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  "type": "article",
  "title": "अल नीनो की मार से मध्य प्रदेश में बारिश घटने का डर, मानसून पिछड़ा तो किसानों की बढ़ी बेचैनी",
  "summary": "मध्य प्रदेश में मानसून तय वक्त से करीब 11 दिन लेट है और अल नीनो के असर से इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, जिससे खरीफ की फसल और किसानों की चिंता बढ़ गई है।",
  "content": "जून का महीना आधे से ज्यादा बीत चुका है और बुंदेलखंड के सागर में अब तक सिर्फ ढाई इंच बारिश ही दर्ज हो पाई है। प्री मानसून की हलचल जरूर शुरू हो गई है, लेकिन मानसून अपने तय समय से करीब 11 दिन पिछड़ कर चल रहा है। ऊपर से मौसम विभाग ने अल नीनो के चलते इस साल कम बारिश की आशंका जता दी है, जिसने खेती पर निर्भर किसानों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अल नीनो है क्या और इसका असर आपकी फसल पर कितना पड़ेगा।\n\nसागर कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव इसे आसान भाषा में समझाते हैं। उनके मुताबिक प्रशांत महासागर में अल नीनो प्रभाव के कारण समुद्र के बीच का पानी गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर पूर्वी तट और दक्षिण से लेकर पश्चिम तक चलने वाले मानसून पर पड़ता है। इसी वजह से आईएमडी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने आशंका जताई है कि अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश होगी। यही अल नीनो इफेक्ट कहलाता है और इसी के चलते बारिश घटने की संभावना बन रही है।\n\nमध्य प्रदेश में 11 दिन देरी से पहुंचा मानसून\nडॉक्टर यादव बताते हैं कि अगर पानी कम गिरा तो सबसे पहले बुवाई का समय और पूरा मौसम चक्र गड़बड़ा जाएगा। मानसून पहले ही लेट हो चुका है और बुंदेलखंड के 60 से 70 फीसदी किसान सीधे बारिश के भरोसे खेती करते हैं। आम तौर पर यहां मानसून 15 जून से 21 जून के बीच आ जाता है। सोयाबीन की बुवाई की बात करें तो ऐसी हालत में किसान पहले ही पिछड़ जाएंगे।\n\nदूसरी बड़ी दिक्कत यह है कि अल नीनो तापमान को काफी ऊपर बनाए रखता है। बीच-बीच में सूखे का दौर बढ़ता है और मुमकिन है कि 15 से 20 दिन तक एक बूंद पानी न गिरे। ऐसे में फसलों पर सूखे का असर पड़ेगा, पॉलिनेशन घटेगा, फलियां कम बनेंगी और कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ जाएगा। इससे पूरा मौसम चक्र बिगड़ता है, और खरीफ लेट हुई तो उसका असर आगे रबी सीजन पर भी साफ दिखाई देगा।\n\nसोयाबीन, मक्का और उड़द वाले किसान रखें ध्यान\nएक्सपर्ट की सलाह है कि सोयाबीन, मक्का और उड़द की खेती करने वाले किसान इस वक्त खास सावधानी बरतें। सबसे जरूरी बात यह है कि बुवाई तभी करें जब मानसून आने पर 75 से 100 एमएम तक पानी गिर जाए। किसानों को तीन बातें जरूर गांठ बांध लेनी चाहिए। पहली, कम अवधि की फसल लगाएं। अगर सोयाबीन लगाना है तो उसे 10 जुलाई तक लगा दें और 90 दिन वाली वैरायटी का इस्तेमाल करें। दूसरी, बीज उपचार जरूर करें। और तीसरी, पीएसबी और राइजोबियम कल्चर से बीज का उपचार करें।\n\nचार महीने में 1230 एमएम बारिश का गणित\nअल नीनो का सबसे ज्यादा खतरा जिन जिलों पर बताया जा रहा है, उनमें धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, खंडवा और इनके आसपास के इलाके शामिल हैं। सागर मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक विवेक छलोत्रे बताते हैं कि सागर में मानसून सीजन के चार महीनों में 1230 एमएम बारिश होती है। निदेशालय की ओर से 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, यानी इस बार करीब 130 एमएम बारिश कम हो सकती है।\n\nछलोत्रे के मुताबिक आंकड़े भी डराने वाले हैं। सागर में जब-जब नौ बार अल नीनो देखा गया है, उनमें से छह बार जिले में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। शुरुआत में तो पानी गिरता रहेगा, लेकिन बाद के महीनों में बारिश घटेगी और इसका सीधा असर फसलों पर पड़ सकता है। इसी वजह से किसानों को 80 से 85 दिन वाली वैरायटी इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा मौसम विभाग के मोबाइल ऐप दामिनी और मेघदूत भी किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, जिससे खरीफ की पैदावार घट सकती है और बारिश पर निर्भर किसानों की लागत व जोखिम दोनों बढ़ेंगे।\n• मध्य प्रदेश में: धार, झाबुआ, सागर, छतरपुर समेत कई जिलों के किसान तभी बुवाई करें जब 75 से 100 एमएम पानी गिर जाए, और सोयाबीन के लिए 90 दिन वाली कम अवधि की वैरायटी 10 जुलाई तक लगा लें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मध्य प्रदेश में मानसून कितने दिन लेट है?\nमानसून अपने तय समय से करीब 11 दिन पिछड़ कर चल रहा है। आम तौर पर यहां यह 15 से 21 जून के बीच आ जाता है।\n\n2. अल नीनो की वजह से कितनी कम बारिश का अनुमान है?\nआईएमडी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश हो सकती है।\n\n3. सागर में मानसून सीजन में कितनी बारिश होती है?\nसागर में चार महीने के मानसून सीजन में 1230 एमएम बारिश होती है, और इस बार करीब 130 एमएम कम बारिश का अनुमान है।\n\n4. किसानों को बुवाई कब करनी चाहिए?\nकिसानों को सलाह है कि बुवाई तभी करें जब मानसून आने पर 75 से 100 एमएम तक पानी गिर जाए।\n\n5. सोयाबीन की बुवाई के लिए क्या सलाह है?\nसोयाबीन को 10 जुलाई तक लगा लें और 90 दिन वाली कम अवधि की वैरायटी का इस्तेमाल करें, साथ ही बीज उपचार जरूर करें।\n\n6. अल नीनो का सबसे ज्यादा खतरा किन जिलों पर है?\nधार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, खंडवा और आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।\n\n7. किसानों के लिए कौन से मोबाइल ऐप मददगार हैं?\nमौसम विभाग के मोबाइल ऐप दामिनी और मेघदूत किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-06-24",
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    "अल नीनो",
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