# जबलपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रखी 472 करोड़ रुपये के टैंक ओवरहाल प्रोजेक्ट की आधारशिला, हर साल 230 T-72 और T-90 टैंक होंगे अपडेट

> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में 472 करोड़ रुपये की लागत वाली टैंक नवीनीकरण परियोजना का भूमि पूजन किया। इसके तहत जबलपुर और अवाड़ी कारखानों की संयुक्त क्षमता से भारतीय सेना के 230 T-72 और T-90 टैंकों को हर साल ओवरहाल किया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** मध्य प्रदेश · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/madhya-pradesh/jabalpur-men-raksha-mntri-rajnath-singh-ne-rakhi-472-karora-rupaye-ke-tainka-ovarahala-projekta-ki-adharashila-hara-sala-230-t-72--23137 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजनाथ सिंह, जबलपुर रक्षा प्रोजेक्ट, भारतीय सेना टैंक, T-90 टैंक, T-72 टैंक, रक्षा मंत्रालय, मध्य प्रदेश रक्षा क्षेत्र, अवाड़ी टैंक कारखाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में सैन्य टैंकों के नवीनीकरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास किया। 472 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े को मजबूती प्रदान करना है। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना विश्व की सबसे ताकतवर सेनाओं में शामिल है, जिससे इसकी रक्षा आवश्यकताएं भी व्यापक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य युद्धक टैंक, विशेषकर T-72 और T-90 के विभिन्न संस्करण, मैदानी युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सीमा पर सुरक्षा की लोहे की दीवार की तरह तैनात रहते हैं।

## बदलती तकनीक के बीच युद्धक टैंकों की प्रासंगिकता
जबलपुर में जनसमूह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि आधुनिक युद्ध शैली में आ रहे बदलावों के बावजूद टैंकों की उपयोगिता कम नहीं हुई है। प्रौद्योगिकी के विकास के साथ युद्ध के तौर-तरीके जरूर बदल रहे हैं, लेकिन मैदानी इलाकों में लड़ाई के दौरान टैंकों का महत्व बना हुआ है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए देश की रक्षा नीति को नई दिशा दी जा रही है।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सैन्य तैयारियों में किसी एक हथियार को दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता। भारतीय सेना को सिर्फ टैंक या सिर्फ ड्रोन के बीच चुनाव करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि दोनों प्रणालियों का एक साथ होना जरूरी है। सेना को आधुनिक टैंकों के साथ-साथ ड्रोन, तोपखाना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, मिसाइलें और निर्देशित ऊर्जा हथियार भी चाहिए। बख्तरबंद बेड़े और ड्रोन तकनीक के बीच बेहतर तालमेल बिठाना वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता है, और जबलपुर की यह नई ओवरहाल सुविधा इसी एकीकृत रणनीति को आगे बढ़ाएगी।

## जबलपुर और अवाड़ी से हर साल 230 टैंकों का होगा नवीनीकरण
जबलपुर में स्थापित की जा रही इस नई इकाई से प्रतिवर्ष 80 टैंकों के ओवरहाल की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी। यह क्षमता चेन्नई के पास स्थित भारी वाहन कारखाना अवाड़ी की मौजूदा 150 टैंकों की वार्षिक नवीनीकरण क्षमता के साथ जोड़ी जाएगी। जब जबलपुर की परियोजना पूरी तरह से काम करने लगेगी, तो अवाड़ी की 150 और जबलपुर की 80 टैंकों की क्षमता मिलकर हर साल कुल 230 T-72 और T-90 टैंकों का नवीनीकरण कर सकेगी। इससे सेना को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार समय पर अपग्रैडेड टैंक उपलब्ध हो सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि भारी वाहन कारखाना अवाड़ी पिछले 40 वर्षों से भारतीय सेना को बख्तरबंद वाहन मुहैया कराता रहा है। इन चार दशकों में अवाड़ी कारखाने ने सेना को लगभग 4,400 टैंकों की आपूर्ति की है। रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ये टैंक सीमा पर दुश्मनों के खिलाफ मजबूत ढाल बनकर खड़े हैं और जवानों के मनोबल को ऊँचा रखते हैं। 472 करोड़ रुपये की इस परियोजना से स्थानीय तकनीकी प्रतिभाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर मिलेंगे।

## रक्षा उत्पादन और निर्यात में एक दशक की बड़ी छलांग
भारत के रक्षा क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों की तुलना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46,000 करोड़ रुपये का था। बीते दशक में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत की गई मेहनत के बल पर अब घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़कर 1 लाख 77 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।

इसी तरह रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014 के आसपास भारत से रक्षा सामानों का निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम होता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक समुदाय भारत को एक प्रमुख निर्माण शक्ति, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी साझेदार और भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में देख रहा है।

## मध्य प्रदेश को रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने का विजन
जबलपुर की यह ओवरहाल परियोजना केवल सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इस परियोजना से जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों, मजदूरों, युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए समृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। स्थानीय कार्यबल को आधुनिक तकनीक और सही पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाया जाएगा।

मध्य प्रदेश को रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना पर काम चल रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रक्षा विनिर्माण की संभावनाओं को देखते हुए 3,073 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है, जहाँ 16,960 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। यह कदम मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में मजबूत आधारशिला रख रहा है।

## इसका आप पर असर
जबलपुर में टैंक ओवरहाल सुविधा के निर्माण से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास और स्थानीय रोजगार को गति मिलेगी।

- **भारत में:** सेना के T-72 और T-90 टैंकों का हर साल तेजी से नवीनीकरण होने से सरहद पर परिचालन तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इससे रक्षा आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू रक्षा उद्योग का आधार मजबूत होगा।
- **मध्य प्रदेश में:** जबलपुर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 16,960 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। इससे क्षेत्र के छोटे उद्यमियों, एमएसएमई और सेवा क्षेत्र को व्यापार के नए रास्ते मिलेंगे।
- **कौशल विकास पर प्रभाव:** स्थानीय इंजीनियरिंग और तकनीकी कार्यबल को अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इससे राज्य में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के लिए एक मजबूत कुशल वर्कफोर्स तैयार होगी।
- **आर्थिक चक्र पर असर:** जबलपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला विकसित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे विनिर्माण इकाइयों और सहायक उद्योगों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. जबलपुर में किस परियोजना का शिलान्यास किया गया है?
जबलपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 472 करोड़ रुपये की लागत वाली सैन्य टैंक ओवरहाल परियोजना की आधारशिला रखी है।

### 2. इस नई परियोजना से हर साल कितने टैंकों का नवीनीकरण होगा?
जबलपुर इकाई से हर साल 80 टैंकों का ओवरहाल होगा। अवाड़ी कारखाने की 150 टैंकों की क्षमता मिलाकर दोनों इकाइयाँ सालाना 230 T-72 और T-90 टैंकों का नवीनीकरण कर सकेंगी।

### 3. भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात पिछले 10 वर्षों में कितना बढ़ा है?
घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,77,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये पहुँच गया है।

### 4. भारी वाहन कारखाना अवाड़ी ने अब तक सेना को कितने टैंक दिए हैं?
अवाड़ी स्थित भारी वाहन कारखाना (HVF) पिछले 40 वर्षों में भारतीय सेना को लगभग 4,400 टैंकों की आपूर्ति कर चुका है।

### 5. मध्य प्रदेश में रक्षा विनिर्माण को लेकर क्या योजनाएँ हैं?
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रक्षा निर्माण के लिए 3,073 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है और 16,960 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।

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