बालाघाट में राहुल गांधी का दौरा महज राजनीतिक तमाशा, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों का तीखा पलटवार मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और उच्च शिक्षा व परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बालाघाट पहुंचे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। दोनों मंत्रियों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी गंभीर नहीं हैं और घटना के तीन महीने बाद केवल राजनीतिक पर्यटन करने पहुंचे हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में बालाघाट के दौरे को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तथा परिवहन एवं उच्च शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकारी मंत्रियों का कहना है कि राहुल गांधी किसी भी सार्वजनिक विषय को लेकर गंभीर नहीं रहते और बालाघाट पहुंचने के दौरान भी उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। मंत्रियों के अनुसार राहुल गांधी स्वयं एक बड़ी समस्या हैं और उन्हें देश भर की जनता से क्षमा मांगनी चाहिए। राज्य प्रशासन पूरी शक्ति और संसाधनों के साथ बालाघाट के पिछड़े क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास में जुटा हुआ है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुनियादी तकनीकों का विस्तार सुदूर अंचलों तक किया जा रहा है। घटना के तीन महीने बाद आने पर उठाए सवाल उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि राहुल गांधी अपने पुराने मिजाज के अनुरूप बालाघाट में तनिक भी गंभीर नजर नहीं आए। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए की हुकूमत के दौर में बालाघाट इलाके में नक्सली गतिविधियां चरम पर पहुंच गई थीं। उन्होंने अतीत का स्मरण कराते हुए कहा कि वर्ष 1999 के दौरान दिग्विजय सिंह की सरकार में तत्कालीन गृह मंत्री लेखीराम कावरे की नक्सलियों ने घर में घुसकर नृशंस हत्या कर दी थी और उनका सिर धड़ से अलग कर दिया था। उस पूरे इतिहास को भुलाकर राहुल गांधी आज नाटकीय शैली में राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार सत्ता में आने की लालसा लिए राहुल गांधी किसी घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद बालाघाट पहुंचकर केवल राजनीतिक पर्यटन में मशगूल हैं। राजेंद्र शुक्ल ने आगे टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस आधार के मनगढ़ंत आरोप लगाना राहुल गांधी की कार्यशैली बन चुकी है। जब भी वे कोई सार्वजनिक वक्तव्य देते हैं, तो उनका समूचा व्यक्तित्व और शारीरिक हाव-भाव यह साफ उजागर कर देता है कि उनमें आत्मविश्वास का घोर अभाव है। एक तरफ राहुल गांधी यह दावा करते हैं कि वे जनता से जुड़े मामले संसद के निचले सदन में उठाएंगे, वहीं दूसरी तरफ वे लोकसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने नहीं देते। उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं की फेहरिस्त गिनाते हुए सवाल किया कि लाड़ली बहना योजना की शुरुआत किसने की और इसकी मासिक राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये तक पहुंचाने का काम किसकी सरकार ने किया। इसके अतिरिक्त बैगा, भारिया और सहरिया आहार अनुदान योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1500 रुपये की वित्तीय सहायता भी वर्तमान सरकार ही उपलब्ध करा रही है, जिसकी जानकारी तक राहुल गांधी को नहीं है। मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी में धकेलने वालों को सत्ता में वापसी का ख्वाब छोड़ देना चाहिए, क्योंकि राज्य के नागरिक वर्ष 2003 से पहले के पिछड़े मध्य प्रदेश को कभी भूल नहीं सकते। नक्सलवाद के खात्मे और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दावा उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वास्तव में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार प्रकट करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान शासन ने वर्ष 2025 में उस पूरे वनांचल से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया कर दिया है। यदि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में नक्सलियों का समूल उन्मूलन न किया गया होता, तो आज राहुल गांधी के लिए उस दुर्गम क्षेत्र का दौरा कर पाना भी संभव नहीं हो पाता। नक्सल समस्या से प्रभावित रहे दो विकासखंडों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार हेतु 45 हजार नागरिकों की विस्तृत हेल्थ स्क्रीनिंग पूरी की गई है। इसके साथ ही क्षेत्र में 14 नए आंगनवाड़ी केंद्र और 10 उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी पीएचसी को उन्नत करके 30 बिस्तरों वाले अस्पताल का रूप दे दिया गया है। प्रशासनिक पहलों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी किसी समस्या का हल नहीं निकाल सकते क्योंकि वे स्वयं ही समस्या का रूप हैं, इसलिए उन्हें राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा योजना के जरिए बैगा, सहरिया और भारिया सहित अत्यंत पिछड़ी