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  "type": "article",
  "title": "मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बड़ी हलचल के बीच बिजली टावर पर चढ़ा किसान और बस्तर में गहराया विदेशी फंडिंग का विवाद",
  "summary": "मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं, जिनमें खंडवा में मुआवजे के लिए टावर पर चढ़ा किसान और बस्तर में चर्च निर्माण की विदेशी फंडिंग के आरोप प्रमुख हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की धरती पर हर रोज कई ऐसी घटनाएं घटती हैं जो यहां के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। आज भी भोपाल, इंदौर, रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्रों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक में कई महत्वपूर्ण हलचलें देखी गई हैं। सरकारी विभागों के फैसले, स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन, बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जुड़ी जनसमस्याएं और तीखी राजनीतिक बयानबाजी जैसी तमाम गतिविधियों ने आज दोनों राज्यों की जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से आज कौन सी बड़ी खबरें सामने आ रही हैं और इन घटनाओं का स्थानीय जनजीवन और शासन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।\n\nखंडवा में मुआवजा विवाद: बिजली के टावर पर खटिया बांधकर डटा पीड़ित किसान\nखंडवा जिले के पुनासा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुलगांव में एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। यहां के एक स्थानीय किसान रविंद्र सिंह पिछले 72 घंटों से अपने ही खेत में लगाए गए बिजली के ऊंचे ट्रांसमिशन टावर पर चढ़कर बैठे हुए हैं। इस किसान ने अपनी जान जोखिम में डालकर टावर के ऊपरी हिस्से पर एक खटिया बांध रखी है और वहीं पर अपना डेरा जमाया हुआ है। रविंद्र सिंह का कहना है कि उनके खेत से जो विशाल टावर लाइन निकाली जा रही है, उसके बदले में उन्हें विद्युत कंपनी और प्रशासन द्वारा उचित मुआवजा प्रदान नहीं किया जा रहा है। किसान का आरोप है कि उसकी इस जायज मांग को सुनने के लिए न तो बिजली विभाग के अधिकारी तैयार हैं और न ही स्थानीय प्रशासन का कोई नुमाइंदा उनकी बात पर ध्यान दे रहा है।\n\nइस बीच, आंदोलन की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह सुलगांव पहुंचे। उन्होंने आंदोलन स्थल पर जाकर सीधे टावर पर बैठे किसान रविंद्र सिंह से बातचीत की और उनका हालचाल जाना। इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि एक अन्नदाता को अपनी मेहनत की जमीन का हक पाने के लिए इस तरह जान की बाजी लगानी पड़ रही है, जो पूरे प्रशासनिक तंत्र की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रशासन की भारी संवेदनहीनता करार दिया। कांग्रेस नेता ने जिले के कलेक्टर से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है और मांग की है कि पीड़ित किसान को न्याय दिलाते हुए उसे पांच लाख रुपये की उचित मुआवजा राशि दी जाए ताकि वह सुरक्षित नीचे उतर सके।\n\nधार में मोहर्रम समाप्ति के बाद प्रशासन ने सील किया इमामबाड़ा\nधार जिले से प्रशासन की बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहां सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजामों के बीच इमामबाड़े को दोबारा सील कर दिया गया है। मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों की उपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों ने इस सीलिंग की प्रक्रिया को शांतिपूर्वक पूरा किया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे संवेदनशील इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को तैनात किया गया था। गौरतलब है कि इंदौर हाईकोर्ट के विशेष आदेश के बाद मोहर्रम का त्योहार मनाने के लिए इस इमामबाड़े को केवल पांच दिनों की अल्पावधि के लिए खोला गया था।\n\nइस भवन और जमीन से जुड़ा कानूनी विवाद लंबे समय से इंदौर हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यह इमामबाड़ा वास्तव में लोक निर्माण विभाग यानी PWD की एक इमारत के भीतर संचालित होता है, जिसके मालिकाना हक और उपयोग को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। पांच दिनों की निर्धारित अवधि समाप्त होते ही तय नियमों के अनुसार प्रशासन ने इसे दोबारा सील करने का कदम उठाया, जिसे दोनों पक्षों और स्थानीय निवासियों के सहयोग से सुचारू रूप से पूरा कर लिया गया।