# बैगा बच्चों की मौतों पर मध्य प्रदेश में सियासी तकरार, बालाघाट में राहुल गांधी की दस्तक से पहले सरकार का तीखा पलटवार

> बालाघाट में मलेरिया और अन्य बीमारियों से पीड़ित बैगा आदिवासी परिवारों से राहुल गांधी की मुलाकात पर मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कड़ा विरोध जताया है। सरकार का आरोप है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए दौरे कर रहा है जबकि प्रशासन स्वास्थ्य सुधारों में जुटा है।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/baiga-bachchon-ki-mauton-para-madhya-pradesh-men-siyasi-takarara-balaghat-men-rahul-gandhi-ki-dastaka-se-pahale-sarakara-ka-tikha--40984 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालाघाट, राहुल गांधी, राजेंद्र शुक्ला, बैगा आदिवासी, मध्य प्रदेश राजनीति, मोहन यादव, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले बालाघाट में गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों से मिलने पहुंचे लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कदम ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। मलेरिया समेत विभिन्न मौसमी व गंभीर संक्रमणों से जूझ रहे पीड़ित परिवारों के प्रति सहानुभूति जताने के इस विपक्षी प्रयास पर भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने सीधे तौर पर यह सवाल उठाया है कि जब इलाका दशकों तक गंभीर नक्सली संकट और जटिल परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अब अचानक दौरा करना सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने का जरिया भर है।

## विपक्ष की नीयत पर डिप्टी सीएम के तीखे सवाल
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने राहुल गांधी की यात्रा को पूरी तरह भ्रामक और चुनावी नफे नुकसान की कवायद करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी बहुत लंबे अंतराल के बाद बालाघाट की धरती पर कदम रख रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक और जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को इस बात का भान होना चाहिए था कि जब बालाघाट नक्सलवाद के खौफ और बुनियादी अभावों में जी रहा था, तब स्थानीय लोगों की वास्तविक परेशानियों को साझा करना आवश्यक था। संकट के उस लंबे दौर में दूरी बनाए रखकर अब सामान्य स्थिति में पहुंचकर बयानबाजी करना महज सियासी माइलेज लेने की एक कोशिश है, जिसमें जनहित का कोई सरोकार नहीं दिखता।

## नक्सल संकट के खात्मे और बुनियादी तंत्र की बहाली का दावा
राजेंद्र शुक्ला ने क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि बालाघाट दशकों तक उग्रवादी हिंसा और नक्सली गतिविधियों से बुरी तरह त्रस्त रहा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोहन यादव के रणनीतिक नेतृत्व के चलते इस दशकों पुरानी नक्सल समस्या को जड़ से समाप्त करने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की गई है। सरकार ने केवल सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर ही प्रहार नहीं किया, बल्कि दुर्गम वनों में रहने वाले समाज के अंतिम व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बहुस्तरीय कदम उठाए। क्षेत्र में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाई गई, बच्चों के टीकाकरण को सघन किया गया, जीवन रक्षक ओआरएस और जिंक के वितरण की शत प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सीडीपीओ की तैनाती की गई।

## दुर्गम स्वास्थ्य केंद्रों पर 3,100 से अधिक डॉक्टरों की तैनाती
प्रदेश सरकार का दावा है कि दूरदराज और पिछड़े इलाकों में लंबे समय से चली आ रही चिकित्सकों की कमी को पाटने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया गया है। राज्य के सुदूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 3,100 से अधिक डॉक्टरों की नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें से 2,600 से अधिक डॉक्टरों ने पहले ही अपने कार्यस्थलों पर पहुंचकर पदभार संभाल लिया है। इस व्यापक भर्ती और पदस्थापना से ग्रामीण एवं वनांचल इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों की जो भारी किल्लत महसूस की जाती थी, वह काफी हद तक समाप्त हो गई है। इसका प्रत्यक्ष लाभ उन आदिवासी परिवारों को मिल रहा है, जिन्हें मामूली बीमारियों की जांच या प्राथमिक उपचार के लिए भी मीलों पैदल या निजी साधनों से सफर तय करना पड़ता था।

## प्राथमिक स्तर से तृतीयक स्तर तक स्वास्थ्य व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औसतन 25 से 30 हजार की ग्रामीण आबादी को आवश्यक चिकित्सीय सेवाएं प्रदान करता है। इन केंद्रों पर न केवल निःशुल्क जांच और आवश्यक दवाइयों का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की गहन निगरानी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की समय पर पहचान और प्राथमिक उपचार की सुविधा को मजबूत बनाया जा रहा है। यदि किसी मरीज की स्थिति ज्यादा नाजुक या जटिल होती है, तो उसे त्वरित रूप से जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में सेकेंडरी व टर्शियरी केयर के लिए रेफर करने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि बुनियादी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक और पर्याप्त दवाओं से लैस करके ही बीमारियों की रोकथाम संभव बनाई जा रही है।

## दो ब्लॉकों के 50 गांवों में हालात पूरी तरह नियंत्रण में
डिप्टी सीएम ने मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि बालाघाट के जिन दो ब्लॉकों के 50 गांवों में बीमारियों की शिकायतें सामने आई थीं, वहां अब पूरी स्थिति प्रशासनिक नियंत्रण में है। नक्सलवाद पर कड़े नियंत्रण के बाद ही इन दुर्गम और कटे हुए गांवों में स्वास्थ्य दलों की नियमित आवाजाही और दैनिक रिपोर्टिंग संभव हो सकी है। अतीत में इन क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना भी सरकार और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा था। अब कुपोषण पर अंकुश लगाने के साथ ही संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में ऐतिहासिक सुधार आया है। साल 2003 से पहले जहां मध्य प्रदेश में संस्थागत प्रसव का स्तर मात्र 21 प्रतिशत पर सिमटा हुआ था, वह आज सुधरकर 92 प्रतिशत के स्तर को पार कर चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इन सभी स्वास्थ्य सुधारों और जमीनी व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

