शारदीय नवरात्रि में फलाहार की सही थाली: जानिए किन चीजों के सेवन की है मनाही और क्या खाना रहेगा लाभकारी 11 अक्तूबर से शुरू हो रहे नवरात्रि पर्व पर उपवास रखने वाले भक्तों के लिए सात्विक खानपान के स्पष्ट नियम तय हैं। व्रत में कुट्टू, सिंघाड़े के आटे और सेंधा नमक का सेवन किया जाता है, जबकि सामान्य अनाज, दालें और प्याज-लहसुन पूरी तरह वर्जित रहते हैं। 11 अक्तूबर से नवरात्रि का पावन पर्व आरंभ हो रहा है और इस दौरान भक्त मां दुर्गा की उपासना के साथ पूरे नौ दिनों का उपवास रखते हैं। उपवास के दौरान देवी को उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है और स्वयं भी सात्विक आहार ग्रहण करने की परंपरा निभाई जाती है। व्रत रखने वाले अधिकांश लोगों के सामने अक्सर यह उलझन रहती है कि कौन सी खाद्य सामग्री उपवास के अनुकूल है और किन चीजों से पूरी तरह परहेज बरतना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ व्रत का यह आहार शरीर को भरपूर ऊर्जा प्रदान करने और पाचन तंत्र को डिटॉक्स करने में भी अत्यंत सहायक सिद्ध होता है। खानपान से जुड़ी किसी भी गलती से बचने के लिए उपवास के नियमों के अनुसार सही खाद्य पदार्थों की पहचान होना आवश्यक है। उपवास के दौरान भोजन में शामिल करने योग्य खाद्य पदार्थ नवरात्रि के व्रत में फलाहारी और सात्विक आहार को ही प्राथमिकता दी जाती है। इस दौरान भोजन तैयार करने के लिए अनाज के पारंपरिक विकल्पों की जगह विशेष फलाहारी सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है • अनाज और आटा: उपवास के दिनों में सामान्य गेहूं, नियमित चावल अथवा दालों को पकाने की अनुमति नहीं होती। इनकी जगह पर कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगिरा का आटा इस्तेमाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त फलाहारी खिचड़ी अथवा खीर तैयार करने के लिए साबूदाना तथा समा के चावल का उपयोग किया जाता है। • सब्जियां: व्रत की थाली में कंदमूल और हल्की सब्जियों का विशेष स्थान होता है। श्रद्धालु अपनी रसोई में आलू, अरबी, रतालू, कद्दू, लौकी, खीरा, गाजर और शकरकंद शामिल कर सकते हैं। इसके साथ ही स्वाद बढ़ाने और पाचन को दुरुस्त रखने के लिए टमाटर और अदरक का प्रयोग भी भोजन में किया जा सकता है। • डेयरी उत्पाद: दिनभर शारीरिक स्फूर्ति और पोषण बनाए रखने के लिए दुग्ध उत्पादों का सेवन सबसे उत्तम माना जाता है। भोजन पकाने के लिए देसी घी का उपयोग किया जाता है, जबकि आहार में दूध, ताजा दही, पनीर, मावा, छाछ, लस्सी और मक्खन को नियमित रूप से शामिल किया जा सकता है। • फल और सूखे मेवे: प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए सेब, केला, अनार, पपीता और संतरा जैसे ताजे फलों का सेवन गुणकारी रहता है। ऊर्जा के स्तर को ऊंचा रखने के लिए बादाम, काजू, मखाना, किशमिश, अखरोट और भुनी हुई मूंगफली को नाश्ते में शामिल करना चाहिए। • मसाले और नमक: व्रत के भोजन में समुद्री या साधारण सफेद नमक का उपयोग पूरी तरह वर्जित होता है, इसलिए केवल सेंधा नमक ही डाला जाता है। स्वाद और सुगंध के लिए मसालों में केवल काली मिर्च पाउडर, जीरा, हरी मिर्च, ताजा हरा धनिया और छोटी इलायची का इस्तेमाल किया जा सकता है। व्रत के नियमों के तहत इन चीजों से पूरी तरह बनाएं दूरी उपवास को शुद्ध और तामसिक दोषों से मुक्त रखने के लिए रसोई से कई आम सामग्रियों को पूरी तरह बाहर रखना पड़ता है • अनाज और दालें: व्रत की अवधि में गेहूं, सामान्य चावल, बेसन, सूजी, मैदा, जई यानी ओट्स और हर प्रकार की दालों जैसे चना, उड़द और मूंग का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। • प्याज और लहसुन: धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से प्याज तथा लहसुन को तामसिक प्रवृत्ति का भोजन माना गया है, जो मन की एकाग्रता को प्रभावित करता है। इसलिए नवरात्रि के दिनों में इनका सेवन पूर्ण रूप से वर्जित है। • सामान्य नमक और रोजमर्रा के मसाले: रसोई में रोजाना काम आने वाला साधारण नमक, हल्दी पाउडर, पिसी हुई लाल मिर्च, गरम मसाला, धनिया पाउडर, हींग और राई का प्रयोग व्रत के किसी भी व्यंजन में नहीं करना चाहिए। • मांसाहार और मदिरा: पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से