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  "type": "article",
  "title": "चैटजीपीटी से नकली बिल बनाकर चोरी के गैजेट्स बेचने वाला बीटेक इंजीनियर इंदौर पुलिस की गिरफ्त में, 13 लाख के इलेक्ट्रॉनिक्स बरामद",
  "summary": "इंदौर में पुलिस ने एक ऐसे शातिर मैकेनिकल इंजीनियर को गिरफ्तार किया है जो कर्ज चुकाने के लिए हॉस्टलों से लैपटॉप और मोबाइल चोरी करता था और चैटजीपीटी की मदद से नकली बिल बनाकर उन्हें बाजारों में बेच देता था।",
  "content": "इंदौर में पुलिस ने एक ऐसे पढ़े-लिखे और शातिर चोर को गिरफ्तार किया है जिसके कारनामे सुनकर कानून व्यवस्था से जुड़े लोग भी दंग रह गए हैं। पलासिया थाना पुलिस की गिरफ्त में आया यह आरोपी कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि उसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग (B.Tech) की डिग्री है। वह पूर्व में नोएडा जैसे बड़े शहर में आयकर विभाग के भीतर टैक्स असिस्टेंट के पद पर भी काम कर चुका है। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ऑनलाइन ट्रेडिंग के दलदल में फंस गया था, जहां उसे भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ा। इस नुकसान के कारण वह लाखों रुपये के कर्ज में डूब गया था। इसी कर्ज को चुकाने और अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा।\n\n \n\nहॉस्टलों को निशाना बनाने का तरीका और चैटजीपीटी का खेल\n\nपुलिस पूछताछ में आरोपी की पहचान 32 वर्षीय प्रतीक ताराचंद लिखार के रूप में हुई है। आरोपी ने चोरी के लिए इंदौर के उन इलाकों को चुना जहां बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी युवा किराए पर रहते हैं। उसने मुख्य रूप से राऊ, राजेंद्र नगर, बॉम्बे हॉस्पिटल, चोइथराम, भंवरकुआ, गीताभवन और पलासिया जैसे क्षेत्रों में स्थित हॉस्टलों और पेइंग गेस्ट (PG) आवासों की रेकी की। इन जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था अक्सर ढीली होती है, जिसका फायदा उठाकर वह वहां से महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और कीमती घड़ियां चुरा लेता था।\n\nइन चोरी के सामानों को खुले बाजार में बेचने के लिए उसने एक बेहद आधुनिक और शातिर तरीका निकाला। आरोपी चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई (AI) टूल का उपयोग करता था ताकि प्रसिद्ध ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट और इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर लोटस के नकली बिल तैयार किए जा सकें। वह चैटजीपीटी की मदद से बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले इनवॉइस और बिल प्रिंट कर लेता था। इन जाली दस्तावेजों की वजह से खरीदारों को लगता था कि सामान वैध रूप से खरीदा गया है। इसके बाद वह बिना किसी डर के इंदौर के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों जैसे सिल्वर मॉल, यशवंत प्लाजा और डॉलर मार्केट में जाकर इन कीमती सामानों को दुकानदारों को बेच देता था और मोटी रकम कमाता था।\n\n \n\nबड़वानी प्लाजा के पास गिरफ्तारी और बरामदगी\n\nइस हाईटेक चोर की गतिविधियों पर विराम लगाने के लिए पलासिया थाना पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। 20 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बड़वानी प्लाजा के पास संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहा है। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे घेराबंदी करके दबोच लिया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा, तो उसने खुद को आयकर विभाग का मौजूदा अधिकारी बताकर पुलिस पर धौंस जमाने और कानूनी कार्रवाई से बचने का प्रयास किया।\n\nहालांकि, पुलिस ने जब उसके बैग की गहन तलाशी ली, तो उसकी पोल खुल गई। बैग के अंदर से ताले और कुंडी काटने के लिए इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोलिक कटर, पेचकस और अन्य मैकेनिकल उपकरण बरामद हुए। सख्ती से पूछताछ किए जाने पर आरोपी टूट गया और उसने शहर के विभिन्न इलाकों में की गई दर्जनों चोरियों की बात कबूल कर ली। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए 21 लैपटॉप, 4 टैबलेट, 4 मोबाइल फोन और 2 ब्रांडेड घड़ियां बरामद की हैं। बरामद किए गए इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बाजार में कुल कीमत लगभग 13 लाख रुपये आंकी गई है।\n\n \n\nतकनीक के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाएं\n\nयह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे तकनीकी रूप से सक्षम युवा अब अपराध के लिए आधुनिक उपकरणों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इंदौर में इस तरह तकनीक का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इंदौर पुलिस ने एक ऐसे शातिर छात्र को पकड़ा था जिसने चैटजीपीटी का उपयोग करके नकली नीट-यूजी (NEET-UG) का प्रश्नपत्र तैयार किया था और उसे असली पेपर बताकर कई छात्रों को मोटी रकम में बेचकर ठगा था। वर्तमान मामले में पुलिस अब उन दुकानदारों और कबाड़ियों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने जानते-बूझते या बिना उचित सत्यापन के इस इंजीनियर से चोरी के महंगे उपकरण खरीदे थे।\n\nइसका आप पर असर\n• राष्ट्रीय स्तर पर: यह घटना पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों और पेशेवरों के लिए सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाती है, और दर्शाती है कि कैसे तकनीकी रूप से सक्षम अपराधी चोरी की वस्तुओं को छिपाने के लिए जेनरेटिव एआई का उपयोग कर रहे हैं।\n• इंदौर में: पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों (जैसे सिल्वर मॉल और यशवंत प्लाजा) के दुकानदारों को पुराना सामान खरीदते समय बिलों की सघन जांच करने के प्रति सचेत किया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इंदौर पुलिस द्वारा पकड़े गए हाईटेक चोर की पहचान क्या है?\nआरोपी की पहचान 32 वर्षीय प्रतीक ताराचंद लिखार के रूप में हुई है, जिसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग (बी.टेक) की डिग्री है और वह नोएडा में आयकर विभाग में टैक्स असिस्टेंट के रूप में काम कर चुका है।\n\n2. आरोपी ने चोरी का रास्ता क्यों चुना?\nआरोपी ऑनलाइन ट्रेडिंग में भारी वित्तीय घाटे के कारण बड़े कर्ज में डूब गया था, जिससे उबरने के लिए उसने चोरी का रास्ता चुना।\n\n3. आरोपी चोरी के गैजेट्स बेचने के लिए चैटजीपीटी का उपयोग कैसे करता था?\nवह चैटजीपीटी की मदद से फ्लिपकार्ट और लोटस जैसी नामचीन कंपनियों के बिल्कुल असली दिखने वाले नकली बिल तैयार करता था ताकि दुकानदारों को चोरी के सामान पर संदेह न हो।\n\n4. पुलिस ने आरोपी के पास से क्या-क्या बरामद किया है?\nपुलिस ने आरोपी के कब्जे से 21 लैपटॉप, 4 टैबलेट, 4 मोबाइल फोन और 2 घड़ियां बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 13 लाख रुपये है।\n\n5. आरोपी को किस जगह से और कैसे गिरफ्तार किया गया?\nपलासिया पुलिस ने मुखबिर की सूचना और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को 20 जुलाई को बड़वानी प्लाजा के पास से पकड़ा। तलाशी में उसके बैग से कटर और पेचकस जैसे औजार मिले।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-24",
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    "इंदौर पुलिस",
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    "चैटजीपीटी धोखाधड़ी",
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    "नकली बिल घोटाला"
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