गिफ्ट पार्सल के बहाने घर से निकाला, 35 साल पहले के हत्याकांड का फरार आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार ग्वालियर पुलिस ने गिफ्ट पार्सल का झांसा देकर 35 साल पुराने हत्याकांड के दोषी जगदीश आर्य को दिल्ली के जहांगीरपुरी से गिरफ्तार किया। वह पिछले दो साल से फरार चल रहा था। ग्वालियर पुलिस को एक ऐसे अपराधी की तलाश थी जो पिछले दो साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था, और आखिरकार उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने दिल्ली की गलियों में एक पूरी स्क्रिप्ट तैयार की। मामला 35 साल पुराने हत्याकांड से जुड़ा था और मुजरिम का नाम जगदीश आर्य था, जो उम्रकैद की सजा से बचने के लिए राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में जा छिपा था। दिल्ली में पांच दिन की रेकी और गिफ्ट पार्सल का झांसा जगदीश आर्य जहांगीरपुरी में पहचान छिपाकर सिलाई का काम कर रहा था ताकि किसी को शक न हो। जैसे ही ग्वालियर पुलिस को उसके छिपने के ठिकाने का पक्का सुराग मिला, एक खास टीम दिल्ली रवाना कर दी गई। यह टीम पांच दिनों तक अलग अलग भेष बदलकर इलाके पर नजर रखती रही, कभी कबाड़ी बनकर तो कभी आम राहगीर की तरह गलियों में घूमकर उसकी शिनाख्त पक्की की गई। जगदीश खुद भी बेहद चौकन्ना था और आसानी से घर से बाहर नहीं निकलता था, इसलिए पुलिस को उसे बाहर बुलाने के लिए एक तरकीब सोचनी पड़ी। आखिरकार वर्दी की जगह पुलिस के जवान डिलीवरी वाले की वेशभूषा में उसके दरवाजे पर पहुंचे और आवाज लगाई कि उसके नाम से एक पार्सल आया है। गिफ्ट के लालच में जगदीश जैसे ही बाहर निकला, पहले से घेरा डाले खड़े जवानों ने उसे तुरंत काबू में ले लिया। 1991 में बिरलानगर में हुई थी नंदू की हत्या यह पूरा मामला साल 1991 का है, जब ग्वालियर के बिरलानगर इलाके में रहने वाले नंदू नाम के एक शख्स की बेरहमी से जान ले ली गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे नंदू का पड़ोसी जगदीश आर्य, उसका भाई टीकाराम और कुछ अन्य लोग शामिल थे। सभी ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद ग्वालियर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और जांच पूरी होने पर जगदीश समेत बाकी आरोपियों को जेल भेज दिया गया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत करीब एक दशक बाद, साल 2001 में ग्वालियर की जिला अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए जगदीश, टीकाराम और बाकी आरोपियों को दोषी करार दिया और सबको आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इस बीच आरोपियों को कुछ समय के लिए जमानत मिल गई, जिसका फायदा उठाकर जगदीश ने अपनी सजा को चुनौती देने का फैसला किया। उसने पहले हाईकोर्ट का रुख किया और वहां राहत न मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले गया, लेकिन दोनों ही अदालतों ने निचली अदालत की सजा को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जब कानूनी तौर पर बचने का हर रास्ता बंद हो गया, तो जगदीश ने खुद को छिपा लिया और अंडरग्राउंड होकर रहने लगा। पुलिस पिछले दो साल से उसकी तलाश में जुटी हुई थी। एएसपी जयराज कुबेर ने बताया कि टीम आरोपी को पकड़कर दिल्ली से ग्वालियर वापस ले आई है। इसका आप पर असर यह गिरफ्तारी दिखाती है कि पुराने मामलों में फरार आरोपी भी हमेशा के लिए बचकर नहीं रह सकते। • भारत में: यह मामला बताता है कि दशकों पुरानी वारदातों के भगोड़ों की तलाश आज भी जारी रहती है, जिससे पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिलने का भरोसा बढ़ता है। • ग्वालियर में: स्थानीय पुलिस की इस कार्रवाई से शहर के पुराने लंबित मामलों की फाइलें दोबारा खंगाले जाने और भगोड़ों पर शिकंजा कसने का रास्ता खुलता है। सवाल-जवाब 1. गिरफ्तार आरोपी का नाम क्या है? आरोपी का नाम जगदीश आर्य है, जो हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। 2. उसे कहां से गिरफ्तार किया गया? उसे दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से गिरफ्तार किया गया, जहां वह सिलाई का काम कर रहा था। 3. जगदीश आर्य कितने समय से फरार था? वह करीब दो साल से पुलिस से बचते हुए फरार चल रहा था। 4. यह हत्या का मामला कब का है? यह मामला साल 1991 का है, जब ग्वालियर के बिरलानगर में नंदू नाम के व्यक्ति की हत्या हुई थी। 5. अदालत ने सजा कब सुनाई थी? साल 2001 में ग्वालियर जिला अदालत ने जगदीश, टीकाराम और अन्य को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 6. क्या हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उसे राहत मिली? नहीं, दोनों अदालतों ने निचली अदालत की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। 7. पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए क्या तरकीब अपनाई? पुलिस के जवान डिलीवरी बॉय बनकर उसके घर पहुंचे और गिफ्ट पार्सल आने का बहाना बनाकर उसे बाहर बुलाया। https://trendkia.com/madhya-pradesh/giphta-parsala-ke-bahane-ghara-se-nikala-35-sala-pahale-ke-hatyakanda-ka-pharara-aropi-delhi-se-giraphtara-9106 TrendKia — Har trend, sabse pehle.