# बारिश के मौसम में सांपों के डर से पुलिस से भी ज्यादा खौफजदा रहते थे चंबल के डकैत, पढ़ें बीहड़ की अनकही कहानी

> ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में डकैतों के लिए सबसे बड़ा खतरा पुलिस नहीं बल्कि बरसात का मौसम होता था, जब उफनती नदियां, जहरीले सांप और गांवों में मुखबिरी का डर उनकी जान पर बन आता था।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-07-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/barisha-ke-mausama-men-sanpon-ke-dara-se-pulisa-se-bhi-jyada-khauphajada-rahate-the-chnbala-ke-dakaita-parhen-bihara-ki-anakahi-ka-8983 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंबल के डकैत, मोहर सिंह, पुतलीबाई, माधव सिंह, रणधीर कपूर अपहरण, ग्वालियर चंबल बीहड़, रामबाबू गड़रिया

मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल इलाके में कभी बंदूकों की तड़तड़ाहट और डकैतों की दहशत आम बात हुआ करती थी, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि इन खूंखार बागियों के लिए सबसे बड़ा खतरा पुलिस की वर्दी नहीं, बल्कि सावन-भादों के महीनों में बरसने वाला पानी होता था। कड़ाके की ठंड हो या तपती धूप, बीहड़ के ये राजा हर मौसम से निपटना जानते थे, मगर मानसून की दस्तक के साथ ही उनकी रातों की नींद उड़ जाती थी और अगले तीन-चार महीने उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का सफर बन जाते थे।

## बारिश में बीहड़ों का पूरा गणित बदल जाता था
चंबल और गबलिया के इलाके की बनावट ऐसी है कि यहां के ऊबड़-खाबड़ बीहड़ और घने जंगल आम दिनों में डकैतों को छिपने की सबसे बेहतर जगह मुहैया कराते थे। पुलिस की गाड़ियां इन दुर्गम रास्तों तक पहुंच ही नहीं पाती थीं और बागी इसी कमजोरी का पूरा फायदा उठाते थे। लेकिन जैसे ही झमाझम बारिश शुरू होती, यही बीहड़ उनके लिए खुली जेल में तब्दील हो जाते थे। पहाड़ी नाले और नदियां उफान पर आ जातीं और आने-जाने के तमाम रास्ते बंद हो जाते थे। उस दौर में इन नदियों पर न कोई पुल था और न पार करने का कोई भरोसेमंद जरिया, इसलिए पानी बढ़ते ही पूरा क्षेत्र मानो एक टापू में बदल जाता था और डकैतों की आपस में मिलने-जुलने या रसद जुटाने की हर कोशिश ठप पड़ जाती थी। एक जगह से दूसरी जगह जाना नामुमकिन हो जाने पर डकैतों के पास शिवपुरी और ग्वालियर से लगे पहाड़ी इलाकों की प्राकृतिक गुफाओं में शरण लेने के अलावा कोई चारा नहीं बचता था, जहां न पूरा खाना मिलता था और न सुकून की नींद।

## पुलिस से भी ज्यादा खतरनाक साबित होते थे जहरीले सांप
बारिश के दिनों में जंगलों और गुफाओं में पानी भर जाने से जहरीले जीव-जंतु और सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते थे। बीहड़ में छिपे डकैतों के पास इनसे बचाव का कोई पक्का तरीका नहीं होता था, न कोई दवा-दारू और न ही किसी वैद्य तक पहुंचने का रास्ता। वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव के मुताबिक, इतिहास में ऐसे कई किस्से दर्ज हैं जब पुलिस की गोलियों से बचने में कामयाब रहे खूंखार डकैत आखिरकार सांप के डंक का शिकार होकर तड़प-तड़पकर दम तोड़ बैठे। चारों तरफ पानी भरा होने और इलाज की कोई सुविधा न होने की वजह से घायल डकैत को समय पर मदद तक नहीं मिल पाती थी, और साथी बागी बेबस होकर सिर्फ तड़पते देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाते थे। यही वजह थी कि बरसात का मौसम आते ही बीहड़ के बड़े-बड़े नाम भी सहम जाते थे।

## गांवों में भेष बदलकर रहना और मुखबिरों को सख्त सजा
जब जंगल में टिके रहना मुमकिन नहीं रह जाता था, तो डकैत सोच-समझकर जंगलों से निकलकर आसपास के गांवों की ओर रुख करते थे। इसके लिए वे खासतौर पर ऐसे दुर्गम गांव चुनते थे, जहां बाढ़ या टूटे रास्तों की वजह से पुलिस या प्रशासन का पहुंचना लगभग असंभव हो। इन गांवों में डकैत आम ग्रामीणों जैसा भेष बनाकर महीनों गुजार लेते थे। गांव वाले भांप तो लेते थे कि ये असल में बीहड़ के बागी हैं, लेकिन उनके खौफ के चलते किसी की जुबान खुलने की हिम्मत नहीं होती थी। इन्हीं गांवों में डकैतों के खाने-पीने और जरूरी सामान का इंतजाम भी चुपचाप हो जाया करता था। कोई हिम्मत करके पुलिस तक खबर पहुंचाने की कोशिश भी करता, तो टूटे रास्तों की वजह से पुलिस समय पर मौके पर पहुंच ही नहीं पाती थी। दूसरी तरफ, मुखबिरी को लेकर डकैतों का रवैया बेहद क्रूर था। जिस किसी ग्रामीण पर पुलिस से मिलीभगत का जरा-सा भी शक होता, उसे ऐसी खौफनाक सजा दी जाती कि पूरा इलाका दहशत में आ जाता और आगे किसी की मुखबिरी करने की हिम्मत ही नहीं पड़ती। इसी डर के सहारे बागी तीन-चार महीने गांवों में लगभग बेखौफ होकर गुजार लेते थे।

