# तौलिया धोने के बाद भी बदबू आए तो समझें, गड़बड़ तौलिये में नहीं वॉशिंग मशीन में है

> साफ किया गया तौलिया भी सीलन या पसीने जैसी गंध दे रहा है, तो इसकी वजह गंदा तौलिया नहीं बल्कि धोने और सुखाने से जुड़ी कुछ आम आदतें हो सकती हैं.

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/tauliya-dhone-ke-bada-bhi-badabu-ae-to-samajhen-garabara-tauliye-men-nahin-washing-machine-men-hai-28239 · **Language:** Hindi
**Tags:** तौलिया की बदबू, वॉशिंग मशीन की सफाई, लॉन्ड्री टिप्स, डिटर्जेंट इस्तेमाल, फैब्रिक सॉफ्टनर, कपड़े सुखाने का तरीका

वॉशिंग मशीन से निकालने के तुरंत बाद भी अगर तौलिये से सीलन या पसीने जैसी गंध आए, तो जरूरी नहीं कि गलती तौलिये की गंदगी में हो. ज्यादातर मामलों में असली वजह धोने का तरीका और वॉशिंग मशीन से जुड़ी कुछ रोजमर्रा की आदतें होती हैं. तौलिया मोटा और पानी सोखने वाला कपड़ा होता है, इसलिए इसमें नमी और बैक्टीरिया आसानी से टिक जाते हैं, अगर धुलाई और सुखाने के तरीके में थोड़ी भी चूक हो जाए.

## गीले तौलिये को मशीन में देर तक भूल जाना
वॉश साइकिल खत्म होने के बाद भी बहुत से लोग तौलिया और बाकी कपड़े घंटों तक मशीन के अंदर ही छोड़ देते हैं. बंद मशीन के अंदर हवा नहीं पहुंचती और नमी बनी रहती है, यही माहौल बैक्टीरिया और फफूंद जैसे सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए एकदम सही होता है. इसी वजह से धुला हुआ तौलिया भी सीलन जैसी बदबू छोड़ने लगता है. बेहतर यही है कि वॉश पूरा होते ही तौलिये को निकालकर तुरंत सुखाने के लिए फैला दिया जाए.

## जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना
ज्यादा डिटर्जेंट डालने से सफाई ज्यादा नहीं होती, बल्कि उल्टा असर होता है. तय मात्रा से ज्यादा साबुन तौलिये के रेशों के बीच फंसा रह जाता है, जिससे मशीन उसे ठीक से रिंस नहीं कर पाती. यह बचा हुआ डिटर्जेंट धीरे-धीरे बदबू का कारण बनता है, भले ही तौलिया ऊपर से साफ और सूखा दिख रहा हो. इसलिए हमेशा मशीन में डाले गए कपड़ों की मात्रा के हिसाब से ही डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना चाहिए.

## फैब्रिक सॉफ्टनर की अधिकता
फैब्रिक सॉफ्टनर तौलिये को छूने में मुलायम जरूर बना देता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा तौलिये के रेशों पर एक हल्की परत जमा कर देती है. यह परत तौलिये की पानी सोखने की क्षमता को कम कर देती है, जिससे तौलिया धोने के बाद भी ठीक से सूख नहीं पाता और नमी अंदर ही अंदर बनी रहती है. यही अधूरी सूखी नमी आगे चलकर बदबू की जड़ बन जाती है. इसलिए तौलिये के लिए फैब्रिक सॉफ्टनर सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.

## वॉशिंग मशीन की खुद अपनी सफाई न होना
बहुत बार गंदगी तौलिये में नहीं, बल्कि मशीन के अंदर ही जमा होती है. अगर मशीन के ड्रम, रबर सील या डिटर्जेंट ड्रॉअर में साबुन की परत, नमी और गंदगी जमा हो जाए, तो हर धुलाई के साथ यही गंदगी साफ किए जा रहे तौलिये तक पहुंच जाती है. फ्रंट-लोड मशीन में यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि इनकी रबर सील में नमी लंबे समय तक फंसी रह जाती है. मशीन को समय-समय पर कंपनी की बताई विधि के अनुसार साफ करना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसका दरवाजा कुछ देर के लिए खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि अंदर की नमी सूख सके.

