बेटे को खोने के बाद देवास के पिता की गुहार, बच्चों को दिल्ली पढ़ने मत भेजो सत्य निकेतन में इमारत ढहने से देवास के 21 वर्षीय अर्पित जाज की मौत के बाद पिता भूपेंद्र जाज ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली न भेजें, वहीं परिवार ने बेटे की एक आंख दान करने का भी फैसला किया है। राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना ने मध्य प्रदेश के देवास के एक परिवार से उनका 21 साल का बेटा अर्पित जाज छीन लिया। मंगलवार को बेटे को अंतिम विदाई देने के बाद पिता भूपेंद्र जाज ने दोनों हाथ जोड़कर देशभर के अभिभावकों से भावुक अपील की कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली न भेजें। एक बेटे को खोने का दर्द और दूसरे परिवारों को ऐसी ही त्रासदी से बचाने की चिंता उनकी बातों में साफ झलक रही थी। बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था अर्पित अर्पित दिल्ली के एक डिग्री कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था। उसकी अंतिम यात्रा में परिवार के साथ-साथ दोस्त, शिक्षक और पड़ोसी भी शामिल हुए और सभी की आंखें नम थीं। अंतिम विदाई के बाद पत्रकारों से बातचीत में भूपेंद्र ने कहा, "मैं सभी माता-पिता से बस यही कहना चाहूंगा कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली न भेजें।" उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह हताश हो चुके हैं और कई आर्थिक व पारिवारिक कठिनाइयों से जूझते हुए अर्पित को दिल्ली में पढ़ा रहे थे, ताकि बेटे का भविष्य संवर सके। हादसे में गई एक आंख, अब दूसरी करेंगे दान भूपेंद्र ने बताया कि इमारत गिरने के हादसे में अर्पित की एक आंख खराब हो गई थी। गहरे दुख के इस समय में भी परिवार ने फैसला किया है कि अर्पित की दूसरी आंख दान की जाएगी, ताकि किसी जरूरतमंद मरीज की जिंदगी में फिर रोशनी लौट सके। परिवार का यह फैसला बेटे को खोने के गम में भी दूसरों की मदद करने की उनकी सोच को दिखाता है। बेटे को ढूंढने में प्रशासन से नहीं मिली मदद देवास में टैक्सी का कारोबार चलाने वाले भूपेंद्र ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद जब वे बेटे को तलाशने दिल्ली पहुंचे, तो उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा और दिल्ली प्रशासन की ओर से उन्हें जरूरी सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा, "हम दुर्घटनास्थल से लेकर अस्पतालों तक अर्पित को ढूंढते रहे, लेकिन कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था।" उन्होंने बताया कि आखिरकार एक वकील की मदद से परिवार ने बेटे के शव की पहचान की, जिसके बाद ही उन्हें अपने बेटे की मौत की पुष्टि हो सकी। सख्त कार्रवाई और विस्तृत जांच की मांग भूपेंद्र ने मांग की कि इस हादसे की विस्तृत जांच होनी चाहिए और जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को घटनास्थल के आसपास की जर्जर इमारतों पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि आगे किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। भूपेंद्र की यह मांग दिखाती है कि वे अकेले अपने बेटे के इंसाफ के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली में रह रहे बाकी छात्रों की सुरक्षा के लिए भी चिंतित हैं। दादा बोले, परिवार का चिराग बुझ गया अर्पित के दादा माखनलाल जाज ने भारी मन से कहा, "वह हमारे परिवार का चिराग था।" उन्होंने बताया कि परिवार का सहारा छिन गया है। परिजन के मुताबिक अर्पित ने घर पर रक्षाबंधन और जन्माष्टमी का त्योहार मनाया और उसके बाद 5 सितंबर को देवास से दिल्ली के लिए रवाना हुआ। वह 6 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा था। यानी त्योहारों की खुशियां मनाकर लौटा अर्पित दिल्ली पहुंचने के अगले ही दिन इस हादसे का शिकार हो गया। पहुंचने के कुछ घंटों बाद ही हादसा, 7 सितंबर को हुई पहचान परिजन के अनुसार दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना हो गई, जिसमें अर्पित की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार का अर्पित से संपर्क पूरी तरह टूट गया था, जिसके चलते घरवालों की चिंता और बढ़ गई। 