लाइव: ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष गहराया — कुवैत में ड्रोन हमला, अमेरिकी सैनिकों की मौत पर पलटवार ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा देश की एक मिसाइल के जॉर्डन के अकाबा हवाई अड्डे पर गिरने की खबर के बाद पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच, इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के अकाबा की तरफ दागी गई मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें हवा में ही रोक दिया। मध्य पूर्व एक अभूतपूर्व और अत्यंत विनाशकारी सैन्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कई दशकों से चल रहा कूटनीतिक तनाव अब एक पूर्ण और सीधे सैन्य टकराव में तब्दील हो चुका है। जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक घातक हमले ने इस पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए किया गया अंतरिम समझौता पूरी तरह से टूट चुका है। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसा व्यापक युद्ध शुरू हो गया है जिसकी आंच अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इस भयानक संघर्ष की लपटें कुवैत, इराक, जॉर्डन और बहरीन जैसे संप्रभु राष्ट्रों की सीमाओं को पार कर चुकी हैं। पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोनों की गूंज सुनाई दे रही है। यह केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है बल्कि एक ऐसा क्षेत्रीय युद्ध बन गया है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार किए जा रहे बड़े हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में इस सैन्य संघर्ष के थमने की कोई उम्मीद नहीं है। अमेरिकी सैनिकों की मौत और वॉशिंगटन का प्रचंड पलटवार इस ताज़ा और भयानक युद्ध की शुरुआत 17 जुलाई को जॉर्डन में हुए एक बड़े हमले से हुई। इस हमले ने अमेरिकी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया और पूरे वाशिंगटन में हड़कंप मचा दिया। इस घटना में दो अमेरिकी सैनिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सैनिक अभी भी लापता बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त चार सैनिकों को गंभीर चोटें आईं जिन्हें तत्काल विशेष चिकित्सा के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मध्य पूर्व में फिर से भड़की इस खुली जंग में यह अमेरिका के लिए पहली सबसे बड़ी और पुष्ट जनहानि थी। इस घटना ने अमेरिकी प्रशासन को तुरंत और अत्यंत कठोर सैन्य कार्रवाई करने के लिए विवश कर दिया। रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी जवाबी कार्रवाई का सबसे ताज़ा और आक्रामक दौर शुरू किया। इस सैन्य अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक शक्ति रिवोल्यूशनरी गार्ड को तत्काल और कठोर दंड देना था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि यह सैन्य अभियान लगातार अपने आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। वाशिंगटन का इरादा केवल बदला लेना नहीं है बल्कि ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है जो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को चुनौती देती है। अमेरिकी वायु सेना ने ईरान के कई रणनीतिक पुलों, प्रमुख बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर बमबारी की है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इन सटीक हवाई हमलों में ईरान की तटीय निगरानी प्रणालियों, उन्नत वायु रक्षा सुविधाओं, समुद्री युद्ध क्षमताओं और मिसाइल तथा ड्रोन के विशाल भंडारण स्थलों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस पूरी कार्रवाई का एक बड़ा उद्देश्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित करने की ईरान की क्षमता को पंगु बनाना है। ईरान का कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर सीधा प्रहार अमेरिका की इस प्रचंड बमबारी का जवाब देने में ईरान ने कोई कसर नहीं छोड़ी। तेहरान ने अपनी सैन्य रणनीति को विस्तार देते हुए सीधे उन देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जहां अमेरिकी सेना के अड्डे मौजूद हैं। ईरानी सेना ने आधिकारिक तौर पर सरकारी टेलीविजन पर एक बयान जारी कर यह दावा किया कि उसने कुवैत की धरती पर स्थित अमेरिका के दो बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। यह हमला ईरानी धरती पर हुए अमेरिकी हमलों का सीधा जवाब था। ईरानी सेना के बयान के अनुसार इस विशेष सैन्य अभियान में आधुनिक कामिकाजे ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। इन ड्रोनों ने कुवैत के प्रसिद्ध कैंप उडैरी स्थित विशाल गोला-बारूद भंडार को अपना निशाना बनाया। इसके साथ ही अली अल सालेम एयर बेस पर स्थापित अत्याधुनिक पैट्रियट रडार और वायु निगरानी रडार प्रणालियों पर भी घातक प्रहार किए गए। यह कदम ईरान की उस आक्रामक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों को यह संदेश देना चाहता है कि वे अमेरिकी सैन्य अभियानों का समर्थन करने की भारी