## तौलिये को ठीक से न सुखाना
तौलिया धोने के बाद उसे खुली और हवादार जगह पर पूरी तरह सुखाना जरूरी है. अगर तौलिया गीला या आधा सूखा रहते हुए ही मोड़कर रख दिया जाए, तो उसमें बची नमी की वजह से सीलन जैसी गंध बहुत जल्दी आने लगती है. जहां तक संभव हो, तौलिये को कुछ देर धूप में सुखाना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि धूप नमी सोखने के साथ बैक्टीरिया को भी कम करने में मदद करती है.

## एक साथ बहुत ज्यादा तौलिये धो लेना
वॉशिंग मशीन में जरूरत से ज्यादा कपड़े भर देने पर पानी और डिटर्जेंट सभी कपड़ों तक बराबर मात्रा में नहीं पहुंच पाते. तौलिये मोटे और ज्यादा पानी सोखने वाले होते हैं, इसलिए इन्हें दूसरे कपड़ों के साथ ठूंस-ठूंसकर धोने पर सफाई और रिंसिंग, दोनों प्रभावित होती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि तौलिया धुलने के बाद भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाता और उसमें बदबू बनी रह जाती है.

## इसका आप पर असर
इन आदतों को सुधारकर बार-बार तौलिया खराब होने की शिकायत और नया तौलिया खरीदने में लगने वाला पैसा, दोनों बचाए जा सकते हैं.

- **सेहत पर असर:** नम और बदबूदार तौलिये में बैक्टीरिया और फफूंद पनप सकते हैं. रोज इस्तेमाल होने वाला ऐसा तौलिया त्वचा में जलन या इन्फेक्शन की वजह बन सकता है.
- **पैसे की बचत:** बदबू की शिकायत पर अक्सर लोग तौलिया बदलकर नया खरीद लेते हैं, जबकि असली समस्या धोने के तरीके में होती है. आदत सुधारकर पुराने तौलिये को ही ठीक से इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
- **डिटर्जेंट और सॉफ्टनर का खर्च:** जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट या फैब्रिक सॉफ्टनर डालना हर महीने के लॉन्ड्री खर्च को बढ़ाता है, जबकि सही मात्रा से भी उतनी ही सफाई मिल जाती है.
- **मशीन की उम्र:** गंदगी और नमी जमा रहने से मशीन के पुर्जों और रबर सील पर असर पड़ सकता है. समय पर सफाई करने से मशीन ज्यादा दिन तक ठीक से चलती है.
- **रोजमर्रा की आदत में बदलाव:** वॉश खत्म होते ही कपड़े निकालना, धूप में सुखाना और मशीन का दरवाजा खुला रखना, ये छोटी आदतें रोज अपनाई जा सकती हैं और तुरंत फर्क दिखाती हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. तौलिया धोने के बाद भी बदबू क्यों आती रहती है?
ज्यादातर मामलों में यह तौलिये की गंदगी नहीं बल्कि गीले कपड़े देर तक मशीन में छोड़ देने, ज्यादा डिटर्जेंट या फैब्रिक सॉफ्टनर इस्तेमाल करने और मशीन की सफाई न होने की वजह से होता है.

### 2. क्या ज्यादा डिटर्जेंट डालने से तौलिया ज्यादा साफ होता है?
नहीं, ज्यादा डिटर्जेंट रेशों में फंसा रह जाता है और ठीक से रिंस नहीं हो पाता, जिससे बदबू की समस्या और बढ़ सकती है.

### 3. फैब्रिक सॉफ्टनर तौलिये के लिए नुकसानदायक क्यों है?
ज्यादा फैब्रिक सॉफ्टनर तौलिये के रेशों पर परत जमा कर देता है, जिससे उसकी पानी सोखने की क्षमता घट जाती है और नमी अंदर ही फंसी रह जाती है.

### 4. वॉशिंग मशीन की सफाई कितनी जरूरी है?
बहुत जरूरी है, क्योंकि मशीन के ड्रम, रबर सील और डिटर्जेंट ड्रॉअर में जमी गंदगी हर धुलाई में कपड़ों तक पहुंच सकती है, खासकर फ्रंट-लोड मशीन में.

### 5. तौलिये को सुखाने का सही तरीका क्या है?
तौलिये को खुली और हवादार जगह पर पूरी तरह सुखाना चाहिए और जहां संभव हो, कुछ देर धूप में भी सुखाना फायदेमंद रहता है.

### 6. एक बार में कितने तौलिये धोने चाहिए?
उतने ही जितने में मशीन के अंदर पानी और डिटर्जेंट सभी कपड़ों तक ठीक से पहुंच सकें, मशीन को जरूरत से ज्यादा भरने से बचना चाहिए.

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