सोने के महंगे भाव के बीच फिरोजाबाद की चूड़ी मार्केट में आई आर्टिफिशियल कंगनों की बहार कीमती धातुओं के आसमान छूते दामों के बीच फिरोजाबाद के बाजार में सोने जैसी चमक वाले किफायती आर्टिफिशियल कंगन महिलाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। मात्र 100 रुपये से 1,000 रुपये के दायरे में मिल रही इन डिजाइनों की चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है। सोने के लगातार बढ़ते दामों ने पारंपरिक गहनों की खरीदारी को आम बजट से काफी दूर कर दिया है। खासकर कंगन जैसे भारी गहनों को बनवाना अब जेब पर भारी पड़ रहा है, जिसकी वजह से आभूषण बाजार में खरीदारों का रुझान तेजी से कृत्रिम विकल्पों की ओर मुड़ा है। फिरोजाबाद के मशहूर चूड़ी बाजार में इन दिनों सोने की हूबहू नकल वाले गोल्डन कंगनों की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। इन आभूषणों की कारीगरी और फिनिशिंग असली सोने के जेवरों की तरह तैयार की गई है, जिसके चलते सामान्य नजर से असली और नकली का फर्क भांप पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। महिलाएं इन्हें पारंपरिक कांच की चूड़ियों के साथ मिलाकर आकर्षक सेट तैयार करवा रही हैं। त्योहारी मांग और बाजार में उपलब्ध पारंपरिक पैटर्न गली बोहरान इलाके में चूड़ी का कारोबार करने वाले शिवांग गुप्ता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि आगामी त्योहारों और उत्सवों को लेकर महिलाओं में आभूषणों की पारंपरिक खरीदारी जोर पकड़ती है। सोने की मौजूदा दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण ग्राहक अब ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो दिखने में भव्य हों लेकिन जेब पर बोझ न डालें। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बाजार में असली सोने की ढलाई जैसी दर्जनों डिजाइनों का भंडार उतारा गया है। बाजार में उपलब्ध वैरायटी की बात करें तो कारीगरों ने इनमें बारीक नक्काशी का काम किया है। शिवांग गुप्ता के पास इस समय करीब 30 अलग-अलग तरह की डिजाइन मौजूद हैं। इनमें प्रकृति से प्रेरित लोटस और पीकॉक पैटर्न्स को काफी पसंद किया जा रहा है। इन कंगनों की बनावट ऐसी है कि इन्हें किसी भी शादी, पार्टी अथवा घरेलू उत्सव में रंग-बिरंगी चूड़ियों के बीच रखकर आसानी से पहना जा सकता है। दूर से देखने पर इनकी चमक और बनावट बिल्कुल शुद्ध सोने के आभूषणों का अहसास कराती है। 100 रुपये से शुरुआत और टिकाऊ चमक की खूबियां बाजार में केवल पारंपरिक रूप ही नहीं, बल्कि आधुनिक स्टाइल के शौकीनों के लिए भी विस्तृत रेंज उतारी गई है। दुकानों पर पंजाबी स्टाइल, डायमंड लुक और एडी वर्क यानी अमेरिकन डायमंड की नक्काशी वाले कंगन भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इन कंगनों की शुरुआती कीमत 100 रुपये रखी गई है, जबकि बेहद बारीक कारीगरी वाले प्रीमियम पीस करीब 1,000 रुपये तक आसानी से मिल जाते हैं। किफायती दाम होने के कारण खरीदार एक ही बजट में अपनी पसंद की कई अलग-अलग डिजाइन चुन पा रहे हैं। इसके साथ ही इन आभूषणों की व्यावहारिकता को लेकर दुकानदार ने बताया कि इनकी सतह पर की गई विशेष कोटिंग के चलते ये जल्दी काले नहीं पड़ते। सामान्य इस्तेमाल में भी इनकी सुनहरी चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है। शादियों और आने वाले त्योहारों के मौसम को देखते हुए चूड़ी बाजार में इन