लाइव: पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज, अमेरिका ने ईरान पर किए भीषण जवाबी हमले पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी और सैन्य गतिरोध तेज हो गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य जहाजों को नुकसान पहुंचाने का दावा किए जाने के बाद वॉशिंगटन ने बयान जारी कर साफ किया है कि उसके सभी विमान सुरक्षित हैं। पश्चिम एशिया में लगभग एक सप्ताह तक बनी अस्थिर शांति के बाद युद्ध का नया और भयानक दौर शुरू हो गया है। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए मिसाइल हमलों के प्रतिशोध में अमेरिकी वायुसेना ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को ईरान के सैन्य ढांचों और कमान केंद्रों पर बड़े पैमाने पर जवाबी बमबारी की। इस भयंकर सैन्य कार्रवाई से हाल के दिनों में जारी कूटनीतिक वार्ताओं की बची-खुची उम्मीदें भी ध्वस्त हो गई हैं। इसके साथ ही संघर्ष का दायरा अब फारस की खाड़ी से निकलकर भूमध्य सागर तक फैल गया है, जहां मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर एक गैस टैंकर ड्रोन हमले की चपेट में आ गया। दूसरी तरफ जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जबकि कुवैत में एक चीनी वाणिज्यिक परिसर पर हुए हमले में एक कर्मचारी की मौत हो गई। इस अभूतपूर्व तनाव के बीच ऊर्जा गलियारे कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमरीका का भीषण प्रहार और CENTCOM का बयान अमेरिकी सैन्य बल के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसने ईरान के भीतर दर्जनों प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी व्यापक हवाई कार्रवाई का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार यह दो घंटे से अधिक समय तक चला एक केंद्रित सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर पिछले दिनों हुए ईरानी मिसाइल हमलों का कड़ा जवाब देना था। अमेरिकी बमवर्षक और लड़ाकू विमानों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्य सैन्य कमान केंद्रों, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइटों, उन्नत ड्रोन भंडारण परिसरों और तटीय निगरानी व वायु रक्षा तंत्रों पर सटीक हमला बोला। यह व्यापक सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के महज कुछ ही घंटों बाद आया, जो उन्होंने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दी थी। जॉर्डन स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल प्रहार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हालांकि ईरानी पक्ष ने पूर्व में हुए टकरावों के लिए खेद व्यक्त किया था, लेकिन अमरीकी बलों पर हालिया हमलों का जवाब देना अनिवार्य हो गया था। उन्होंने कहा था कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बेहद जोरदार हमला करने जा रहे हैं, जिसके बाद ही भविष्य में किसी संभावित समझौते पर बात हो सकेगी। इस हवाई हमले से ठीक एक दिन पहले 29 जुलाई 2026 को अमरीका और सऊदी अरब ने इराक में संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान समर्थित उग्रवादी गुटों के ठिकानों को नष्ट किया था, जिसमें 20 से अधिक लड़ाके और 6 ईरानी सैन्य सलाहकार मारे गए थे। वहीं इजराइल ने भी लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अपनी सैन्य सतर्कता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरानी मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार करार दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान ने तीन अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों और तीन अमरीकी जहाजों को नष्ट कर दिया है। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के दौरान अमेरिकी सेना के किसी भी विमान या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि M/T नोरा नामक वाणिज्यिक पोत ने ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को तोड़ा है। केश्म द्वीप, ज़ंजन और कुवैत में जनहानि तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान अमेरिकी बमबारी का प्रभाव ईरान के कई प्रांतों और पड़ोस के कुवैत तक देखा गया। फारस की खाड़ी में स्थित सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर अमरीकी हवाई हमले ने भारी तबाही मचाई। स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों और होर्मोज़गान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के अनुसार केश्म द्वीप के चाह तांगू इलाके में एक रिहायशी मकान पर अमरीकी बंकर-ब्लास्टर बम गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना में 2 वर्ष के एक छोटे बच्चे, उसके पिता और मां की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया कि अमरीकी विमानों ने जॉर्डन स्थित सैन्य अड्डों से उड़ान भरकर नागरिक इलाकों पर बमबारी की। केश्म द्वीप के अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम ईरान के खुज़ेस्तान और ज़ंजन प्रांतों में भी भयंकर धमाकों की खबरें सामने आईं। ज़ंजन प्रांत में अमरीकी प्रहार की चपेट में आने से अंसार अल-महदी IRGC इकाई के तीन सैन्य कर्मियों की मौत हो गई। ज़ंजन में IRGC की प्रांतीय कमान ने 30 जुलाई 2026 को अपने तीन जवानों की शहादत की आधिकारिक पुष्टि की। उधर फारस की खाड़ी के उत्तरी छोर पर स्थित कुवैत में भी स्थिति बिगड़ गई। कुवैती सैन्य कमान के अनुसार गुरुवार सुबह उत्तरी कुवैत में स्थित एक चीनी निर्माण और व्यावसायिक फर्म की इमारत पर ईरानी मिसाइल या ड्रोन का टुकड़ा गिरने से इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और वहां कार्यरत एक कर्मचारी की जान चली गई। जॉर्डन की वायु सीमा में मिसाइल मुठभेड़ और अल अज़राक एयर बेस का लक्ष्य गुरुवार, 30 जुलाई 2026 की तड़के जॉर्डन के आकाश में भयंकर सैन्य मुठभेड़ देखने को मिली। जॉर्डन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि उनकी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों ने पूर्व से अपनी सीमा की ओर आ रही पांच ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया और देश की सुरक्षा रणनीति के तहत उन्हें हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। मिसाइलों के मलबे से नीचे जमीन पर किसी भी नागरिक के हताहत होने या बड़ी संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है। इस मिसाइल हमले के तुरंत बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर स्वीकार किया कि उनके बलों ने जॉर्डन स्थित अल अज़राक एयर बेस को निशाना बनाकर ये मिसाइलें दागी थीं। IRGC का दावा था कि अल अज़राक एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमान तैनात हैं और इसी ठिकाने का इस्तेमाल अमरीका ने केश्म द्वीप पर रिहायशी मकानों पर हमले करने के लिए किया था। ईरानी गार्ड्स का कहना था कि अल अज़राक पर किया गया हमला उस अमरीकी कार्रवाई का सीधा जवाब था जिसमें एक मासूम बच्चे समेत तीन नागरिकों की जान गई थी। मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर ड्रोन हमला और होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा संकट पश्चिम एशिया का युद्ध अब लाल सागर और फारस की खाड़ी के पारंपरिक दायरे को पार कर भूमध्य सागर के तट तक पहुंच गया है। मिस्र के मंत्रिमंडल और पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि 29 जुलाई 2026 को मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर दो तरल प्राकृतिक गैस (LNG) जहाजों में लगी भयंकर आग वास्तव में एक बाहरी ड्रोन हमले का परिणाम थी। यह 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से मिस्र के भूमध्यसागरीय क्षेत्र पर हुआ अपनी तरह का पहला हमला है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों एम्ब्रे और वैगार्ड के विवरण के अनुसार, एक अज्ञात ड्रोन ने अमेरिकी स्वामित्व वाली फ्लोटिंग स्टोरेज सुविधा 'एनर्गोस विंटर' के स्टारबोर्ड हिस्से पर सीधा प्रहार किया। इसके बाद आग की लपटें पास में खड़े ग्रीक स्वामित्व वाले गैस टैंकर 'गैसलॉग सालेम' तक फैल गईं। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ, लेकिन मिस्र सरकार ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। इस बीच यमन के हुती विद्रोहियों ने सबा समाचार एजेंसी के माध्यम से एक बयान जारी कर दमिएटा बंदरगाह हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और कहा है कि मिस्र में किसी जहाज को निशाना बनाने की खबरें बेबुनियाद हैं। दूसरी तरफ विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा विश्लेषकों के अनुसार 29 जुलाई की रात कतरएनर्जी का एक बड़ा एलएनजी टैंकर 'अल अरीश' सुरक्षात्मक घेरे में होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा। 