# सोने के गहने लेते समय केवल हॉलमार्क का निशान देखना क्यों पड़ सकता है भारी

> ज्वेलरी खरीदते समय केवल हॉलमार्क लोगो देखकर निश्चिंत न हों, दुकान के पंजीकरण और आभूषण पर छपे अल्फान्यूमेरिक कोड की पूरी पुष्टि करना धोखाधड़ी से बचने के लिए बेहद जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/sone-ke-gahane-lete-samaya-kevala-hallmark-ka-nishana-dekhana-kyon-para-sakata-hai-bhari-54696 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, हॉलमार्क, शुद्धता जांच, बीआईएस केयर ऐप, ज्वेलरी खरीदारी

सोने अथवा चांदी के गहनों की खरीदारी करते वक्त खरीदार आम तौर पर केवल आभूषण की चमक, बनावट, डिजाइन और वजन पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। कई बार लोग हॉलमार्क का साधारण सा प्रतीक देखकर यह मान बैठते हैं कि उत्पाद पूरी तरह खरा है। हालांकि हकीकत इससे काफी अलग हो सकती है, क्योंकि सिर्फ एक लोगो की मौजूदगी शुद्धता की मुकम्मल गारंटी नहीं देती। भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता जांच और हॉलमार्किंग को लेकर सख्त नियम कायदे बना रखे हैं। जब तक ग्राहक इन तकनीकी पैमानों को खुद परखना नहीं सीखेंगे, तब तक मिलावट अथवा धोखाधड़ी का जोखिम लगातार बना रहेगा।

## दुकान के बाहर लगे सरकारी लोगो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें
अक्सर देखा जाता है कि कई खुदरा दुकानों के बोर्ड अथवा शीशों पर बीआईएस का आधिकारिक चिह्न अंकित रहता है। खरीदार इसे देखते ही मान लेते हैं कि संबंधित शोरूम पूरी तरह मान्यता प्राप्त और प्रमाणित है। इस संदर्भ में पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने एक अहम पहलू साझा किया है। उनके अनुसार बाजार में मौजूद कुल आभूषण दुकानों में से बीआईएस के साथ पंजीकृत प्रतिष्ठानों का अनुपात 50 प्रतिशत से भी कम बना हुआ है। यानी आधी से अधिक दुकानें अब भी औपचारिक मानकों के दायरे से बाहर काम कर रही हैं।

इसी वजह से विनोद कुमार ने सुझाव दिया है कि किसी भी प्रतिष्ठान को केवल बाहर टंगे प्रतीक के आधार पर अधिकृत न माना जाए। खरीदार को दुकान के अंदर जाकर वहां लगा पंजीकरण प्रमाणपत्र ध्यान से देखना चाहिए। बीआईएस के स्थापित प्रावधानों के तहत प्रत्येक पंजीकृत आभूषण केंद्र को अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट परिसर में ऐसी प्रमुख जगह लगाना अनिवार्य होता है, जहां हर आने वाले की नजर आसानी से पड़ सके। यदि दुकान में यह दस्तावेज सामने प्रदर्शित नहीं है, तो खरीदारी से पहले सवाल पूछना ग्राहक का अधिकार है।

## शोरूम में प्रदर्शित नियमों और अधिकारों वाले ब्रोशर जरूर पढ़ें
नियमों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मानक ब्यूरो की ओर से पंजीकृत ज्वैलर्स को आधिकारिक पैम्फलेट और सूचना पत्रक भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों में हॉलमार्किंग के तौर तरीके, उपभोक्ता अधिकार और सुरक्षा से जुड़े बिंदु स्पष्ट लिखे होते हैं। नियमों के मुताबिक प्रत्येक अधिकृत दुकानदार के लिए इन सूचना पत्रकों को ग्राहकों की पहुंच में रखना जरूरी होता है। लेन देन पक्का करने से पहले इन पर्चों को पढ़कर खरीदार अपने कानूनी अधिकारों और आभूषण की प्रामाणिकता की शर्तें भली भांति समझ सकते हैं।

