सुल्तानपुर के विनोद जायसवाल ने मुंबई से सीखा वड़ा बनाने का हुनर, गांव में दुकान पर सुबह से उमड़ती है भीड़ सुल्तानपुर के कादीपुर खुर्द गांव के रहने वाले विनोद जायसवाल ने मुंबई में वड़ा बनाने की कला सीखी और अपने गांव में छोटी सी दुकान खोलकर इसे आजीविका का जरिया बनाया। उनके हाथ के बने वड़े का अनूठा स्वाद न केवल स्थानीय लोगों बल्कि प्रतापगढ़ और जौनपुर जैसे दूर-दराज के जिलों से आने वाले ग्राहकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। सुल्तानपुर जिले के एक छोटे से गांव में एक बेहद साधारण सी दुकान पर मिलने वाले वड़े का स्वाद इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां मिलने वाले वड़े का जायका ऐसा है कि इसके दीवाने केवल आसपास के गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि काफी दूर-दराज के जिलों से भी लोग खिंचे चले आते हैं। दुकान का आकार भले ही काफी छोटा हो, लेकिन इसकी ख्याति अब बहुत दूर तक फैल चुकी है। इस दुकान को चलाने वाले दुकानदार विनोद जायसवाल बताते हैं कि उनके यहां तैयार होने वाले वड़े का स्वाद चखने के लिए प्रतापगढ़ और जौनपुर समेत कई अन्य जिलों से भी लोग खासतौर पर पहुंचते हैं। कई नियमित ग्राहक ऐसे हैं जो जब भी इस रास्ते से होकर गुजरते हैं, इस दुकान पर रुकना और वड़े का आनंद लेना कभी नहीं भूलते। आखिर इस छोटे से काउंटर और साधारण सी दुकान के वड़े में ऐसा क्या खास है, जो खाने वालों को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देता है, यह अपने आप में एक दिलचस्प कहानी है। विनोद जायसवाल बताते हैं कि उनके वड़े के अनोखे स्वाद के पीछे इसमें इस्तेमाल होने वाली उच्च गुणवत्ता की सामग्री का बहुत बड़ा योगदान है। वड़े का मिश्रण तैयार करने के दौरान वह लाल मिर्च, हरी मिर्च, जीरा, ताजा हरी धनिया और उबले हुए आलू जैसी कई बुनियादी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया में वड़े को शुद्ध सरसों के तेल में तला जाता है, जिससे इसका स्वाद और इसकी सौंधी खुशबू बिल्कुल अलग और मनमोहक नजर आती है। महानगर मुंबई में रहते हुए जो तौर-तरीके उन्होंने सीखे थे और वहां के अपने लंबे अनुभव को साथ लेकर, वह इन तमाम सामग्रियों का सही अनुपात मिलाते हैं। यही अनूठा मिश्रण और पारंपरिक तरीका ग्राहकों की जुबान पर चढ़ जाता है और उन्हें बार-बार यहां खींच लाता है। एक बेहद छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका यह काम आज तरक्की करते हुए आसपास के कई जिलों में अपनी एक अलग पहचान कायम कर चुका है। मुंबई की गलियों से गांव तक पहुंचा स्वाद का सफर सुल्तानपुर के कादीपुर खुर्द गांव में स्थित यह छोटी सी दुकान आज अपने बेहतरीन जायके के कारण इलाकेभर में मशहूर हो चुकी है। इस दुकान के मालिक और कर्ताधर्ता विनोद जायसवाल हैं, जिन्होंने वड़ा बनाने की यह कला उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में रहकर सीखी थी। वहां विभिन्न स्थानों पर काम करने और संघर्ष करने के दौरान उन्होंने वड़ा बनाने, उसे स्वादिष्ट और कुरकुरा बनाने की तमाम बारीकियों को बहुत करीब से समझा और सीखा। इसके बाद जब वह वापस अपने पैतृक गांव लौटे, तो उन्होंने इस हुनर को किसी दूसरे काम में झोंकने के बजाय अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाने का फैसला किया। आज भले ही उनकी दुकान एक छोटे से इलाके में स्थित है, लेकिन उनके हाथों के बने वड़े की शोहरत काफी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है और दूर-दूर से लोग इसका लुत्फ उठाने आते हैं। चालीस किलोमीटर के दायरे से खिंचे चले आते हैं शौकीन विनोद जायसवाल की यह दुकान भले ही क्षेत्रफल में बहुत छोटी हो, लेकिन उनके ग्राहकों