पाली में शादियों की धूम, कपड़े से मैच करती राजस्थानी जूतियां सात दिन में हो रहीं तैयार शादी के सीजन में पाली की एक ऐतिहासिक दुकान पर राजस्थानी जूतों की भारी मांग है, जहां कपड़े के मुताबिक सात दिन में विशेष मोजड़ियां तैयार की जाती हैं। शादियों का सीजन शुरू होने के साथ ही पारंपरिक पहनावे का क्रेज हर तरफ देखने को मिल रहा है। इस माहौल में राजस्थानी पारंपरिक जूतियों की मांग काफी बढ़ गई है। शहर के पुराना बस स्टैंड पर स्थित एक पुरानी और ऐतिहासिक दुकान पर इन दिनों खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस दुकान पर राजपूती, राठौड़ी और बीजी जैसी प्रसिद्ध शैलियों के अलावा जोधपुरी, भीनमाल और जालोरी स्टाइल की जूतियां ग्राहकों को बहुत लुभा रही हैं। पारंपरिक फैशन का बढ़ता आकर्षण भले ही आधुनिक समय में लोग फैशन के अनुसार कई तरह के आधुनिक जूते पहनना पसंद करते हैं, लेकिन जब बात राजस्थान की संस्कृति की आती है तो यहां की पारंपरिक जूतियां देसी और विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींच लेती हैं। पाली शहर में एक ऐसा विशेष बाजार है जहां एक खास दुकान पर आज भी राजा-महाराजाओं के दौर में पहनी जाने वाली शाही जूतियां भारी डिमांड में बनी हुई हैं। कपड़े के रंग और वर्क से तैयार होती है मैचिंग जूती इस ऐतिहासिक दुकान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ग्राहक अपनी शेरवानी, लहंगे या कुर्ते का बचा हुआ कपड़ा खुद लेकर आते हैं और कारीगर ठीक उसी रंग, डिजाइन और वर्क से मेल खाती हुई एक्सक्लूसिव जूती तैयार कर देते हैं। ऑर्डर मिलने के ठीक सात दिन के भीतर यह मैचिंग जूती तैयार करके ग्राहकों को सौंप दी जाती है, जिससे दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजन शादी समारोहों में अपने मनपसंद और आकर्षक लुक में नजर आ सकें। शाही लुक और बेहतरीन कारीगरी जोधपुरी नक्काशी, भीनमाली मजबूती और जालोरी डिजाइन वाली ये जूतियां न केवल दिखने में बेहद खूबसूरत लगती हैं, बल्कि अपनी टिकाऊ बनावट और पैरों के आराम के लिए भी काफी मशहूर हैं। अगर आप भी इस वेडिंग सीजन में पूरी तरह से पारंपरिक राजस्थानी रॉयल लुक अपनाना चाहते हैं, तो यह पुरानी दुकान आपकी हर फैशन जरूरत को बखूबी पूरा कर रही है। शाही परिवारों वाली मोजड़ियों की खासियत शाही परिवारों द्वारा पहनी जाने वाली इन विशेष जूतियों की बात करें तो इनकी मोजड़ी में नीचे अंदर की तरफ और चारों तरफ बारीक नक्काशी और कशीदाकारी का काम किया जाता है। अंदर की तरफ कशीदाकारी करने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि पहनने वाले के पैरों में किसी तरह की असुविधा न हो और जूती खूबसूरत भी दिखे। अलग-अलग समुदायों और प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न रंगों और कशीदाकारी का उपयोग करके इन जूतियों को तैयार किया जाता है। तीन जिलों की संस्कृति का अनूठा संगम दुकान चलाने वाले रामलाल बताते हैं कि पुराना बस स्टैंड के पास स्थित उनकी इस दुकान पर लोग अपनी पसंद की जूतियां बनवाने के लिए पहुंचते हैं। शादियों के सीजन में धोती और कुर्ता-पजामे के साथ इन जूतियों को विशेष रूप से पहना जाता है। लोग राजपूती, बीजी और राठौड़ी शैली की जूतियां अपने साथ खरीदकर ले जाते हैं। यदि कोई ग्राहक हमें अपना कपड़ा लाकर देता है और मैचिंग जूती की मांग करता है, तो हम उसे भी तय समय पर तैयार करके देते हैं, हालांकि इसमें कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाता है। इन जूतियों को खरीदने के लिए विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। अब भीनमाल, जोधपुर और जालोर की प्रसिद्ध जूतियां पाली शहर में ही आसानी से मिल जाती हैं। इसका आप पर असर यह खबर शादी की खरीदारी करने वाले परिवारों और स्थानीय कारीगरों के लिए विशेष महत्व रखती है। • भारत में: पारंपरिक शिल्पकारों और हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कला को देशव्यापी स्तर पर बढ़ावा मिलता है। • पाली में: स्थानीय निवासियों और विवाह समारोहों की तैयारी कर रहे लोगों को केवल सात दिन के भीतर अपनी पोशाक से मेल खाती हुई कस्टम जूतियां आसानी से मिल जाती हैं। ऐसा क्यों हुआ शादी के सीजन में पारंपरिक पहनावे की भारी मांग और ऐतिहासिक शिल्पकारी के प्रति लोगों के बढ़ते आकर्षण के कारण इन विशेष जूतियों का चलन बढ़ गया है। • सांस्कृतिक महत्व: राजस्थान की समृद्ध शाही परंपरा और शादियों में पारंपरिक पोशाक पहनने का पुराना चलन इस मांग को सीधे तौर पर बढ़ावा देता है। • कस्टम सेवा: ग्राहकों को उनके अपने कपड़ों के फैब्रिक से मेल खाती हुई जूतियां तैयार करके देने की अनूठी सुविधा खरीदारों को आकर्षित करती है। • क्षेत्रीय विशेषता: जोधपुर, भीनमाल और जालोर की पारंपरिक शैलियों का एक ही बाजार में उपलब्ध होना ग्राहकों के लिए खरीदारी को आसान बनाता है। सवाल-जवाब 1. पाली में यह ऐतिहासिक जूतों की दुकान कहाँ स्थित है? यह ऐतिहासिक दुकान पाली शहर के पुराना बस स्टैंड के पास स्थित है। 2. कस्टम मैचिंग जूती तैयार होने में कितना समय लगता है? ग्राहक के कपड़े से मैच करती हुई जूती तैयार होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगता है। 3. इस दुकान पर कौन-कौन सी शैलियों की जूतियां मिलती हैं? यहाँ राजपूती, राठौड़ी, बीजी, जोधपुरी, भीनमाल और जालोरी स्टाइल की जूतियां उपलब्ध हैं। 4. जूतियों के अंदर कशीदाकारी क्यों की जाती है? जूतियों के अंदर कशीदाकारी इसलिए की जाती है ताकि पैरों में आराम रहे और वे खूबसूरत दिखें। 5. क्या इन जूतियों को खरीदने विदेशी पर्यटक भी आते हैं? हाँ, इन पारंपरिक और शाही जूतियों को खरीदने के लिए विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं। https://trendkia.com/lifestyle/traditional-rajasthani-juttis-take-over-pali-wedding-season-with-seven-day-custom-orders-33100 TrendKia — Har trend, sabse pehle.