मांस, मछली, अंडे और सभी प्रकार के मदिरा अथवा शराब के सेवन से पूरी तरह दूर रहना अनिवार्य है। • प्रोसेस्ड और पैकेज्ड उत्पाद: बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद फलों के रस, औद्योगिक रूप से तैयार किए गए स्नैक्स और बोतलबंद टेबल सॉस या केचप का सेवन करने से बचना चाहिए। इन उत्पादों में रासायनिक प्रिजर्वेटिव्स और साधारण नमक मिला होता है, जो व्रत को खंडित कर सकता है। इसका आप पर असर नवरात्रि के उपवास नियमों की सटीक जानकारी श्रद्धालुओं को अशुद्धियों से बचाते हुए स्वस्थ रहने में सहायता करती है। • खानपान की शुद्धता: साधारण नमक और तामसिक मसालों की जगह सेंधा नमक और सात्विक सामग्री चुनना जरूरी होता है। बाजार से सामग्री लाते समय पैकेज्ड लेबल की जांच करें ताकि किसी प्रतिबंधित घटक का प्रवेश न हो। • ऊर्जा और स्वास्थ्य: लंबे उपवास में केवल भूखे रहने के बजाय फल, दूध और मेवों का संतुलित सेवन आवश्यक है। पर्याप्त तरल पदार्थ और सात्विक आहार लेने से शरीर में डिहाइड्रेशन और कमजोरी की समस्या नहीं आती। • बजट और खरीदारी: व्रत में प्रयुक्त होने वाले कुट्टू का आटा, समा के चावल और मखाने सामान्य अनाज से अधिक दाम पर मिलते हैं। त्योहार के दिनों में मांग बढ़ने से पहले ही जरूरी फलाहारी राशन की योजना बना लेना किफायती रहता है। • बाहरी खानपान से बचाव: बाजार के पैकेज्ड स्नैक्स, सॉस और डिब्बाबंद जूस में प्रिजर्वेटिव्स तथा साधारण नमक मिला होता है। उपवास की शुद्धता बनाए रखने के लिए घर पर बने ताजे व्यंजनों को ही प्राथमिकता देना सुरक्षित रहता है। ऐसा क्यों हुआ नवरात्रि के दौरान विशिष्ट खानपान नियमों का पालन करने के पीछे धार्मिक निष्ठा और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों का संतुलन शामिल है। • धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता: नौ दिनों के अनुष्ठान में मां दुर्गा की आराधना के लिए अंतःकरण और परिवेश की शुद्धि को अनिवार्य माना जाता है। इसी कारण मानसिक उत्तेजना बढ़ाने वाले प्याज, लहसुन और तामसिक मांसाहारी पदार्थों को पूरी तरह त्याग दिया जाता है। • ऋतु परिवर्तन और पाचन संतुलन: शारदीय नवरात्रि का समय मौसम में बदलाव और ठंड की शुरुआत का संधिकाल होता है, जिसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। सात्विक, सुपाच्य और सादे भोजन का सेवन पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स करता है। • फलाहारी आहार की परंपरा: पारंपरिक खेती और प्राचीन परंपराओं के अनुसार उपवास में सामान्य रूप से उगाई जाने वाली गेहूं व धान की फसलों की जगह जंगली व मौसमी अनाजों को प्राथमिकता दी गई। इसी व्यवस्था के तहत कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और समा के चावल को शुद्ध आहार के रूप में मान्यता मिली। सवाल-जवाब 1. नवरात्रि का पावन पर्व किस तारीख से आरंभ हो रहा है? नवरात्रि का त्योहार 11 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। 2. व्रत के दौरान किन आटों का प्रयोग किया जा सकता है? उपवास में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगिरा का आटा इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. क्या नवरात्रि के उपवास में साधारण नमक खाया जा सकता है? नहीं, व्रत में साधारण नमक पूरी तरह वर्जित है और केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है। 4. सब्जियों में किन चीजों का सेवन व्रत के अनुकूल माना गया है? आलू, अरबी, रतालू, कद्दू, लौकी, खीरा, गाजर, शकरकंद, टमाटर और अदरक का सेवन किया जा सकता है। 5. नवरात्रि में प्याज और लहसुन खाने की मनाही क्यों होती है? प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है, इसलिए उपवास में इनका सेवन पूरी तरह वर्जित है। 6. व्रत में बाजार के पैकेज्ड जूस और सॉस का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए? बाजार के पैकेज्ड स्नैक्स, डिब्बाबंद जूस और सॉस में साधारण नमक व प्रिजर्वेटिव्स मिले होते हैं, जो व्रत के अनुकूल नहीं हैं। https://trendkia.com/lifestyle/sharadiya-navratri-men-phalahara-ki-sahi-thali-janie-kina-chijon-ke-sevana-ki-hai-manahi-aura-kya-khana-rahega-labhakari-45763 TrendKia — Har trend, sabse pehle.