# पश्चिम चम्पारण में खास अरुणिमा आम की खेती, ऑफ सीजन में 400 रुपए किलो तक बिकता है

> पश्चिम चम्पारण के कृषक शिशिर दूबे द्वारा उगाई जाने वाली अरुणिमा आम की किस्म सितंबर से अक्टूबर के बीच पककर तैयार होती है, जो ऑफ सीजन में बाजार में 300 से 400 रुपए प्रति किलो तक बिकती है।

**Type:** article · **Category:** जीवनशैली · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/lifestyle/west-champaran-me-khaas-arunima-aam-ki-kheti-off-season-me-400-rupee-kg-48900 · **Language:** Hindi
**Tags:** अरुणिमा आम, पश्चिम चम्पारण, कृषि समाचार, ऑफ सीजन आम, बिहार खेती, फल बागवानी

पश्चिम चम्पारण में एक खास किस्म के आम की खेती इन दिनों खासी चर्चा में है, जिसकी तुड़ाई और कटाई सितंबर से लेकर अक्टूबर के मध्य तक की जाती है। आम तौर पर उत्तर भारत के बाजारों में अगस्त का महीना बीतते-बीतते आम का सीजन समाप्त हो जाता है और फल मिलने बंद हो जाते हैं। ऐसे समय में बाजार में एक ऐसा फल अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, जो न केवल दिखने में बेहद मनमोहक होता है बल्कि स्वाद में भी चीनी या मिश्री की तरह बहुत मीठा होता है। जिले के नौतन प्रखंड क्षेत्र में रहने वाले प्रगतिशील कृषक शिशिर दूबे ने इस खास प्रजाति की बागवानी की है, और अब फसल पूरी तरह तैयार होकर बाजार में बिक्री के लिए निकल पड़ी है।

## पांच साल से हो रही है इस विलंबित किस्म की बागवानी
इस अनूठी बागवानी के बारे में बात करते हुए कृषक शिशिर दूबे का कहना है कि वह पिछले पांच वर्षों से लगातार अरुणिमा आम की खेती कर रहे हैं। इस प्रजाति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका फलन अन्य पारंपरिक और सामान्य किस्मों की तुलना में काफी देरी से होता है। जब जुलाई महीने का अंतिम सप्ताह आते-आते उत्तर भारत के स्थानीय बाजारों से सभी आम गायब हो जाते हैं, तब जाकर सितंबर और अक्टूबर के बीच के हफ्तों में अरुणिमा आम अपनी चमक बिखेरता हुआ बाजार में पहुंचता है।

## आकर्षक रंग-रूप और बेहतरीन बनावट
बाजार में बिकने वाले अधिकांश आमों की तुलना में अरुणिमा की रंगत और शारीरिक बनावट बेहद आकर्षक और ग्राहकों को लुभाने वाली होती है। इस प्रजाति के एक फल का औसत वजन लगभग 350 ग्राम से लेकर 400 ग्राम तक दर्ज किया जाता है। जब यह फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाता है, तो इसके छिलके के ऊपर एक सुंदर लाल और नीले रंग की परत उभर आती है, जो दूर से ही फल प्रेमियों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है।

## बिना रेशे का गूदा और शानदार बाजार भाव
खेती करने वाले कृषक शिशिर दूबे का यह भी कहना है कि अरुणिमा आम का अंदरूनी गूदा रस से पूरी तरह लबालब भरा होता है, जिसमें किसी भी तरह के रेशे नहीं होते और इसका स्वाद बेहद लजीज होता है। बाजार में इस फल की मांग इतनी अधिक है कि यह 300 रुपए से लेकर 400 रुपए प्रति किलोग्राम तक के ऊंचे दामों पर बिकता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बाजार में उस समय कोई दूसरा आम उपलब्ध नहीं होता, इसलिए स्वाद के शौकीन ग्राहक बिना किसी मोलभाव के इस प्रीमियम फल की खरीदारी करते हैं।

## इसका आप पर असर
यह अनोखी खेती उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो बागवानी से अलग हटकर कमाई करना चाहते हैं।

