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  "type": "article",
  "title": "ग्वालियर के एक पते से बांग्लादेशी नागरिकों को मिलते रहे भारतीय पासपोर्ट, STF की जांच में चौंकाने वाला खुलासा",
  "summary": "मध्य प्रदेश STF ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने फर्जी आधार, वोटर आईडी और अन्य कागजात के दम पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाए, जांच में अब तक करीब 70 पासपोर्ट शक के दायरे में हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश से पासपोर्ट को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें एक गिरोह पर बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी कागजी पहचान तैयार करने और उसी के दम पर उनके नाम असली भारतीय पासपोर्ट बनवाने का आरोप है। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है, और अब तक की जांच की सुई बार-बार ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के एक ही पते पर आकर टिक रही है। इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि पासपोर्ट बनने से पहले होने वाली दस्तावेज जांच और पुलिस वेरिफिकेशन आखिर कितनी पुख्ता है, क्योंकि ये सभी पासपोर्ट पहले ही इस प्रक्रिया से गुजर चुके थे।\n\nसिर्फ एक नहीं, पूरी कागजी पहचान गढ़ी गई\nजांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने केवल एक दस्तावेज नहीं बनवाया, बल्कि पूरी की पूरी पहचान कागज पर खड़ी कर दी, आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और यहां तक कि 10वीं की अंकसूची भी, ताकि रिकॉर्ड में विदेशी नागरिक बरसों से भारत में रहने वाला व्यक्ति नजर आए। यही कागजी पहचान बाद में पासपोर्ट आवेदन और उसकी मंजूरी का आधार बनी। STF का कहना है कि जांच जितनी आगे बढ़ रही है, फर्जीवाड़े का दायरा उतना ही बड़ा नजर आ रहा है। आम तौर पर जिन दस्तावेजों के जरिए कोई भी भारतीय नागरिक अपनी पहचान और पता साबित करता है, उन्हीं का इस तरह गलत इस्तेमाल हो जाना बताता है कि गिरोह ने सिस्टम की किस कमजोर कड़ी का फायदा उठाया।\n\nकरीब 70 पासपोर्ट जांच के दायरे में\nशुरुआती जांच के मुताबिक अलग-अलग पतों से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के सहारे करीब 70 पासपोर्ट बनवाए जाने की बात सामने आई है। इनमें से 20 पासपोर्ट खासतौर पर उन बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े हैं, जिनके दस्तावेजों में डबरा स्थित बौद्ध विहार का पता दर्ज है। इन सभी 20 पासपोर्ट में गवाह के तौर पर एक ही नाम दर्ज है, रियाल चौधरी। STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी कागजात तैयार करने से लेकर पासपोर्ट प्रक्रिया पूरी कराने तक हर कदम पर कौन-कौन शामिल था।\n\nपांच साल पुराने भी हैं कुछ फर्जी पासपोर्ट\nजांच अधिकारियों के मुताबिक डबरा वाले पते से जुड़े ये 20 पासपोर्ट करीब पांच साल पहले बनवाए गए थे, यानी हो सकता है यह तरीका पकड़ में आने से पहले लंबे समय तक इस्तेमाल होता रहा हो। इनके अलावा अब 44 और पासपोर्ट भी जांच में जुड़ गए हैं, जिससे कुल आंकड़ा और बढ़ गया है। STF अब तक मिले दस्तावेजों और रिकॉर्ड के सहारे यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने लोगों ने भारतीय पहचान हासिल की और यह पूरा नेटवर्क आखिर किस स्तर पर चलाया जा रहा था।\n\nदो आरोपी गिरफ्त में, बाकी गिरोह की तलाश जारी\nSTF अब तक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इन दोनों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के बाकी सदस्यों और उनकी भूमिका का पता लगाया जा रहा है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर किन लोगों ने फर्जी पहचान बनाने में मदद की, और क्या पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कहीं मिलीभगत या लापरवाही भी हुई, जिसकी वजह से यह फर्जीवाड़ा इतने समय तक पकड़ में नहीं आया।