त्योहारी सीजन में काली पड़ी पीतल की मूर्तियों को चमकाने के आसान उपाय, बिना अधिक झंझट लौटेगी सुनहरी चमक दिवाली के मौके पर घर के पूजा स्थल में रखी पीतल की मूर्तियों का कालापन दूर करने के लिए घरेलू नुस्खे और बाजार में उपलब्ध विकल्प बेहद असरदार साबित हो सकते हैं। त्योहारों के आगमन पर घरों में व्यापक साफ-सफाई के दौरान पूजा घर में स्थापित पीतल की देव प्रतिमाओं को निखारना एक अहम काम माना जाता है। समय बीतने के साथ पीतल की धातु पर मैल और ऑक्सीकरण की परत चढ़ जाती है, जिससे मूर्तियां गहरी काली या मटमैली दिखने लगती हैं। सनातन परंपरा में पीतल के विग्रहों की विशेष महत्ता है और अधिकांश परिवार हर पर्व पर नई मूर्ति लाने के बजाय अपने मंदिर में रखी पारंपरिक मूर्तियों को ही स्वच्छ कर उनकी आराधना करना शुभ मानते हैं। इस कालेपन को दूर कर मूर्तियों को दोबारा नए जैसा रूप देने के लिए आसान घरेलू सामग्रियों से लेकर व्यावसायिक क्लीनर तक कई उपाय अपनाए जा सकते हैं। पीतल पर कालापन चढ़ने की वजह और पारंपरिक समाधान पीतल धातु का प्राकृतिक स्वभाव ऐसा होता है कि हवा और नमी के लगातार संपर्क में रहने से इसकी बाहरी सतह धीरे-धीरे अपनी चमक खो देती है और काली पड़ने लगती है। व्यावसायिक स्तर पर पीतल की वस्तुओं को चमकाने के लिए मशीनरी, बफिंग पॉलिश और विशेष एसिड का उपयोग किया जाता है। हालांकि, घर के मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों के लिए इस प्रकार के तीखे रसायनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रसोई में मौजूद साधारण चीजों की सहायता से ही इन्हें सुरक्षित तरीके से साफ किया जा सकता है। पीतल कारोबारी नितिन खन्ना के अनुसार, घर पर मौजूद नींबू इस धातु का खोया निखार वापस लाने का एक बेहद असरदार और सुरक्षित माध्यम है। नींबू, डिटर्जेंट और रीठे के पानी से सफाई की विधि घरेलू नुस्खों में नींबू का प्रयोग पीतल के कालेपन को काटने के लिए सबसे सरल विकल्प माना जाता है। नींबू के रस में मौजूद प्राकृतिक एसिड धातु पर जमी मैल की परत को हल्का कर देता है, जिससे थोड़ी सी मेहनत के बाद मूर्ति पूरी तरह खिल उठती है। बेहतर नतीजों के लिए नींबू के साथ डिटर्जेंट पाउडर यानी सर्फ का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा रीठे का पारंपरिक तरीका भी बहुत प्रभावी काम करता है। रीठे को पानी में डालकर अच्छी तरह गर्म कर लें और फिर काली पड़ी मूर्ति को उस गुनगुने पानी में कुछ देर के लिए भिगोकर रख दें। पानी के असर से मूर्ति की बारीक नक्काशी में फंसी सख्त गंदगी और तेल-धूल फूलकर ढीली हो जाती है। इसके बाद नींबू और हल्के कपड़े या ब्रश की मदद से मूर्ति को रगड़कर आसानी से चमकाया जा सकता है। जो लोग कड़े रसायनों से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह तरीका पूरी तरह हानिरहित और किफायती है। बाजार में उपलब्ध व्यावसायिक क्लीनर के विकल्प यदि घरेलू उपायों के लिए पर्याप्त समय न हो तो बाजार में मिलने वाले खास धातु क्लीनर का सहारा भी लिया जा सकता है। नितिन खन्ना बताते हैं कि बाजार में दारा के नाम से ब्रासो और पीतांबरी जैसे विशेष क्लीनिंग उत्पाद सुगमता से मिल जाते हैं। ये उत्पाद विशेष रूप से पीतल और तांबे जैसी