जनजातियों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। जिन वनांचलों में पहले लाल झंडे लहराया करते थे, आज वहां आधुनिक मोबाइल टावर खड़े हैं और 4G तथा 5G नेटवर्क कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। इसके अलावा अस्पताल और आंगनवाड़ी केंद्र निरंतर कार्य कर रहे हैं। बालाघाट में घटित घटना को बेहद पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि घटना सामने आते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिले के प्रभारी मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा वे स्वयं तत्काल मौके पर पहुंचे थे। राज्य सरकार ने तुरंत जरूरी बंदोबस्त किए, चार विकासखंडों में महिला बाल विकास अधिकारियों की तैनाती की और 14 उप स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया। केवल 15 मिनट की मौजूदगी और विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप परिवहन एवं उच्च शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी कांग्रेस सांसद के दौरे को पूरी तरह खोखला करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बालाघाट पहुंचकर केवल औपचारिकता पूरी की है। इसके विपरीत, त्रासदी सामने आते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने मंत्रियों, कांग्रेस के स्थानीय जिलाध्यक्ष और कांग्रेस के विधायकों को साथ लेकर प्रभावित क्षेत्र में गए थे। सरकार ने संकटग्रस्त परिवारों को फौरी सहायता और हर मुमकिन मदद उपलब्ध कराई, जिसकी मुक्तकंठ से सराहना खुद कांग्रेस के विधायकों ने भी की थी। भारतीय जनता पार्टी एक कर्मठ संगठन है और मौजूदा सरकार जमीनी स्तर पर ठोस काम करने में यकीन रखती है, न कि कांग्रेस की तरह खोखले भाषण देने में। उदय प्रताप सिंह ने रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौके पर पहुंचकर आदिवासी ग्राम प्रधानों और स्थानीय निवासियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया था, चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की और इलाके की प्रगति की रूपरेखा तैयार की थी। जब स्थानीय नागरिकों ने इन कल्याणकारी कदमों की प्रशंसा की, तब कांग्रेस पार्टी के दोनों विधायक भी उस पूरी बातचीत और प्रशासनिक कार्यक्रम में सक्रिय रूप से मौजूद थे। बच्चों के साथ हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के उपरांत राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद भी कांग्रेस विधायकों और जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में प्रदान की थी। इसके विपरीत राहुल गांधी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके यहां सिर्फ 15 मिनट के लिए आए और स्थानीय पत्रकारों तक को अपने साथ लेकर नहीं गए। दूरदराज के आदिवासी स्कूल में पहुंचकर उन्होंने देखा कि बच्चे अनुशासन से पढ़ रहे हैं, शिक्षक पूरी निष्ठा से पढ़ा रहे हैं और विद्यालय परिसर साफ-सुथरा व सुव्यवस्थित है, परंतु उनके मुंह से व्यवस्था की तारीफ में एक शब्द तक नहीं निकला। योजनाओं के नियमों और अतीत की घटनाओं पर तीखे सवाल कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि बैगा समुदाय की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना का पैसा न मिलने की बात उठाकर राहुल गांधी अपनी समझ की कमी दर्शा रहे हैं। किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में यह बुनियादी नियम लागू होता है कि जब किसी हितग्राही को एक विशेष योजना का लाभ मिल रहा हो, तो उसी प्रकृति की दूसरी समानांतर योजना की राशि नहीं दी जाती। राहुल गांधी को शायद यह बुनियादी तथ्य भी ज्ञात नहीं है कि बैगा महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत नियमित वित्तीय मदद मिल रही है। आजादी के बाद के 75 सालों में से 55 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी का शासन रहा, तब उस समय वे इन बुनियादी सुविधाओं के लिए कहां थे। मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी बच्चों के साथ हुई दुखद घटना का केवल सियासी फायदा उठाने आए थे। जब उनकी ही पार्टी की सरकार के पूर्व मंत्री लखीराम कांवरे की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी, तब कांग्रेस का कोई बड़ा नेता वहां ढांढस बंधाने नहीं पहुंचा था। यहां तक कि कांग्रेस की पूर्व विधायक रही बिटिया के घर तक जाने की फुर्सत राहुल गांधी को नहीं मिली। