दारू, डीजे और दहेज से दूर रहें युवा, बड़वानी में सांसद गजेंद्र पटेल ने सामाजिक बदलाव पर दिया जोर मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी से सांसद गजेंद्र पटेल ने युवाओं को शराब, लाउड डीजे और दहेज की कुरीतियों से बचने की नसीहत दी है। उन्होंने पारंपरिक कलाकारों के संरक्षण और सामाजिक मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया। मध्य प्रदेश स्थित खरगोन-बड़वानी संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र सिंह पटेल ने सामाजिक विकृतियों और युवाओं की जीवनशैली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। बड़वानी में आयोजित एक जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी से अपने जीवन में ‘3डी’ यानी दारू, डीजे और दहेज से पूरी तरह दूरी बनाने का आह्वान किया। उनका मानना है कि ये तीनों कुरीतियां आज के युवाओं को उनके वास्तविक लक्ष्यों से भटका रही हैं और उनके भविष्य को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। युवाओं की आदतों और डीजे संस्कृति पर आंकड़े कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए गजेंद्र पटेल ने समाज को इन तीनों चुनौतियों की गंभीरता को गहराई से समझने की सलाह दी। उन्होंने आयोजनों में बजने वाले डीजे साउंड सिस्टम को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने रखा। सांसद ने कहा कि डीजे की धुनों पर थिरकने वाले युवाओं में करीब 100 प्रतिशत सनातनी होते हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत युवा नशे की हालत में नाचते हैं। इस स्थिति पर गहरी आपत्ति जताते हुए उन्होंने युवाओं को मादक पदार्थों और नशे से दूर रहकर एक स्वस्थ, मर्यादित और अनुशासित जीवनशैली अपनाने की सख्त सलाह दी। दहेज प्रथा का विरोध और पारंपरिक वाद्यों की वकालत शादी-ब्याह और उत्सवों के बदलते तौर-तरीकों पर चर्चा करते हुए सांसद ने दहेज प्रथा को समाज की जड़ों को खोखला करने वाली बुराई करार दिया। उन्होंने कहा कि वैवाहिक और सामाजिक समारोहों को सादगी और गरिमा के साथ आयोजित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने डीजे संस्कृति के बढ़ते चलन के स्थान पर पारंपरिक गाजे-बाजे और वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। पटेल का कहना था कि तेज आवाज वाले डीजे के अत्यधिक उपयोग के कारण पारंपरिक लोक कलाकारों की आजीविका और रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो रहा है, जिसे बचाना समाज का कर्तव्य है। सामाजिक सुधार और जनसंख्या पर सांसद के विचार गजेंद्र पटेल ने उपस्थित जनसमूह के सामने ‘3डी’ जागरूकता अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक अथवा सामाजिक उत्सव में उल्लास के साथ-साथ मर्यादा का पालन होना बेहद आवश्यक है। नशामुक्ति और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए उन्होंने युवाओं से आगे आकर सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। बड़वानी के इस कार्यक्रम में सांसद ने युवाओं को दिखावे से बचने की सीख देने के अलावा यह सलाह भी दी कि सनातनियों की संख्या बढ़ाने के लिए हिंदू पांच बच्चे पैदा करें। इसके अलावा उन्होंने हिंदुओं को अपने पास हथियार रखने की बात भी कही। मुख्य रूप से आदिवासी और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले इस अंचल में उनके इस संबोधन को सामाजिक जागरूकता और कुरीतियों के खात्मे की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका आप पर असर यह बयान शादी-विवाह और सार्वजनिक उत्सवों में फिजूलखर्ची, नशे और शोर-शराबे पर रोक लगाने की सामाजिक