भोपाल में गरीबी का दर्दनाक चेहरा: 1 महीने की बच्ची को स्टेशन पर छोड़ा, वायरल पोस्ट देखकर लौटे तो हुए गिरफ्तार पुणे से बिहार जा रहे एक दिहाड़ी मजदूर दंपती ने भारी आर्थिक तंगी के चलते अपनी 1 महीने की नवजात को भोपाल स्टेशन पर लावारिस छोड़ दिया। हालांकि, इंटरनेट पर बच्ची की तस्वीरें वायरल होने के बाद जब वे लौटकर आए तो पुलिस ने उन्हें फौरन गिरफ्तार कर लिया। मध्य प्रदेश के भोपाल में गरीबी और बेबसी से जुड़ा एक बेहद झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मजदूर दंपती ने अपनी 1 महीने की नवजात बच्ची को रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़ दिया। हालांकि, बाद में सोशल मीडिया की पहुंच और माता-पिता के मन में उठे पछतावे के कारण वे पुलिस की गिरफ्त में आ गए। मूल रूप से बच्ची को बिहार ले जा रहे इन माता-पिता ने उसे ऑटो स्टैंड पर छोड़ दिया था, लेकिन इंटरनेट पर उसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद जब वे उसका हाल जानने वापस लौटे, तो गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने उन्हें पकड़ लिया। स्टेशन पर मिली बेसहारा मासूम घटनाक्रम की शुरुआत 10 जुलाई को हुई, जब प्रशासन को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 के बाहर स्थित ऑटो स्टैंड के पास एक बेसहारा मासूम मिली। बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए रेलवे पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए उसे सुरक्षित किया। नवजात को फौरन रेस्क्यू करके चाइल्डलाइन के अधिकारियों को सौंप दिया गया, जिन्होंने उसकी तत्काल देखभाल का जिम्मा उठाया। इसके बाद पुलिस ने परिवार को खोजने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया और किसी सुराग की उम्मीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अज्ञात बच्ची की तस्वीरें और जानकारी तेजी से फैलाई। सोशल मीडिया से मिला सुराग और गिरफ्तारी पुलिस की यह डिजिटल मुहिम काफी असरदार साबित हुई। जैसे ही मासूम बच्ची की तस्वीरें सोशल मीडिया नेटवर्क पर वायरल हुईं, फरार माता-पिता की नजर उन पोस्ट पर पड़ गई। अपनी बेटी के अंजाम को लेकर चिंता और भारी पछतावे में डूबा यह दंपती वापस लौटने पर मजबूर हो गया। वे बच्ची की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी जुटाने के इरादे से गुपचुप तरीके से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसी बीच मुस्तैद जीआरपी जवानों ने इस दंपती को पहचान लिया। उनके साथ उनकी बड़ी बेटी भी मौजूद थी। पुलिस ने फौरन उन्हें हिरासत में ले लिया और इस खौफनाक कदम के पीछे की वजह जानने के लिए पूछताछ शुरू कर दी। मेडिकल जांच में दिल की बीमारी का खुलासा मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब नवजात की चिकित्सीय जांच की गई। जीआरपी के थाना प्रभारी जहीर खान के अनुसार, बचाई गई बच्ची की जरूरी मेडिकल जांच से एक बड़ी जन्मजात समस्या का खुलासा हुआ है, जिसमें बच्ची के दिल में छेद की पुष्टि हुई है। जब हिरासत में लिए गए माता-पिता को इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या के बारे में बताया गया, तो उन्होंने दावा किया कि उन्हें नवजात की इस जानलेवा बीमारी के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। फिलहाल, बच्ची चाइल्डलाइन अधिकारियों की कड़ी निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित माहौल में है, और उसकी दिल की बीमारी के लिए जरूरी इलाज की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मजदूरी और 5 बच्चों का बोझ पुलिस की लंबी पूछताछ में परिवार की आर्थिक तंगी की बेहद दर्दनाक तस्वीर उभर कर सामने आई। हिरासत में लिए गए ये लोग पुणे शहर में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। इन पर अपनी मामूली कमाई से 5 बच्चों की परवरिश का भारी बोझ है। गरीबी की इसी मार के चलते उन्हें अपने 3 बड़े बच्चों को बिहार में अपनी दादी के पास रहने के लिए भेजने पर मजबूर होना पड़ा था, जो वहां बिल्कुल अकेली रहती हैं। सफर के दौरान बदला मन माता-पिता ने अपनी शुरुआती योजना का खुलासा करते हुए बताया कि वे पुणे से बिहार की यात्रा कर रहे थे ताकि अपनी इस सबसे छोटी बच्ची को भी दादी के पास ही छोड़ आएं। लेकिन, सफर के दौरान जब उनकी ट्रेन भोपाल में रुकी, तो उनके मन में अचानक बदलाव आ गया। हालात से हार मान चुके इस दंपती ने आखिरकार नवजात को स्टेशन के ऑटो स्टैंड पर ही छोड़ने का फैसला कर लिया और उसे वहीं लावारिस छोड़कर खुद बिहार की ओर आगे बढ़ गए। पुलिस जांच जारी प्रशासन अब इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रहा है। रेलवे पुलिस परिवार द्वारा बताई गई भयानक आर्थिक तंगी का बारीकी से मूल्यांकन कर रही है। इसके साथ ही, एक बेबस नवजात को इस तरह लावारिस छोड़ने के आपराधिक कृत्य के लिए उचित कानूनी कार्रवाई भी तय की जा रही है। इस घटना ने समाज में मौजूद गहरी असमानता और दिहाड़ी मजदूरों के संघर्ष को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। माता-पिता के खिलाफ आगे क्या कदम उठाया जाएगा, यह इस विस्तृत जांच के नतीजों पर ही निर्भर करेगा। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना बाल संरक्षण प्रणालियों की अहमियत को रेखांकित करती है और दिखाती है कि कैसे गंभीर आर्थिक तंगी परिवारों को खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर सकती है। • भोपाल में: स्थानीय निवासियों और यात्रियों को रेलवे स्टेशनों पर लावारिस बच्चों के प्रति सतर्क रहने और तुरंत जीआरपी या चाइल्डलाइन को सूचित करने की आवश्यकता है। सवाल-जवाब 1. भोपाल रेलवे स्टेशन पर बच्ची कब और कहां मिली? बच्ची 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 के बाहर ऑटो स्टैंड के पास लावारिस हालत में मिली थी। 2. बच्ची को किसने रेस्क्यू किया? गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसकी देखभाल का जिम्मा चाइल्डलाइन को सौंप दिया। 3. पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को कैसे गिरफ्तार किया? सोशल मीडिया पर बच्ची की वायरल तस्वीरें देखने के बाद माता-पिता पछतावे के कारण स्टेशन पर वापस लौटे, जहां पुलिस ने उन्हें पहचान कर हिरासत में ले लिया। 4. मेडिकल जांच में बच्ची की तबीयत के बारे में क्या खुलासा हुआ? मेडिकल जांच में पता चला कि 1 महीने की इस नवजात बच्ची के दिल में छेद है, और अब उसका इलाज शुरू कर दिया गया है। 5. माता-पिता ने बच्ची को स्टेशन पर क्यों छोड़ा था? माता-पिता पुणे में दिहाड़ी मजदूर हैं और आर्थिक तंगी के कारण वे बच्ची का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया। https://trendkia.com/madhya-pradesh/bhopal-men-garibi-ka-dardanaka-chehara-1-mahine-ki-bachchi-ko-steshana-para-chhora-vayarala-posta-dekhakara-laute-to-hue-giraphtar-10070 TrendKia — Har trend, sabse pehle.