# बालाघाट का 'क्रिकेट बैट' पुल: 746 मीटर लंबे ROB पर बड़े हिस्से में फुटपाथ ही गायब, अफसर का बयान- NOC का इंतजार करते तो 25 साल लग जाते

> भोपाल के 90 डिग्री और इंदौर के Z आकार वाले पुल के बाद अब बालाघाट का गर्रा रेलवे ओवरब्रिज सुर्खियों में है, जहां करीब 746 मीटर लंबे पुल के एक बड़े हिस्से में फुटपाथ ही नहीं बना और स्ट्रीट लाइट तक जुगाड़ से लगानी पड़ी।

**Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/balaghata-ka-kriketa-baita-pula-746-mitara-lnbe-rob-para-bare-hisse-men-phutapat-519

मध्य प्रदेश में रेलवे ओवरब्रिज एक के बाद एक अजीबोगरीब डिजाइन की वजह से बदनाम होते जा रहे हैं। पहले भोपाल का 90 डिग्री पर मुड़ने वाला ओवरब्रिज चर्चा में आया, फिर इंदौर के Z आकार वाले रेल ओवरब्रिज ने सबका ध्यान खींचा और अब इस फेहरिस्त में बालाघाट का गर्रा रेलवे ओवरब्रिज भी शामिल हो गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां सवाल आकार पर नहीं, बल्कि उस सुविधा पर है जो पुल पर बननी ही चाहिए थी- फुटपाथ।

## पुल बना तो सही, पर पैदल चलने वालों की जगह छूट गई
बालाघाट-गर्रा रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन तो धूमधाम से हुआ, लेकिन सामने आते ही पता चला कि इसके एक बड़े हिस्से में फुटपाथ बनाया ही नहीं गया। यह पुल लगभग 746 मीटर लंबा है। एक तरफ रेलवे फाटक की भीड़ से हजारों लोगों को राहत मिलने जा रही है, तो दूसरी तरफ पैदल चलने वालों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस हिस्से में फुटपाथ नहीं है, वहां से रोज स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और दूसरे राहगीर गुजरते हैं और अब उन्हें मजबूरन तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर ही चलना पड़ेगा।

दूर से देखने पर पुल का यह अधूरा हिस्सा अजीब आकार बना देता है- ऐसा लगता है मानो किसी ने क्रिकेट का बैट रख दिया हो, जिसका एक सिरा हैंडल की तरह पतला निकल गया हो। यही वजह है कि लोग इसे 90 डिग्री और Z वाले पुलों की कतार में गिनने लगे हैं।

## 'वन विभाग की NOC का इंतजार करते तो 25 साल लग जाते'
जब इस अधूरेपन को लेकर सेतु विभाग के एसडीओ अर्जुन सनोडिया से सवाल किया गया, तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। उन्होंने माना कि डीपीआर यानी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में पूरा फुटपाथ बनना तय था, लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पाई। उनके मुताबिक, पुल को जल्दी पूरा करने और जनता को ट्रैफिक से राहत देने का दबाव था, इसलिए उतने हिस्से में फुटपाथ छोड़ दिया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर एनओसी का इंतजार करते रहते तो पुल बनने में 25 साल तक लग सकते थे।

दूसरी ओर अधिकारियों का यह भी तर्क है कि वरिष्ठ अधिकारियों के लिखित आदेश के बाद ही पुल के डाउन हिस्से में बिना फुटपाथ के काम पूरा कराया गया। यह आरओबी रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम को खत्म करने के मकसद से आधुनिक तकनीक और पाइल फाउंडेशन पर बनाया गया है। लोकार्पण के वक्त इसे विकास का प्रतीक बताया गया, लेकिन निर्माण पूरा होते ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के कुछ हिस्सों का काम तय मानकों के मुताबिक नहीं दिखता और पैदल यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं भी पूरी तरह नहीं हैं।

## शिव मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए बढ़ेगा खतरा
पुल के पास ही शंकर घाट पर शिव मंदिर है, जहां श्रावण मास और महाशिवरात्रि के मौके पर हजारों श्रद्धालु पैदल पहुंचते हैं। फुटपाथ न होने की वजह से अब इन्हें जान जोखिम में डालकर सड़क से गुजरना होगा। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके पुल तो खड़ा कर दिया गया, मगर पैदल चलने वालों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर दिया गया।

## उद्घाटन में विधायक नदारद, प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप
उद्घाटन समारोह में जिला प्रभारी मंत्री उदय राव प्रताप सिंह, सांसद भारती पारधी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। लेकिन क्षेत्रीय विधायक अनुभा मुंजारे इस आयोजन में नहीं दिखीं। उन्होंने प्रशासन पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने और उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

## डीपीआर में स्ट्रीट लाइट ही नहीं थी, फिर लगा जुगाड़
फुटपाथ अकेली चूक नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, बालाघाट-गर्रा आरओबी की बुनियादी डीपीआर में स्ट्रीट लाइट का जिक्र ही नहीं था। निर्माण महीनों चलता रहा, पर किसी जिम्मेदार को यह ध्यान नहीं आया कि पुल पर रोशनी की व्यवस्था भी करनी है। जब काम पूरा होने को आया और उद्घाटन की तारीख नजदीक आई, तब जाकर अफसरों को इसका ख्याल आया। आनन-फानन में इसे डीपीआर में जोड़ा गया और अब इसके लिए टेंडर निकाले गए हैं। फिलहाल रात में हादसा न हो, इसके लिए सेतु विभाग ने जुगाड़ के तौर पर हैलोजन लाइटें लगा दी हैं।

इस पर प्रभारी मंत्री का रुख भी कम चर्चा में नहीं रहा। उन्होंने कहा, ”तब आप लोग ही कहते कि लाइट नहीं लगी. सिर्फ लाइट के चक्कर में उद्घाटन नहीं हुआ. सब लग जाएगा”। इतना कहकर मंत्री जी फुटपाथ वाले सवाल का जवाब दिए बगैर ही वहां से निकल गए।

## नाम पर भी छिड़ी जंग
विवाद यहीं नहीं थमा। नगर पालिका बालाघाट ने पुल का नामकरण करते हुए 'राजा भोज रेलवे ओवर ब्रिज' का बोर्ड लगा दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई है। आम लोगों की मांग है कि इस पुल का नाम वैनगंगा रेलवे ओवरब्रिज रखा जाए, या फिर शंकर घाट के पास होने के नाते भगवान शंकर से जुड़ा कोई नाम दिया जाए। कुछ लोग इसे बालाघाट जिले के दानवीर मुलना के नाम पर या नक्सल ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि यह पुल आम जनता के टैक्स के पैसे से बना है, इसलिए इसका नाम देश और आम लोगों से जुड़े किसी व्यक्ति के नाम पर ही होना चाहिए।

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