कीमत चुकाएंगे। इस बीच तेहरान ने अपने ऊपर हुए अमेरिकी हमलों में हुए सैन्य नुकसान का कोई भी आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। ईरान लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह अपने जवाबी हमलों का दायरा और भी अधिक बढ़ा सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है। कुवैत के नागरिक और बुनियादी ढांचे पर गहराता संकट ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस वर्चस्व के युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा कुवैत को भुगतना पड़ रहा है। कुवैत की सशस्त्र सेनाओं को लगातार दूसरे दिन ईरान की ओर से दागे गए मिसाइलों और ड्रोनों के भारी बैराज का सामना करना पड़ा। कुवैत सिटी में लगातार चेतावनी के सायरन गूंज रहे हैं, जिसकी पुष्टि कई अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं ने ज़मीन से की है। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली अत्यंत दबाव में काम कर रही है और वह ईरान की आक्रामकता का सक्रिय रूप से मुकाबला कर रही है। कुवैती सेना ने एक आधिकारिक बयान में इन हमलों को ईरान की पापी आक्रामकता करार दिया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन हमलों का निशाना केवल सैन्य अड्डे नहीं हैं, बल्कि देश का महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचा भी इसकी चपेट में आ गया है। कुवैत के विद्युत, जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक्स पर जारी एक विस्तृत बयान में पुष्टि की कि लगातार दूसरे दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिजली और जल विलवणीकरण संयंत्र को ईरानी ड्रोनों ने निशाना बनाया। इस भयानक हमले के कारण स्टेशन की कई अहम इकाइयों में भीषण आग भड़क उठी। अग्निशमन दल और आपातकालीन सेवाएं आग बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। ईरान द्वारा कुवैत के बिजलीघरों और पानी शुद्धीकरण संयंत्रों को तबाह करने की इस रणनीति ने उस छोटे और तेल समृद्ध देश में आम जनजीवन को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ने भी क्षेत्र में बिगड़ते हालात को लेकर रातोंरात कड़ी चेतावनी जारी की है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वर्चस्व की लड़ाई और वैश्विक तेल संकट इस पूरे क्षेत्रीय युद्ध का केंद्र होर्मुज़ जलडमरूमध्य बन गया है। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है और रणनीतिक रूप से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है। शांतिकाल में वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुज़रता है। अमेरिका और ईरान दोनों ही इस जलमार्ग पर अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित करने के लिए आमने-सामने हैं। इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने रविवार को एक आधिकारिक बयान में बताया कि इस तनावपूर्ण माहौल में दो वाणिज्यिक जहाज़ एक दुर्घटना का शिकार हो गए हैं। अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इन जहाज़ों ने कथित तौर पर एक असुरक्षित रास्ते से गुज़रने का प्रयास किया था। उसी रास्ते पर चल रहे दो अन्य जहाज़ों ने आगे बढ़ने से पूरी तरह इनकार कर दिया और अपना सफर रोक दिया। आईआरजीसी ने सीधा आरोप लगाया कि इन चारों जहाज़ों ने ईरानी नौसेना की चेतावनियों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया और वे अमेरिका के प्रत्यक्ष समर्थन और दिशा-निर्देशों के तहत काम कर रहे थे। आईआरजीसी ने एक बेहद कड़े बयान में चेतावनी देते हुए कहा कि जो जहाज़ अमेरिकियों की बातों में आकर असुरक्षित रास्तों पर जाएंगे, उन्हें भविष्य में ऐसी ही दुर्घटनाओं का सामना करना ही पड़ेगा। इस स्थिति ने वैश्विक तेल बाज़ारों में घबराहट पैदा कर दी है। परमाणु ठिकानों पर हमले का आरोप और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं युद्ध की इस आग में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर एक नया और खौफनाक अध्याय जुड़ गया है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने रविवार को सरकारी टेलीविजन पर एक बेहद गंभीर घोषणा की। संगठन ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित निर्माणाधीन दार्खोविन परमाणु बिजली संयंत्र पर हमला किया है। बयान में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी बलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए इस प्रतिष्ठान पर कई विनाशकारी प्रक्षेपास्त्र दागे हैं। ईरान ने इसे एक आक्रामक और क्रूर कार्रवाई करार दिया है। इस हमले के दावों को बल तब मिला जब रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के अबादान शहर में बड़े धमाकों की तेज़ आवाज़ें सुनी गईं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नींद उड़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने तत्काल प्रभाव से इस कथित रात्रि हमले की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि दार्खोविन परियोजना अभी निर्माण के बेहद प्रारंभिक