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  "type": "article",
  "title": "इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की सख्त शर्त, 62,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पाने के लिए भारतीय ब्रांड्स को खुद विकसित करने होंगे मौलिक फोन डिजाइन",
  "summary": "इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि 62,500 करोड़ रुपये की एमपीएमएस प्रोत्साहन योजना का लाभ उठाने के लिए भारतीय मोबाइल निर्माताओं को अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों वाले मौलिक डिजाइन तैयार करने होंगे।",
  "content": "देश में अगले 10 से 14 महीनों के भीतर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और स्थानीय डिजाइन पर आधारित मोबाइल फोन बाजार में उतरने की तैयारी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ किया है कि केंद्र सरकार की 62,500 करोड़ रुपये की 'मोबाइल फोन विनिर्माण योजना' (MPMS) का वित्तीय लाभ लेने के लिए भारतीय कंपनियों को अपने खुद के मौलिक फोन डिजाइन तैयार करने होंगे। इसके साथ ही कंपनियों के पास उन डिजाइनों के पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार (IP राइट्स) भी होने चाहिए। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी दूसरी कंपनी या विदेशी ब्रांड के प्रोडक्ट की नकल करने वाले निर्माताओं को इस योजना में प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।\n\nडिजाइन और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर सख्त सरकारी रुख\nयोजना के विस्तृत ब्योरे साझा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना में आवेदन करने वाली हर भारतीय कंपनी को यह साबित करना होगा कि विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले डिजाइन का बौद्धिक संपदा अधिकार उनका अपना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी ब्रांड विकसित करने की प्रक्रिया में डिजाइन के मूल्यांकन को लेकर सरकार कोई ढील नहीं बरतेगी। तीन घरेलू कंपनियों को अपने डिजाइन विकल्प पेश करने के लिए चुना गया है। मंत्री के अनुसार, इन तीनों भारतीय कंपनियों में यह क्षमता देखी गई है कि वे अगले 10 से 14 महीनों में अपने खुद के डिजाइन और विश्वस्तरीय मानकों के साथ बाजार में कदम रख सकती हैं।\n\nभारतीय मोबाइल फोन विनिर्माण का वर्तमान परिदृश्य\nवर्तमान समय में भारत के भीतर पूरी तरह से डिजाइन किया गया कोई भी स्मार्टफोन व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं है। हालांकि लावा इंटरनेशनल और एआई प्लस जैसी घरेलू मोबाइल कंपनियां यह दावा जरूर करती हैं कि वे अपने स्मार्टफोन की डिजाइनिंग स्थानीय स्तर पर ही करती हैं, लेकिन उद्योग का बड़ा हिस्सा अब भी विदेशी डिजाइन पर निर्भर है। सरकार की नई नीति का उद्देश्य इसी निर्भरता को समाप्त करना और देश में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का मजबूत आधार तैयार करना है।\n\nMPMS योजना का दो-स्तरीय ढांचा और पात्रता शर्तें\n62,500 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है\n\n• टार्गेट सेग्मेंट 1 (TS1): यह हिस्सा बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन के समग्र निर्माण को गति देने के लिए है। इसमें वे इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां और मोबाइल निर्माता पात्र होंगे, जिनका पिछले वित्तवर्ष में कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का कुल कारोबार रहा है।\n• टार्गेट सेग्मेंट 2 (TS2): यह श्रेणी विशेष रूप से भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन देने के लिए बनाई गई है। इसके तहत आवेदन करने वाली कंपनियों में कम से कम 51 प्रतिशत भारतीय स्वामित्व होना अनिवार्य है। इसके अलावा, वित्तवर्ष 2025-26 में कंपनी का न्यूनतम कारोबार 1,000 करोड़ रुपये होना चाहिए।\n\nयोजना के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन जारी रखने के लिए TS2 में शामिल मौजूदा ब्रांड्स को लगातार विकास दिखाना होगा। इन कंपनियों को वित्तवर्ष 2025-26 के अपने कुल कारोबार के आधार स्तर से हर साल कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री दर्ज करानी होगी।\n\nघरेलू ब्रांड इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करने की योजना\nभारतीय मोबाइल बाजार के इतिहास पर बात करते हुए वैष्णव ने स्वीकार किया कि भारत में पहले मोबाइल निर्माण का एक अच्छा परिवेश मौजूद था। लेकिन कर संबंधी जटिलताओं और चीनी कंपनियों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय ब्रांडों के लिए बाजार में बने रहना कठिन हो गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि MPMS के नए दिशानिर्देशों से भारतीय कंपनियों को अपनी मौलिक बौद्धिक संपदा तैयार करने और घरेलू ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में नई ऊर्जा मिलेगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: 62,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना से घरेलू मोबाइल फोन विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीक से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।\n\nउपभोक्ताओं के लिए: अगले 10 से 14 महीनों में भारतीय डिजाइन और बौद्धिक संपदा अधिकार वाले स्मार्टफोन बाजार में आने से ग्राहकों को स्वदेशी तकनीक वाले नए विकल्प मिलेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) का कुल बजट कितना है?\nइस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।\n\n2. MPMS के तहत वित्तीय लाभ पाने के लिए कंपनियों के लिए क्या मुख्य शर्त है?\nभारतीय कंपनियों को साबित करना होगा कि उनके पास मोबाइल फोन डिजाइन के बौद्धिक संपदा अधिकार (IP राइट्स) हैं और उत्पाद किसी अन्य कंपनी की नकल नहीं है।\n\n3. भारत में बने मौलिक डिजाइन वाले स्मार्टफोन कब तक बाजार में आने की उम्मीद है?\nइलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, स्वदेशी डिजाइन वाले फोन अगले 10 से 14 महीनों के भीतर बाजार में आ जाएंगे।\n\n4. टार्गेट सेग्मेंट 2 (TS2) में शामिल होने के लिए कंपनियों की पात्रता क्या है?\nकंपनी में कम से कम 51 प्रतिशत भारतीय स्वामित्व होना अनिवार्य है और वित्तवर्ष 2025-26 में न्यूनतम 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होना चाहिए।\n\n5. TS2 के तहत मौजूदा ब्रांड्स के लिए बिक्री में वृद्धि का क्या लक्ष्य रखा गया है?\nमौजूदा ब्रांड्स को वित्तवर्ष 2025-26 के कुल कारोबार के आधार स्तर से हर साल कम से कम 5,000 करोड़ रुपये अधिक की बिक्री हासिल करनी होगी।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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