- **पश्चिम चम्पारण में:** नौतन प्रखंड और आसपास के स्थानीय किसानों को ऑफ सीजन में फसल बेचकर सामान्य से कहीं अधिक मुनाफा कमाने का नया रास्ता मिलता है। किसानों को इस तरह की लेट-हर्विस्टिंग वाली फसलों से अच्छी आर्थिक आमदनी हो सकती है।
- **भारत में:** उत्तर भारत के आम प्रेमियों को पारंपरिक सीजन के खत्म होने के कई हफ्तों बाद भी ताजे और प्रीमियम फलों का स्वाद चखने का मौका मिल जाता है। बाजार में सीमित उपलब्धता होने के कारण ग्राहकों को इसके लिए थोड़ा अधिक भुगतान करना पड़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस खास किस्म की लेटलतीफ पैदावार और उसकी अनोखी विशेषताओं के पीछे कई वैज्ञानिक और जैविक कारण जुड़े हुए हैं।

- **देरी से फलन की प्रकृति:** अरुणिमा किस्म की आनुवंशिक बनावट अन्य पारंपरिक प्रजातियों की तुलना में पौधे पर बहुत बाद में फल विकसित करती है। यह जैविक विशेषता इसे सामान्य मौसम के गुजर जाने के बाद बाजार में आने में सक्षम बनाती है।
- **मौसम का अनुकूल प्रभाव:** पश्चिम चम्पारण के नौतन क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी का संयोजन इस विशेष पौधे की वृद्धि और फल पकने की प्रक्रिया के अनुकूल बैठता है। इससे फलों का वजन 350 से 400 ग्राम तक पहुंचता है और उन पर आकर्षक लाल-नीली परत बनती है।
- **मांग और आपूर्ति का अंतर:** उत्तर भारत के बाजारों में जुलाई के अंत तक आम खत्म हो जाने के कारण सितंबर और अक्टूबर में बाजार में भारी खालीपन होता है। इस सीजनल अंतराल के कारण व्यापारी और उपभोक्ता इस फल के लिए 300 से 400 रुपए प्रति किलो तक चुकाने को तैयार रहते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अरुणिमा आम की तुड़ाई किस महीने में होती है?
अरुणिमा आम की हार्वेस्टिंग सितंबर से लेकर अक्टूबर के मध्य तक की जाती है।

### 2. इस आम की बागवानी किसने की है?
इस आम की बागवानी पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड के कृषक शिशिर दूबे ने की है।

### 3. अरुणिमा आम का औसत वजन कितना होता है?
इस आम का औसत वजन 350 से 400 ग्राम तक होता है।

### 4. बाजार में यह आम किस कीमत पर बिकता है?
यह आम बाजार में 300 से 400 रुपए प्रति किलो तक बिकता है।

### 5. शिशिर दूबे कितने वर्षों से इस आम की खेती कर रहे हैं?
शिशिर दूबे पिछले पांच वर्षों से अरुणिमा आम की बागवानी कर रहे हैं।

## प्रेरणा और सबक
किसानों और उद्यमियों के लिए यह सफलता एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है कि लीक से हटकर सोचने से क्या हासिल हो सकता है।

- **अलग किस्म का चुनाव:** पारंपरिक फसलों की बजाय बाजार में लीक से हटकर लेट-हर्विस्टिंग वाली प्रजाति चुनने से किसानों को प्रतिस्पर्धा से दूर रहकर बेहतरीन मुनाफा मिल सकता है।
- **सीजनल गैप का फायदा:** बाजार की मांग और आपूर्ति के अंतर को पहचानकर सही समय पर फसल बाजार में उतारने से ग्राहकों से मनचाही कीमत वसूली जा सकती है।
- **गुणवत्ता पर जोर:** अपने उत्पाद की बनावट, वजन और स्वाद को बेहतर रखकर प्रीमियम क्वालिटी तैयार करने से बिना किसी मोलभाव के सीधी बिक्री संभव होती है।

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