का दायरा काफी बड़ा और विस्तृत है। स्थानीय ग्रामीणों के अलावा चांदा, कादीपुर और सुल्तानपुर के विभिन्न कोनों से लोग उनके यहां वड़ा खाने के लिए रोजाना पहुंचते हैं। केवल इतना ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ और अन्य नजदीकी इलाकों से सफर करने वाले लोग भी जब इस रास्ते से गुजरते हैं, तो इस दुकान पर अपनी गाड़ी रोककर वड़ा खाना पसंद करते हैं। कई ऐसे खरीदार हैं जो पहली बार स्वाद चखने के बाद इसके कायल हो गए और अब जब भी मौका मिलता है, दोबारा यहां जरूर आते हैं। यही वह मुख्य वजह है कि विनोद की यह छोटी सी दुकान आज स्थानीय स्तर पर एक लोकप्रिय ब्रांड की तरह अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुकी है और हर सुबह से ही यहां खाने के शौकीनों की भारी भीड़ जमा होने लगती है। इसका आप पर असर यह खबर मुख्य रूप से स्थानीय खानपान, छोटे स्तर के रोजगार और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। • भारत में: यह कहानी दर्शाती है कि कैसे महानगरों में सीखे गए कौशल का उपयोग करके छोटे गांवों में भी सफल स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। • सुल्तानपुर में: स्थानीय खाद्य प्रेमियों और आसपास के जिलों से आने वाले यात्रियों को बेहतरीन गुणवत्ता का पारंपरिक नाश्ता किफायती दाम पर मिल जाता है। इसके अलावा, ऐसे छोटे व्यवसायों से स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए रास्ते भी खुलते हैं। ऐसा क्यों हुआ इस सफलता के पीछे महानगर का अनुभव, पारंपरिक सामग्री का सही उपयोग और ग्राहकों की पसंद के प्रति समर्पण मुख्य कारण रहे हैं। • मुंबई का अनुभव: दुकानदार विनोद जायसवाल ने मुंबई में रहने के दौरान वड़ा बनाने की बारीकियां सीखीं, जिससे उन्हें इस लोकप्रिय व्यंजन को परफेक्ट बनाने का हुनर मिला। • गुणवत्ता और सामग्री: ताजी सामग्री और सरसों के तेल में वड़े को तैयार करने की पारंपरिक विधि इसके स्वाद को बेहद खास बनाती है, जो लोगों को पसंद आता है। • गांव में रोजगार की तलाश: महानगर से लौटने के बाद अपनी आजीविका चलाने की जरूरत ने उन्हें इस हुनर को अपने पैतृक गांव में व्यावसायिक रूप देने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. यह दुकान कहाँ स्थित है? यह दुकान सुल्तानपुर जिले के कादीपुर खुर्द गांव में स्थित है। 2. इस दुकान को कौन चलाता है? इस दुकान को विनोद जायसवाल चलाते हैं। 3. विनोद ने वड़ा बनाना कहाँ सीखा था? विनोद ने वड़ा बनाने का हुनर मुंबई में रहकर सीखा था। 4. वड़े का स्वाद लेने के लिए ग्राहक कहाँ-कहाँ से आते हैं? यहाँ के वड़े का स्वाद लेने के लिए प्रतापगढ़ और जौनपुर समेत आसपास के कई जिलों से लोग आते हैं। 5. वड़े को तैयार करने में किस तेल का उपयोग किया जाता है? वड़े को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। प्रेरणा और सबक विनोद जायसवाल की यह प्रेरणादायक यात्रा उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। • कौशल का उपयोग: महानगर में सीखे गए किसी भी हुनर को अपने गृह क्षेत्र में लाकर एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है। • गुणवत्ता से पहचान: छोटे स्तर के काम में भी यदि स्वाद और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, तो लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं। • साधारण शुरुआत: किसी भी बड़े काम की शुरुआत एक छोटी सी दुकान या सीमित संसाधनों से भी की जा सकती है, बशर्ते मेहनत सच्ची हो। https://trendkia.com/lifestyle/sultanapura-ke-vinoda-jayasavala-ne-mumbai-se-sikha-vada-banane-ka-hunar-ganva-men-dukana-para-subaha-se-umarati-hai-bheed-38895 TrendKia — Har trend, sabse pehle.