पूर्व स्कूल शिक्षक निकला अंतरराज्यीय वाहन चोर, खंडवा पुलिस ने पकड़ीं 61 मोटरसाइकिलें मध्य प्रदेश के खंडवा में पुलिस ने एक शातिर वाहन चोर गिरोह को बेनकाब करते हुए दो लोगों को पकड़ा है। इनके कब्जे से दो राज्यों के कई इलाकों से चुराई गई करीब 30 लाख रुपये की 61 मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में दोपहिया वाहनों की चोरी करने वाले एक संगठित अंतर-जिला गिरोह पर कानून का शिकंजा कसा है। कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को दबोचकर उनके कब्जे से 61 दोपहिया गाड़ियां बरामद की गई हैं। जब्त की गई इन तमाम गाड़ियों का कुल बाजार मूल्य करीब 30 लाख रुपये आंका गया है। ये सभी गाड़ियां मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से गायब की गई थीं। पकड़े गए दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जा रहा है। जांच अधिकारी अदालत से रिमांड हासिल कर यह पता लगाने की तैयारी में हैं कि इन चुराई गई गाड़ियों के सौदे किन लोगों के साथ किए गए थे और इस पूरे जाल में अन्य कौन से मददगार शामिल थे। मास्टरमाइंड का अतीत और अपराध का रिकॉर्ड इस पूरे गिरोह की कमान संभालने वाला मुख्य आरोपी पूर्व में शिक्षा के पेशे से जुड़ा रहा था। खंडवा के SP आगम जैन ने बताया कि गिरोह का सरगना राजेंद्र राठौर का बेटा विशाल है, जो मूल रूप से खरगोन जिले के भीकनगांव इलाके का निवासी है। विशाल ने B.Sc. तक उच्च शिक्षा हासिल की है और अपराध की राह चुनने से पहले वह एक निजी स्कूल में बतौर शिक्षक काम कर रहा था। तकनीकी समझ और चालाकी के चलते वह किसी भी दोपहिया वाहन के लॉक को महज तीन मिनट के भीतर तोड़कर उसे उड़ा ले जाने में माहिर हो चुका था। उसके आपराधिक इतिहास की पड़ताल करने पर सामने आया कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 10 अलग-अलग आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। वारदातों में विशाल का साथ देने वाला दूसरा आरोपी बबलू है, जिसके पिता का नाम सरदारिया बारेला है और वह बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र का रहने वाला है। बबलू के खिलाफ भी पुलिस थानों में दो आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने दोनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की कार्रवाई पूरी कर ली है। जांच का दायरा और तकनीकी निगरानी खंडवा शहर और आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की शिकायतों के बाद पुलिस ने एक विशेष कार्ययोजना तैयार की थी। जांचकर्ताओं ने हाल के महीनों में दर्ज हुए मुकदमों का गहन अध्ययन किया और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज को खंगाला। तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो रिकॉर्डिंग के मिलान से यह साफ हुआ कि अलग-अलग स्थानों पर हुई चोरियों में ताला तोड़ने और गाड़ी लेकर भागने का तरीका एक समान था। इस समानता के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों और गाड़ियों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी शुरू की गई। इसी दौरान पुलिस को एक ठोस सूचना मिली, जिसके बाद दबिश देकर दोनों को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में ही आरोपियों ने सिलसिलेवार तरीके से कई वारदातें स्वीकार कर लीं। जंगलों में छिपाने और थोक में बेचने की रणनीति पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने काम करने के शातिर तौर-तरीकों का खुलासा किया। वे किसी भी गाड़ी को चुराने के तुरंत बाद बाजार में बेचने की गलती नहीं करते थे, ताकि पुलिस की तत्काल नाकाबंदी से बचा जा सके। इसके उलट, वे वाहनों को घने जंगलों और वीरान पड़े निर्जन स्थानों में ले जाकर सुरक्षित छिपा देते थे। जब इस तरह जमा की गई गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाती थी, तब वे सुनियोजित तरीके से खरीदारों की तलाश शुरू करते थे। बाजार की मांग को देखते हुए कुछ गाड़ियों को सीधे पूरी की पूरी बेच दिया जाता था, जबकि कुछ वाहनों के कलपुर्जे अलग-अलग खोलकर कबाड़ या पार्ट्स के रूप में खपाए जाते थे। दो राज्यों के कई जिलों में फैला नेटवर्क इस गिरोह की सक्रियता केवल एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इनका जाल मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बड़े भूभाग में फैला हुआ था। मध्य प्रदेश के भीतर गिरोह ने खंडवा के अलावा खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, हरदा, रतलाम, धार, इंदौर और देवास जैसे प्रमुख जिलों को अपना निशाना बनाया था। वहीं महाराष्ट्र के कई सीमावर्ती और नजदीकी जिलों में भी इनकी गतिविधियां फैली हुई थीं। बरामद की गई कुल 61 मोटरसाइकिलों में से 7 गाड़ियां खंडवा जिले से उठाई गई थीं, जबकि शेष 54 वाहन मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और महाराष्ट्र के इलाकों से चुराए गए थे। पुलिस अब उन खरीदारों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने चोरी की जानकारी होते हुए भी ये वाहन खरीदे थे। