सर्दियों में खरीदा आंवला साल भर नहीं होगा खराब, ग्रामीण परंपरा के ये घरेलू नुस्खे बनाए रखेंगे ताजगी सर्दियों के मौसमी आंवले को खराब होने से बचाने के लिए पारंपरिक ग्रामीण तरीके बेहद असरदार हैं। तेल की परत, धूप में सुखाने और पाउडर या मुरब्बा तैयार करने जैसे उपायों से इन्हें साल भर इस्तेमाल किया जा सकता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही सब्जी मंडियों और बाजारों में ताजा, रसीला आंवला प्रचुर मात्रा में मिलने लगता है। तीखे और खट्टे स्वाद वाला यह फल सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता, जिसके कारण लोग इसे भारी मात्रा में खरीदकर घर ले आते हैं। कोई इसका स्वादिष्ट अचार डालने की योजना बनाता है, तो कोई चटनी, जूस और मुरब्बा बनाने की तैयारी करता है। परेशानी उस वक्त खड़ी होती है जब घर लाकर रखने के कुछ ही दिनों के भीतर यह फल पिलपिला होने लगता है, भूरे धब्बे उभर आते हैं या यह पूरी तरह सड़कर खराब हो जाता है। आंवला एक विशुद्ध मौसमी फल है, जिसकी बाजार में आवक ठंड के सीमित महीनों में ही होती है। ऐसे में यदि सही वैज्ञानिक और पारंपरिक रखरखाव न किया जाए, तो इसका आनंद लंबे समय तक लेना मुमकिन नहीं होता। निमाड़ के ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से बुजुर्ग महिलाएं आंवले को लंबे वक्त तक खाने योग्य बनाए रखने के लिए पारंपरिक घरेलू तकनीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। दिनेश पटेल बताते हैं कि बिना किसी जटिल रसायन के केवल थोड़ी सी सूझबूझ और सफाई का ध्यान रखकर आंवले की ताजगी को महीनों तक बरकरार रखा जा सकता है। सरसों के तेल की परत से बढ़ाएं नमी से सुरक्षा आंवले को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय तक तरोताजा बनाए रखने का एक बेहद कारगर देशी उपाय सरसों का तेल है। बाजार से आंवला लाने के बाद सबसे पहले उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि धूल और मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद एक साफ, सूखे सूती कपड़े से हर एक आंवले को पोंछकर उसका सारा पानी सुखा लें। यह सुनिश्चित करना बहुत आवश्यक है कि फल की त्वचा पर पानी की एक भी बूंद या नमी शेष न रहे। जब फल पूरी तरह सूख जाएं, तब हथेलियों पर कुछ बूंदें शुद्ध सरसों का तेल लें और हल्के हाथों से प्रत्येक आंवले पर उसकी एक पतली परत चढ़ा दें। यह तेल फल की बाहरी सतह पर एक सुरक्षा कवच बना देता है, जो बाहरी नमी और बैक्टीरिया को अंदर प्रवेश करने से रोकता है। अब इन तेल लगे आंवलों को किसी सूखे डिब्बे अथवा थैले में बंद करके फ्रिज में रख दें। जब भी आपको इसका सेवन करना हो अथवा खाना पकाने में इस्तेमाल करना हो, तब इसे निकालकर साधारण पानी से अच्छी तरह धो लें। यह आसान तरीका सामान्य भंडारण के मुकाबले फल को काफी दिनों तक सिकुड़ने या गलने से बचाता है। नमी रहित एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित रखने का तरीका यदि आप तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते और फल को उसके प्राकृतिक रूप में ही सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो एयरटाइट कंटेनर का विकल्प सबसे मुफीद साबित होता है। इसके लिए भी धुलाई और सुखाने की प्रक्रिया पूरी तरह समान रहती है। किचन टॉवल या साफ कपड़े से पोंछने के बाद आंवलों को कुछ देर हवा में छोड़ दें ताकि उनमें जरा सी भी सीलन न बचे। इसके बाद आंवलों को एक एकदम सूखे और साफ एयरटाइट जार या प्लास्टिक कंटेनर में भरकर फ्रिज के भीतर रखें। डिब्बे के भीतर नमी का प्रवेश रोकने के साथ-साथ इस बात की छंटाई करना भी जरूरी है कि कोई भी दबा हुआ, कटा हुआ या दाग वाला आंवला अच्छे आंवलों के साथ न रखा जाए। एक खराब फल बाकी पूरे जार को सड़ा सकता है। समय-समय पर डिब्बे को खोलकर देखते रहें और यदि किसी दाने पर फफूंद अथवा सड़न के लक्षण नजर आएं, तो उसे फौरन बाकी फलों से अलग कर दें। उबालकर और धूप में सुखाकर बनाएं महीनों चलने वाला विकल्प पारंपरिक ग्रामीण रसोई में आंवले को सीजन के बाद भी सालों-साल इस्तेमाल करने का सबसे आजमाया हुआ तरीका उसे सुखाकर रखना है। इस विधि को अपनाने के लिए पहले आंवले के दानों को काटकर उनके बीज निकाल लें। इसके उपरांत इन टुकड़ों को एक बर्तन में पानी लेकर लगभग 10 से 15 मिनट तक उबालें, जिससे फल थोड़े नरम हो जाएं। उबालने के बाद टुकड़ों को किसी छलनी अथवा साफ कपड़े पर फैला दें ताकि सारा अतिरिक्त पानी निथर जाए। इसके बाद इन्हें तेज धूप में सूखने के लिए फैला दें। आमतौर पर यह प्रक्रिया एक-दो दिनों में पूरी नहीं होती, इसलिए इन्हें तब तक धूप दिखानी चाहिए जब तक कि उनके भीतर की सारी नमी पूरी तरह समाप्त न हो जाए और वे कड़े न पड़ जाएं। पूरी तरह सूख जाने के बाद इन सूखे टुकड़ों को साफ, सूखे एयरटाइट डिब्बे में सुरक्षित रख लें। पूरे साल जब भी आपको दाल, रसेदार सब्जी, सांभर या चटनी में खटाई की आवश्यकता हो, आप इन टुकड़ों का आसानी से उपयोग कर सकते हैं। घर पर तैयार करें पोषक तत्वों से भरपूर आंवला पाउडर अगर आपके पास बहुत अधिक मात्रा में आंवला इकट्ठा हो गया है, तो उसे खराब होने से बचाने का सबसे टिकाऊ उपाय उसका सूखा पाउडर तैयार करना है। इसके लिए भी पहले आंवलों को पानी में उबालकर उनकी गुठलियां अलग कर ली जाती हैं और फिर गूदे को धूप में कड़क होने तक सुखाया जाता है। जब सूखे हुए टुकड़े पूरी तरह सख्त और खनकदार हो जाएं, तब उन्हें मिक्सी या ग्राइंडर में डालकर बारीक पीस लें। इस तैयार चूर्ण को किसी कांच या प्लास्टिक के नमी रहित डिब्बे में बंद करके रख दें। इस चूर्ण को रोजाना सुबह गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है अथवा सब्जियों और बालों की देखभाल में प्रयुक्त किया जा सकता है। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि पाउडर के जार में कभी भी गीला चम्मच न डालें, हमेशा सूखे चम्मच से ही जरूरत भर चूर्ण निकालें। स्वाद और सेहत का मेल: खट्टी-मीठी कैंडी और रसीला मुरब्बा कच्चा आंवला कसैला और बेहद खट्टा होता है, जिसके कारण बच्चे और कई बड़े इसे सीधे खाना पसंद नहीं करते। ऐसे लोगों के लिए आंवले की कैंडी और पारंपरिक मुरब्बा बनाना सबसे बेहतरीन उपाय माना जाता है। इस विधि में आंवलों को पहले पानी में उबालकर या भाप में पकाकर हल्का मुलायम कर लिया जाता है। इसके पश्चात उनकी फांकें अलग करके गुठली बाहर कर दी जाती है और उन्हें गाढ़ी शर्करा या चीनी की चाशनी में डुबोकर रखा जाता है। कैंडी तैयार करने के लिए चाशनी में रचे-बसे टुकड़ों को बाहर निकालकर कुछ दिन हल्की धूप में सुखाया जाता है, जबकि मुरब्बे के मामले में आंवलों को चाशनी के साथ ही शीशे के साफ और सूखे मर्तबान में भरकर रखा जाता है। यदि इन्हें साफ-सुथरे तरीके से बनाया जाए और नमी से दूर रखा जाए, तो ये साल भर से अधिक समय तक बिना खराब हुए चल जाते हैं और दैनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी रहते हैं। भंडारण के दौरान इन जरूरी सावधानियों का रखें ख्याल आंवले को सुरक्षित रखने की किसी भी विधि में सबसे बुनियादी नियम नमी से बचाव का है। धोने के बाद यदि फल में थोड़ी सी भी सीलन रह जाती है, तो फफूंद बहुत तेजी से पनपती है और पूरा संग्रह नष्ट हो जाता है। आप जिस भी मर्तबान, डिब्बे अथवा थैले का उपयोग करें, वह पूरी तरह सूखा और गंधहीन होना चाहिए। खराब, दबे या चोट खाए आंवलों को कभी भी स्वस्थ फलों के साथ मिलाकर न रखें। इसके अलावा समय-समय पर अपने भंडार की जांच करते रहें ताकि किसी भी खराबी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सके। बाजार से अधिक आंवला लाने के बाद यह जरूरी नहीं है कि सारा माल एक ही तरह से रखा जाए। दैनिक जरूरत के फल तेल