वैवाहिक जीवन में तालमेल के लिए सुधा मूर्ति ने सुझाए 5 जरूरी नियम लेखिका और समाजसेविका सुधा मूर्ति ने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए साझा कीं अहम सीख, जिसमें जिम्मेदारियों के बंटवारे और मतभेदों को सुलझाने पर जोर दिया गया है। दांपत्य जीवन में आपसी अनुराग और सामंजस्य के साथ एक-दूसरे की भावना को समझना और बराबरी का भाव रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। वैवाहिक रिश्तों को लेकर अक्सर यह भ्रांति देखने को मिलती है कि जिस रिश्ते में विवाद नहीं होते, केवल वही सफल है। इस तरह का दृष्टिकोण पति-पत्नी के रिश्ते में अनावश्‍यक तनाव पैदा करता है। कई बार लोग अपने रिश्ते की तुलना बाहर दिखने वाले दूसरे युगलों से करने लगते हैं, जिससे मनमुटाव बढ़ता है। हकीकत में किसी भी रिश्ते में मतभेद होना स्वाभाविक है, और समझदार जोड़े अपने विवादों को सूझबूझ से सुलझाते हैं। परफेक्ट साथी खोजने के बजाय कमियों को स्वीकारें इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति की पत्नी, विख्यात लेखिका और समाजसेविका सुधा मूर्ति अक्सर युवाओं को दांपत्य जीवन में समझदारी बरतने की प्रेरणा देती हैं। उनका मानना है कि किसी भी शादी को टिकाऊ बनाने के लिए साथी का सर्वगुण संपन्न या त्रुटिहीन होना जरूरी नहीं है। रिश्ते की मजबूती एक-दूसरे की कमियों को अपनाने और मिलकर आगे बढ़ने में निहित होती है। यदि कोई व्यक्ति किसी आदर्श साथी की खोज में रहता है या अपने जीवनसाथी को पूरी तरह बदलने का प्रयास करता है, तो यह वैवाहिक रिश्ते के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। विवाद स्वाभाविक हैं, उन्हें संभालने का तरीका मायने रखता है पति-पत्नी के बीच समय-समय पर नोकझोंक और विचार भिन्नता होना एकदम सामान्य प्रक्रिया है। सुधा मूर्ति के अनुसार, यदि कोई युगल यह कहे कि उनके बीच कभी कोई मतभेद या बहस नहीं हुई, तो यह बात अप्राकृतिक लगती है। असल मुद्दा बहस होना या न होना नहीं है, बल्कि उस स्थिति को दोनों पक्ष किस तरह से संभालते हैं, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। समझदारी इसी में है कि छोटी-मोटी असहमति को रिश्ते पर हावी न होने दिया जाए। एक के नाराज होने पर दूसरे का शांत रहना जरूरी क्रोध और आवेश की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुधा मूर्ति एक व्यावहारिक नियम अपनाने की सलाह देती हैं। उनके मुताबिक, दोनों साझेदारों को एक ही समय पर उत्तेजित या क्रोधित नहीं होना चाहिए। यदि एक व्यक्ति किसी बात पर नाराज हो जाए, तो दूसरे को संयम बरतते हुए शांत हो जाना चाहिए। उन्होंने अपने स्वयं के वैवाहिक जीवन का दृष्टांत रखते हुए बताया कि जब नारायण मूर्ति गुस्से में होते हैं, तो वह खामोश रहकर स्थिति को संभालती हैं। ठीक इसी प्रकार, जब उन्हें गुस्सा आता है, तो उनके पति धैर्य बनाए रखते हैं। इस आपसी तालमेल के कारण कोई भी मामूली बात गंभीर विवाद का रूप नहीं ले पाती। घरेलू जिम्मेदारियों का निष्पक्ष बंटवारा आधुनिक समय में दोनों साझेदारों के कामकाजी होने की स्थिति पर विचार रखते हुए सुधा मूर्ति ने स्पष्ट किया कि जब पति और पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं, तो घर-गृहस्थी के दायित्व भी दोनों को मिलकर उठाने चाहिए। भोजन तैयार करना, संतानों की परवरिश करना और घर की दैनिक व्यवस्थाओं को देखना केवल महिला की एकल जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। दोनों का सक्रिय सहयोग ही घर के माहौल को सुखद बनाए रख सकता है। तुलना करने की प्रवृत्ति से बचें और सम्मान दें सुधा मूर्ति के अनुसार, परस्पर आदर, सहयोग और विवेकशीलता ही एक सुदृढ़ और आनंदमय दांपत्य की सच्ची बुनियाद है। उन्होंने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि पति द्वारा अपनी पत्नी की कार्यशैली की तुलना अपनी मां से करना अनुचित है। पुराने दौर में अधिकांश महिलाएं पूर्णकालिक रूप से घर की देखरेख करती थीं, जबकि वर्तमान समय में बहुत-सी महिलाएं अपने पेशेवर दायित्वों को भी संभालती