोनू बताते हैं कि गहनों को तैयार करने के लिए ज्यादातर पहाड़ी इलाकों के फूलों का उपयोग किया जाता है। इनमें खासतौर पर कश्मीर और अन्य पहाड़ी घाटियों से लाए गए फूल शामिल रहते हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक देसी भारतीय फूलों को भी गहनों का आधार बनाया जाता है। कारीगरी की शुरुआत में हर फूल की पंखुड़ियों को बेहद सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है, जिसके बाद उन्हें विशेष तकनीक से प्रेस करके सुखाया जाता है ताकि शिल्पकार उन्हें मनचाहे आभूषण के ढांचे के अनुसार संतुलित आकार दे सकें।

## रेजिन की मदद से तैयार होती है टिकाऊ बनावट
फूलों को गहनों में तब्दील करने की पूरी प्रक्रिया काफी बारीक और व्यवस्थित है। सबसे पहले चुने हुए फूलों को प्रेस करने के बाद आवश्यकतानुसार काटा जाता है। इसके पश्चात इन पंखुड़ियों को पारदर्शी रेजिन के भीतर सुरक्षित ढंग से व्यवस्थित किया जाता है। फ्रेम के डिजाइन के मुताबिक उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है, जिससे फूल का मूल प्राकृतिक स्वरूप कांच जैसी चमक में सुरक्षित बंद हो जाता है। सोनू के अनुसार, इस पूरी कलाकारी में काफी समय लगता है और किसी एक प्रदर्शनी के लिए पर्याप्त स्टॉक तैयार करने में ही लगभग 3 से 4 महीने तक का समय लग जाता है।

## ₹150 से शुरुआत और इयररिंग्स की सर्वाधिक पसंद
कीमत के लिहाज से यह ज्वेलरी आम खरीदारों की जेब के काफी अनुकूल रखी गई है। स्टॉल पर गहने मुख्य रूप से ₹150, ₹250 और ₹350 के दाम में उपलब्ध हैं। कुछ बेहद बारीक और विशेष डिजाइन वाले आभूषणों की कीमत ₹350 से ₹400 तक भी जाती है। सोनू बताते हैं कि आने वाले खरीदारों में सबसे ज्यादा रुझान इयररिंग्स की ओर देखने को मिलता है। प्रकृति का सीधा जुड़ाव होने के कारण यह सामान्य कृत्रिम गहनों से एकदम अलग दिखते हैं। हालांकि, ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और खरीदारी के समय होने वाले मोलभाव के अनुसार कीमतों में हल्का बदलाव भी संभव रहता है।

## देशभर की प्रमुख प्रदर्शनियों तक सीधी पहुंच
सोनू अपने इन शिल्पों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रमुख व्यापारिक आयोजनों पर भरोसा करते हैं। वह दिल्ली हाट, सूरजकुंड मेला, प्रगति मैदान और भारत के अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाले सरकारी व सांस्कृतिक एक्सपो में अपनी दुकानें लगाते हैं। वर्तमान में उनका कारोबार पूरी तरह प्रत्यक्ष प्रदर्शनियों पर ही आधारित है और वह ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री नहीं करते हैं। सोनू के अनुसार, इस पूरे कार्य में मुनाफे का दायरा करीब 60 फीसदी तक रहता है, जो आभूषण के डिजाइन, निर्माण में आई लागत और ग्राहकों को दी जाने वाली छूट के आधार पर तय होता है।

## इसका आप पर असर
हैंडमेड और पर्यावरण-अनुकूल कला में रुचि रखने वाले खरीदारों और छोटे शिल्पकारों के लिए यह अनूठी ज्वेलरी किफायती और टिकाऊ विकल्प पेश करती है।