## आभूषण पर बने अल्फान्यूमेरिक विशिष्ट कोड की अनिवार्य जांच
सोने के किसी भी गहने पर केवल पारंपरिक मुहर देखना काफी नहीं होता। उसके साथ छह अंकों वाला हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID अंकित होना चाहिए। यह एक विशेष अल्फान्यूमेरिक पहचान संख्या होती है, जो हर एक गहने को एक अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। विनोद कुमार के अनुसार खरीदारों को कोई भी रकम चुकाने से पहले यह अच्छी तरह देख लेना चाहिए कि आभूषण पर स्पष्ट रूप से HUID कोड छपा है अथवा नहीं। सामान्य हॉलमार्क के प्रतीक की तुलना में यह अनोखी अल्फान्यूमेरिक संख्या असली सोने की पहचान का सबसे ठोस प्रमाण मानी जाती है।

## मोबाइल फोन के जरिए करें घर बैठे शुद्धता की पड़ताल
आभूषण की शुद्धता की पुष्टि के लिए अब पूरी तरह सुनार के दावों पर आश्रित रहने की लाचारी समाप्त हो चुकी है। भारतीय मानक ब्यूरो ने उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए बीआईएस केयर ऐप नाम से एक डिजिटल मंच तैयार किया है। कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन में इसे डाउनलोड करके उपयोग में ला सकता है। आभूषण पर उकेरा गया HUID कोड इस ऐप में दर्ज करते ही उस उत्पाद से जुड़ा सारा रिकॉर्ड स्क्रीन पर सामने आ जाता है।

यदि संबंधित जेवर वैध हॉलमार्किंग प्रणाली के तहत दर्ज है, तो ऐप पर उसकी सटीक शुद्धता, उसका वजन और प्रमाणन से जुड़ी दूसरी सभी जानकारियां खुलकर सामने आ जाएंगी। इससे खरीदार यह मिलान कर सकता है कि बिल पर लिखी बातें और दुकानदार द्वारा बताया गया विवरण सरकारी डेटाबेस से मेल खाता है या नहीं।

## अब डिजिटल रिकॉर्ड में आभूषण का चित्र भी शामिल
नकली गहनों के प्रसार को रोकने और व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए तकनीक का दायरा बढ़ाया गया है। विनोद कुमार ने रेखांकित किया कि नए हॉलमार्क वाले आभूषणों के डिजिटल डेटा में अब संबंधित जेवर की वास्तविक तस्वीर भी जोड़ी जा रही है। इसका सीधा फायदा यह है कि खरीदार ऐप में केवल संख्या या तकनीकी आंकड़े देखकर ही संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि अपने हाथ में मौजूद जेवर के डिजाइन और स्वरूप का मिलान ऐप में दिख रही आधिकारिक फोटो से भी कर सकेंगे। इससे एक ही कोड को किसी दूसरे जेवर पर चिपकाने की धोखाधड़ी पर पूरी तरह लगाम लगती है।

## सस्ते दामों और भारी छूट के प्रलोभन से बचें
खरीदारी के दौरान सबसे बड़ी चूक जल्दबाजी और जरूरत से ज्यादा छूट के फेर में पड़ती है। विनोद कुमार ने चेताया कि हालांकि नियामक संस्थाओं की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम सतर्कता ग्राहक की अपनी समझ पर निर्भर करती है। अक्सर लोग आकर्षक विज्ञापनों, असाधारण छूट अथवा बाजार से सस्ते भाव के लालच में आकर बिना जांचे परखे गहने खरीद लेते हैं। यही वह स्थिति होती है जहां मिलावटी धातु थमाए जाने की गुंजाइश सबसे अधिक होती है। किसी भी प्रलोभन में आने के बजाय दुकान का आधिकारिक प्रमाणपत्र, आभूषण पर हॉलमार्क मुहर और HUID कोड की तसल्ली करना ही आर्थिक नुकसान से बचने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।

