# त्योहारी सीजन में पुराने मिट्टी के दीयों को नया रूप देकर बनाएं आकर्षक सजावटी सामान

> धनतेरस और दिवाली पर पुराने दीयों को फेंकने के बजाय पेंट, कुंदन, फूलों और मोमबत्तियों की मदद से दोबारा सुंदर डेकोरेशन आइटम में बदला जा सकता है। इससे फिजूलखर्च बचेगा और घर की रौनक भी बढ़ेगी।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/tyohari-sijana-men-purane-mitti-ke-diyon-ko-naya-rupa-dekara-banaen-akarshaka-sajavati-samana-56593 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिवाली सजावट, धनतेरस, मिट्टी के दीये, होम डेकोर, क्राफ्ट टिप्स, पुनर्चक्रण

त्योहारों की दस्तक के साथ ही बाजारों में सजावट की रौनक बढ़ जाती है। धनतेरस और दिवाली की तैयारी के दौरान अमूमन लोग हर साल नए दीये, आधुनिक लाइटें और महंगे सजावटी सामान खरीदने लगते हैं। हालांकि हर पर्व पर नई खरीदारी करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। पिछले साल इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीये यदि घर में सहेज कर रखे गए हैं, तो थोड़ी सी रचनात्मकता और हल्की मेहनत के जरिए उन्हें बिल्कुल नया रूप दिया जा सकता है। बेकार समझे जाने वाले इन दीयों का पुनर्चक्रण न केवल बजट को संतुलित रखता है, बल्कि घर के हर कोने को एक अनोखा और व्यक्तिगत स्पर्श भी प्रदान करता है।

## ऐक्रेलिक रंगों की मदद से दें पारंपरिक नया लुक
मिट्टी के पुराने दीयों को फिर से उपयोगी बनाने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय उनकी रंगाई करना है। इस काम के लिए ऐक्रेलिक पेंट सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। रंगाई शुरू करने से पहले दीयों को अच्छी तरह पानी से धोकर सुखाना जरूरी होता है ताकि उन पर जमी पुरानी कालिख या तेल पूरी तरह हट जाए। पूरी तरह सूखने के बाद उन पर सुनहरा, रूपहला, चटख लाल, पीला या कोई भी पसंदीदा आधार रंग लगाया जा सकता है। जब बेस पेंट सूख जाए, तब बारीक ब्रश के सहारे उन पर छोटी बिंदियां, बेल-बूटे, फूल-पत्तियों की आकृतियां अथवा अन्य पारंपरिक मांडना पैटर्न उकेरे जा सकते हैं। इस तरह तैयार दीयों को बालकनी की रेलिंग, खिड़कियों की चौखट और पूजा घर में कतारबद्ध रूप से सजाया जा सकता है।

## शीशों, मोतियों और कुंदन वर्क से तैयार करें शाही रूप
अगर सादे दीयों को थोड़ा भव्य और शाही स्वरूप देना हो, तो शिल्प सामग्री की मदद ली जा सकती है। इसके लिए क्राफ्ट की दुकानों पर मिलने वाले छोटे कुंदन, रंगीन शीशे, मोती और लेस का उपयोग किया जा सकता है। किसी मजबूत क्राफ्ट ग्लू की मदद से दीये के बाहरी किनारों पर मोतियों की लड़ चिपकाई जा सकती है और मध्य भाग में छोटा शीशा लगाया जा सकता है। जब इन दीयों में बाती जलती है, तो शीशों और मोतियों पर पड़ने वाला प्रकाश बेहद मनमोहक चमक पैदा करता है। इस प्रकार तैयार किए गए आकर्षक दीयों को किसी सुंदर थाली में सजाकर सेंटरपीस के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