\n\nबड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के एंगल से भी पड़ताल\nमामले की गंभीरता को देखते हुए STF अब यह भी खंगाल रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तो सक्रिय नहीं, जो बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट दिलाने का काम बड़े पैमाने पर कर रहा हो। पासपोर्ट किसी भी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा और कानूनी रूप से मान्य पहचान दिलाता है, इसलिए नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में इस तरह की जालसाजी का असर सीधे जुड़े लोगों से कहीं आगे तक जाता है। जांच की अगुवाई STF के उप पुलिस महानिरीक्षक राहुल लोढ़ा कर रहे हैं, और अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।\n\nइसका आप पर असर\nइस मामले का सीधा असर पासपोर्ट और पहचान दस्तावेजों की जांच-पड़ताल की सख्ती पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: इस खुलासे के बाद पासपोर्ट आवेदन में लगने वाले आधार, वोटर आईडी और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की जांच और सख्त हो सकती है। नए आवेदकों को पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान अतिरिक्त सवालों या देरी का सामना करना पड़ सकता है।\n• ग्वालियर और मध्य प्रदेश में: डबरा तहसील के जिस पते और गवाह के नाम का बार-बार इस्तेमाल हुआ, वहां से जुड़े पुराने दस्तावेजों और पासपोर्ट रिकॉर्ड की दोबारा जांच हो सकती है। जिन लोगों ने इस दौरान वहां से पासपोर्ट या पहचान पत्र बनवाए हैं, उन्हें भी पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।\n• गवाह बनने में सावधानी: किसी भी सरकारी दस्तावेज पर बतौर गवाह दस्तखत करने से पहले उसकी सत्यता जरूर परखें, क्योंकि फर्जी दस्तावेजों में नाम आने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।\n• पासपोर्ट प्रक्रिया पर असर: STF की जांच पूरी होने तक इस मामले से जुड़े इलाकों में पासपोर्ट सत्यापन में सामान्य से ज्यादा वक्त लग सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह फर्जीवाड़ा तब संभव हुआ जब असली भारतीय नागरिकों की पहचान साबित करने वाले दस्तावेजों की तर्ज पर नकली कागजात बनाकर उन्हें विदेशी नागरिकों के नाम पर तैयार करवाया गया।\n\n• दस्तावेजों की जालसाजी: आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे बुनियादी दस्तावेज कूटरचित कर बांग्लादेशी नागरिकों को कागज पर भारतीय नागरिक दिखाया गया।\n• एक ही पते और गवाह का बार-बार इस्तेमाल: डबरा के बौद्ध विहार का पता और गवाह के तौर पर एक ही नाम, रियाल चौधरी, बार-बार दर्ज होने से जांच एजेंसी को एक साथ कई पासपोर्ट पकड़ में आए, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह किसी संगठित तरीके से किया गया।\n• लंबे समय तक न पकड़ में आना: इनमें से कई पासपोर्ट करीब पांच साल पहले बनवाए गए थे, यानी यह तरीका लंबे समय तक बिना पकड़े इस्तेमाल होता रहा।\n• सिस्टम में चूक की जांच जारी: STF यह भी पता लगा रही है कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कहीं मिलीभगत या लापरवाही हुई या नहीं, हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह फर्जीवाड़ा किस पते से जुड़ा है?\nग्वालियर जिले की डबरा तहसील में स्थित बौद्ध विहार के पते से जुड़े दस्तावेजों के जरिए यह मामला सामने आया।\n\n2. कुल कितने पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं?\nकरीब 70 पासपोर्ट जांच के घेरे में हैं, जिनमें से 20 बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े हैं और अब 44 अन्य भी इसमें शामिल हो गए हैं।\n\n3. इन पासपोर्ट में गवाह के तौर पर किसका नाम दर्ज है?\nबांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े सभी 20 पासपोर्ट में गवाह के तौर पर रियाल चौधरी का नाम दर्ज है।\n\n4. इन 20 पासपोर्ट के लिए कौन-कौन से फर्जी दस्तावेज बनाए गए?\nआधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेज कूटरचित कर तैयार किए गए।\n\n5. अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?\nSTF ने अब तक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बाकी की तलाश जारी है।\n\n6. जांच की अगुवाई कौन कर रहा है?\nSTF के उप पुलिस महानिरीक्षक राहुल लोढ़ा के नेतृत्व में यह जांच चल रही है।\n\n7. डबरा पते से जुड़े पासपोर्ट कब बनवाए गए थे?\nजांच अधिकारियों के मुताबिक ये 20 पासपोर्ट करीब पांच साल पहले बनवाए गए थे।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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