सर्दियों की नमी से पारंपरिक अचार को खराब होने से बचाने के देसी नुस्खे सर्दियों के मौसम में धूप की कमी और हवा की नमी के कारण घरों में रखे पुराने अचार में फंगस लगने की आशंका बढ़ जाती है, जिसे कुछ आसान सावधानियों से रोका जा सकता है। मौसम में ठंडक घुलते ही घरों में सहेज कर रखे गए पुराने अचार की हिफाजत एक बड़ी चुनौती बन जाती है। गांवों और कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक, लगभग हर रसोई में आम, करौंदा और बड़हर जैसे पारंपरिक आचार बड़ी बरनियों में भरकर रखे जाते हैं। जाड़े के दिनों में अक्सर धूप कमजोर पड़ जाती है और हवा में नमी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इस मौसमी बदलाव के कारण बरनी में रखे अचार में फंगस या सफेद उल्ली पनपने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। मध्य प्रदेश के विंध्य और बघेलखंड अंचल के घरों में पीढ़ियों से दादी-नानी के बताए कई ऐसे आजमाए हुए देसी उपाय अपनाए जाते हैं, जिनकी बदौलत साल भर पुराना अचार भी अपने मूल स्वाद और खुशबू के साथ बिल्कुल सुरक्षित बना रहता है। सरसों के तेल की भरपूर परत है सुरक्षा का सबसे बड़ा नियम सतना की रहने वाली उर्मिला मिश्रा के अनुसार अचार को लंबे वक्त तक सही सलामत रखने का सबसे पहला और बुनियादी उसूल यह है कि वह तेल में पूरी तरह डूबा रहे। मर्तबान या बरनी के भीतर अचार के टुकड़ों के ऊपर सरसों के तेल की एक मोटी और साफ परत हमेशा दिखनी चाहिए। तेल की यह परत हवा में मौजूद नमी और ऑक्सीजन का अचार के मसालों से सीधा संपर्क पूरी तरह काट देती है, जिससे फंगस के कीटाणुओं को पनपने की जगह नहीं मिलती। अगर कभी बरनी के ऊपरी हिस्से में अचार सूखा नजर आने लगे या तेल का स्तर नीचे चला जाए, तो इसमें तनिक भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में जरूरत के अनुसार शुद्ध सरसों का तेल लेकर उसे पहले अच्छी तरह गर्म कर लें और फिर उसे सामान्य तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब तेल बिल्कुल ठंडा हो जाए, तभी उसे बरनी में ऊपर तक भरें ताकि अचार का कोई भी हिस्सा सूखा न छूटे। अक्टूबर की धूप दिखाना है बेहद जरूरी सर्दियों के पूरी तरह जमने से पहले अक्टूबर के महीने में जब भी तेज धूप खिली हो, उस वक्त अचार की बरनी को धूप में रखना सदियों पुराना कारगर तरीका रहा है। इस प्रक्रिया में बरनी का मुख्य ढक्कन पूरी तरह हटा दिया जाता है और उसके मुंह पर एक साफ सूती या मलमल का महीन कपड़ा कसकर बांध दिया जाता है। इस तरह बरनी को लगातार करीब 4 से 5 घंटे तक सीधी धूप में रखा जाना चाहिए। कपड़ा बांधने से धूल-मिट्टी या कीड़े अंदर नहीं जाते, जबकि धूप की गर्माहट से बरनी के भीतर जमा अतिरिक्त भाप और सीलन उड़ जाती है। इससे न सिर्फ अचार की नमी छंटती है, बल्कि उसके मसालों का तीखापन, सौंधी खुशबू और असली स्वाद भी बरकरार रहता है। गीले बर्तनों और हाथों के इस्तेमाल से बचना जरूरी अक्सर घरों में अचार खराब होने का एक प्रमुख कारण उसे निकालने का गलत तरीका होता है। बरनी के भीतर सीधे हाथ डालना या गीले चम्मच का इस्तेमाल करना अचार में नमी पहुंचाने का सबसे आसान जरिया बन जाता है। एक छोटी सी पानी की बूंद भी पूरे मर्तबान को फंगस