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  "title": "इंदौर और उज्जैन के बीच 2935 करोड़ रुपये का नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, महज 35 मिनट में तय होगा सफर",
  "summary": "मध्य प्रदेश में इंदौर-उज्जैन के बीच 48 किलोमीटर लंबे फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमिपूजन हो गया है, जिससे दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर सिर्फ आधा घंटा रह जाएगी।",
  "content": "मध्य प्रदेश में परिवहन और संपर्क को एक नया आयाम देने की तैयारी शुरू हो गई है। सांवेर में इंदौर-उज्जैन फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की आधारशिला रखी गई है। इस शिलान्यास कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस नए मार्ग के निर्माण से इंदौर और उज्जैन के बीच की दूरी सिमट जाएगी, जिससे दोनों शहरों के बीच का सफर सिर्फ 30 से 35 मिनट का रह जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। यह मार्ग केवल दो शहरों को जोड़ने का काम नहीं करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगा।\n\nकॉरिडोर की लंबाई और प्रमुख मार्ग विवरण\nयह प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर कुल 48 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी शुरुआत इंदौर के पितृ पर्वत से होगी, और यह उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर के समीप स्थित सिंहस्थ बाईपास पर जाकर समाप्त होगा। इस कॉरिडोर के बन जाने से दैनिक यात्रियों, स्थानीय व्यापारियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आवागमन में विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। विशेष रूप से इंदौर हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन से उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर तक जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहद सुगम और कम समय लेने वाला मार्ग उपलब्ध होगा।\n\nवर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान देश और दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में यह फोरलेन कॉरिडोर यातायात के भारी दबाव को नियंत्रित करने और लोगों को जाम की समस्या से बचाने में एक जीवन रेखा के रूप में कार्य करेगा।\n\nलागत, ग्रामीण संपर्क और किसानों को लाभ\nइस पूरी परियोजना के निर्माण पर कुल 2935 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस कॉरिडोर के माध्यम से इंदौर जिले के 20 गांव और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे तौर पर आपस में जुड़ेंगे। इसके अतिरिक्त कई अन्य गांवों को भी इसका सीधा फायदा पहुंचेगा। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया। सरकार ने मुआवजे की राशि कलेक्टर गाइडलाइन के स्थान पर बाजार और बिक्री दरों के आधार पर तय की है। इस फैसले के चलते किसानों को अपनी जमीन के बदले सामान्य से कई गुना अधिक मुआवजा मिला है।\n\nआर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार\nभूमिपूजन के इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण से मध्य प्रदेश में विकास की गति अत्यधिक तेज होगी। यह कॉरिडोर इंदौर-पीथमपुर आर्थिक गलियारे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता प्रदान करेगा, जिससे क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा।\n\nवहीं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने संबोधन में कहा कि इस कॉरिडोर से दोनों प्रमुख शहरों के बीच की भौगोलिक दूरी तो कम होगी ही, साथ ही इनके आपसी संबंध भी और मजबूत होंगे। इस कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार की ओर से मध्य प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए कुल 5,657 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई, जिसका उपयोग लाभार्थियों को आवास और रोजगार मुहैया कराने में किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\n• देशभर में: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को इंदौर हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने के लिए तेज और सुगम रास्ता मिलेगा।\n• इंदौर और उज्जैन में: दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 30 से 35 मिनट रह जाएगा, साथ ही 28 गांवों को बेहतर सड़क संपर्क और स्थानीय किसानों को उनकी भूमि के लिए शानदार मुआवजा मिला है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की कुल लागत कितनी है?\nइस अत्याधुनिक कॉरिडोर परियोजना की कुल निर्माण लागत 2935 करोड़ रुपये है।\n\n2. इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद इंदौर से उज्जैन की यात्रा में कितना समय लगेगा?\nइस नए ग्रीनफील्ड मार्ग के बन जाने से इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा का समय घटकर केवल 30 से 35 मिनट रह जाएगा।\n\n3. इस कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है और इसका मुख्य मार्ग क्या है?\nयह फोरलेन कॉरिडोर 48 किलोमीटर लंबा होगा, जो इंदौर के पितृ पर्वत से शुरू होकर उज्जैन में चिंतामण गणेश मंदिर के समीप सिंहस्थ बाईपास तक जाएगा।\n\n4. इस परियोजना को कब तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई है?\nइस परियोजना को साल 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।\n\n5. इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण में किसानों को कैसे फायदा हुआ है?\nसरकार ने जमीन का मुआवजा कलेक्टर गाइडलाइन के बजाय वास्तविक बाजार और बिक्री दरों पर तय किया, जिससे किसानों को सामान्य से कई गुना अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-06-20",
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