## कांच के बर्तन और पंखुड़ियों के साथ फ्लोटिंग कैंडल का प्रबंध
कई पुराने दीये ऐसे होते हैं जिनके किनारे टूट जाते हैं या जिनमें तेल डालकर लंबे समय तक जलाना कठिन होता है। ऐसे दीयों को कांच के सजावटी बर्तनों के साथ तालमेल बिठाकर खूबसूरत फ्लोटिंग कैंडल डेकोर में बदला जा सकता है। एक चौड़े कांच के कटोरे में स्वच्छ पानी भरकर उसमें गेंदे और गुलाब की ताजी पंखुड़ियां बिखेरें। इसके बाद साफ किए गए और रंगे हुए दीयों को पानी के पात्र के बाहरी किनारों पर आकर्षक ढंग से सजाएं। पात्र के मध्य में तैरने वाली फ्लोटिंग कैंडल रखी जा सकती है। यदि किसी दीये को पानी में उतारना हो, तो पहले उसकी स्थिरता की जांच कर लेना आवश्यक है ताकि वह संतुलन न खोए।

## रंगोली की रूपरेखा को दीयों के उजाले से निखारें
धनतेरस और लक्ष्मी पूजन के पावन अवसर पर मुख्य द्वार के समीप रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। पहले से तैयार की गई पारंपरिक रंगों या फूलों की रंगोली के चारों ओर रंगे हुए दीये रखकर उसके पूरे आकर्षण को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। मुख्य द्वार के फर्श पर बनाई गई डिजाइन के किनारों पर इन दीयों को रखें और उनके साथ ताजे फूलों की पंखुड़ियों तथा छोटी मोमबत्तियों का समन्वय करें। रंगों और दीयों का यह संगम घर के प्रवेश द्वार को भव्य और ऊर्जावान बना देता है।

## सक्युलेंट्स और सजावटी पौधों के लिए बनाएं मिनी प्लांटर
बड़े आकार के पुराने मिट्टी के दीयों को छोटे और आकर्षक इनडोर प्लांटर्स में भी ढाला जा सकता है। इन दीयों के बाहरी हिस्से को चटख रंगों से पेंट करके उनमें थोड़ी सी उपजाऊ मिट्टी भरी जा सकती है। इसके बाद इनमें छोटे सक्युलेंट या कम पानी की जरूरत वाले सजावटी पौधे रोपे जा सकते हैं। चूंकि अधिकांश दीयों में पानी निकासी के लिए नीचे छेद नहीं होता, इसलिए अतिरिक्त नमी से पौधे को बचाने के लिए सीधे रोपण के बजाय किसी बेहद छोटे प्लास्टिक गमले को दीये के भीतर रखा जा सकता है। ये छोटे प्लांटर लिविंग रूम की मेज, खिड़की की चौखट या बालकनी में रखे जाने पर बेहद खूबसूरत दिखते हैं।

## सजावटी प्लेट या लकड़ी की ट्रे से तैयार करें भव्य सेंटरपीस
कम खर्च में लिविंग रूम की मुख्य मेज को सजाने के लिए पुराने दीयों से एक शानदार सेंटरपीस तैयार किया जा सकता है। इसके लिए किसी पुरानी लकड़ी की ट्रे या धातु की सजावटी प्लेट का आधार बनाएं। उस ट्रे में रंगे और सजाए गए दीयों को करीने से रखें। दीयों के बीच खाली बची जगहों पर गेंदे के खिले हुए फूल, लाल गुलाब की पंखुड़ियां, सुनहरे मोती और बैटरी से चलने वाली छोटी लाइटें पिरोएं। यह सेंटरपीस ड्राइंग रूम के वातावरण को उत्सव के अनुकूल बना देता है और पुराने सामान के बेहतरीन उपयोग का उदाहरण पेश करता है।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में पुराने दीयों का दोबारा इस्तेमाल करके घर की साज-सज्जा को बजट के भीतर नया और अनोखा लुक दिया जा सकता है।