पहल से जुड़ा है। • मध्य प्रदेश में: बड़वानी और खरगोन के ग्रामीण अंचलों में सामाजिक आयोजनों के दौरान डीजे के इस्तेमाल और शराब पर रोक लगाने के लिए स्थानीय पंचायतें कड़े नियम बना सकती हैं। इससे शादी-विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्चों में कमी आएगी और पारंपरिक बैंड-बाजा वादकों को काम मिलने में मदद होगी। • पारंपरिक कलाकारों पर: आयोजनों में आधुनिक डीजे साउंड की जगह पारंपरिक वाद्ययंत्रों को तरजीह मिलने से स्थानीय लोक कलाकारों की आजीविका सुरक्षित होगी। इससे क्षेत्रीय संगीत परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा और कारीगरों की नियमित कमाई बनी रहेगी। • युवाओं के जीवन पर: नशामुक्ति और अनुशासित दिनचर्या अपनाने की सलाह युवाओं को स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक बर्बादी से बचा सकती है। इससे युवाओं का ध्यान अपनी पढ़ाई और करियर निर्माण की ओर केंद्रित करने में मदद मिलेगी। • पारिवारिक स्तर पर: दहेज के विरोध से बेटियों के परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और विवाह समारोह सादगी से संपन्न होंगे। इससे समाज में फिजूलखर्ची और दिखावे की होड़ पर अंकुश लग सकेगा। ऐसा क्यों हुआ बड़वानी के कार्यक्रम में सांसद गजेंद्र पटेल ने यह संबोधन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से पैर पसार रही सामाजिक बुराइयों और युवाओं में बढ़ती नशे की लत को देखते हुए दिया। • नशे और डीजे का बढ़ता चलन: धार्मिक और वैवाहिक जुलूसों में लाउड डीजे सिस्टम के दौरान शराब पीकर हुड़दंग करने की बढ़ती घटनाओं ने इस अपील की सीधी पृष्ठभूमि तैयार की। सांसद के अनुसार इस माहौल में युवा अपने प्राथमिक लक्ष्यों से भटक रहे हैं। • पारंपरिक कलाकारों की बदहाली: आधुनिक डीजे साउंड सिस्टम के अत्यधिक उपयोग से पारंपरिक ढोल, बाजे और लोक वाद्य बजाने वाले स्थानीय कलाकारों का काम छिन रहा था। इसी नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने पारंपरिक संगीत को दोबारा अपनाने का मुद्दा उठाया। • दहेज और दिखावे की कुरीति: सामाजिक समारोहों में दिखावे की होड़ और दहेज प्रथा के कारण गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को रोकने के लिए इस सुधार की जरूरत बताई गई। • जनसांख्यिकीय विचार: समाज को संगठित और मजबूत करने के उद्देश्य से सांसद ने सनातन परंपराओं के संरक्षण, जनसंख्या वृद्धि और व्यक्तिगत सुरक्षा के पहलुओं को अपने भाषण में शामिल किया। सवाल-जवाब 1. सांसद गजेंद्र पटेल के अनुसार ‘3डी’ का क्या अर्थ है? सांसद गजेंद्र पटेल के अनुसार ‘3डी’ का अर्थ दारू, डीजे और दहेज है, जिससे उन्होंने युवाओं को दूर रहने की सलाह दी है। 2. डीजे पर नाचने वाले युवाओं को लेकर सांसद ने क्या आंकड़ा दिया? उन्होंने दावा किया कि डीजे पर नाचने वाले युवाओं में करीब 100 प्रतिशत सनातनी होते हैं और उनमें से लगभग 60 प्रतिशत नशे की हालत में नाचते हैं। 3. गजेंद्र पटेल ने पारंपरिक गाजे-बाजे अपनाने पर क्यों जोर दिया? उन्होंने कहा कि डीजे के अत्यधिक इस्तेमाल से पारंपरिक कलाकारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है, इसलिए पारंपरिक गाजे-बाजे को बढ़ावा देना चाहिए। 4. सांसद ने हिंदुओं को क्या अतिरिक्त सलाह दी? उन्होंने सलाह दी कि सनातनी संख्या बढ़ाने के लिए हिंदू पांच बच्चे पैदा करें और साथ ही हथियार भी रखें। https://trendkia.com/madhya-pradesh/daru-dije-aura-daheja-se-dura-rahen-yuva-barwani-men-sansada-gajendra-patel-ne-samajika-badalava-para-diya-jora-43302 TrendKia — Har trend, sabse pehle.