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  "type": "article",
  "title": "लाइव: सोनम वांगचुक का ऐलान — सरकार जवाबदेही माने तो तोड़ेंगे अनशन, CJP का संसद मार्च आज",
  "summary": "पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के हजारों समर्थक मध्य दिल्ली की सड़कों पर उतरे और संसद मार्ग के पास सुरक्षाबलों से उनकी भारी झड़प हुई — लाठीचार्ज और आंसू गैस में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए व हिरासत में लिए गए। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर डेरा जमाया, लेकिन सरकार ने अभी तक CJP की मांगों पर कोई जवाब नहीं दिया है।",
  "content": "मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सोमवार को मध्य दिल्ली का इलाका भारी तनाव का केंद्र बन गया। राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के खिलाफ हजारों छात्र और युवा कार्यकर्ता संसद भवन की ओर मार्च कर रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल प्रदर्शन के दौरान भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।\n\nजंतर-मंतर पर उमड़ा जनसैलाब\n\nसंसद मार्च की रूपरेखा एक दिन पहले ही तय हो गई थी। रविवार दोपहर से ही जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर समर्थकों का भारी हुजूम जुटने लगा था। दोनों प्रवेश द्वारों से लगातार आ रही भीड़ के कारण मैदान पूरी तरह से भर गया था। चश्मदीदों के मुताबिक वहां इतनी भीड़ थी कि बिना किसी से टकराए चलना लगभग असंभव हो गया था। रात के समय आयोजित जागरण में करीब बीस हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इस अभूतपूर्व भीड़ ने सोमवार सुबह होने वाले मार्च के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया था।\n\nअस्पताल से सोनम वांगचुक की चेतावनी\n\nलंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी। अस्पताल के बिस्तर से उन्होंने ऐलान किया कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था की खामियों की जिम्मेदारी लेती है तो वह तुरंत अपना अनशन तोड़ देंगे। इसके अलावा उन्होंने यह शर्त भी रखी कि अगर सांसद इस मुद्दे को सदन में उठाने का पक्का भरोसा दें तो भी वह हड़ताल खत्म कर सकते हैं। वांगचुक ने अपनी यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए लोगों तक पहुंचाई।\n\nअपने संदेश में उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह मार्च में शारीरिक तौर पर शामिल नहीं हो पाएंगे। वांगचुक ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से सफदरजंग अस्पताल आकर मुलाकात करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अस्पताल में अवैध तरीके से बंदी बनाकर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल प्रवास के दौरान उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी कुचला जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्होंने अस्पताल के निदेशक को पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर छुट्टी की मांग की।\n\nसुरक्षा के कड़े इंतजाम और इंटरनेट पर पाबंदी\n\nप्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे नई दिल्ली जिले को हाई अलर्ट पर रखा था। मानसून सत्र शुरू होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही बेहद कड़ी थी। प्रशासन ने पूरे इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी थी। यह नियम पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक लगाता है। पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।\n\nभीड़ को एकजुट होने से रोकने के लिए अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। सूत्रों के अनुसार मध्य दिल्ली के करीब एक सौ पचास इलाकों में मोबाइल इंटरनेट ठप कर दिया गया था। इस कदम से प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को ग्राउंड जीरो से तस्वीरें और जानकारी साझा करने में भारी परेशानी हुई। सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने इस इंटरनेट पाबंदी की कड़ी आलोचना की। संस्था का कहना था कि यह कदम न सिर्फ जरूरत से ज्यादा सख्त था बल्कि यह बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार का भी सीधा उल्लंघन था।\n\nमध्य दिल्ली में पुलिस और छात्रों की भिड़ंत\n\nजैसे ही प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग दिशाओं से संसद की ओर बढ़ना शुरू किया हालात तेजी से बिगड़ने लगे। मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन की तरफ से आ रहे सैकड़ों छात्रों को भारी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने रोक लिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज का सहारा लिया। इस भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं जो केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही थीं। जंतर-मंतर के पास भी हालात बेकाबू हो गए जहां भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने टॉल्स्टॉय मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया।\n\nप्रेस क्लब ऑफ इंडिया और संसद मार्ग के पास पुलिस और छात्रों के बीच सबसे बड़ा टकराव हुआ। अति सुरक्षित क्षेत्र में लगाए गए बहुस्तरीय बैरिकेड्स को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ने की कोशिश की। इसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को पीछे धकेलने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान करीब दस से पंद्रह लोगों को हिरासत में लिया गया। झड़प में कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। मौके पर ही घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब अड़तीस घायलों को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इसके अलावा पैंसठ अन्य लोगों को सिर की चोट, फ्रैक्चर और आंसू गैस के असर के कारण राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।\n\nसार्वजनिक परिवहन और सरकारी कामकाज ठप\n\nसुरक्षा कारणों से आम जनजीवन और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कई अहम स्टेशनों को बंद करने की घोषणा की। जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों के गेट पूरी तरह से बंद कर दिए गए। हालांकि राजीव चौक और केंद्रीय सचिवालय पर यात्रियों को ट्रेन बदलने की सुविधा दी गई थी लेकिन स्टेशनों से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबंदी थी। सड़क यातायात भी बाधित रहा क्योंकि पुलिस ने मध्य दिल्ली को जोड़ने वाले अहम रास्ते विकास मार्ग को सभी वाहनों के लिए बंद कर दिया था।\n\nप्रदर्शन का असर आस-पास स्थित सरकारी दफ्तरों पर भी साफ नजर आया। रेल भवन के बाहर भारी भीड़ जमा हो जाने के कारण अधिकारियों ने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया। संसद भवन के बाहर दंगा नियंत्रण वाहन तैनात कर दिए गए थे। प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या ने सुरक्षा एजेंसियों को हैरान कर दिया। करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती और कई परतों वाली बैरिकेडिंग के बावजूद छात्रों की भीड़ संसद भवन के मुख्य चौराहे तक पहुंचने में कामयाब रही।\n\nनेताओं का हस्तक्षेप और भूख हड़ताल समाप्त\n\nइस विरोध प्रदर्शन ने प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और नागरिक समाज के सदस्यों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सांसदों मनोज झा, राजाराम सिंह और अमरा राम के साथ योगेंद्र यादव तथा प्रशांत भूषण जैसे कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। उनके साथ फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और शबाना आजमी भी मौजूद थीं। इस दल ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के तीन सदस्यों को अपना तेईस दिन पुराना अनशन तोड़ने के लिए राजी कर लिया। छात्रा नेहा, मनीष और आमीन ने अपना उपवास तो समाप्त कर दिया लेकिन स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने तक अभियान चलाने का ऐलान किया।\n\nसरकार ने शुरू की बातचीत\n\nहालात की गंभीरता को भांपते हुए केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की तरफ सुलह का हाथ बढ़ाया। पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा के जरिए बातचीत की शुरुआती कोशिशें की गईं। अधिकारियों ने जिला मजिस्ट्रेट, केंद्र सरकार के सचिव और राज्य मंत्री के साथ बैठकों का प्रस्ताव रखा। हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व ने इन सभी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनकी एक ही मांग थी कि बातचीत केवल प्रधानमंत्री या किसी कैबिनेट मंत्री के स्तर पर ही होगी।\n\nआखिरकार कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से उनके आवास पर मिलने के लिए बुलाया गया। दो घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के साथ संक्षिप्त बैठक की। उन्होंने अपनी मांगों का एक लिखित पत्र सौंपा। इस पत्र में सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल थी। बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन वापस लेने और शांति बहाल करने में सहयोग करने की अपील की।\n\nकानूनी लड़ाई और देश भर में गूंज\n\nयह टकराव केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा बल्कि अदालतों तक भी पहुंच गया। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें उनके पति को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अगले दिन सुनवाई तय करते हुए कार्यकर्ता की जान बचाने को अपनी पहली प्राथमिकता बताया। अदालत ने सभी संबंधित अस्पतालों से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी और अगली सुनवाई में इलाज कर रहे डॉक्टरों को मौजूद रहने का आदेश दिया।