हैं। ऐसी बदली हुई परिस्थितियों में उनसे पुरानी पारंपरिक अपेक्षाएं रखना सही नहीं है। इसका आप पर असर सुधा मूर्ति की यह व्यावहारिक सलाह आधुनिक जोड़ों को आपसी तनाव कम करने और घर-परिवार में संतुलन स्थापित करने का रास्ता दिखाती है। • दांपत्य जीवन में: पति-पत्नी के बीच काम और जिम्मेदारियों के निष्पक्ष बंटवारे से बेवजह के झगड़े खत्म होते हैं। इससे कामकाजी युगलों को मानसिक शांति मिलती है और रिश्ते में मधुरता बनी रहती है। • पारिवारिक संवाद में: एक के गुस्से के समय दूसरे के शांत रहने की सीख बड़े विवादों को रोकती है। यह नियम दैनिक बातचीत में तनाव को घटाकर समझदारी को बढ़ावा देता है। • घरेलू जिम्मेदारियों में: खाना बनाने और बच्चों की परवरिश में दोनों का हाथ बंटाना समय और ऊर्जा बचाता है। इससे महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ नहीं पड़ता और बराबरी की भावना मजबूत होती है। • पारंपरिक सोच में: पत्नी की तुलना मां से न करने की सलाह अवास्तविक अपेक्षाओं को समाप्त करती है। यह दृष्टिकोण आधुनिक कामकाजी माहौल को स्वीकार कर परिवार को स्थिरता प्रदान करता है। ऐसा क्यों हुआ आधुनिक जीवनशैली और दोनों साझेदारों के कामकाजी होने के कारण वैवाहिक जीवन में नई चुनौतियां और तनाव पैदा हो रहे हैं, जिसके समाधान के लिए यह मार्गदर्शन दिया गया। • बदलती सामाजिक व्यवस्था: एकल परिवारों और व्यस्त दिनचर्या के कारण घरेलू काम और नौकरी के बीच संतुलन साधना जटिल हो गया है। इस वजह से पति-पत्नी के बीच जिम्मेदारियों को लेकर अक्सर मतभेद उभरते हैं। • अवास्तविक उम्मीदों का दबाव: लोग अक्सर अपने वैवाहिक जीवन की तुलना दूसरों से करते हैं या आदर्श जीवनसाथी की तलाश में रहते हैं। यह अवास्तविक सोच रिश्ते में असंतोष और निराशा को जन्म देती है। • पारंपरिक धारणाओं का टकराव: कामकाजी महिलाओं से पारंपरिक गृहिणियों जैसी अपेक्षाएं रखना परिवारों में तनाव का कारण बनता है। इसी टकराव को दूर करने के लिए आधुनिक दृष्टिकोण और आपसी समझदारी की जरूरत रेखांकित की गई। सवाल-जवाब 1. सुधा मूर्ति के अनुसार शादी को सफल बनाने के लिए क्या आवश्यक है? सुधा मूर्ति का मानना है कि साथी का परफेक्ट होना जरूरी नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करना और जिम्मेदारियों को मिलकर निभाना सबसे महत्वपूर्ण है। 2. पति-पत्नी के झगड़ों को लेकर सुधा मूर्ति का क्या दृष्टिकोण है? उनका कहना है कि पति-पत्नी में कभी-कभार बहस होना पूरी तरह सामान्य है और असल बात विवाद होने की नहीं, बल्कि उसे समझदारी से संभालने की है। 3. क्रोध की स्थिति में उन्होंने क्या सलाह दी है? उन्होंने सलाह दी कि दोनों को एक साथ गुस्सा नहीं होना चाहिए; जब एक व्यक्ति नाराज हो, तो दूसरे को शांत रहकर स्थिति को संभालना चाहिए। 4. कामकाजी दंपतियों के लिए घरेलू जिम्मेदारियों पर उन्होंने क्या कहा? उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दोनों नौकरी करते हैं, तो खाना बनाने और बच्चों की देखभाल सहित घर के सभी काम दोनों को मिलकर बांटने चाहिए। 5. पत्नी की तुलना मां से करने पर सुधा मूर्ति ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि पत्नी की तुलना मां से करना अनुचित है क्योंकि आज के समय में महिलाएं घर के साथ-साथ नौकरी की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। प्रेरणा और सबक सुधा मूर्ति के अपने वैवाहिक अनुभव से जुड़े ये विचार हर व्यक्ति को अपने रिश्तों में परिपक्वता और सम्मान अपनाने की प्रेरणा देते हैं। • संयम का महत्व: आवेश के क्षणों में धैर्य धारण करना बड़े से बड़े संकट को टालने की क्षमता रखता है। • सहानुभूति और स्वीकृति: अपने साथी की खामियों को स्वीकार करना ही सच्चे और मजबूत संबंध की पहचान है। • समानता का भाव: घर के दैनिक कार्यों को किसी एक लिंग तक सीमित न रखकर मिलकर निभाना ही सच्ची साझेदारी है। https://trendkia.com/lifestyle/vaivahika-jivana-men-talamela-ke-lie-sudha-murty-ne-sujhae-5-jaruri-niyama-34694 TrendKia — Har trend, sabse pehle.