भोपाल मास्टर प्लान-2047 का प्रारूप जारी, झीलों की नगरी के विकास के लिए सरकार ने उठाए बड़े कदम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल विकास योजना-2047 के नए प्रारूप का प्रकाशन कर दिया है। इस मास्टर प्लान में पर्यावरण संरक्षण, ग्रोथ कॉरिडोर और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। मध्य प्रदेश की राजधानी के सुनियोजित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रशासन ने आगामी दशकों के लिए विकास का खाका तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बहुप्रतीक्षित दस्तावेज को सार्वजनिक करते हुए इसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा की है। इस नए खाके को मुख्य रूप से चार आधारशिलाओं पर खड़ा किया गया है, जिसमें प्राकृतिक परिवेश का बचाव, नागरिक-केंद्रित आधुनिक सोच, प्रगतिशील बदलाव और आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देना शामिल है। सरकार अब इस प्रस्ताव पर आम जनता से राय और सुझाव मांगेगी, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं और पर्यावरण सुरक्षा इस विस्तृत योजना को तैयार करते समय शहर की भौगोलिक और प्राकृतिक खूबियों का पूरा ध्यान रखा गया है। ऐतिहासिक भोजताल और इसके जलग्रहण क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्थानीय पहाड़ियों, घने जंगलों, जल स्रोतों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों की रक्षा के लिए पुख्ता नियम बनाए गए हैं। इस बार शहर के हरित क्षेत्र को पहले के मुकाबले काफी बढ़ाया गया है, जो कि तय मानकों से भी अधिक है। भानपुर खंती जैसी पुरानी जगहों के कायाकल्प के लिए वहां गोल्फ कोर्स बनाने की योजना है, जबकि आवासीय कॉलोनियों में भी खुले एवं हरियाली वाले स्थानों का दायरा बढ़ाया गया है ताकि पर्यावरण संतुलित रहे। ग्रोथ कॉरिडोर और आधुनिक अधोसंरचना का विकास आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि को ग्रोथ कॉरिडोर के अंतर्गत रखा गया है। यह 51 किलोमीटर लंबा मार्ग शहर के कई प्रमुख हिस्सों, हवाई अड्डे और औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस कॉरिडोर के आसपास बहुउपयोगी और ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति होगी, जिससे व्यापार और आवास दोनों को बढ़ावा मिलेगा। यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक परिवहन के लिए विशेष मार्ग सुझाए गए हैं। इसके अलावा विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर जैसे प्रमुख मार्गों को भी इस मुख्य विकास धुरी से जोड़ा जा रहा है ताकि यातायात सुगम हो सके। स्मार्ट मोबिलिटी और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए यातायात व्यवस्था में सुधार के कई नए प्रावधान किए गए हैं। शहर में बहुस्तरीय पार्किंग, मशीनीकृत पार्किंग स्थल और फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों का उपयोग वाहन खड़े करने के लिए किया जाएगा। निर्माण कार्यों की वास्तविक समय पर निगरानी और अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की अवधारणा को शामिल किया गया है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी कैमरों के नेटवर्क को मजबूत करने और पारदर्शी परिसरों के निर्माण पर जोर दिया गया है ताकि नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल मिल सके। आवासीय सुविधाएं और शिक्षा का विस्तार शहर में काम करने की जगह और आवास के बीच की दूरी को कम करने के लिए मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। भौंरी इलाके में शिक्षा और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष नॉलेज हब की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही धर्मशालाओं, वृद्धाश्रमों और विशेष विद्यालयों जैसी कल्याणकारी गतिविधियों को अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिल सके। प्रवासी नागरिकों के लिए किराये के मकानों की व्यवस्था और पुरानी सोसाइटियों के पुनर्विकास को भी आसान बनाया गया है ताकि शहर के भीतर किफायती आवासों की उपलब्धता बनी रहे। इसका आप पर असर भोपाल मास्टर प्लान-2047 के इस नए प्रारूप के आने से शहर के निवासियों, संपत्ति मालिकों और निवेशकों के लिए कई बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं। • आम नागरिकों के लिए: शहर में हरित क्षेत्र बढ़ने और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होने से लोगों को प्रदूषण मुक्त और सुगम वातावरण मिलेगा। