छतरपुर में टूटी टांग वाली बकरी को गोद में उठाकर एसपी दफ्तर पहुंचा बेबस ग्रामीण छतरपुर के एक ग्रामीण ने पड़ोसी पर बकरी की टांग तोड़ने और थाने द्वारा सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए सीधे एसपी कार्यालय में गुहार लगाई। अधिकारियों ने मेडिकल जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक ग्रामीण न्याय की आस में अपनी जख्मी बकरी को लेकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय जा पहुंचा। मंगलवार के दिन घटी इस घटना ने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पीड़ित का आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने लाठी से हमला कर उसकी बकरी का पैर तोड़ दिया। स्थानीय थाने में कोई सुनवाई न होने के बाद निराश होकर उसे जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी के चौखट पर दस्तक देनी पड़ी। वाहन पर चढ़ने को लेकर हुआ विवाद यह पूरा मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गौरा गांव से जुड़ा हुआ है। पीड़ित ग्रामीण दुबियालाल पटेल का कहना है कि उनकी बकरी घूमते हुए पड़ोस में खड़ी एक गाड़ी के ऊपर चढ़ गई थी। इसी बात से नाराज होकर पड़ोसी देवकीनंदन पटेल ने उस बेजुबान जानवर पर डंडे से जोरदार वार कर दिया। इस हमले के कारण बकरी की एक टांग टूट गई। जब दुबियालाल ने इस बेरहमी का विरोध किया, तो आरोपी ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए अभद्र व्यवहार किया। थाने में सुनवाई न होने पर एसपी के पास पहुंचा पीड़ित दुबियालाल पटेल के अनुसार, घटना की रात वह तुरंत न्याय मांगने सिविल लाइंस थाने पहुंचे थे। हालांकि, वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया। स्थानीय स्तर पर निराशा हाथ लगने के बाद दुबियालाल अपनी दर्द से कराहती बकरी को गोद में लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गए। वहां के उच्चाधिकारियों ने पीड़ित की परेशानी को सुना और तत्काल सिविल लाइंस थाना प्रभारी को आवश्यक कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए। पशु चिकित्सा परीक्षण और कानूनी कदम पुलिस अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि सबसे पहले घायल बकरी का उचित पशु चिकित्सा परीक्षण कराया जाए। डॉक्टर द्वारा तैयार की जाने वाली मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी। नियमों के मुताबिक इसमें आरोपी पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने से लेकर कानूनी वाद दायर करने तक के प्रावधान शामिल हैं। इससे पहले भी प्रदेश के सीहोर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार कंटेनर की टक्कर से 100 भेड़ों के मारे जाने का दर्दनाक हादसा सामने आया था, जिसकी जांच अभी पुलिस कर रही है। प्रशासन के दिशा-निर्देशों का संदर्भ पशुओं की सुरक्षा और कुर्बानी को लेकर राज्य प्रशासन ने पूर्व में भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सभी जिला कलेक्टरों और दंडाधिकारियों को कड़े नियम लागू करने को कहा गया था। इन निर्देशों में प्रमुख रूप से ये बातें शामिल थीं • समस्त कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी त्योहार के दौरान शासन के सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। • जानवरों की कुर्बानी से जुड़ा कोई भी ऑडियो अथवा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित न किया जाए। • कुर्बानी केवल प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्थलों पर ही की जाए और अपशिष्ट को नगरपालिका अथवा निगम के कंटेनरों में ही डाला जाए। • सफाई व्यवस्था बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की नैतिक और धार्मिक जिम्मेदारी मानी जाए। • किसी भी परिस्थिति में प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न दी जाए। • कुर्बानी स्थल को चारों तरफ से दीवार या टीनशेड से पूरी तरह सुरक्षित और बंद रखा जाए। • नमाज केवल ईदगाह अथवा मस्जिद परिसर में ही पढ़ी जाए और सड़कों पर नमाज पढ़ने से बचा जाए। इसका आप पर असर यह घटना दर्शाती है कि पशु क्रूरता के मामलों में भी पीड़ित नागरिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सीधे कानूनी मदद प्राप्त कर सकते हैं। • मध्य प्रदेश में: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं पर होने वाले हमलों और स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता की स्थिति में नागरिक सीधे जिला एसपी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे थाना स्तर पर मामलों को दबाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। • देश भर में: पशु पालकों और आम नागरिकों को यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि मवेशियों और पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचाना कानूनी अपराध है। किसी जानवर पर लाठी चलाने या चोट पहुंचाने पर पशु क्रूरता निवारण नियमों के तहत जुर्माना और मुकदमा दोनों संभव हैं। • शिकायत की प्रक्रिया: यदि स्थानीय थाना बेजुबान पशुओं पर हुए हमले की प्राथमिकी लिखने से मना करे, तो वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाया जा सकता है। इसके लिए अधिकृत सरकारी पशु चिकित्सक से मेडिकल जांच रिपोर्ट बनवाना अनिवार्य कदम होता है। • पशु स्वास्थ्य अधिकार: घायल पशु का चिकित्सकीय परीक्षण कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्य होता है। इस रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ दंडात्मक धाराएं तय की जा सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद पड़ोसी के वाहन पर बकरी के चढ़ जाने और उसके बाद हुए हिंसक विरोध के कारण उपजा, जिसे स्थानीय पुलिस द्वारा नजरअंदाज किए जाने से मामला बड़ा बन गया। • सीधा विवाद: गौरा गांव में दुबियालाल की बकरी पास में खड़े एक वाहन पर चढ़ गई थी, जिससे नाराज होकर वाहन मालिक या पड़ोसी देवकीनंदन पटेल ने उस पर लाठी चला दी। इस हमले से बकरी का पैर टूट गया और विरोध करने पर गाली-गलौज की गई। • पुलिस की लापरवाही: घटना की रात सिविल लाइंस थाने द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। थाने के इस टालमटोल वाले रवैये ने पीड़ित को विवश किया कि वह घायल बकरी को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे। • कार्रवाई का आधार: वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल थाना प्रभारी को जांच के आदेश दिए हैं और बकरी के पशु चिकित्सा परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद ही अगली कानूनी प्रक्रिया तय होगी। सवाल-जवाब 1. शिकायतकर्ता बकरी को लेकर एसपी कार्यालय क्यों गया? सिविल लाइंस थाने द्वारा प्राथमिकी दर्ज न किए जाने के बाद दुबियालाल पटेल न्याय मांगने सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। 2. आरोपी ने बकरी पर हमला क्यों किया? बकरी पास में खड़े एक वाहन पर चढ़ गई थी, जिससे नाराज होकर आरोपी ने डंडे से मारकर उसका पैर तोड़ दिया। 3. इस मामले में आरोपी कौन है? पीड़ित ने गौरा गांव निवासी अपने पड़ोसी देवकीनंदन पटेल पर बकरी की टांग तोड़ने और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है। 4. पुलिस अब आगे क्या कार्रवाई कर रही है? एसपी कार्यालय के निर्देश पर घायल बकरी का पशु चिकित्सा परीक्षण कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तय होगी। https://trendkia.com/madhya-pradesh/chhatarpur-men-tuti-tanga-vali-bakari-ko-goda-men-uthakara-sp-daphtara-pahuncha-bebasa-gramina-56232 TrendKia — Har trend, sabse pehle.