11 जुलाई के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाला यह पहला गैस टैंकर है। केपलर और एलएसईजी के आंकड़ों से पता चलता है कि 'अल अरीश' ने 4 से 6 जुलाई के बीच कतर के रास लफान टर्मिनल से एलएनजी लोड की थी। हालांकि इस एक सफल मार्ग के विपरीत फारस की खाड़ी में अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बना हुआ है। IRGC की नौसेना ने गुरुवार को घोषणा की कि 29 जुलाई की रात अमेरिकी वायुसेना के संरक्षण में दो तेल टैंकरों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के असुरक्षित दक्षिणी मार्ग से जबरन निकलने की कोशिश की। IRGC के अनुसार अमरीकी विमानों की उकसावे वाली कार्रवाई के बीच एक टैंकर में भीषण आग भड़क उठने के बाद दोनों जहाजों को उलटे पांव पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। IRGC ने कड़े शब्दों में दोहराया कि 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य उनके पूर्ण सैन्य नियंत्रण में है और यह ईरान की संप्रभु भूमि व जलक्षेत्र का हिस्सा है। ईरानी नौसेना ने चेतावनी दी है कि जब तक अमरीका की तरफ से अनुचित धमकियां और समुद्री हस्तक्षेप जारी रहेगा, तब तक बिना पूर्व अनुमति, सेवा शुल्क और निर्धारित मार्ग का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं दिया जाएगा। चीन से 70 मिलियन डॉलर का गुप्त मिसाइल सौदा और ईरानी वायु रक्षा सुदृढ़ीकरण अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के सामने अपने सैन्य बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को देखते हुए तेहरान ने अपनी कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कदम उठाया है। रक्षा मामलों की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार ईरान ने चीन के साथ कंधे पर रखकर दागे जाने वाले मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) की बड़ी खेप खरीदने का गुप्त अनुबंध किया है। लगभग 60 से 70 मिलियन डॉलर मूल्य के इस सौदे के तहत ईरान को अगले कुछ हफ्तों के भीतर चीन निर्मित 300 से 400 QW-12 और FN-16 मिसाइल लॉन्चरों की पहली खेप प्राप्त होगी। यह रक्षा समझौता अमेरिकी और इजराइली अभियानों के शुरू होने के बाद से ईरान द्वारा अपनी हवाई सीमाओं को सुरक्षित करने का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है। इस अनुबंध को पूरा करने में हांगकांग स्थित वित्तीय और व्यापारिक फर्म झोंगचिंग बाओशांग इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसने ईरानी रक्षा तंत्र और चीनी आपूर्तिकर्ताओं के बीच वित्तीय व लॉजिस्टिक सेतु का काम किया। इन मिसाइलों के आने से ईरान की पैदल सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमरीकी ड्रोन और लड़ाकू विमानों से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। पटरी से उतरी कूटनीति, पाकिस्तान का मध्यस्थता प्रयास और यूरोपीय अड्डों पर ईरानी दबाव सैन्य टकराव के अचानक भीषण रूप लेने से अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष रूप से चल रही शांति वार्ता पटरी से उतर गई है। यद्यपि वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा करते रहे हैं कि तेहरान आर्थिक और सैन्य दबाव के कारण बातचीत की मेज पर आने के लिए मिन्नतें कर रहा है, लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री ने इन दावों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान ने पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से अमरीका के साथ किसी भी स्तर की वार्ता फिर से शुरू करने का कोई अनुरोध नहीं किया है। इस बढ़ते गतिरोध के बीच पाकिस्तान ने दोनों परमाणु संपन्न और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव कम करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस्लामाबाद में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पिछले महीने हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) और 22 जून के पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान की भावना के अनुरूप दोनों पक्षों को तकनीकी स्तर की वार्ता