7 सितंबर को अर्पित के शव की शिनाख्त हुई, जिसके बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए देवास लाया गया, जहां परिवार, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी। इसका आप पर असर यह हादसा और पिता की अपील उन तमाम अभिभावकों के लिए एक चेतावनी है जो अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए महानगरों में भेजते हैं। • भारत में: देश भर से बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली जैसे शहरों में किराए के मकानों और हॉस्टलों में रहते हैं। यह घटना अभिभावकों को बच्चों के रहने की जगह की सुरक्षा और इमारत की स्थिति खुद जांचने के लिए प्रेरित कर सकती है। • दिल्ली में: सत्य निकेतन जैसे इलाकों में जर्जर इमारतों में चलने वाले हॉस्टल और पीजी की जांच की मांग तेज हो सकती है। स्थानीय प्रशासन पर आसपास की पुरानी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराने का दबाव बढ़ सकता है। • अंगदान पर असर: अर्पित के परिवार का आंख दान करने का फैसला दूसरे परिवारों को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को मदद मिल सकती है। • शिकायत और मदद तंत्र: परिवार को शव की पहचान में जिस मुश्किल का सामना करना पड़ा, वह हादसों के बाद प्रशासन की हेल्पलाइन और सूचना व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत को उजागर करता है। ऐसा क्यों हुआ सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने की ठीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। मृतक अर्पित जाज के परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि हादसे की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए। • कारण अस्पष्ट: इस खबर में हादसे की तकनीकी वजह नहीं बताई गई है। परिवार का कहना है कि जांच के बाद ही असली वजह सामने आ पाएगी। • जर्जर इमारतों की आशंका: भूपेंद्र जाज ने प्रशासन से मांग की कि घटनास्थल के आसपास की जर्जर इमारतों पर भी ध्यान दिया जाए, जिससे संकेत मिलता है कि परिवार को आसपास की पुरानी संरचनाओं पर शक है। • प्रशासनिक सुस्ती: परिवार के मुताबिक हादसे के बाद बेटे की तलाश में उन्हें प्रशासन से समय पर जानकारी और मदद नहीं मिली, जिससे शव की पहचान में देरी हुई। • आगे क्या: परिवार की मांग है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। सवाल-जवाब 1. सत्य निकेतन हादसे में किसकी मौत हुई? देवास के 21 वर्षीय अर्पित जाज की मौत सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में हुई। 2. अर्पित जाज कौन थे और क्या पढ़ाई कर रहे थे? वह दिल्ली के एक डिग्री कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र थे। 3. अर्पित के पिता ने क्या अपील की? पिता भूपेंद्र जाज ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली न भेजें। 4. परिवार ने अंगदान को लेकर क्या फैसला किया? हादसे में अर्पित की एक आंख खराब हो गई थी, परिवार ने उसकी दूसरी आंख दान करने का फैसला किया है। 5. शव की पहचान कब हुई? 7 सितंबर को अर्पित के शव की पहचान हुई, इससे पहले परिवार को प्रशासन से पर्याप्त मदद नहीं मिली थी। 6. अर्पित कब दिल्ली पहुंचे थे? वह 5 सितंबर को देवास से रवाना होकर 6 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे, इसके कुछ ही घंटों बाद हादसा हो गया। 7. परिवार ने प्रशासन से क्या मांग की? भूपेंद्र जाज ने हादसे की विस्तृत जांच और सख्त कार्रवाई के साथ आसपास की जर्जर इमारतों की जांच की मांग की। https://trendkia.com/madhya-pradesh/bete-ko-khone-ke-bada-dewas-ke-pita-ki-guhara-bachchon-ko-delhi-parhane-mata-bhejo-29538 TrendKia — Har trend, sabse pehle.