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  "type": "article",
  "title": "कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों का कुनबा बढ़ा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा",
  "summary": "मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क के सुपखार में असम से लाए गए 8 जंगली भैंसों को क्वारंटाइन पूरा होने के बाद 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पुनर्स्थापन अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए वन्यजीव संरक्षण और क्षेत्र के विकास पर जोर दिया।",
  "content": "मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों को अब अधिक विस्तृत दायरे में विचरण करने की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बालाघाट जिले के गढ़ी सुपखार पहुंचकर पुनर्स्थापन अभियान के तहत इन जंगली भैंसों को लगभग 17 हेक्टेयर में फैले बड़े बाड़े में औपचारिक रूप से छोड़ा। इस दल में कुल 8 वन्य प्राणी शामिल हैं, जिनमें 6 मादा और 2 नर भैंसे हैं। यह कदम इन दुर्लभ जीवों को प्राकृतिक परिवेश में पूरी तरह ढालने की रणनीति का हिस्सा है।\n\nक्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद बड़ा बाड़ा बना नया बसेरा\n\nइससे पहले इन सभी जंगली भैंसों को निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण के उद्देश्य से एक छोटे बाड़े में रखा गया था। लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बने इस बाड़े में पिछले 4 महीने से इन सभी की विशेष निगरानी और क्वारंटाइन की प्रक्रिया चल रही थी। विशेषज्ञों और वन विभाग की टीम द्वारा स्वास्थ्य मानकों की पुष्टि किए जाने के बाद अब इन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि वे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित माहौल में अपनी संख्या और गतिविधियों को सहजता से बढ़ा सकें।\n\nअसम से 2200 किमी का सफर और एक सदी बाद वापसी\n\nमध्य प्रदेश के वनों में जंगली भैंसों की यह वापसी करीब 100 साल के लंबे अंतराल के बाद दर्ज की गई है। इस पुनर्बसाहट के लिए असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा के सहयोग से इन्हें लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय करके लाया गया था। कान्हा का जंगल पहले से ही बारहसिंगा और बाघों की मजबूत मौजूदगी के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, और अब जंगली भैंसों के जुड़ने से यहां की जैव विविधता और समृद्ध हुई है। पुनर्स्थापन के पहले चरण में कान्हा के सुपखार क्षेत्र में 28 अप्रैल को 4 भैंसें और इसके बाद 9 मई को 4 भैंसें लाई गई थीं, जिन्हें शुरुआत में छोटे बाड़े में रखा गया था। अब दूसरे चरण के तहत इन्हें बड़े बाड़े में विस्थापित कर दिया गया है।\n\nवन्यजीव इकोसिस्टम और नए टाइगर रिजर्व का विस्तार\n\nमुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर राज्य में लुप्तप्राय वन्य जीवों के संरक्षण के रोडमैप का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में 7 अक्टूबर को नौरादेही को रानी दुर्गावती के नाम से नया टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, जहां चीतों का तीसरा बसेरा तैयार किया गया है। सरकार की योजना है कि राज्य में एक-एक कर विभिन्न वन्य प्राणियों का संतुलित इकोसिस्टम तैयार किया जाए, ताकि जो वन्य प्राणी अतीत में जंगलों से लुप्त हो चुके हैं, उन्हें पुनः स्थापित किया जा सके। बालाघाट का यह प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व वैश्विक स्तर पर वन्यजीव प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान रखता है।\n\nसुरक्षा व्यवस्था और बालाघाट के विकास पर फोकस\n\nक्षेत्र के प्रशासनिक और सामाजिक माहौल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट को नक्सल मुक्त कर दिया गया है और अब यह क्षेत्र विकास के नए पैमाने तय कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 5 महीनों में वे खुद 4 बार इस इलाके का दौरा कर चुके हैं। नक्सली गतिविधियों के खात्मे के साथ ही प्रशासन अब जंगलों में दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे को तेजी से आगे बढ़ाने के काम में जुटा हुआ है।\n\nइसका आप पर असर\nकान्हा नेशनल पार्क में जंगली भैंसों के बड़े बाड़े में स्थानांतरण से मध्य प्रदेश में पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव पर्यटन को नया संबल मिलेगा।\n\n• भारत में: देश भर के वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों के लिए एक सदी बाद मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की वापसी जैव विविधता संरक्षण की बड़ी मिसाल पेश करती है। अन्य राज्यों के संरक्षण कार्यक्रमों के लिए यह ट्रांसलोकेशन मॉडल एक उपयोगी केस स्टडी का काम करेगा।\n• मध्य प्रदेश और बालाघाट में: कान्हा आने वाले पर्यटकों को अब बाघ और बारहसिंगा के अलावा जंगली भैंसों को भी देखने का नया अवसर धीरे-धीरे मिलने लगेगा। इससे बालाघाट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीव पर्यटन से जुड़े स्थानीय रोजगार और आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअसम से लाए गए जंगली भैंसों को 4 महीने के प्रारंभिक क्वारंटाइन के सफल समापन के बाद सुरक्षित रूप से बड़े प्राकृतिक बाड़े में स्थानांतरित किया गया है।\n\n• स्वास्थ्य परीक्षण और क्वारंटाइन: असम से लंबी यात्रा करके आए इन 8 जानवरों को किसी भी संक्रमण या बीमारी से बचाने और नए मौसम में ढलने के लिए पहले 1 हेक्टेयर के बाड़े में निगरानी में रखा गया था। 4 महीने तक स्वास्थ्य मानकों की पुष्टि होने के बाद ही इन्हें 17 हेक्टेयर के विस्तृत बाड़े में भेजना सुरक्षित माना गया।\n• एक सदी बाद प्रजाति की बहाली: मध्य प्रदेश के जंगलों से जंगली भैंसे लगभग 100 वर्ष पहले पूरी तरह समाप्त हो चुके थे। इस ऐतिहासिक कमी को पूरा करने और पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के लिए असम सरकार के तालमेल से इन्हें कान्हा लाया गया।\n• चरणबद्ध पुनर्वासन रणनीति: वन्यजीव प्रोटोकॉल के तहत सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय पहले छोटा बाड़ा और फिर बड़ा बाड़ा दिया जाता है। आने वाले चरणों में इनकी अनुकूलन क्षमता और संख्या वृद्धि के आधार पर इन्हें पूरी तरह खुले वन में छोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कान्हा में कुल कितने जंगली भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया है?\nकुल 8 जंगली भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया है, जिनमें 6 मादा और 2 नर शामिल हैं।\n\n2. इन जंगली भैंसों को किस राज्य से लाया गया था?\nइन्हें लगभग 2200 किलोमीटर दूर असम राज्य से मध्य प्रदेश लाया गया था।\n\n3. नया बाड़ा कितने क्षेत्र में फैला हुआ है?\nनया बाड़ा लगभग 17 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जबकि पहले वे 1 हेक्टेयर के क्वारंटाइन बाड़े में थे।\n\n4. मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की वापसी कितने समय बाद हुई है?\nप्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट लगभग 100 साल बाद हुई है।\n\n5. चीतों के लिए नया बसेरा किस अभयारण्य में बनाया गया है?\n7 अक्टूबर को नौरादेही को रानी दुर्गावती के नाम से नया टाइगर रिजर्व बनाया गया है, जहां चीतों का तीसरा बसेरा तैयार किया गया है।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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