# सरयू तट पर 30 लाख दीपों का रिकॉर्ड रचने की तैयारी, दीपोत्सव में अयोध्या के इन 7 प्रमुख आकर्षणों को न छोड़ें

> अयोध्या में इस साल 56 घाटों पर 30 लाख दीये प्रज्ज्वलित किए जाएंगे, जबकि 2,147 अर्चकों की महाआरती और 2,100 ड्रोन से रामायण प्रसंगों की प्रस्तुति उत्सव का मुख्य आकर्षण बनेगी।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/sarayu-tata-para-30-lakha-dipon-ka-rikorda-rachane-ki-taiyari-deepotsav-men-ayodhya-ke-ina-7-pramukha-akarshanon-ko-na-chhoren-55872 · **Language:** Hindi
**Tags:** अयोध्या दीपोत्सव, राम की पैड़ी, सरयू महाआरती, राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, ड्रोन शो

धार्मिक नगरी अयोध्या में इस वर्ष दीपोत्सव को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बनाने के लिए भव्य स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। इस पावन अवसर पर सरयू तट से लेकर नगर के प्रमुख धार्मिक परिसरों तक फैली अलौकिक आभा श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर आप इस दौरान रामनगरी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो उत्सव के उल्लास, आध्यात्मिक शांति और आधुनिक तकनीकी प्रस्तुतियों को समेटे ये सात प्रमुख स्थल आपकी यात्रा को बेहद खास बना सकते हैं।

## राम की पैड़ी पर 30 लाख दीयों का अलौकिक दृश्य
अयोध्या में दीपोत्सव का मुख्य केंद्र हमेशा की तरह राम की पैड़ी ही रहने वाला है। सरयू नदी के तट पर बने विभिन्न घाटों को इस बार पारंपरिक मिट्टी के दीयों से सजाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस उत्सव के तहत लगभग 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये प्रज्ज्वलित किए जाने की तैयारी है। सूर्यास्त होते ही जब इन लाखों दीयों को एक निश्चित क्रम में जलाया जाएगा, तो घाटों की छटा देखते ही बनेगी। पानी की सतह पर जगमगाती इन दीपमालाओं के प्रतिबिंब का मनोहारी दृश्य देखने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

## 2,147 अर्चकों के साथ सरयू की भव्य महाआरती
रामनगरी पहुंचने वाले हर श्रद्धालु के लिए सरयू नदी के पावन तट पर आयोजित होने वाली महाआरती में सम्मिलित होना एक अविस्मरणीय अनुभव होता है। दीपोत्सव के उपलक्ष्य में नदी के किनारे पारंपरिक विधि-विधान से विशेष पूजन का खाका खींचा गया है। 7 नवंबर को प्रस्तावित विशेष आयोजन में लगभग 2,147 अर्चकों के भाग लेने की उम्मीद जताई गई है। एक सुर में गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और नदी तट पर एक साथ प्रज्ज्वलित होते दीपों का यह वातावरण पूरी नगरी को गहरे भक्तिभाव से सराबोर कर देता है।

## श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में उत्सव का उल्लास
भगवान राम को समर्पित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन के बिना अयोध्या की कोई भी आध्यात्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है। अपनी अनूठी स्थापत्य कला और अगाध आस्था के कारण यह पावन धाम पूरे वर्ष आकर्षण का केंद्र रहता है। दीपोत्सव के विशेष अवसर पर मंदिर के मुख्य भवन, परकोटे और आसपास के समूचे क्षेत्र को विशेष पुष्प सज्जा और प्रकाश व्यवस्था से सजाया जाता है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु न केवल विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं, बल्कि रामनगरी में उत्सव के चरम उल्लास को भी करीब से महसूस कर सकते हैं।

## हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन की परंपरा
अयोध्या के प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्रों में हनुमानगढ़ी का महत्व सर्वोपरि है। एक ऊंचे टीले पर स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों का मार्ग तय करना पड़ता है। मान्यता है कि रामनगरी में रामलला के दर्शन करने से पूर्व हनुमानगढ़ी में पवनपुत्र बजरंगबली की अनुमति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इसी कारण पूरे वर्ष यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, और दीपोत्सव के दौरान इस पवित्र स्थान पर आस्था का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।

## कनक भवन और दशरथ महल की ऐतिहासिक आभा
अयोध्या की गौरवशाली पौराणिक विरासत और स्थापत्य कला को गहराई से समझने के लिए कनक भवन और दशरथ महल की यात्रा अनिवार्य मानी जाती है। कनक भवन मुख्य रूप से भगवान राम और माता सीता की युगल उपासना को समर्पित एक अत्यंत सुंदर और भव्य मंदिर है। वहीं, दशरथ महल को धार्मिक आस्था के अनुसार महाराजा दशरथ का प्राचीन निवास स्थान माना जाता है। इन दोनों ऐतिहासिक परिसरों की नक्काशीदार संरचना, मनमोहक साज-सज्जा और इनका पौराणिक महत्व पर्यटकों को प्राचीन काल के वैभव का सीधा अहसास कराते हैं।

## 2,100 ड्रोन का रामायण शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
दीपोत्सव अब केवल पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें अत्याधुनिक तकनीक का अनूठा समावेश भी किया जा रहा है। इस वर्ष 7 और 8 नवंबर को आसमान में करीब 2,100 ड्रोन की सहायता से भगवान राम के जीवन और रामायण के विभिन्न प्रसंगों को सजीव रूप में प्रदर्शित करने की तैयारी है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंग-बिरंगी झांकियां भी निकाली जाएंगी, जो इस पारिवारिक उत्सव में बच्चों और युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगी।