## कांग्रेस की नीतियों पर हमला और ऐतिहासिक गलतियों का आरोप
राजेंद्र शुक्ला ने विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक देश को दीमक की तरह भीतर से खोखला करने वाले नक्सलवाद को पिछली सरकारों की कमजोर नीतियों से पोषण मिला था। भाजपा सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर इस समस्या पर निर्णायक प्रहार किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज सबसे सुदूर कोनों में भी अस्पताल, सड़कें और बुनियादी नागरिक सुविधाएं पहुंच रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक ताकतों की अनदेखी के चलते ये क्षेत्र वर्षों तक बदहाली में फंसे रहे, आज वही लोग संवेदना का नाटक करके जनता को भड़काने और गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

## इसका आप पर असर
बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और राजनीतिक सरगर्मी से दूरदराज के नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और त्वरित प्रशासनिक सहयोग मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

- **भारत में:** संसद के नेता प्रतिपक्ष द्वारा आदिवासी और ग्रामीण स्वास्थ्य संकटों को केंद्र में लाने से राष्ट्रीय स्तर पर मौसमी बीमारियों और बुनियादी चिकित्सा तंत्र पर नीतिगत जवाबदेही बढ़ती है। इससे विभिन्न राज्यों में दुर्गम बस्तियों के भीतर डॉक्टरों की नियुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ करने का दबाव बनता है।
- **मध्य प्रदेश में:** राज्य सरकार द्वारा 3,100 से अधिक डॉक्टरों की तैनाती से सुदूर प्राथमिक केंद्रों पर 25 से 30 हजार की ग्रामीण आबादी को मुफ्त दवाइयां और जांच मिलने में आसानी होगी। गंभीर रोगियों को समय पर बड़े जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में रेफर किए जाने से मौसमी बीमारियों से होने वाली मौतों की रोकथाम में मदद मिलेगी।
- **बालाघाट में:** प्रभावित दो ब्लॉकों के 50 गांवों में मलेरिया, कुपोषण और संक्रमणों की रोकथाम के लिए टीकाकरण, ओआरएस और जिंक के वितरण की विशेष व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासनिक निगरानी बढ़ने से पीड़ित बैगा आदिवासी परिवारों तक आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और राहत तंत्र की त्वरित सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक टकराव बालाघाट के दूरस्थ आदिवासी इलाकों में मलेरिया और अन्य बीमारियों के प्रकोप से बैगा बच्चों की असामयिक मौतों के बाद उपजे प्रशासनिक और चुनावी गतिरोध के कारण हुआ है।

- **सीधा कारण:** बालाघाट जिले में मलेरिया एवं विभिन्न संक्रमणों के कारण जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के शोकाकुल परिवारों से मिलने विपक्ष के नेता राहुल गांधी वहां पहुंचे। इस दौरे को राज्य सरकार ने वास्तविक संवेदना के बजाय चुनावी प्रचार और राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करार दिया।
- **प्रशासनिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि:** बालाघाट का बड़ा हिस्सा सघन वनों और दशकों लंबे नक्सली प्रभाव के कारण बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं और नियमित प्रशासनिक पहुंच से कटा हुआ रहा था। सुरक्षा अभियानों के बाद स्वास्थ्य तंत्र स्थापित तो किया गया, परंतु मौसमी संक्रमणों के दौरान सुदूर क्षेत्रों में तत्काल आपातकालीन देखभाल उपलब्ध कराना एक निरंतर चुनौती बना रहा।
- **स्वास्थ्य सुधारों पर परस्पर विरोधी दावे:** विपक्ष ने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे की नाकामी का आरोप लगाया, जिसके जवाब में राज्य सरकार ने 3,100 से अधिक नए डॉक्टरों की पदस्थापना और संस्थागत प्रसव को 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 92 प्रतिशत करने का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया।

## सवाल-जवाब

### 1. राहुल गांधी मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के दौरे पर क्यों पहुंचे?
राहुल गांधी बालाघाट में मलेरिया तथा अन्य बीमारियों के चलते जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने पहुंचे हैं।

### 2. मध्य प्रदेश सरकार ने राहुल गांधी की यात्रा पर क्या आरोप लगाया है?
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि राहुल गांधी भ्रम फैला रहे हैं और वे केवल राजनीतिक माइलेज लेने के लिए यह दौरा कर रहे हैं।

### 3. राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,100 से अधिक डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है, जिनमें से 2,600 से अधिक डॉक्टरों ने अपना पदभार संभाल लिया है।

### 4. एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कितनी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराता है?
एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औसतन 25 से 30 हजार की ग्रामीण आबादी को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं, दवाइयां और जांच उपलब्ध कराता है।

### 5. मध्य प्रदेश में संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में क्या बदलाव आया है?
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार वर्ष 2003 से पहले राज्य में संस्थागत प्रसव केवल 21 प्रतिशत था, जो अब सुधरकर 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

### 6. बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में मौजूदा स्थिति कैसी है?
डिप्टी सीएम के अनुसार बालाघाट के दो ब्लॉकों के 50 गांवों में हालात अब पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण में हैं।

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