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से दो राज्यों में वाहन सुरक्षा और चोरी की गाड़ियों के अवैध बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा। • वाहन मालिकों के लिए: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रभावित जिलों में जिन लोगों की मोटरसाइकिलें चोरी हुई थीं, वे अब पुलिस सत्यापन के जरिए अपनी गाड़ी की पहचान कर उसे वापस पाने का दावा कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित थानों में दर्ज अपनी FIR और गाड़ी के दस्तावेज लेकर खंडवा पुलिस से संपर्क किया जा सकता है। • गाड़ी खरीदारों के लिए: बिना वैध पंजीकरण और अत्यधिक सस्ते दामों पर पुरानी बाइक खरीदने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। किसी भी पुराने वाहन को खरीदते समय परिवहन विभाग के रिकॉर्ड और असली दस्तावेजों की गहन जांच जरूर करें। • स्थानीय सुरक्षा के लिए: मुख्य गिरोह के पकड़े जाने से खंडवा और आसपास के जिलों में सार्वजनिक पार्किंग तथा कॉलोनियों में दोपहिया चोरी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि वाहन चालकों को केवल हैंडल लॉक पर निर्भर रहने के बजाय अतिरिक्त सुरक्षा लॉक इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। • खंडवा और सीमावर्ती जिलों में: पुलिस अब जंगलों और सुनसान ठिकानों पर निगरानी बढ़ा रही है ताकि लावारिस रखे वाहनों की समय पर पहचान हो सके। स्थानीय ग्रामीण और वन क्षेत्र के निवासी किसी भी संदिग्ध वाहन जमावड़े की सूचना तुरंत नजदीकी थाने को दे सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट आधुनिक शिक्षा, तकनीकी कौशल और सुनसान भौगोलिक इलाकों के दुरुपयोग के दम पर लंबे समय से सक्रिय बना हुआ था। • मास्टरमाइंड की कार्यप्रणाली: मुख्य आरोपी ने अपनी तकनीकी कुशलता का इस्तेमाल मोटरसाइकिल के लॉक को महज तीन मिनट में तोड़ने के लिए किया। त्वरित चोरी की इस तकनीक के कारण बाजार और व्यस्त इलाकों में किसी को उन पर तुरंत शक नहीं होता था। • सुरक्षित छिपाने के ठिकाने: आरोपी चुराई गई गाड़ियों को तुरंत बेचने के बजाय घने जंगलों और सुनसान वीरान इलाकों में छिपाकर रखते थे। इस रणनीति से वे वारदात के तुरंत बाद शुरू होने वाली पुलिस नाकाबंदी और स्थानीय तलाशी अभियानों से बच निकलते थे। • अवैध मांग और पुर्जों का कारोबार: ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में सस्ती गाड़ियों तथा उनके सस्ते कलपुर्जों की निरंतर मांग बनी रहती है। आरोपी पूरी गाड़ी बेचने के अलावा वाहनों को काटकर उनके पुर्जे कबाड़ में खपाते थे, जिससे गाड़ियों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था। सवाल-जवाब 1. खंडवा पुलिस ने इस गिरोह से कितनी मोटरसाइकिलें बरामद की हैं? पुलिस ने गिरोह के कब्जे से कुल 61 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये है। 2. इस गिरोह के मुख्य आरोपी की पृष्ठभूमि क्या है? सरगना विशाल खरगोन के भीकनगांव का रहने वाला है, जिसने B.Sc. की पढ़ाई की है और वह पहले एक निजी स्कूल में शिक्षक था। 3. आरोपियों के खिलाफ पहले से कितने मामले दर्ज हैं? मुख्य आरोपी विशाल पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि उसके साथी बबलू पर दो मामले दर्ज हैं। 4. चोरी की गई गाड़ियां किन राज्यों से संबंधित हैं? ये गाड़ियां मध्य प्रदेश के कई जिलों जैसे खंडवा, खरगोन, बड़वानी, इंदौर और देवास के साथ-साथ महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से चुराई गई थीं। 5. आरोपी चुराई गई मोटरसाइकिलों को कैसे ठिकाने लगाते थे? वे तुरंत गाड़ियां बेचने के बजाय उन्हें जंगलों में छिपाते थे और बाद में खरीदार मिलने पर पूरी बाइक या उनके पुर्जे अलग करके बेचते थे। https://trendkia.com/madhya-pradesh/khandwa-pulisa-ne-pakarin-61-motarasaikilen-purva-skula-shikshaka-nikala-antararajyiya-vahana-chora-44137 TrendKia — Har trend, sabse pehle.