सर्दियों में बिना खर्च टहनी से उगाएं गुलाब और पोथोस समेत पांच आकर्षक पौधे सर्दियों के मौसम में महंगे बीज खरीदे बिना केवल कटिंग की मदद से पोथोस, फिलोडेंड्रोन, बिगोनिया, डहेलिया और गुलाब के पौधे घर पर तैयार किए जा सकते हैं। गार्डनिंग विशेषज्ञ के अनुसार सही मिट्टी, गांठ वाली टहनी और नमी का संतुलन रखकर बगीचे को हरा-भरा बनाया जा सकता है। घर के आशियाने को ठंड के महीनों में फूलों की महक और हरियाली से सजाने की चाहत रखने वालों को नर्सरी से महंगे पौधे या बीज खरीदने की आवश्यकता नहीं है। कई ऐसे लोकप्रिय पौधे मौजूद हैं, जिन्हें सिर्फ एक छोटी सी टहनी की कटिंग लगाकर अपने बगीचे अथवा बालकनी में आसानी से उगाया जा सकता है। रामपुर में करीब 40 साल से गार्डनिंग का काम कर रहे एक्सपर्ट ललित का मानना है कि यदि कटिंग लगाने की विधि और प्राथमिक देखभाल का सही तरीका पता हो, तो ठंड के मौसम में भी नए पौधे सफलतापूर्वक जड़ें पकड़ लेते हैं। उचित मिट्टी तैयार करने और सही शाखा चुनने की यह आसान तरकीब बगीचे को रंग-बिरंगा बना सकती है। पोथोस की कटिंग से घर के भीतर लाएं हरियाली कमरों के भीतर प्राकृतिक हरियाली जोड़ने के लिए पोथोस एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। इसकी लताओं पर आने वाली हरी और पीली धारियों वाली पत्तियां घर के माहौल को तरोताजा रखती हैं। इसे तैयार करने के लिए किसी स्वस्थ पुरानी बेल में से लगभग 4 से 6 इंच लंबी टहनी का चुनाव करना चाहिए। टहनी काटते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि उसमें कम से कम दो गांठें मौजूद हों, क्योंकि बिना गांठ वाली टहनी से जड़े नहीं फूटतीं। काटी गई इस टहनी को आप पानी से भरे किसी कांच के जार में रख सकते हैं या फिर सीधे मिट्टी में लगा सकते हैं। यदि गमले में रोपाई कर रहे हैं, तो एक गांठ को भुरभुरी मिट्टी के भीतर दबाएं और दूसरी गांठ को सतह के ऊपर खुला रखें। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें जल निकासी बेहतर हो और पानी ठहरने की समस्या न बने। गमले को ऐसी जगह पर स्थापित करें जहां ताजी हवा का संचार हो और सीधी तेज धूप के बजाय हल्की धूप या रोशनी आती हो। चंद हफ्तों के भीतर टहनी में मजबूत जड़ें उभरने लगती हैं और नई पत्तियों का निकलना शुरू हो जाता है। फिलोडेंड्रोन की टहनी लगाकर तैयार करें आकर्षक गमला घर में हरियाली का दायरा बढ़ाने के लिए फिलोडेंड्रोन भी एक बेहद पसंदीदा और टिकाऊ पौधा माना जाता है। इसकी आकर्षक बनावट वाली पत्तियां किसी भी कोने की शोभा बढ़ा देती हैं। इस पौधे को कटिंग से उगाने के लिए पुरानी शाखा से करीब 4 से 6 इंच लंबी टहनी काटी जाती है। इस चयनित टहनी में दो से तीन गांठें होना आवश्यक है। कटिंग लगाने से पहले शाखा के निचले हिस्से में मौजूद पत्तों को काटकर अलग कर देना चाहिए। इसकी रोपाई मिट्टी या पानी किसी भी माध्यम में की जा सकती है। गमले में रोपने के लिए बगीचे की सामान्य मिट्टी में थोड़ी बालू रेत और जैविक खाद का मिश्रण तैयार करें। शाखा का निचला सिरा लगभग एक से दो इंच की गहराई तक मिट्टी में दबाएं। मिट्टी में हल्की नमी हमेशा बनी रहनी चाहिए, लेकिन अत्यधिक पानी देने से बचना चाहिए। साथ ही पौधे को चिलचिलाती धूप से दूर रखें। जैसे ही जड़ें विकसित होंगी, यह बेल धीरे-धीरे गमले के चारों ओर फैलने लगेगी। बिगोनिया के मनमोहक फूलों से महकाएं बालकनी बिगोनिया अपने सजावटी पत्तों के साथ-साथ मनमोहक फूलों के कारण प्रकृति प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसके फूल गुलाबी, लाल, सफेद समेत कई अन्य आकर्षक रंगों में खिलते हैं, जो किसी भी बगिया में अलग ही छटा बिखेरते हैं। इस पौधे को उगाने के लिए किसी स्वस्थ पौधे से लगभग 3 से 4 इंच लंबी टहनी काटनी चाहिए। इस बात की तसल्ली कर लें कि टहनी में कम से कम एक गांठ अवश्य मौजूद हो। गमले को तैयार करने के लिए मिट्टी, रेत और थोड़ी सी खाद को आपस में भली-भांति मिला लें। काटी गई टहनी का करीब एक इंच हिस्सा इस तैयार मिट्टी में दबा देना चाहिए। गमले में इतना ही पानी छिड़कें जिससे मिट्टी नम बनी रहे, कीचड़ जैसी स्थिति न बने। पौधे को ऐसी छायादार या छनकर धूप आने वाली जगह पर रखें जहां कड़ी धूप सीधे न पड़ती हो। कुछ समय बाद जब जड़े जम जाती हैं, तो नई पत्तियां फूट पड़ती हैं और उचित देखभाल मिलने पर पौधा लंबे समय तक फूल देता रहता है। कंद और कोंपलों की मदद से लगाएं डहेलिया शीतकालीन फूलों में डहेलिया का स्थान बेहद प्रमुख माना जाता है। इसके बड़े और खूबसूरत फूल लाल, पीले, गुलाबी, सफेद और बैंगनी जैसे मनमोहक रंगों में खिलते हैं। सामान्य तौर पर इस पौधे को जड़ों में विकसित होने वाली गांठों यानी कंद की सहायता से रोपा जाता है। कंद के अलावा इसे कटिंग की तकनीक से भी तैयार किया जा सकता है। सर्दियों के अंतिम दिनों में कंद को गमले में रोपकर नई कोंपलें निकलने का इंतजार करें। जब ये कोंपलें थोड़ी विकसित हो जाएं, तो उनकी स्वस्थ शाखा से 3 से 4 इंच लंबी कटिंग काट लें। इसके बाद हल्की और भुरभुरी मिट्टी तैयार करके कटिंग को लगभग एक इंच की गहराई तक दबाएं और हल्का पानी दें। जब तक कटिंग अपनी जड़ें न बना ले, तब तक उसे तेज शुष्क हवाओं और सीधी तीखी धूप से बचाकर सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है। गुलाब की कलम से खिलेंगे मनचाहे रंगों के फूल फूलों के शौकीन लोगों के बीच गुलाब हमेशा पहली पसंद बना रहता है। गुलाब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बीजों के स्थान पर अधिकतर कलम यानी कटिंग के जरिए ही नया रूप दिया जाता है। इसके लिए नवंबर से फरवरी के महीनों के बीच का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। इस अवधि में पौधे से ऐसी हरी टहनी चुनें जो थोड़ी सख्त हो चुकी हो और उसकी लंबाई करीब 6 से 8 इंच हो। इस टहनी में तीन से चार गांठों का होना अनिवार्य है। कटिंग के निचले हिस्से की पत्तियों को पूरी तरह हटा दें और आधार वाले सिरे पर तिरछा कट लगाएं। इसके बाद गमले में मिट्टी, बालू रेत और पुरानी सड़ी हुई खाद का संतुलित मिश्रण भरें। टहनी का निचला दो से तीन इंच का भाग मिट्टी के अंदर अच्छी तरह दबा दें। मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन गमले में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। समय बीतने के साथ टहनी में नई जड़ें फूटेंगी। गुलाब के लाल, पीले, सफेद और गुलाबी