की चपेट में ला सकती है। इसलिए अचार निकालने के लिए हमेशा साफ, सूखी लकड़ी या फिर पूरी तरह सूखी स्टील की कलछी का ही प्रयोग करना चाहिए। अचार निकालने के तुरंत बाद उस कलछी को धोकर अच्छी तरह सुखाकर अलग रखना चाहिए और बरनी का ढक्कन फौरन कसकर बंद कर देना चाहिए। बरनी रखने का स्थान और सही बर्तन का चुनाव बघेलखंड के पारंपरिक घरों में अचार के बर्तनों को कभी भी सीलन भरी जगहों या सीधे फर्श पर रखने से पूरी तरह बचा जाता है। कांच या चीनी मिट्टी से बनी भारी बरनियों को हमेशा फर्श से ऊपर किसी सूखे, साफ और हवादार रैक पर ही रखा जाना चाहिए। सीधे जमीन पर रखने से नीचे की ठंडक और सीलन बरनी में समा सकती है, जो अचार के लिए नुकसानदेह होती है। इसके अलावा अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए साधारण प्लास्टिक के डिब्बों या पॉलीथिन के थैलों का उपयोग करने के बजाय हमेशा चीनी मिट्टी के पारंपरिक मर्तबान या कांच के साफ और सूखे जार को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। नमक का संतुलन और सूखे मसालों की भूमिका बघेलखंड क्षेत्र की महिलाएं जब करौंदा, आम या बड़हर जैसे खट्टे फलों का पारंपरिक अचार तैयार करती हैं, तो मसालों के मिश्रण में नमक की मात्रा सामान्य से थोड़ी तेज रखती हैं। नमक केवल स्वाद बढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि वह एक बेहतरीन प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव भी है जो बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोकता है। इसके साथ ही अचार में इस्तेमाल होने वाले सभी सूखे मसाले पहले धूप में अच्छी तरह सुखाए जाने चाहिए। अगर मसालों के दानों में जरा सी भी नमी बाकी रह जाती है, तो वह पूरे अचार को बहुत तेजी से खराब कर सकती है। धूप न निकलने पर विनेगर और फूड-ग्रेड प्रिजर्वेटिव का सहारा यदि कड़ाके की सर्दी के दौरान आसमान में लगातार बादल छाए रहें और कई दिनों तक धूप न निकले, तब भी कुछ खास उपायों से अचार को बचाया जा सकता है। ऐसे हालात में कई लोग सिरका यानी विनेगर का उपयोग करते हैं, जो खटास बनाए रखने के साथ फंगस को रोकता है। इसके अलावा लंबे समय तक सुरक्षा के लिए फूड-ग्रेड सोडियम बेंजोएट जैसे सुरक्षित प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। कुल मिलाकर सबसे अहम बात यह है कि बरनी, चम्मच, मसाले और अचार तक नमी की एक भी बूंद न पहुंचे। इन आसान और घरेलू सावधानियों को अपनाकर सर्दियों के मौसम में भी अपने पारंपरिक देसी अचार को पूरे साल लजीज बनाए रखा जा सकता है। इसका आप पर असर सर्दियों में रसोई में रखी कीमती खाद्य सामग्रियों और पारंपरिक अचार को नमी की वजह से खराब होने से बचाना बेहद आसान हो जाता है। • अचार की बर्बादी से बचाव: सही तरीके से तेल भरने और बरनी को सूखा रखने से साल भर की मेहनत से तैयार किया गया अचार खराब नहीं होता। इससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी रुकती है और परिवारों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है। • रसोई की स्वच्छता के नियम: गीले बर्तनों और सीधे हाथों के इस्तेमाल से बचकर भोजन को फंगस से पूरी तरह मुक्त रखा जा सकता है। प्रतिदिन केवल सूखे चम्मच का प्रयोग करने