लगाकर या एयरटाइट डिब्बे में फ्रिज में रख सकते हैं, जबकि शेष बचे हिस्से को सुखाकर, पाउडर बनाकर या मुरब्बे में तब्दील करके पूरे साल के लिए निश्चिंत हुआ जा सकता है। इसका आप पर असर इस तरीके से सर्दियों में सस्ते दाम पर मिलने वाले आंवले को बिना सड़े साल भर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पैसे और सेहत दोनों की बचत होती है। • घरेलू बजट पर असर: सीजन में सस्ता आंवला थोक में खरीदकर सुरक्षित रखने से ऑफ-सीजन में महंगे उत्पाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे परिवार के मासिक किराना बजट में सीधी बचत होती है। • दैनिक खानपान में बदलाव: सूखा आंवला या पाउडर तैयार रखने से आप बिना किसी झंझट के हर दिन दाल, सब्जी या पानी में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको हर हफ्ते बाजार जाकर ताजा फल तलाशने की मशक्कत नहीं करनी होगी। • फूड वेस्टेज की रोकथाम: सामान्यतः फ्रिज में रखा आंवला एक हफ्ते में गलने लगता है, लेकिन तेल और एयरटाइट जार के इस्तेमाल से वह हफ्तों तक ताजा रहता है। इससे खरीदे गए फल का एक भी दाना फेंकना नहीं पड़ता। • सेहत के आसान विकल्प: खट्टा फल न खाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर पर ही कैंडी और मुरब्बा तैयार किया जा सकता है। इससे बाजार में मिलने वाले मिलावटी और प्रिजर्वेटिव युक्त उत्पादों पर निर्भरता खत्म हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ आंवला एक नाजुक मौसमी फल है जिसकी त्वचा में नमी और हवा के संपर्क में आते ही फफूंद और सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। सही भंडारण न होने पर यह फल कुछ ही दिनों में सिकुड़कर पिलपिला हो जाता है। • उच्च नमी और फंगल संक्रमण: धोने के बाद फल पर बची रह जाने वाली सीलन मोल्ड और फंगस के तेजी से फैलने का मुख्य कारण बनती है। यदि सुखाने की प्रक्रिया पूरी न हो, तो बंद डिब्बे के अंदर फल बहुत जल्दी गल जाते हैं। • सीजनल उत्पादन की सीमाएं: आंवले का उत्पादन मुख्य रूप से सर्दियों तक ही सीमित रहता है और सामान्य तापमान पर यह ज्यादा दिन नहीं टिकता। इसी मौसमी प्रकृति के कारण ग्रामीण परिवारों ने सुखाने और तेल लगाने जैसे परिरक्षण उपाय विकसित किए। • त्वचा की संवेदनशीलता: आंवले की ऊपरी परत हल्की सी चोट या दबाव लगने पर भीतर से क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे सड़न तेजी से फैलती है। इसलिए दबे हुए फलों को अलग करना और सुरक्षात्मक तेल की परत चढ़ाना आवश्यक माना जाता है। सवाल-जवाब 1. सरसों का तेल लगाने से आंवले को कितने समय तक ताजा रखा जा सकता है? सरसों के तेल की हल्की परत लगाकर फ्रिज में रखने से आंवला सामान्य भंडारण के मुकाबले काफी अधिक समय तक ताजा और सुरक्षित रहता है। 2. आंवला सुखाते समय उसे कितने मिनट तक उबालना चाहिए? आंवले के बीज निकालने के बाद उसके टुकड़ों को लगभग 10 से 15 मिनट तक पानी में उबालना चाहिए। 3. क्या आंवला पाउडर बनाने के लिए बीज निकालना जरूरी है? हां, आंवले को उबालने के बाद उसके बीज अलग कर दिए जाते हैं और फिर गूदे को धूप में कड़क होने तक सुखाकर पीसा जाता है। 4. आंवले को एयरटाइट डिब्बे में रखते समय सबसे महत्वपूर्ण सावधानी क्या है? डिब्बे और आंवले में पानी या नमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, साथ ही किसी भी दबे या खराब आंवले को तुरंत अलग कर देना चाहिए। 5. कैंडी या मुरब्बा बनाने के लिए आंवले को कैसे तैयार किया जाता है? इसके लिए आंवले को पहले उबालकर या भाप में पकाकर नरम किया जाता है, फिर बीज निकालकर चीनी की चाशनी में डाला जाता है। https://trendkia.com/lifestyle/sardiyon-men-kharida-amla-sala-bhara-nahin-hoga-kharaba-gramina-parnpara-ke-ye-gharelu-nuskhe-banae-rakhenge-tajagi-54462 TrendKia — Har trend, sabse pehle.