रंग के फूल सही देखरेख मिलने पर समय-समय पर खिलकर बगीचे की रौनक बढ़ाते रहेंगे। इसका आप पर असर सर्दियों में नर्सरी से पौधे खरीदने पर होने वाले अनावश्यक खर्च को बचाकर घर पर ही हरियाली और फूलों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। • लागत की बचत: नए पौधे और महंगे बीज खरीदने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाती है। घर पर पहले से मौजूद पौधों की कटिंग से ही दर्जनों नए गमले तैयार किए जा सकते हैं। • घर की सुंदरता: कमरों और बालकनी में विभिन्न रंगों के फूल और आकर्षक पत्तियां खिलेंगी। इससे सर्दियों के मौसम में घर का वातावरण तरोताजा और प्राकृतिक बना रहता है। • आसान तकनीक: किसी विशेष उपकरण या जटिल बागवानी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य मिट्टी, रेत और सही देखभाल के साथ कोई भी व्यक्ति इन्हें उगा सकता है। • सर्दियों में उपयोगिता: नवंबर से फरवरी के बीच गुलाब और अन्य लताओं की जड़ें आसानी से निकल आती हैं। इस समय सही टहनी चुनकर नए पौधे विकसित करने का सबसे उपयुक्त अवसर मिलता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के मौसम में टहनियों से पौधे तैयार करना कई जैविक और मौसमी कारणों से बेहद प्रभावी और सफल साबित होता है। • मौसम का प्रभाव: नवंबर से फरवरी के दौरान मध्यम ठंडक और हल्की धूप कटिंग को झुलसने से बचाती है। यह वातावरण नाजुक टहनियों में नमी बनाए रखकर जड़ें फूटने के लिए अनुकूल स्थिति प्रदान करता है। • गांठों में मौजूद कोशिकाएं: तने की गांठों यानी नोड्स में सक्रिय कोशिकाएं होती हैं जो मिट्टी या पानी के संपर्क में आते ही जड़ें पैदा करने लगती हैं। बिना गांठ वाली टहनी में यह क्षमता नहीं होती, इसलिए गांठ वाली शाखाएं तेजी से पनपती हैं। • मिट्टी की जल निकासी: भुरभुरी मिट्टी में रेत और खाद मिलाने से जड़ों को सांस लेने के लिए हवा मिलती है और पानी जमा नहीं होता। इससे टहनियों के निचले हिस्से में सड़न की समस्या पैदा नहीं होती। सवाल-जवाब 1. कटिंग लगाने के लिए टहनी में गांठ का होना क्यों जरूरी है? टहनी की गांठों से ही नई जड़ें और पत्तियां विकसित होती हैं। बिना गांठ वाली टहनी में जड़ें नहीं निकल पाती हैं। 2. गुलाब की कटिंग लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है? गुलाब की कलम लगाने के लिए नवंबर से फरवरी के बीच का समय सबसे सही माना जाता है। 3. पोथोस की कटिंग को किस माध्यम में उगाया जा सकता है? पोथोस की 4 से 6 इंच लंबी टहनी को पानी से भरे जार या भुरभुरी मिट्टी दोनों में उगाया जा सकता है। 4. डहेलिया का नया पौधा किस प्रकार तैयार किया जाता है? डहेलिया को इसकी जड़ों में बनने वाले कंद या कंद से निकली नई कोंपलों की 3 से 4 इंच की कटिंग से उगाया जाता है। 5. कटिंग लगाते समय गमले की मिट्टी कैसी होनी चाहिए? गमले में मिट्टी, बालू रेत और पुरानी खाद का मिश्रण होना चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी रहे और पानी जमा न हो। https://trendkia.com/lifestyle/sardiyon-men-bina-kharcha-tahani-se-ugaen-rose-aura-pothos-sameta-pancha-akarshaka-paudhe-53721 TrendKia — Har trend, sabse pehle.