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग की आधुनिक सुविधाएं दैनिक आवागमन को आसान बनाएंगी। • संपत्ति और आवास बाजार: नए मिक्स्ड लैंड यूज़ नियमों और पुनर्विकास नीतियों से लोगों को अपने पुराने मकानों और सोसाइटियों का जीर्णोद्धार कराने में बड़ी सहूलियत मिलेगी। किराए के मकानों और किफायती आवासों को बढ़ावा मिलने से घर खरीदारों को भी फायदा होगा। • व्यापारी और निवेशक: ग्रोथ कॉरिडोर के पास असीमित एफएआर और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार से नए कारोबारों और निवेश को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। • पर्यावरण और जल स्रोत: भोजताल और आसपास के जंगलों के संरक्षण के कड़े नियमों से शहर का प्राकृतिक संतुलन और जल सुरक्षा दीर्घकालिक रूप से मजबूत होगी। • मध्य प्रदेश में: राज्य की राजधानी होने के नाते यह मास्टर प्लान आने वाले समय में प्रदेश के अन्य शहरी विकास मॉडल के लिए एक बड़ा मानक स्थापित करेगा। ऐसा क्यों हुआ इस मास्टर प्लान के निर्माण और इसके नए प्रारूप को सार्वजनिक किए जाने के पीछे शहर की तेजी से बढ़ती आबादी और भविष्य की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता है। पिछली योजनाएं काफी पुरानी हो चुकी थीं, जिनके दायरे को अब आधुनिक समय के हिसाब से विस्तार दिया गया है। • शहरी विस्तार और आबादी: भोपाल की पिछली विकास योजनाएं दशकों पुरानी थीं और मौजूदा भौगोलिक तथा जनसांख्यिकीय दबाव को संभालने के लिए अपर्याप्त हो चुकी थीं। नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र को काफी बड़ा किया गया है ताकि 45 लाख से अधिक अनुमानित आबादी को समायोजित किया जा सके। • पर्यावरण संतुलन की मांग: शहर के प्राकृतिक सौंदर्य, विशेषकर भोजताल और वन्यजीव क्षेत्रों पर बढ़ते शहरीकरण के दबाव को संतुलित करने के लिए विशेष संरक्षण प्रावधानों की आवश्यकता महसूस की गई। • आर्थिक विविधीकरण: पारंपरिक प्रशासनिक गतिविधियों से आगे बढ़कर शहर को औद्योगिक, तकनीकी और व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ग्रोथ कॉरिडोर जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है। • परिवहन और बुनियादी ढांचा: वाहन पंजीकरण में भारी वृद्धि और बढ़ती यातायात समस्या से निपटने के लिए ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट और मजबूत मोबिलिटी नेटवर्क की जरूरत थी। सवाल-जवाब 1. भोपाल मास्टर प्लान-2047 का निवेश क्षेत्र कितना बड़ा है? इस नए मास्टर प्लान का निवेश क्षेत्र 1016.90 वर्ग किलोमीटर निर्धारित किया गया है, जिसमें 254 गांव शामिल हैं। 2. इस मास्टर प्लान का प्रारूप कितनी आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है? यह योजना 45 लाख की आंकलित जनसंख्या हेतु तैयार की गई है। 3. ग्रोथ कॉरिडोर की लंबाई कितनी है? मास्टर प्लान में निवेश अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। 4. शहर में हरित क्षेत्र को कितना बढ़ाया गया है? भोपाल मास्टर प्लान 2005 में हरित क्षेत्र लगभग 16 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर नए प्रारूप में लगभग 27 प्रतिशत किया गया है। 5. भौंरी क्षेत्र में कौन सी विशेष सिटी विकसित करने का प्रस्ताव है? भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी ईकेएआई सिटी के विकास की परिकल्पना की गई है। 6. पुराने आवासीय परिसरों के पुनर्विकास के लिए क्या शर्त है? आरडब्ल्यूए (रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) द्वारा आवासीय अपार्टमेंट के पुनर्विकास के लिए 70 प्रतिशत रहवासियों की सहमति होना आवश्यक है। https://trendkia.com/madhya-pradesh/bhopal-master-plan-2047-draft-released-with-focus-on-environment-and-growth-corridor-39185 TrendKia — Har trend, sabse pehle.