## गुप्तार घाट के शांत तट पर आत्मिक शांति
अगर आप दीपोत्सव की मुख्य हलचल और भीड़भाड़ से हटकर कुछ समय आत्ममंथन और एकांत में बिताना चाहते हैं, तो गुप्तार घाट एक बेहतरीन विकल्प है। सरयू नदी के किनारे स्थित यह स्थल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वह पावन भूमि है, जहां भगवान राम ने अपनी इहलीला समाप्त कर जल समाधि ली थी। इस घाट का शांत वातावरण, मंद-मंद बहती नदी की धारा और किनारे बने प्राचीन मंदिर मन को असीम सुकून प्रदान करते हैं। यहां संध्या के समय बैठकर प्रार्थना करना अयोध्या के आध्यात्मिक स्वरूप को गहराई से जीने का माध्यम बनता है।

## इसका आप पर असर
दीपोत्सव पर अयोध्या में भारी भीड़ और भव्य आयोजनों को देखते हुए यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए दर्शन, परिवहन और व्यवस्थाओं में कई बदलाव होंगे।

- **भारत में:** देश भर से अयोध्या जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को 7 और 8 नवंबर के विशेष कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा और रहने की व्यवस्था पहले से तय करनी चाहिए। भारी मांग के कारण उड़ानों, ट्रेनों और स्थानीय होटलों में समय रहते बुकिंग कराना सबसे व्यावहारिक कदम होगा।
- **अयोध्या में:** राम की पैड़ी और सरयू के 56 घाटों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के कड़े नियम लागू रहेंगे। स्थानीय निवासियों और आगंतुकों को शाम के समय घाटों और मंदिर परिसरों तक पहुंचने के लिए पैदल मार्गों और निर्धारित समय सारिणी का पालन करना होगा।
- **दर्शकों के लिए:** 7 और 8 नवंबर को आयोजित होने वाले 2,100 ड्रोन के रामायण शो का आनंद लेने के लिए खुले सार्वजनिक स्थानों पर समय से पहले पहुंचना जरूरी होगा। बच्चों और बुजुर्गों के साथ जाने वाले परिवारों को शाम की भीड़ से बचने के लिए प्रवेश और निकास द्वारों की जानकारी पहले ही रखनी चाहिए।
- **पूजा-अर्चना में:** 7 नवंबर को 2,147 अर्चकों द्वारा होने वाली सरयू महाआरती के दौरान तटवर्ती इलाकों में सुरक्षा घेरा रहेगा। आम श्रद्धालुओं को तय दर्शक दीर्घाओं से ही दर्शन की अनुमति मिलेगी, इसलिए तय समय से कम से कम दो घंटे पहले अपनी जगह सुनिश्चित करें।

## ऐसा क्यों हुआ
अयोध्या में दीपोत्सव के इस विशाल आयोजन के पीछे धार्मिक परंपराओं को भव्य स्वरूप देने और रामनगरी को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की सुनियोजित रणनीति है।

- **भव्य धार्मिक परंपरा:** भगवान राम के वनवास से लौटने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले दीपोत्सव को हर साल नए रिकॉर्ड के साथ आयोजित किया जाता है। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाकर और 2,147 अर्चकों की आरती के माध्यम से आस्था के सबसे बड़े केंद्र के रूप में संदेश दिया जा रहा है।
- **आधुनिक तकनीक का समावेश:** युवा पीढ़ी और आधुनिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ 2,100 ड्रोन की मदद से रामायण प्रसंगों का प्रदर्शन जोड़ा गया है। यह प्राचीन इतिहास को आधुनिक दृश्य कला के माध्यम से प्रस्तुत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
- **पर्यटन अवसंरचना का विस्तार:** श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के बाद से अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। ऐसे विशाल आयोजनों से शहर के सभी ऐतिहासिक स्थलों जैसे गुप्तार घाट, कनक भवन और दशरथ महल को समान रूप से पर्यटन मानचित्र पर उभारा जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस वर्ष अयोध्या दीपोत्सव में कितने दीये जलाने की तैयारी है?
इस वर्ष अयोध्या में सरयू नदी के करीब 56 घाटों पर लगभग 30 लाख मिट्टी के दीये जलाने की तैयारी की गई है।

### 2. सरयू महाआरती कब होगी और इसमें कितने अर्चक शामिल होंगे?
सरयू नदी के तट पर विशेष महाआरती 7 नवंबर को आयोजित की जाएगी, जिसमें लगभग 2,147 अर्चकों के शामिल होने की उम्मीद है।

### 3. रामायण पर आधारित ड्रोन शो का आयोजन किस दिन किया जाएगा?
रामायण के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाने वाला विशेष ड्रोन शो 7 और 8 नवंबर को आयोजित होगा, जिसमें करीब 2,100 ड्रोन भाग लेंगे।

### 4. धार्मिक मान्यता के अनुसार रामलला के दर्शन से पहले कहां जाना चाहिए?
मान्यता के अनुसार अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के दर्शन करने से पूर्व हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन करने चाहिए।

### 5. शांति और एकांत चाहने वाले पर्यटकों के लिए कौन सा घाट उपयुक्त है?
भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण और आत्मिक शांति के लिए गुप्तार घाट जाना सबसे उपयुक्त है, जहां भगवान राम ने जल समाधि ली थी।

### 6. अयोध्या के कनक भवन और दशरथ महल का क्या महत्व है?
कनक भवन भगवान राम और माता सीता की पूजा को समर्पित है, जबकि दशरथ महल को राजा दशरथ के प्राचीन निवास स्थल के रूप में पूजा जाता है।

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