सोने के बढ़ते दामों के बीच दिल्ली के बाजारों में ₹30 से बिक रही बंगाली ज्वेलरी की मांग बढ़ी नवरात्रि और डांडिया उत्सव के मौके पर दिल्ली के प्रमुख बाजारों में पश्चिम बंगाल से आई पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल ज्वेलरी ₹30 की शुरुआती कीमत में बिक रही है। नवरात्रि और डांडिया उत्सव की तैयारियों के बीच खरीदारी के लिए बाजारों में महिलाओं की आवाजाही तेज हो गई है। उत्सव के दिनों में पारंपरिक 16 श्रृंगार और सजने-संवरने का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन सोने और चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम खरीदारों के लिए कीमती धातुओं के आभूषण खरीदना बेहद मुश्किल बना दिया है। इस स्थिति के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलग-अलग शॉपिंग केंद्रों में पश्चिम बंगाल से मंगाए गए खास हस्तनिर्मित आभूषणों की व्यापक मांग देखी जा रही है। प्रमुख बाजारों में पारंपरिक डिजाइनों की बड़ी रेंज राजधानी के सरोजनी नगर, सदर बाजार, लाजपत नगर, जनपथ, कनॉट प्लेस और मोनेस्ट्री मार्केट के खुदरा काउंटरों पर बंगाली आभूषणों की भारी वैरायटी पहुंची है। इन बाजारों में महिलाओं और युवतियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए गले के हार, नाक की नथ, कानों की बालियां, पारंपरिक झुमके और मांग टीका जैसे उत्पाद बड़ी तादाद में प्रदर्शित किए गए हैं। अलग-अलग परिधानों के साथ मेल खाने वाले रंगों और बनावट के आधार पर खरीदार इन गहनों की खरीदारी कर रहे हैं। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर, डोकरा और मिट्टी के आभूषणों का चलन इस साल बाजार में हाथ से तैयार किए गए और पर्यावरण के अनुकूल यानी इको-फ्रेंडली गहनों का विशेष चलन दिखाई दे रहा है। डिजाइनों के मामले में ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर श्रेणी के आभूषण खरीदारों की पहली पसंद बने हुए हैं, जिनमें झुमके, चोकर हार और बाजूबंद की बिक्री सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही बारीक शीशों और रंग-बिरंगे धागों के तालमेल से तैयार हैंडमेड मिरर वर्क ज्वेलरी को भी खासा पसंद किया जा रहा है। दुकानों पर प्राकृतिक कौड़ियों, रंगीन मोतियों और सूती धागों से बुने गए नेकलेस, कमरबंद और ईयररिंग्स मौजूद हैं। धातु शिल्प की प्राचीन परंपरा से बनी पारंपरिक बंगाली डोकरा ज्वेलरी के अलावा मिट्टी से गढ़े गए आभूषणों के संग्रह से भी दुकानें पटी हुई हैं। मात्र ₹30 से शुरुआत और किफायती बजट विकल्प इन बंगाली गहनों की सबसे बड़ी खासियत इनका बेहद सस्ता और किफायती होना है। दिल्ली के इन प्रमुख बाजारों में इन हस्तनिर्मित आभूषणों की शुरुआती दर केवल ₹30 रखी गई है। सीमित बजट में त्योहार की तैयारी करने वाले ग्राहकों के लिए ₹500 के खर्च में भी कई तरह के गहनों का पूरा संग्रह आसानी से मिल जाता है। डांडिया नाइट्स और नवरात्रि के अलग-अलग दिनों के हिसाब से हर रंग के परिधान के अनुकूल मैचिंग आभूषण उपलब्ध होने के कारण त्योहारी भीड़ लगातार दुकानों पर पहुंच रही है। इसका आप पर असर सोने-चांदी की महंगाई के दौर में यह सस्ती और पारंपरिक ज्वेलरी आम ग्राहकों के लिए उत्सव की खरीदारी को जेब के अनुकूल बना रही है। • भारत में: कीमती धातुओं के दाम ऊंचे रहने से पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प आभूषणों का चलन बढ़ रहा है। त्योहारी