और बुनियादी दौर में थी। पिछली बार किए गए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के दौरान वहां किसी भी तरह की रेडियोधर्मी या परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने तनाव के इस अभूतपूर्व स्तर को देखते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की तत्काल अपील की है। जॉर्डन की वायु सीमा का उल्लंघन और कूटनीतिक तनाव इस युद्ध ने जॉर्डन की संप्रभुता को भी गंभीर चुनौती दी ক্ষমতায় है। जॉर्डन का हवाई क्षेत्र ईरान और इज़राइल के बीच मिसाइलों का मुख्य मार्ग बन गया है। रविवार को जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं ने राज्य को निशाना बनाकर आ रही तीन ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया। एक अन्य चौथी मिसाइल जॉर्डन के किसी दूरदराज और वीरान इलाके में जा गिरी। एक सैन्य अधिकारी ने पुष्टि की कि जॉर्डन में इन घटनाओं से न तो कोई जनहानि हुई है और न ही किसी प्रकार का भौतिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा इज़राइली और जॉर्डन के सैन्य बलों ने एक अभूतपूर्व संयुक्त अभियान में जॉर्डन के ऐतिहासिक शहर अकाबा की तरफ दागी गई एक खतरनाक ईरानी मिसाइल को रास्ते में ही मार गिराया। इज़राइली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इस मिसाइल के कुछ टुकड़े अकाबा हवाई अड्डे के परिसर में आ गिरे, जिसका असर सीमा के ठीक उस पार बसे इज़राइली शहर एइलात से भी स्पष्ट रूप से देखा गया। जॉर्डन की राजधानी अम्मान और देश के अन्य विभिन्न हिस्सों में लगातार अलर्ट सायरन गूंज रहे हैं। अल-ममलका टीवी ने इसकी ज़मीनी स्तर पर पुष्टि की है। इस आक्रामकता के जवाब में जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने अम्मान में तैनात ईरान के चार्ज डी'अफेयर्स को तुरंत तलब किया। जॉर्डन ने अपने राज्यक्षेत्र पर किए गए अनुचित और खुले हमलों के साथ-साथ भड़काऊ बयानों की अत्यंत कड़ी भर्त्सना की। इस बीच जॉर्डन सरकार ने उन अफवाहों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि अकाबा के हवाईअड्डे और बंदरगाह को खाली कराया गया है। अम्मान में अमेरिकी दूतावास ने एक विशेष और विश्वसनीय खतरे का हवाला दिया था, लेकिन जॉर्डन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आधिकारिक निकासी आदेश जारी नहीं किया गया है। इराक के कुर्दिस्तान में ड्रोन हमले और अमेरिकी नुकसान इराक की ज़मीन भी इस युद्ध के मुख्य मोर्चों में से एक बनी हुई है। रविवार 19 जुलाई को अमेरिकी सेना ने एक दुखद घटना की जानकारी दी। वाशिंगटन ने बताया कि 18 जुलाई शनिवार को इराक में मार गिराए गए एक खतरनाक ईरानी ड्रोन के नियंत्रित विस्फोट के दौरान अमेरिका का एक सैन्य कर्मी मारा गया। इस नई जनहानि के बाद ईरान के साथ जारी इस भीषण संघर्ष में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैन्य कर्मियों की कुल संख्या 17 तक पहुंच गई है। एपी के अनुसार इस पूरे टकराव में अब तक 430 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जो इस युद्ध की क्रूरता को दर्शाता है। इसी दौरान इराक के उत्तरी हिस्से में स्थित कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी भारी हिंसा हुई। यह इलाका अमेरिकी सैनिकों और निर्वासित ईरानी कुर्द लड़ाकों का एक प्रमुख अड्डा रहा है, जिसे ईरान अक्सर अपना निशाना बनाता है। रविवार की रात लगभग 02:00 बजे ईरानी बलों ने ड्रोन के ज़रिए एर्बिल शहर के नज़दीक एक भीषण हमला किया। इस हमले में निर्वासित विपक्षी गुट कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के आठ सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पार्टी के वरिष्ठ नेता आदिब खालदियान ने इस कायराना हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया। इराक की संप्रभुता लगातार ईरान और अमेरिका के बीच इस छद्म युद्ध में कुचली जा रही है। बहरीन की सुरक्षा और इज़राइल की युद्ध की तैयारियां फारस की खाड़ी के छोटे से लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण द्वीप राष्ट्र बहरीन में भी दहशत का माहौल है। यह देश अमेरिकी नौसेना के महत्वपूर्ण फिफ्थ फ्लीट का घर है। रविवार को राजधानी मनामा में हवाई हमले के सायरन तेज़ आवाज़ में गूंज उठे। बहरीन के गृह मंत्रालय ने तुरंत एक आपातकालीन बयान जारी कर नागरिकों और प्रवासियों से शांत रहने और निकटतम सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की। बहरीन की सेना ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय करते हुए ईरान द्वारा किए गए कई विश्वासघाती हवाई हमलों को सफलतापूर्वक रोककर उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। दूसरी ओर इज़राइल भी इस क्षेत्रीय युद्ध में किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए अपनी सैन्य तैयारियां तेज़ कर रहा है। इज़राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने बचाव सेवा केंद्र के दौरे के दौरान एक स्पष्ट और कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि यदि ईरान इज़राइल की भूमि पर मिसाइलें दागने का दुस्साहस करता है तो इज़राइली सेना पूरी ताकत और क्रूरता के साथ उन पर पलटवार करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अमेरिकी नीतियों में कोई बदलाव आता है, तब भी इज़राइल तेहरान के खिलाफ रक्षात्मक और आक्रामक दोनों प्रकार की सैन्य कार्रवाइयों के लिए पूरी तरह से तैयार है। इज़राइल की इस तैयारी को और बल देने के लिए वाशिंगटन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति में बड़ा बदलाव किया है। एक इज़राइली सैन्य अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका इज़राइल में तैनात हवाई ईंधन भरने वाले बेड़े को नए रिफ्यूलिंग विमान भेजकर और भी अधिक मज़बूत कर रहा है। कूटनीतिक प्रयास और प्रतिबंधों की राजनीति जहां एक तरफ युद्ध के मैदान में मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज़ है। लेबनान इस युद्ध की आंच से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को वाशिंगटन में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह मुलाकात इटली में लेबनान और इज़राइल के बीच संपन्न हुई वार्ता के ताज़े दौर के ठीक बाद हुई। 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल सुलेमान की मुलाकात के बाद यह पहला मौका है जब कोई लेबनानी राष्ट्राध्यक्ष वाशिंगटन पहुंचा है। जोसेफ औन 21 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी अलग से मुलाकात करने वाले हैं। इन बैठकों में लेबनान में युद्धविराम को स्थायी बनाने और इज़राइल द्वारा कब्ज़ा किए गए लेबनानी इलाकों से उसकी वापसी के जटिल मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। क्षेत्रीय कूटनीति के मोर्चे पर इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी भी आने वाले सप्ताह के भीतर ईरान की राजधानी तेहरान की यात्रा करने वाले हैं। इराक की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार इस दौरे का उद्देश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न समझौतों और ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करना है। अमेरिका के आंतरिक राजनीतिक माहौल में भी इस युद्ध की गूंज सुनाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों से कड़ा आग्रह किया है कि वे रूस पर केंद्रित प्रतिबंध विधेयक के ढांचे में ईरान को भी कड़े प्रतिबंधों के तहत शामिल करें। इस पूरे क्षेत्रीय उथल-पुथल और बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने भी सक्रियता दिखाते हुए वहां निवास कर रहे अपने सभी नागरिकों के लिए एक नई और संशोधित सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें हर समय सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। इसका आप पर असर इस बड़े सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा: • भारत में: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। • शेयर बाज़ार: युद्ध की स्थिति गहराने से भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आ सकती है और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों के दाम बढ़ सकते हैं। • प्रवासी भारतीय: कुवैत, बहरीन और इराक में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के कारण वहां काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा और रोज़गार पर संकट खड़ा हो गया है। सवाल-जवाब 1. जॉर्डन में क्या घटना हुई जिसके कारण यह युद्ध भड़का? जॉर्डन में हुए एक हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, एक लापता हो गया और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। 2. ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया है? ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत में स्थित कैंप उडैरी और अली अल सालेम एयर बेस नामक दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कामिकाजे ड्रोन से बड़े हमले किए हैं। 3. क्या ईरान के किसी परमाणु संयंत्र पर हमला हुआ है? हां, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में निर्माणाधीन दार्खोविन परमाणु बिजली संयंत्र पर कई प्रक्षेपास्त्र दागे हैं। 4. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों के साथ क्या हुआ? ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षित रास्तों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ करने वाले दो जहाज़ दुर्घटनाग्रस्त हो गए और दो अन्य को रोक दिया गया। 5. इस संघर्ष में अब तक कितने अमेरिकी सैनिकों की जान गई है? इस पूरे संघर्ष में अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जिसमें 18 जुलाई को इराक में एक ईरानी ड्रोन के नियंत्रित विस्फोट में मारे गए एक सैनिक की मौत भी शामिल है, और 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। https://trendkia.com/live/live-iran-u-s-military-conflict-deepens-with-drone-strikes-on-kuwait-bases-and-american-retaliatory-bombing-8662 TrendKia — Har trend, sabse pehle.