की आदत से अचार कई महीनों तक बिल्कुल ताजा बना रहता है। • मौसम के अनुसार सही रखरखाव: अक्टूबर और शुरुआती सर्दियों में बरनी को धूप दिखाने से उसके भीतर की अतिरिक्त नमी पूरी तरह गायब हो जाती है। इसके लिए किसी महंगे साधन की जरूरत नहीं पड़ती और साधारण सूती कपड़े से काम हो जाता है। • सुरक्षित बर्तनों का चयन: प्लास्टिक के डिब्बों के स्थान पर चीनी मिट्टी या कांच के मर्तबान का चुनाव सेहत और स्वाद दोनों को सुरक्षित रखता है। इससे अचार में प्लास्टिक के रसायनों का रिसाव नहीं होता और स्वाद बरकरार रहता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के महीनों में मौसम में होने वाले बदलाव और रसोई में गलत रखरखाव के कारण अचार में फंगस लग जाती है। • हवा में नमी और धूप का अभाव: सर्दियों में सूरज की रोशनी कम और कमजोर हो जाती है जबकि वायुमंडल में आर्द्रता तेजी से बढ़ जाती है। यह नम वातावरण हवा में मौजूद फंगस के बीजाणुओं को पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां देता है। • तेल के स्तर में गिरावट: जब बरनी में अचार के टुकड़ों के ऊपर तेल की परत कम हो जाती है, तो वे सीधे हवा के संपर्क में आ जाते हैं। बिना तेल के सुरक्षा कवच के नमी मसालों तक पहुंच जाती है और उल्ली जमने लगती है। • गीले चम्मच या हाथों का स्पर्श: अचार निकालते समय बरनी में पानी की जरा सी भी मात्रा पहुंच जाना खराबी की एक बड़ी तात्कालिक वजह बनता है। लकड़ी या स्टील के बर्तनों में बची सीलन सीधे तौर पर फंगस का कारण बन जाती है। • जमीन और फर्श की सीलन: बरनी को सीधे ठंडे फर्श पर रखने से नीचे की नमी बर्तन के भीतर प्रवेश करने लगती है। ऊंचे और हवादार स्थान पर न रखने से यह सीलन अचार को समय से पहले खराब कर देती है। सवाल-जवाब 1. सर्दियों में अचार में फंगस लगने का मुख्य कारण क्या है? जाड़े के दिनों में धूप कम निकलने और हवा में नमी बढ़ जाने से बरनी के भीतर फंगस पनपने लगती है। 2. अचार में सरसों का तेल डालते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? सरसों के तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करना चाहिए और फिर उसे पूरी तरह ठंडा करके ही बरनी में डालना चाहिए। 3. अचार की बरनी को धूप में कितनी देर रखना चाहिए? बरनी के मुंह पर साफ सूती या मलमल का कपड़ा बांधकर उसे करीब 4 से 5 घंटे तक धूप में रखना चाहिए। 4. अचार निकालने के लिए किस तरह के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए? अचार निकालने के लिए हमेशा पूरी तरह साफ और सूखी लकड़ी या स्टील की कलछी का इस्तेमाल करना चाहिए। 5. अचार को सुरक्षित रखने के लिए किस तरह के कंटेनर सबसे अच्छे होते हैं? प्लास्टिक या पॉलीथिन के बजाय कांच या चीनी मिट्टी की साफ और सूखी बरनी का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहता है। 6. यदि सर्दियों में धूप बिल्कुल न निकले तो अचार को कैसे सुरक्षित रखें? धूप न होने की स्थिति में विनेगर यानी सिरके या फूड-ग्रेड सोडियम बेंजोएट का इस्तेमाल किया जा सकता है। https://trendkia.com/lifestyle/sardiyon-ki-nami-se-parnparika-achara-ko-kharaba-hone-se-bachane-ke-desi-nuskhe-45069 TrendKia — Har trend, sabse pehle.