टिकाऊ और किफायती कंगनों की बिक्री में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन में सोने की ऊंची कीमतों के कारण गहनों की खरीदारी प्रभावित हो रही थी, लेकिन किफायती विकल्पों ने बजट को संतुलित कर दिया है। • भारत में: सोने के दाम बढ़ने के दौर में बजट अनुकूल विकल्प महिलाओं को बिना ज्यादा खर्च किए पारंपरिक रूप अपनाने की सुविधा देते हैं। इससे त्योहारों और शादियों के सीजन में आम परिवारों पर वित्तीय दबाव कम होता है। • फिरोजाबाद में: स्थानीय चूड़ी बाजार में नए डिजाइनों की आवक से खरीदारों को 100 से 1,000 रुपये में विस्तृत विकल्प मिल रहे हैं। गली बोहरान जैसे मुख्य केंद्रों पर जाकर उपभोक्ता अपनी पसंद के 30 से अधिक डिजाइनों में से चयन कर सकते हैं। • टिकाऊपन का फायदा: इन कंगनों की विशेष चमक जल्दी फीकी नहीं पड़ती और ये काले नहीं पड़ते। खरीदार इन्हें लंबे समय तक विभिन्न आयोजनों में बिना रंग उड़ने के डर के दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। • मैचिंग और स्टाइलिंग: कांच की चूड़ियों के साथ आसानी से सेट बनने के कारण अलग-अलग परिधानों के साथ नए कॉम्बिनेशन तैयार किए जा सकते हैं। इससे एक ही बजट में कई तरह के फैशन विकल्प उपलब्ध हो जाते हैं। ऐसा क्यों हुआ सोने की दरों में आई भारी तेजी और आगामी त्योहारों के समय पारंपरिक आभूषणों की बढ़ती जरूरत ने इस बाजार को गति दी है। खरीदार भारी पूंजी लगाए बिना पारंपरिक सौंदर्य पाना चाहते हैं। • सोने के रिकॉर्ड दाम: कीमती धातु के भाव अधिक होने के चलते महिलाओं के लिए असली सोने के आभूषण बनवाना अत्यधिक खर्चीला हो चुका है। इसी कारण अधिकांश उपभोक्ता दिखने में समान लगने वाले कृत्रिम विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। • त्योहारी और वैवाहिक मांग: शादी-समारोहों और पर्वों के दौरान महिलाओं द्वारा नए कंगन पहनने की परंपरा रही है। मांग बनी रहने और क्रय शक्ति सीमित होने के बीच इन कम लागत वाले कंगनों ने बाजार में अपनी जगह बनाई। • उन्नत फिनिशिंग और डिजाइन: कारीगरों ने इन कंगनों को मोर, कमल और अमेरिकन डायमंड जैसे पारंपरिक पैटर्न्स में तैयार किया है। इनकी फिनिशिंग असली सोने जैसी दिखने के कारण ग्राहकों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। सवाल-जवाब 1. फिरोजाबाद में इन आर्टिफिशियल कंगनों की शुरुआती कीमत क्या है? इन कंगनों की कीमत 100 रुपये से शुरू होकर करीब 1,000 रुपये तक जाती है। 2. बाजार में इन गोल्डन कंगनों की कौन-कौन सी डिजाइन उपलब्ध हैं? दुकानों पर लोटस, पीकॉक, पंजाबी स्टाइल, डायमंड और एडी वर्क वाली करीब 30 डिजाइन उपलब्ध हैं। 3. क्या ये आर्टिफिशियल कंगन जल्दी काले पड़ जाते हैं? दुकानदार के अनुसार ये कंगन जल्दी काले नहीं पड़ते और लंबे समय तक अपनी चमक बनाए रखते हैं। 4. महिलाएं इन कंगनों को किस तरह पहनना पसंद कर रही हैं? महिलाएं इन गोल्डन कंगनों को कांच की चूड़ियों के साथ मिलाकर सेट बनवाकर पहन रही हैं। 5. फिरोजाबाद में ये कंगन किस खास इलाके की दुकान पर मिल रहे हैं? ये कंगन फिरोजाबाद के प्रसिद्ध चूड़ी बाजार में गली बोहरान स्थित शिवांग गुप्ता की दुकान पर उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/lifestyle/sone-ke-mahnge-bhava-ke-bicha-firozabad-ki-churi-marketa-men-ai-artiphishiyala-knganon-ki-bahara-44509 TrendKia — Har trend, sabse pehle.