## पुतलीबाई का बीरा सुनाज ठिकाना और मोहर सिंह की धाक
चंबल के डकैतों के इतिहास में महिलाओं का भी एक दौर रहा है, जिसमें पुतलीबाई का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। पुतलीबाई ने लंबे अरसे तक शिवपुरी के बीरा सुनाज इलाके में डेरा जमाकर अपना गिरोह चलाया था और बारिश के मौसम में यही पूरा क्षेत्र उनका सबसे सुरक्षित ठिकाना बन जाता था। इसी अंचल में अपने दौर के दो सबसे ताकतवर नाम, मोहर सिंह और माधव सिंह, का भी सिक्का चलता था। इन दोनों बागियों की दहशत इतनी गहरी थी कि इनका नाम सुनते ही आसपास के गांवों में सन्नाटा पसर जाता था।

## माधव सिंह और रणधीर कपूर के अपहरण की चर्चित वारदात
माधव सिंह से जुड़ा एक किस्सा आज भी इस इलाके में खासा मशहूर है। अपने पूरे करियर की सबसे बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए माधव सिंह ने एक ही बार में 14 लोगों का अपहरण कर लिया था। यह पूरी घटना मशहूर बधिया कुंड से जुड़ी है, जहां कुछ लोग नाव बनवाने के सिलसिले में पहुंचे थे। अपहृत लोगों में फिल्म जगत के जाने-माने कलाकार अन्नू कपूर के बड़े भाई रणधीर कपूर भी शामिल थे। इस साहसिक और चौंका देने वाली वारदात की गूंज उस वक्त दिल्ली की सरकार तक सुनाई दी थी और पूरे देश में यह घटना सुर्खियां बन गई थी।

## अब पूरी तरह डकैत मुक्त हो चुका है चंबल
वक्त बदला और उसके साथ चंबल की तस्वीर भी बदल गई। प्रमोद भार्गव के मुताबिक, आज का चंबल पहले वाला बीहड़ बिल्कुल नहीं रहा। बरसों में यहां विकास पहुंचा, नदी-नालों पर पुल बन गए, सड़कें बिछ गईं और सबसे अहम बदलाव संचार के साधनों में आया। मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में अब किसी डकैत के लिए महीनों तक छिपे रहना नामुमकिन हो चुका है, क्योंकि आज हर सुदूर गांव तक पुलिस की पहुंच और निगरानी पहले से कहीं आसान हो गई है। इलाके के आखिरी बड़े डकैत रामबाबू गड़रिया के खात्मे के बाद यह पूरा क्षेत्र लगभग डकैत मुक्त हो चुका है और अब चंबल या ग्वालियर-शिवपुरी के जंगलों में कोई बड़ा गिरोह सक्रिय नहीं है। कभी-कभार कोई छोटी-मोटी आपराधिक वारदात सामने आती भी है, तो पुलिस और प्रशासन की सक्रियता से वह जल्द ही दम तोड़ देती है। बंदूकों के साए में बरसों गुजार चुका यह इलाका अब शांति और तरक्की की नई कहानी लिख रहा है, हालांकि बरसात के उन चार मुश्किल महीनों के किस्से आज भी इलाके के बुजुर्गों की जुबानी सुनने को मिल जाते हैं, जो नई पीढ़ी के लिए बीहड़ के उस खौफनाक अतीत की एक जिंदा याद बनकर रह गए हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. चंबल के डकैतों के लिए साल का सबसे खतरनाक मौसम कौन सा होता था?
ठंड या गर्मी नहीं, बल्कि सावन-भादों यानी बरसात का मौसम उनके लिए सबसे मुश्किल और जानलेवा होता था।

### 2. बारिश में डकैतों के लिए बीहड़ खतरनाक क्यों बन जाते थे?
नदी-नाले उफान पर आ जाने और पुल न होने से रास्ते बंद हो जाते थे, जिससे इलाका टापू जैसा बन जाता था और डकैतों की आवाजाही ठप पड़ जाती थी।

### 3. बरसात में डकैतों के लिए पुलिस से भी बड़ा खतरा क्या था?
जंगलों और गुफाओं में पानी भरने से बाहर निकल आने वाले जहरीले सांप उनके लिए पुलिस से भी बड़ा खतरा साबित होते थे।

### 4. डकैत बरसात में गांवों में कैसे छिपते थे?
वे ऐसे दुर्गम गांवों में भेष बदलकर रहते थे जहां बाढ़ या टूटे रास्तों की वजह से पुलिस का पहुंचना नामुमकिन होता था।

### 5. पुतलीबाई का ठिकाना कहां था?
पुतलीबाई लंबे समय तक शिवपुरी के बीरा सुनाज इलाके में रहकर अपनी गतिविधियां चलाती थीं।

### 6. माधव सिंह ने अपने करियर की सबसे बड़ी वारदात कब की?
माधव सिंह ने बधिया कुंड में एक साथ 14 लोगों का अपहरण किया था, जो उनके करियर की सबसे बड़ी वारदात मानी जाती है।

### 7. रणधीर कपूर का इस घटना से क्या संबंध है?
अभिनेता अन्नू कपूर के बड़े भाई रणधीर कपूर उन 14 लोगों में शामिल थे जिन्हें माधव सिंह ने अपहृत किया था।

### 8. क्या चंबल इलाका अब डकैतों से मुक्त हो चुका है?
हां, इलाके के आखिरी बड़े डकैत रामबाबू गड़रिया के खात्मे के बाद से चंबल लगभग पूरी तरह डकैत मुक्त हो चुका है।

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