लाइव: पश्चिम एशिया युद्ध: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव की रणनीति अपनाई ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने वॉशिंगटन द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण की बात कही थी। तेहरान का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पूरी तरह से उसके अधिकार क्षेत्र में है। इस बीच, पश्चिम एशिया में इज़राइल, लेबनान और सऊदी अरब से जुड़े सैन्य अभियानों और हमलों के कारण तनाव लगातार बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र में सैन्य और रणनीतिक हलचल अत्यधिक तीव्र हो गई है। रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज़ जलडमरूमध्य के स्वामित्व से लेकर दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा अभियानों और खाड़ी के तटीय जल में फैले पर्यावरणीय संकट तक कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। जहां अमेरिकी प्रशासन ईरानी समुद्री मार्गों की नाकेबंदी को जारी रखने पर जोर दे रहा है, वहीं तेहरान इन दावों को पूरी तरह से नकारते हुए जलमार्ग पर अपने परिचालन नियंत्रण की बात कह रहा है। इसके साथ ही, क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों का असर पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा वाकयुद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए एक संदेश में दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। उन्होंने अपनी नौसैनिक उपस्थिति की तुलना एक मजबूत दीवार से की और कहा कि ईरान इस व्यवस्था के सामने बेबस है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर त्वरित और कड़ी प्रतिक्रिया आई। ईरान की अर्धसैनिक इकाई बासिज के प्रमुख हुसैन ताएब ने अर्ध-सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी के माध्यम से स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग पूरी तरह से ईरानी प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र के अधीन काम कर रहा है। इतना ही नहीं, ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान खातम-अल अंबिया के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में अमेरिकी दावों को खारिज किया। इब्राहिम जुल्फिकारी ने कहा, "अमेरिका के यह झूठे दावे कि जहाज सामान्य रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं, केवल मनगढ़ंत और सफेद झूठ हैं।" उन्होंने दोहराया कि ईरानी सशस्त्र बलों की अनुमति और सीधी निगरानी के बिना किसी भी वाणिज्यिक पोत या तेल टैंकर को इस मार्ग से जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 13 अगस्त 2026 को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अमेरिकी नौसेना अपने युद्धपोतों की निरंतर तैनाती और चक्रानुक्रम के जरिए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को अनिश्चित समय तक बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। लेबनान और इजराइल सीमा पर सैन्य अभियानों और समझौते को लेकर स्थिति दक्षिणी लेबनान के हालात पर चिंता जताते हुए लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजराइल द्वारा किए जा रहे विध्वंस की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि बस्तियों, बुनियादी ढांचे और पूजा स्थलों का सुनियोजित विनाश अंतरराष्ट्रीय कानून तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। नवाफ सलाम के अनुसार पूरे आबादी वाले क्षेत्रों को सैन्य ठिकाना घोषित करके वहां के निवासियों को स्थायी रूप से बेदखल करने का प्रयास तर्कहीन है। दूसरी तरफ, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल कात्ज़ ने दक्षिणी लेबनान के दौरे के दौरान वहां सुरक्षा ढांचे को नष्ट करने और एक निश्चित सुरक्षा क्षेत्र सहित सीरिया तथा गाजा में सैन्य उपस्थिति बनाए रखने की बात दोहराई। यह विवाद 26 जून को अमेरिका की मध्यस्थता से बने उस रूपरेखा समझौते के परिप्रेक्ष्य में हो रहा है, जिसमें हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण, इजराइली बलों की चरणबद्ध वापसी और परीक्षण क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती की योजना शामिल थी। 13 अगस्त 2026 को अमेरिकी आलोचना के बाद इजराइल कात्ज़ ने अपने बयान में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि इजराइली सेना की वापसी हिजबुल्लाह के पूर्ण निशस्त्रीकरण पर ही निर्भर करेगी। इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया कि लेबनान में इजराइल की अनिश्चितकालीन उपस्थिति समझौते की शर्तों के अनुकूल नहीं है। उसी दिन लेबनान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि बेरूत ने निशस्त्रीकरण की निगरानी के लिए ब्रिटेन, इटली, स्विट्जरलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों की सूची पर सहमति जताई है। अधिकारी ने कहा कि इस विषय पर केवल वॉशिंगटन के साथ वार्ता जारी है। अमेरिका की योजना सितंबर के आरंभ में रोम में इजराइल और लेबनान के बीच नए दौर की वार्ता आयोजित करने की है। ओमान खाड़ी में तेल रिसाव और तटीय पर्यावरण को खतरा समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट भी गहरा गया है। ओमान के पर्यावरण प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि तटीय सीमा के पास फंसे एक टैंकर से हो रहा तेल रिसाव अब देश के उत्तरी मुख्य भूमि के तटों तक पहुंच गया है। यह रिसाव कैरोलिन बेजेंगी नामक पोत से संबंधित है, जिसे प्रतिबंधित रूसी शैडो फ्लीट का हिस्सा माना जाता है और जिस पर जून में हुए एक विस्फोट के समय लगभग 10 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ था। इस विस्फोट की सटीक वजह और जिम्मेदारी अब तक तय नहीं हो सकी है। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने भी केश्म द्वीप के निकट समुद्री जल में तेल फैलने की चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि शुरुआती साक्ष्यों से किसी विदेशी मालवाहक पोत की संलिप्तता का संकेत मिलता है। हालांकि, जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली संस्था टैंकरट्रैकर्स के अनुसार यह रिसाव वास्तव में 3 अगस्त को ओमान के जलक्षेत्र में मिनोअन पायनियर नामक पोत पर हुए हमले के बाद शुरू हुआ था और धीरे-धीरे बहकर ईरानी तटों तक पहुंच गया। इस्माइल बक़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ऐसे रिसावों से तटीय अर्थव्यवस्था को अत्यधिक नुकसान हुआ है और जिम्मेदार पक्षों को इसकी भरपाई करनी चाहिए। ईरान में मृत्युदंड पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक आरोप ईरान के आंतरिक हालात पर 25 से अधिक देशों, जिनमें फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा शामिल हैं, तथा यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिक ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरानी अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को दी जा रही फांसी की सजा की कठोर निंदा की है। लगभग 30 से अधिक राष्ट्रों के समर्थन वाले इस बयान में कहा गया कि नागरिकों को डराने और उनके बुनियादी मानवाधिकारों के प्रयोग को दबाने के लिए मृत्युदंड का सहारा लेना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस अंतरराष्ट्रीय आलोचना का जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर पश्चिमी देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि गाजा युद्ध के दौरान इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन करने वाले देशों के पास मानवाधिकारों पर उपदेश देने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है। राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी खुफिया रिपोर्ट और क्षेत्रीय कूटनीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा से जुड़ी एक अन्य घटना में द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की से वापसी के समय सुरक्षा तंत्र ने राष्ट्रपति को गुप्त रूप से दूसरे विमान में स्थानांतरित किया था। यह कदम इजराइल द्वारा सीआईए को दी गई उस खुफिया सूचना के बाद उठाया गया था जिसमें ईरान से जुड़े किसी संभावित खतरे का जिक्र था। हालांकि, सीआईए के विश्लेषकों ने इस इनपुट की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया था और अमेरिकी अधिकारियों को सूचित किया था कि यह रिपोर्ट अमेरिका की अपनी जांच पर आधारित नहीं थी। दक्षिण एशिया के कूटनीतिक मंच पर 13 अगस्त 2026 को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ एड ने पाकिस्तान का दौरा किया और उप प्रधानमंत्री इशाक डार के साथ बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, शिक्षा और जलवायु मामलों पर चर्चा के साथ-साथ 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही मध्यस्थता की भूमिका की सराहना की गई। एस्पेन बार्थ एड ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। वहीं यमन में, हूती विद्रोहियों से जुड़ी समाचार एजेंसी सबा के अनुसार, सशस्त्र समूहों ने दो ड्रोन का उपयोग करके सऊदी अरब के जीज़ान प्रांत में स्थित अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाने का दावा किया है। इसका आप पर असर व्यापक प्रभाव: • भारत में: होर्मुज़ जलमार्ग और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। • वैश्विक स्तर पर: महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर सैन्य नाकेबंदी और तेल रिसाव की घटनाओं से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग भाड़ा और माल ढुलाई की लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। सवाल-जवाब 1. होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान के दावों में क्या अंतर है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी नौसेना ने जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण बना लिया है, जबकि ईरानी अधिकारियों और सेना ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि यह मार्ग पूरी तरह ईरान के प्रबंधन में है। 2. दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की वापसी की क्या शर्त रखी गई है? इजराइल के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि जब तक हिजबुल्लाह का पूर्ण निशस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी। 3. ओमान और खाड़ी के तटीय जल में तेल रिसाव का क्या कारण है? ओमान के तट पर फंसे टैंकर कैरोलिन बेजेंगी में जून में हुए धमाके और 3 अगस्त को मिनोअन पायनियर पर हुए हमले के बाद तेल रिसाव हुआ, जो फैलकर मुख्य भूमि और ईरानी तटीय क्षेत्रों तक पहुंच गया है। 4. ईरान पर मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की क्या प्रतिक्रिया रही? फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा सहित 25 से अधिक देशों और यूरोपीय संघ ने एक संयुक्त बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों को दी जा रही फांसी की सजा की कड़े शब्दों में निंदा की है। https://trendkia.com/live/live-west-asia-crisis-deepens-as-trump-relies-on-economic-pressure-against-iran-16173 TrendKia — Har trend, sabse pehle.