धातुओं के लिए तैयार किए जाते हैं, जिनसे कम रगड़ में ही मूर्तियों पर जमी गहरी कालिख उतर जाती है। इन व्यावसायिक घोलों और पाउडरों की मदद से पुरानी से पुरानी पीतल की मूर्तियों को भी मिनटों में नया जैसा चमकदार लुक दिया जा सकता है। इसका आप पर असर घर के मंदिर में स्थापित पीतल की पुरानी मूर्तियों को बिना अतिरिक्त खर्च के नए जैसा निखारने में यह जानकारी सीधी मदद करती है। • पूजा की तैयारी: बिना नई मूर्तियां खरीदे पुरानी मूर्तियों को घर पर ही चमकाया जा सकता है। इससे त्योहारी खर्च बचता है और पारंपरिक विग्रहों की पवित्रता बनी रहती है। • सुरक्षित सफाई: हानिकारक तेजाब या भारी मशीनों के बजाय नींबू और रीठे का उपयोग सुरक्षित रहता है। इससे मूर्तियों की बारीक नक्काशी खराब होने का कोई जोखिम नहीं रहता। • समय और विकल्प: कम समय होने पर बाजार में मिलने वाले ब्रासो या पीतांबरी जैसे उत्पादों का त्वरित इस्तेमाल किया जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार घरेलू या रेडीमेड में से कोई भी तरीका चुना जा सकता है। • सख्त मैल से राहत: रीठे के गुनगुने पानी में भिगोने से मूर्तियों की दरारों में जमी पुरानी कालिख ढीली पड़ जाती है। इसके बाद नींबू रगड़ने से बहुत कम मेहनत में पूरी चमक लौट आती है। ऐसा क्यों हुआ पीतल की मूर्तियां हवा और नमी के संपर्क में आने के कारण अपनी चमक खोकर काली पड़ जाती हैं, जिसे सही तकनीकों से आसानी से ठीक किया जा सकता है। • धातु का स्वभाव: पीतल धातु हवा में मौजूद तत्वों और नमी के साथ प्रतिक्रिया करती है। इसी प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण समय बीतने पर सतह पर कालेपन की परत जम जाती है। • धार्मिक परंपरा: सनातन धर्म में पर्व-त्योहारों पर पुरानी मूर्तियों को ही स्वच्छ करके पूजने की रीति है। इसी वजह से दिवाली जैसे मौकों पर मूर्तियों को साफ करने की जरूरत सामने आती है। • व्यावसायिक बनाम घरेलू तरीके: फैक्ट्रियों में तेजाब और पॉलिश मशीनों से सफाई होती है, लेकिन घरों में सुरक्षित उपाय चाहिए होते हैं। इसलिए नींबू, सर्फ, रीठा और पीतांबरी जैसे सुरक्षित विकल्पों का उपयोग किया जाता है। सवाल-जवाब 1. पीतल की मूर्तियां समय के साथ काली क्यों पड़ जाती हैं? पीतल धातु का प्राकृतिक स्वभाव ऐसा होता है कि हवा और नमी के संपर्क में रहने से उस पर कालापन जम जाता है। 2. पीतल की मूर्तियों को साफ करने के लिए कौन से घरेलू सामान उपयोगी हैं? रसोई में मौजूद नींबू, सर्फ और गर्म रीठे के पानी का इस्तेमाल करके मूर्तियों को आसानी से चमकाया जा सकता है। 3. रीठे के पानी का उपयोग किस प्रकार किया जाता है? रीठे के पानी को गर्म करके उसमें मूर्ति डालने से जमी हुई गंदगी फूल जाती है, जिसके बाद नींबू से उसे साफ करना आसान हो जाता है। 4. बाजार में पीतल चमकाने के लिए कौन से केमिकल उत्पाद मिलते हैं? बाजार में पीतल की सफाई के लिए दारा के नाम से ब्रासो और पीतांबरी जैसे विशेष क्लीनिंग उत्पाद उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/lifestyle/tyohari-sijana-men-kali-pari-brass-ki-murtiyon-ko-chamakane-ke-asana-upaya-bina-adhika-jhnjhata-lautegi-sunahari-chamaka-54336 TrendKia — Har trend, sabse pehle.