में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास वाणिज्यिक जहाजरानी को सुरक्षित करने और युद्धविराम का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान दोनों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सैन्य घेराबंदी को तोड़ने के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूरोपीय देशों पर राजनयिक दबाव बढ़ा दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलिसलावा पेट्रोवा-चामोवा से फोन पर वार्ता कर बुल्गारिया के बेज़मेर एयर बेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों की अस्थायी तैनाती की अनुमति देने के फैसले का कड़ा विरोध जताया। अब्बास अराघची ने कहा कि सोफिया द्वारा अपने ठिकाने का इस्तेमाल अमरीकी अभियानों के लिए करने देना ईरान के खिलाफ प्रत्यक्ष आक्रामकता को बढ़ावा देने के समान है, जो दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों के विपरीत है। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री ने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्सटेंटिनोस कोम्बोस के साथ भी गहन बातचीत की और इस बात पर जोर दिया कि साइप्रस की भूमि पर स्थित किसी भी विदेशी सैन्य अड्डे को ईरान विरोधी अभियानों का मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए। इसका आप पर असर • ग्लोबल और भारत पर असर: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और मिस्र के बंदरगाह पर हमले से कच्चे तेल व एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। - पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों के लिए: जॉर्डन, कुवैत और खाड़ी देशों में संघर्ष फैलने से वहां काम करने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और हवाई यात्राओं पर जोखिम बढ़ गया है। सवाल-जवाब 1. अमरीका ने ईरान पर हाल ही में कौन से बड़े सैन्य हमले किए हैं? अमरीकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जॉर्डन में अमरीकी सैनिकों पर हुए हमलों के जवाब में 30 जुलाई 2026 को ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय रक्षा प्रणालियों पर दो घंटे से अधिक समय तक भीषण हवाई हमले किए। 2. मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर क्या घटना घटी है? 29 जुलाई 2026 को मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े अमरीकी स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर 'एनर्गोस विंटर' पर एक अज्ञात ड्रोन से हमला हुआ, जिससे लगी आग पास के ग्रीक टैंकर 'गैसलॉग सालेम' तक फैल गई। मिस्र सरकार ने इसकी ड्रोन हमले के रूप में पुष्टि की है। 3. क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है? कतरएनर्जी का एलएनजी टैंकर 'अल अरीश' 11 जुलाई के बाद पहली बार 29 जुलाई की रात होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा, हालांकि IRGC ने कहा है कि अमरीकी समर्थन से जबरन गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों में से एक में आग लगने के बाद वे वापस लौट गए। 4. जॉर्डन की सेना ने अमरीकी अड्डे की सुरक्षा में क्या कार्रवाई की? जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने 30 जुलाई की सुबह देश की ओर आ रही 5 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। ईरान के IRGC ने स्वीकार किया कि उसने जॉर्डन के अल अज़राक एयर बेस को निशाना बनाया था। 5. ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए चीन से क्या रक्षा समझौता किया है? ईरान ने हांगकांग की मध्यस्थ कंपनी के जरिए चीन से 60 से 70 मिलियन डॉलर मूल्य के 300 से 400 कंधे पर रखकर दागे जाने वाले MANPADS मिसाइल लॉन्चर (QW-12 और FN-16) खरीदने का समझौता किया है। 6. क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिर शुरू कराने के प्रयास हो रहे हैं? हाँ, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस्लामाबाद MoU और पाकिस्तान-कतर संयुक्त बयान के तहत वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव घटाने और तकनीकी वार्ता शुरू कराने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है। https://trendkia.com/live/live-us-forces-launch-heavy-retaliation-on-iran-as-west-asia-conflict-deepens-12031 TrendKia — Har trend, sabse pehle.