सीजन में बजट की चिंता किए बिना लोग पारंपरिक लुक आसानी से तैयार कर सकते हैं। • दिल्ली में: सरोजनी नगर, लाजपत नगर और सदर बाजार जैसे इलाकों में कम बजट वाले खरीदारों के लिए विकल्पों की भरमार है। यहां सिर्फ ₹30 की शुरुआती कीमत और ₹500 के कुल बजट में कई तरह के मैचिंग गहने खरीदे जा सकते हैं। • खरीदारों के लिए: डांडिया और गरबा आयोजनों के लिए अलग-अलग ड्रेस के साथ मैचिंग ऑक्सीडाइज्ड और मिरर वर्क सेट चुनना आसान हो गया है। पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी और कौड़ी से बने गहनों से बिना भारी खर्च के आकर्षक लुक पाया जा सकता है। • हस्तशिल्प कारीगरों के लिए: बंगाल के पारंपरिक धातु शिल्प डोकरा और टेराकोटा कारीगरों के उत्पादों को बड़े शहरी बाजारों में सीधा खरीदार मिल रहा है। इससे स्थानीय दस्तकारों और खुदरा दुकानदारों दोनों के व्यापार को त्योहारी समय में मजबूती मिलती है। ऐसा क्यों हुआ कीमती धातुओं के आसमान छूते भाव और त्योहारों के दौरान पारंपरिक परिधानों की मांग ने दिल्ली के बाजारों में बंगाली हस्तशिल्प की आपूर्ति को बड़े पैमाने पर बढ़ाया है। • सोने-चांदी की महंगाई: सोने और चांदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भावों ने सामान्य उपभोक्ताओं के लिए पारंपरिक कीमती आभूषण खरीदना लगभग नामुमकिन कर दिया है। इसी कारण खरीदारों ने किफायती और आकर्षक विकल्पों की ओर रुख किया है। • त्योहारी मांग और 16 श्रृंगार की परंपरा: नवरात्रि और डांडिया उत्सव के दौरान महिलाओं द्वारा सजने-संवरने और पारंपरिक श्रृंगार करने की विशेष परंपरा रहती है। इस मांग को पूरा करने के लिए खुदरा बाजारों में बड़े पैमाने पर नए डिजाइनों का स्टॉक उतारा गया। • हैंडमेड और इको-फ्रेंडली ट्रेंड: हाल के समय में प्राकृतिक सामग्री जैसे मिट्टी, कौड़ी, धागे और डोकरा धातु शिल्प के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ी है। हल्के और टिकाऊ होने की वजह से डांडिया जैसे आयोजनों में ये गहने पहनने में बेहद सहज साबित होते हैं। • सस्ती शुरुआती दरें: ₹30 जैसी न्यूनतम कीमत के कारण खरीदार बिना बजट की चिंता किए एक से अधिक ड्रेस के लिए मैचिंग ज्वेलरी खरीद पा रहे हैं। सवाल-जवाब 1. दिल्ली के किन बाजारों में बंगाली ज्वेलरी मिल रही है? यह ज्वेलरी सरोजनी नगर, सदर बाजार, लाजपत नगर, जनपथ, कनॉट प्लेस और मोनेस्ट्री मार्केट में मिल रही है। 2. दिल्ली के बाजारों में इस ज्वेलरी की शुरुआती कीमत क्या है? इन बंगाली हस्तनिर्मित आभूषणों की शुरुआती कीमत मात्र ₹30 है। 3. इस बार किस प्रकार की बंगाली ज्वेलरी की सबसे ज्यादा मांग है? बाजार में ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर, हैंडमेड मिरर वर्क, कौड़ी-मोतियों के सेट, मिट्टी के गहने और पारंपरिक डोकरा शिल्प की सबसे ज्यादा मांग है। 4. क्या ₹500 के बजट में पर्याप्त ज्वेलरी खरीदी जा सकती है? हां, ₹500 के बजट में आसानी से झोला भरकर अलग-अलग तरह के गहने खरीदे जा सकते हैं। 5. इन गहनों में कौन-कौन सी चीजें उपलब्ध हैं? यहां गले के हार, नाक की नथ, कानों की बालियां, झुमके, मांग टीका, चोकर, बाजूबंद और कमरबंद आसानी से उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/lifestyle/sone-ke-barhate-damon-ke-bicha-delhi-ke-bajaron-men-30-se-bika-rahi-bengali-jewellery-ki-manga-barhi-40971 TrendKia — Har trend, sabse pehle.