## इसका आप पर असर
सोने के जेवर खरीदते समय यदि आप सतर्क नहीं रहे तो मिलावटी धातु के चलते आपकी मेहनत की कमाई डूब सकती है।

- **शुद्धता की पुष्टि:** जेवर खरीदने से पहले बीआईएस केयर ऐप में HUID कोड डालकर शुद्धता और वजन का मिलान जरूर करें। इससे तय हो जाएगा कि जितने कैरेट का दाम आप दे रहे हैं, आभूषण वास्तव में उतना ही खरा है।
- **दुकान का प्रमाणन:** केवल साइनबोर्ड देखकर भरोसा करने के बजाय दुकान में टंगा पंजीकरण प्रमाणपत्र जांचें। बाजार की 50 प्रतिशत से अधिक दुकानें अब भी गैर पंजीकृत हैं, इसलिए अनधिकृत दुकानों से खरीदारी से बचें।
- **तस्वीर से मिलान:** नए हॉलमार्क आभूषणों का डिजिटल रिकॉर्ड चेक करते वक्त ऐप में उपलब्ध फोटो और अपने हाथ के जेवर का मिलान करें। ऐसा करने से कोड के फर्जी इस्तेमाल या हेराफेरी की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाती है।
- **सस्ते ऑफर्स से बचाव:** भारी छूट या सस्ते रेट के दावों में आकर जल्दबाजी में जेवर खरीदने का फैसला न लें। हमेशा अधिकृत बिल और वैध हॉलमार्किंग की जांच के बाद ही भुगतान करें।

## ऐसा क्यों हुआ
सर्राफा बाजार में गैर पंजीकृत दुकानों की बहुतायत और ग्राहकों में हॉलमार्किंग के सही नियमों की समझ न होने के कारण धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं।

- **दुकानों का अधूरा पंजीकरण:** आभूषण बाजार में कुल दुकानों के मुकाबले बीआईएस पंजीकृत दुकानों की तादाद 50 प्रतिशत से कम है। यही कारण है कि गैर मान्यता प्राप्त विक्रेता भी खुलेआम अप्रमाणित जेवर बेचते हैं।
- **नियमों की सतही जानकारी:** ज्यादातर खरीदार सिर्फ एक साधारण हॉलमार्क चिन्ह देखकर संतुष्ट हो जाते हैं और छह अंकों के विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड की जांच नहीं करते। जागरूकता की इसी कमी का फायदा उठाकर मिलावटी माल खपाया जाता है।
- **सस्ते दामों का आकर्षण:** त्योहारी सीजन या शादियों के दौरान ग्राहक अक्सर भारी डिस्काउंट और आकर्षक दावों के चक्कर में पड़ जाते हैं। इस जल्दबाजी में वे दुकान का आधिकारिक प्रमाणपत्र और डिजिटल रिकॉर्ड देखना भूल जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सोना खरीदते समय केवल हॉलमार्क लोगो पर भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए?
लोगो कोई भी बना सकता है, इसलिए शुद्धता की गारंटी के लिए दुकान का बीआईएस रजिस्ट्रेशन और आभूषण पर छपा छह अंकों का HUID कोड जांचना जरूरी है।

### 2. बाजार में कितनी ज्वेलरी दुकानें बीआईएस से पंजीकृत हैं?
पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के अनुसार वर्तमान में कुल दुकानों के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम दुकानें बीआईएस से पंजीकृत हैं।

### 3. HUID नंबर क्या होता है और इसकी जांच कैसे करें?
HUID एक छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक पहचान कोड होता है, जिसे बीआईएस केयर ऐप में डालकर आभूषण की शुद्धता और वजन की पुष्टि की जा सकती है।

### 4. बीआईएस केयर ऐप से ग्राहकों को क्या नया तकनीकी फायदा मिल रहा है?
अब ऐप में नए हॉलमार्क वाले आभूषणों की फोटो भी दिखती है, जिससे ग्राहक अपने हाथ के जेवर और सरकारी डेटाबेस की तस्वीर का मिलान कर सकते हैं।

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