बुरहानपुर में 500 से अधिक मजदूर परिवारों से प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी, 13 साल से रजिस्ट्री न मिलने पर आंदोलन का ऐलान मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में टोकन सिस्टम से प्लॉट खरीदने वाले 500 से ज्यादा पावरलूम मजदूर 12 से 13 सालों से रजिस्ट्री के लिए परेशान हैं। धोखाधड़ी का शिकार हुए इन परिवारों ने अब सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में प्लॉट दिलाने के नाम पर टोकन सिस्टम के जरिए पावरलूम मजदूरों और गरीब परिवारों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। शहर में स्थित तीन प्रमुख कॉलोनियों अहमदनगर 1, अहमदनगर 2 और सुपर कॉलोनी में 500 से ज्यादा परिवारों को जमीन देने का झांसा देकर उनसे सालों तक किस्तों में पैसे ऐंठे गए। पीड़ित मजदूर बीते 12 से 13 सालों से अपने नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। लगातार उपेक्षा और धोखाधड़ी से तंग आकर अब पीड़ित परिवारों ने प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई है। गाढ़ी कमाई ऐंठकर दूसरों को बेची जा रही जमीन स्थानीय मजदूरों का कहना है कि उन्होंने अपनी दिन-रात की मेहनत और खून-पसीने की कमाई जोड़कर इन कॉलोनियों में जमीन के टुकड़े खरीदे थे। लेकिन कॉलोनी मालिकों ने पूरे पैसे वसूलने के बाद भी उनके हक में रजिस्ट्री नहीं कराई। इसके बजाय, भू-माफिया इन जमीनों को दूसरे खरीददारों को दोबारा बेच रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। बुरहानपुर की अहमदनगर 1, अहमदनगर 2 और सुपर कॉलोनी के निवासी इस दोहरे रवैये से बेहद आक्रोशित हैं और उन्होंने विरोध का रास्ता चुना है। 300 से अधिक परिवारों का दर्द और 13 साल का इंतजार अहमदनगर और सुपर कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले पीड़ित लोकेश शाह के मुताबिक कॉलोनी मालिक डॉ. सादिक ज़की हाशमी और यूसुफ अली ने उनके जैसे सैकड़ों लोगों के साथ योजनाबद्ध तरीके से छल किया है। केवल इन तीन कॉलोनियों में ही 300 से ज्यादा गरीब मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने हर महीने छोटी-छोटी किस्तें जमा कर अपने प्लॉट का भुगतान पूरा किया। इसके बावजूद बीते 13 वर्षों से उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया जा रहा है। शहर की आधा दर्जनों से अधिक अन्य कॉलोनियों में भी इसी तरह से टोकन सिस्टम के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठकर रजिस्ट्री लटकाए रखने के मामले सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक जांच और एफआईआर की चेतावनी मामला गर्माने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। बुरहानपुर के तहसीलदार प्रवीण ओरिया ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कॉलोनाइजरों की गतिविधियों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। पूर्व में भी अवैध कॉलोनी काटने और धोखाधड़ी करने वाले आधा दर्जन से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यदि जांच में डॉ. सादिक ज़की हाशमी और यूसुफ अली समेत अन्य भू-माफिया दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज होगी और पीड़ितों की गाढ़ी कमाई की राशि वापस दिलाने के कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसका आप पर असर • भारत में: टोकन या किस्तों वाले अनधिकृत सिस्टम से जमीन खरीदते समय कानूनी अप्रूवल और रजिस्ट्री दस्तावेजों की पहले ही जांच कर लेना जरूरी है। • बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में: अहमदनगर 1, 2 और सुपर कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले 500 से अधिक पीड़ित मजदूरों को प्रशासनिक जांच के बाद अपना पैसा वापस मिलने या कानूनी रजिस्ट्री मिलने की उम्मीद जगी है। सवाल-जवाब 1. बुरहानपुर में मजदूरों के साथ किस तरह की धोखाधड़ी हुई है? कॉलोनी मालिकों ने टोकन सिस्टम के जरिए 500 से ज्यादा पावरलूम मजदूरों से किस्तों में पैसे लिए, लेकिन 12 से 13 साल बीत जाने के बाद भी जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम नहीं की। 2. कौन सी कॉलोनियां इस जमीन धोखाधड़ी से प्रभावित हैं? बुरहानपुर की अहमदनगर 1, अहमदनगर 2 और सुपर कॉलोनी मुख्य रूप से प्रभावित हैं, जबकि शहर की आधा दर्जन अन्य कॉलोनियों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। 3. किन कॉलोनी मालिकों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा है? पीड़ित खरीददारों ने डॉ. सादिक ज़की हाशमी और यूसुफ अली पर धोखाधड़ी करने, पैसे वसूलने के बाद रजिस्ट्री न करने और प्लॉट दूसरों को बेचने का आरोप लगाया है। 4. मामले में स्थानीय प्रशासन और तहसीलदार का क्या कहना है? तहसीलदार प्रवीण ओरिया ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि आरोप सही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और पीड़ितों की राशि वापस कराई जाएगी। https://trendkia.com/madhya-pradesh/burhanpur-men-500-se-adhika-majadura-parivaron-se-plota-ke-nama-para-dhokhadhari-13-sala-se-rajistri-na-milane-para-andolana-ka-ai-15171 TrendKia — Har trend, sabse pehle.