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले सुरक्षा बलों के वीर जवानों को भी उन्होंने कभी उचित श्रद्धांजलि नहीं दी। यही वजह है कि देश का आम जनमानस राहुल गांधी के बयानों और हरकतों को बेहद गैर-गंभीरता से लेता है। इसका आप पर असर मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में राजनीतिक हलचलों और सरकारी दावों से स्थानीय जनजीवन, स्वास्थ्य ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सत्तापक्ष के बीच कल्याणकारी योजनाओं के आवंटन तथा नक्सल उन्मूलन पर तीखी बहस और तेज होगी। इससे संसद के सत्रों में आदिवासी कल्याण और केंद्रीय सहायता की प्राथमिकताओं पर सांसदों का ध्यान केंद्रित रहेगा। • बालाघाट में: नक्सल प्रभावित रहे दो विकासखंडों में 45 हजार लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग होने और 14 नए आंगनवाड़ी केंद्रों व 10 उप स्वास्थ्य केंद्रों के खुलने से सुदूर ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के 30 बिस्तरों वाले अस्पताल में तब्दील होने से स्थानीय मरीजों को गंभीर इलाज के लिए जिला मुख्यालय नहीं भागना पड़ेगा। • आदिवासी महिलाओं के लिए: बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की पात्र महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत प्रतिमाह 1500 रुपये की निरंतर आर्थिक मदद सुनिश्चित रहेगी। इससे यह भ्रम भी दूर होगा कि समानांतर योजना के नियमों के कारण उन्हें वित्तीय सहायता से वंचित रखा गया है। • कनेक्टिविटी और सुरक्षा: वनांचल क्षेत्रों में नए मोबाइल टावरों की स्थापना तथा 4G और 5G नेटवर्क की पहुंच से स्थानीय निवासियों को डिजिटल सेवाओं और आपातकालीन संवाद में बड़ी राहत मिलेगी। सुरक्षा स्थिति सामान्य होने से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना के विकास कार्यों को और गति मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बालाघाट प्रवास और वहां बच्चों से जुड़ी एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के तीन महीने बाद किए गए संक्षिप्त दौरे की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। • दौरे का समय और संक्षिप्त अवधि: राज्य सरकार के अनुसार घटना घटने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने घटनास्थल का दौरा कर सहायता दी थी, जबकि राहुल गांधी घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद केवल 15 मिनट के लिए पहुंचे। सत्तापक्ष ने इसे वास्तविक संवेदना के बजाय विशुद्ध चुनावी राजनीति और राजनीतिक पर्यटन करार दिया। • कल्याणकारी योजनाओं पर परस्पर विरोधी दावे: राहुल गांधी ने बैगा महिलाओं को लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने पर सवाल उठाए थे, जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि उन्हें पहले से ही समानांतर आहार अनुदान योजना के तहत प्रतिमाह 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक एक ही उद्देश्य वाली दो समानांतर योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं दिया जाता। • सुरक्षा और नक्सलवाद का ऐतिहासिक संदर्भ: सत्तापक्ष ने वर्ष 1999 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री लेखीराम कावरे की नक्सलियों द्वारा की गई नृशंस हत्या की याद दिलाई। सरकार का तर्क है कि 2025 में प्रशासन द्वारा नक्सलवाद को समाप्त किए जाने के कारण ही आज विपक्षी नेता वहां निर्भीक होकर जाने में सक्षम हुए हैं। • संसद और सड़क पर राजनीतिक बयानबाजी: नेता प्रतिपक्ष द्वारा संसद में मुद्दों को उठाने की घोषणा के विपरीत सदन की कार्यवाही में होने वाले गतिरोध को लेकर मंत्रियों ने उन पर हमला बोला और कहा कि उनके बयानों में तथ्यों की भारी कमी है। सवाल-जवाब 1. मध्य प्रदेश के मंत्रियों ने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को क्या नाम दिया? उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और मंत्री उदय प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के दौरे को केवल राजनीतिक पर्यटन और चुनावी लाभ लेने के लिए किया गया तमाशा करार दिया। 2. बैगा समुदाय की महिलाओं को लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने पर सरकार ने क्या सफाई दी? कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि बैगा महिलाओं को आहार अनुदान योजना के तहत पहले से हर महीने 1500 रुपये मिल रहे हैं और नियम के तहत दो समानांतर योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं मिलता। 3. सरकार ने बालाघाट में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या सुधार किए हैं? दो विकासखंडों में 45 हजार लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग की गई है, 14 नए आंगनवाड़ी केंद्र व 10 उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं और पीएचसी को 30 बिस्तरों वाले अस्पताल में बदला गया है। 4. उपमुख्यमंत्री ने नक्सलवाद को लेकर पूर्व सरकार पर क्या आरोप लगाए? राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि कांग्रेस के दौर में 1999 में मंत्री लेखीराम कावरे की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी, जबकि वर्तमान सरकार ने 2025 में इस क्षेत्र से नक्सलवाद को समाप्त किया। 5. मंत्री उदय प्रताप सिंह के अनुसार घटना के बाद मुख्यमंत्री ने क्या कदम उठाए थे? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तुरंत मंत्रियों और स्थानीय कांग्रेस विधायकों व जिलाध्यक्ष को साथ लेकर पहुंचे थे तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता राशि सौंपी थी। https://trendkia.com/madhya-pradesh/balaghat-men-rahul-gandhi-ka-daura-mahaja-rajanitika-tamasha-madhya-pradesh-sarakara-ke-mntriyon-ka-tikha-palatavara-41433 TrendKia — Har trend, sabse pehle.