\n\nइसी बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय में जंतर-मंतर पर हो रही निरंतर वीडियो निगरानी का बचाव किया। एक जनहित याचिका का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कैमरे केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। उन्होंने राज्य द्वारा किसी भी तरह की जासूसी के आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया।\n\nदिल्ली में हो रहे इन प्रदर्शनों की गूंज पूरे देश में सुनाई दी। मुंबई में चैत्यभूमि के पास जमा हुए समर्थकों पर पुलिस ने कार्रवाई की। केरल के तिरुवनंतपुरम में लोक केरल भवन की ओर मार्च कर रहे छात्र कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। अहमदाबाद में भी एमजे लाइब्रेरी के पास करीब एक सौ पचास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं गोवा में नागरिकों ने इस आंदोलन के समर्थन में एक शांतिपूर्ण कैंडललाइट मार्च निकाला।\n\nराजनीतिक घमासान और आगे की राह\n\nपुलिस की सख्त कार्रवाई की विपक्षी नेताओं ने कड़ी निंदा की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मौजूदा प्रधानमंत्री को देश के इतिहास का सबसे युवा-विरोधी नेता करार दिया। उन्होंने पेपर लीक से प्रभावित करोड़ों छात्रों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर मेहनती युवाओं को सजा देने का आरोप लगाया। बाद में गांधी ने संसद परिसर में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने छात्र आंदोलन को लेकर गंभीर चर्चा की। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और तमिलनाडु के विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी पुलिस के तौर-तरीकों पर सख्त ऐतराज जताया और कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए।\n\nरात होते-होते स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी रही। अधिकारियों ने पहले जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों का मंच पूरी तरह से हटा दिया था और टेंट उखाड़ दिए थे। हालांकि इसके बावजूद अभिजीत दिपके के नेतृत्व में समर्थकों ने कुछ घंटों बाद उस जगह पर दोबारा अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। दिन भर की भागदौड़ के दौरान कुछ देर के लिए बेहोश हुए दिपके ने एक गाड़ी पर बनाए गए अस्थायी मंच से भीड़ को संबोधित किया। प्रदर्शन के आयोजकों ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि जब तक केंद्र सरकार उनकी प्रमुख मांगें नहीं मान लेती तब तक केरल हाउस के बाहर उनका शांतिपूर्ण धरना बदस्तूर जारी रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में धांधली को लेकर हो रहे ये लगातार प्रदर्शन परीक्षा प्रणाली में बड़े और कड़े सुधारों की ओर इशारा करते हैं, जिसका सीधा असर भविष्य के लाखों छात्रों पर पड़ेगा।\n\n• दिल्ली में: मध्य दिल्ली में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रमुख मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं और यातायात के रास्तों पर रोक लगाई गई है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली में छात्र किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे?\nकॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हजारों छात्रों ने नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में संसद की ओर मार्च किया।\n\n2. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?\nछात्र मुख्य रूप से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे हैं।\n\n3. संसद मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने क्या कदम उठाए?\nपुलिस ने इलाके में धारा 163 लागू कर दी और संसद मार्ग के पास बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रही भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।\n\n4. सोनम वांगचुक की वर्तमान स्थिति क्या है?\nसोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और उन्होंने प्रशासन पर अवैध रूप से बंधक बनाने का आरोप लगाया है। उनकी पत्नी ने उन्हें दूसरे अस्पताल में भेजने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।\n\n5. इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कौन से मेट्रो स्टेशन प्रभावित हुए?\nसुरक्षा कारणों से जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय जैसे प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए गए, हालांकि कुछ स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की सुविधा जारी रही।",
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  "publishedAt": "2026-07-20",
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