- **भारत में:** असली फूलों से बने गहने पारंपरिक कृत्रिम ज्वेलरी का एक प्राकृतिक और बजट-अनुकूल विकल्प प्रदान करते हैं। कम लागत में प्रकृति से जुड़े अनूठे आभूषण दैनिक उपयोग या उपहार देने के लिए सुलभ हो रहे हैं।
- **दिल्ली में:** बाबा खड़क सिंह मार्ग पर एक्सपो में जाकर स्थानीय खरीदार ₹150 से शुरू होने वाले इस क्राफ्ट को सीधे देख और खरीद सकते हैं। मध्यस्थ न होने के कारण ग्राहकों को सीधे कारीगर से मोलभाव करने और वैरायटी चुनने की सुविधा मिलती है।
- **शिल्पकारों के लिए:** स्थानीय फूलों और रेजिन तकनीक का यह मॉडल छोटे कारीगरों के लिए न्यूनतम संसाधनों में बेहतर आय का जरिया साबित हो रहा है। लगभग 60 फीसदी तक का मुनाफा नए उद्यमियों को हैंडीक्राफ्ट क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करता है।
- **खरीदारी के तरीके:** यह उत्पाद किसी भी ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है। जो लोग इसे खरीदना चाहते हैं, उन्हें दिल्ली हाट या सरकारी प्रदर्शनियों में ही व्यक्तिगत रूप से जाना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
ताजे फूलों की अल्पकालिक सुंदरता को स्थायी कला में बदलने और छोटे आयोजनों में किफायती हैंडीक्राफ्ट की बढ़ती मांग के कारण यह नवाचार सामने आया है।

- **प्राकृतिक आकर्षण का संरक्षण:** ताजे फूल कुछ ही दिनों में सूख जाते हैं, जिससे उनकी सुंदरता खत्म हो जाती है। विशेष तकनीक से प्रेस कर रेजिन में सील करने से फूलों के रंग और रूप कई सालों तक सुरक्षित रहते हैं।
- **कच्चे माल की उपलब्धता:** कश्मीर और पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के सुंदर मौसमी फूल पाए जाते हैं। इन पहाड़ी और देसी फूलों का संग्रह स्थानीय शिल्पकारों को अनोखे उत्पाद तैयार करने का आधार देता है।
- **बजट-फ्रेंडली फैशन की मांग:** पारंपरिक सोने-चांदी के मुकाबले युवा पीढ़ी में हल्के और विशिष्ट दिखने वाले आर्टिफिशियल गहनों का चलन बढ़ा है। ₹150 से ₹400 का मूल्य वर्ग इसे आम कॉलेज और कामकाजी ग्राहकों के लिए आसानी से खरीदने योग्य बनाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह प्रदर्शनी दिल्ली में किस जगह आयोजित की जा रही है?
यह प्रदर्शनी दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर चल रहे ग्रैंड एक्सपो में आयोजित हो रही है।

### 2. इस ज्वेलरी को बनाने के लिए किस प्रकार के फूलों का उपयोग होता है?
इसमें मुख्य रूप से कश्मीर और पहाड़ी क्षेत्रों के फूलों के अलावा देसी भारतीय फूलों का उपयोग किया जाता है।

### 3. फूलों को खराब होने से बचाने के लिए क्या तरीका अपनाया जाता है?
फूलों को पहले सावधानी से सुखाकर प्रेस किया जाता है और फिर उन्हें पारदर्शी रेजिन में डालकर सील किया जाता है।

### 4. इन गहनों की शुरुआती कीमत कितनी है?
इन गहनों की शुरुआती कीमत ₹150 है, जबकि अन्य डिजाइन ₹250, ₹350 और ₹400 तक उपलब्ध हैं।

### 5. प्रदर्शनी में किस उत्पाद की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है?
विक्रेता के अनुसार ग्राहकों के बीच सबसे अधिक मांग इयररिंग्स की देखी जा रही है।

### 6. क्या यह ज्वेलरी ऑनलाइन खरीदी जा सकती है?
नहीं, यह ज्वेलरी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है और इसे केवल दिल्ली हाट, सूरजकुंड और प्रगति मैदान जैसी प्रदर्शनियों से ही खरीदा जा सकता है।

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