- **बजट में बचत:** हर साल नए सजावटी सामान और दीयों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को सीधे तौर पर रोका जा सकता है। घर में पहले से मौजूद रंगों और क्राफ्ट की सामान्य वस्तुओं की मदद से बहुत कम लागत में सुंदर डेकोरेशन तैयार हो जाती है।
- **कचरे में कमी:** एक बार इस्तेमाल किए गए मिट्टी के बर्तनों को फेंकने के बजाय उन्हें नया जीवन देकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर कचरे का भार कम होता है और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।
- **रचनात्मक सजावट:** बाजार में मिलने वाले सामान्य उत्पादों की तुलना में हस्तनिर्मित सजावट घर को एक विशिष्ट पहचान देती है। परिवार के सदस्य मिलकर इन आसान DIY तरीकों से घर के कोनों को अपनी पसंद के अनुसार सजा सकते हैं।
- **बहुमुखी उपयोग:** पुराने दीयों को केवल तेल-बाती जलाने तक सीमित रखने के बजाय प्लांटर, सेंटरपीस और फ्लोटिंग डेकोर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। त्योहार के बाद भी इन सजावटी वस्तुओं को साल भर इनडोर प्लांट्स या टेबल डेकोरेशन के लिए रखा जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
त्योहारों के दौरान अनावश्यक खर्च और अपशिष्ट से बचने की आवश्यकता ने पुराने सजावटी सामानों के रचनात्मक उपयोग को लोकप्रिय बनाया है।

- **बढ़ती खरीदारी लागत:** हर साल त्योहारों पर सजावटी सामानों और तैयार दीयों के दामों में बढ़ोतरी देखी जाती है। पुराने सामान को पुनर्निर्मित करने से लोग सीमित बजट में भी अपने घर को सुरुचिपूर्ण ढंग से संवार पाते हैं।
- **पर्यावरणीय सजगता:** उत्सवों के तुरंत बाद भारी मात्रा में मिट्टी और प्लास्टिक कचरा खुले में फेंक दिया जाता है। इस तरह के उपयोगी DIY उपायों से लोग पुरानी सामग्री का सार्थक उपयोग कर कचरे को न्यूनतम करने का प्रयास करते हैं।
- **हस्तनिर्मित कला का आकर्षण:** बाजार के मशीनी उत्पादों की तुलना में हाथों से सजाए गए सामानों का भावनात्मक और सौंदर्यपरक मूल्य अधिक होता है। इसलिए लोग दीयों पर पेंटिंग, कुंदन और मिरर वर्क जैसी तकनीकों का रुख कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पुराने मिट्टी के दीयों को पेंट करने के लिए कौन सा रंग सबसे अच्छा होता है?
ऐक्रेलिक पेंट मिट्टी के दीयों पर इस्तेमाल करने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि यह तेजी से सूखता है और टिकाऊ रहता है।

### 2. पेंटिंग शुरू करने से पहले दीयों को धोना क्यों जरूरी है?
दीयों को अच्छी तरह धोने और सुखाने से उन पर जमी पुरानी कालिख और तेल हट जाते हैं, जिससे नया रंग सतह पर मजबूती से पकड़ बनाता है।

### 3. टूटे या लीक होने वाले दीयों का दोबारा उपयोग कैसे किया जा सकता है?
ऐसे दीयों को कांच के पानी वाले बर्तन के किनारे सजाने, ट्रे के सेंटरपीस में रखने या रंगोली के बॉर्डर पर मोमबत्ती के साथ रखने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

### 4. दीये को मिनी प्लांटर बनाते समय पानी निकासी का क्या उपाय करना चाहिए?
चूंकि दीये में ड्रेनेज होल नहीं होता, इसलिए सीधे मिट्टी भरने के बजाय एक छोटा प्लास्टिक गमला दीये के अंदर रखना चाहिए।

### 5. दीयों से सेंटरपीस तैयार करने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है?
एक सजावटी थाली या लकड़ी की ट्रे लेकर उसमें सजे हुए दीये, गेंदे व गुलाब की पंखुड़ियां, मोती और छोटी लाइट्स मिलाकर सेंटरपीस बनाया जा सकता है।

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