डिंडौरी में चार साल से मजदूरी का भुगतान बकाया, दो मजदूरों की मौत के बाद भी परिजन दर-दर भटकने को मजबूर मध्य प्रदेश के डिंडौरी में अमृत सरोवर योजना के तहत बने चेकडैम की मजदूरी चार साल से नहीं मिली है। बकाया राशि के लिए भटक रहे मजदूरों में से दो की जान जा चुकी है, जबकि प्रशासन अब जांच का भरोसा दे रहा है। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित करंजिया विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत करंजिया के बूटिया टोला में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां निर्माण कार्य में जुटे श्रमिक पिछले चार वर्षों से अपनी मेहनत की कमाई मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक भुगतान नहीं मिल सका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2022 के दौरान अमृत सरोवर योजना के तहत सुनाड़ी नाला पर एक चेकडैम का निर्माण शुरू किया गया था। इस परियोजना की लागत लगभग 29 लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसके तहत दर्जनों लोगों ने अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, काम पूरा होने के बरसों बाद भी यह चेकडैम आज भी अधूरा पड़ा हुआ है और मजदूरों के हिस्से की मजदूरी का भुगतान अधर में लटका है। लंबे इंतजार के बाद भी केवल खोखले वादे पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि उस दौरान आरईएस विभाग में कार्यरत उपयंत्री विजेंद्र सारिवान से उन्होंने भुगतान के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर लौटा दिया गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 45 मजदूरों की मेहनत के 2 लाख रुपये आज भी बकाया हैं। इस पूरे प्रकरण का सबसे दुखद पहलू यह है कि इस लंबी अवधि के दौरान काम करने वाले कई मजदूरों की मृत्यु हो चुकी है। उनके परिवार अब भी उस बकाया राशि को पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है और वे अपनी वाजिब मांग के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। प्रशासन का रुख और कलेक्टर की प्रतिक्रिया अपनी समस्या को लेकर परेशान मजदूरों और उनके परिजनों ने अब प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि न केवल उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान अविलंब किया जाए, बल्कि वर्षों से अधूरा पड़े चेकडैम के निर्माण कार्य को भी शीघ्र पूर्ण करवाया जाए। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए डिंडौरी की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने संज्ञान लिया है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इस संदर्भ में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ग्रामीणों द्वारा मजदूरी भुगतान में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि मामला अब उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने जानकारी दी कि जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान जल से संबंधित कार्यों के लंबित बिलों की प्रक्रिया पूरी कराई गई थी और जनपद सीईओ द्वारा बिल भी लगा दिए गए थे। इसके बावजूद अगर मजदूरों तक धनराशि नहीं पहुंच सकी है, तो यह निश्चित रूप से एक गंभीर विषय है। कलेक्टर ने जिला पंचायत के सीईओ के माध्यम से विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चेकडैम बनने के बाद भी मजदूरों का भुगतान क्यों रुका हुआ है। इसका आप पर असर भारत में: सरकारी योजनाओं के तहत काम करने वाले श्रमिक भुगतान में देरी होने पर जिले के कलेक्टर कार्यालय या संबंधित जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डिंडौरी में: बूटिया टोला के प्रभावित ग्रामीण अब जिला पंचायत सीईओ द्वारा की जा रही जांच की निगरानी कर सकते हैं ताकि बकाया राशि का जल्द भुगतान सुनिश्चित हो सके। सवाल-जवाब 1. डिंडौरी में मजदूरों का पैसा क्यों रुका है? वर्ष 2022 में अमृत सरोवर योजना के तहत बने चेकडैम का काम अधूरा है और मजदूरों का करीब 2 लाख रुपये का भुगतान पिछले चार साल से अटका हुआ है। 2. कितने मजदूरों को मजदूरी मिलनी बाकी है? करीब 45 मजदूरों की मजदूरी का भुगतान अभी भी बकाया है। 3. क्या इस मामले में किसी अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठे हैं? ग्रामीणों ने तत्कालीन आरईएस विभाग के उपयंत्री विजेंद्र सारिवान पर टालमटोल करने का आरोप लगाया है। 4. कलेक्टर ने इस पर क्या कदम उठाया है? डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने जिला पंचायत सीईओ को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है ताकि पता चल सके कि भुगतान क्यों नहीं हुआ। https://trendkia.com/madhya-pradesh/dindori-men-chara-sala-se-majaduri-ka-bhugatana-bakaya-do-majaduron-ki-mauta-ke-bada-bhi-parijana-dara-dara-bhatakane-ko-majabura-7454 TrendKia — Har trend, sabse pehle.