\n\nकोंटा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम का दावा: बस्तर में चर्च निर्माण के लिए अमेरिका से आ रहा फंड\nछत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में धर्मांतरण और लगातार बन रहे नए चर्चों को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कोंटा क्षेत्र के पूर्व विधायक और बस्तर राज मोर्चा के वर्तमान अध्यक्ष मनीष कुंजाम ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मनीष कुंजाम का कहना है कि बस्तर के घने जंगलों और ग्रामीण इलाकों में जो नए चर्चों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, उसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी धन आ रहा है और यह फंड सीधे अमेरिका से भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अत्यंत संवेदनशील और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामले को लेकर प्रदेश सरकार बिल्कुल भी गंभीर दिखाई नहीं दे रही है।\n\nमनीष कुंजाम ने आगे एक तीखा बयान देते हुए कहा कि यदि अमेरिका से आने वाले इस अवैध फंड पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए, तो बस्तर क्षेत्र में RSS का खेल भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उनका दावा है कि बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में योजनाबद्ध तरीके से नए प्रार्थना स्थलों का निर्माण हो रहा है और वहां के भोले-भाले आदिवासियों का बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर राज मोर्चा के पास इन सभी चर्चों के निर्माण और विदेशों से आने वाली वित्तीय मदद की पुख्ता जानकारियां मौजूद हैं। कुंजाम ने मांग की है कि यदि इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इस धर्मांतरण और चर्च निर्माण के पीछे कौन से तत्व सक्रिय हैं और उन्हें फंड देने वाले मुख्य स्रोत कहां स्थित हैं।\n\nमुरैना की सबलगढ़ अनाज मंडी में भीषण अग्निकांड, जलकर राख हुआ लाखों का सामान\nमध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर आई है, जहां सबलगढ़ की प्रसिद्ध अनाज मंडी के एक बड़े गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसने देखते ही देखते कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण अग्निकांड के चलते गोदाम के भीतर रखा लाखों रुपये का कीमती कृषि उत्पाद जलकर पूरी तरह राख हो गया। बताया गया है कि इस गोदाम में भारी मात्रा में लहसुन, प्याज और आलू जैसी सब्जियां संग्रहित करके रखी गई थीं, जो पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।\n\nहादसे की सूचना जैसे ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को दी गई, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर रवाना की गईं। दमकल कर्मी घटनास्थल पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के लिए लगातार मशक्कत कर रहे हैं। हालांकि, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि माल को सुरक्षित बाहर निकालने का कोई मौका नहीं मिला। इस हादसे से व्यापारी वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है।\n\nकैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को लिखे कथित शिकायत पत्र को किया खारिज, अफवाह बताया\nमध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक कथित पत्र को पूरी तरह से काल्पनिक और झूठा करार दिया है। इस कथित पत्र में दावा किया गया था कि कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पिछले ढाई सालों से उनके साथ हो रहे असहयोग, प्रशासनिक उपेक्षा और विरोध की शिकायत की थी। इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने इस तरह का कोई भी पत्र मुख्यमंत्री को नहीं लिखा है। उन्होंने इस भ्रामक खबर को फैलाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों या समाचार माध्यमों ने इसे प्रकाशित किया है, उनसे यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उनके पास इस बेबुनियाद जानकारी का क्या स्रोत था।\n\nइसके साथ ही, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राजस्थान के दौसा जिले में हुई भीषण बस दुर्घटना पर भी गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि इस भयानक हादसे में अपनी जान गवाएं लोगों के परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के बेहतर से बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है और मृतकों के परिजनों को हरसंभव प्रशासनिक और आर्थिक मदद पहुंचाई जाएगी। विजयवर्गीय ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी इस हृदयविदारक घटना से बेहद व्यथित हैं और वे लगातार दुर्घटना स्थल के अधिकारियों के संपर्क में रहकर पल-पल की स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।\n\nखरगोन के भगवानपुरा में जान की बाजी लगाकर उफनती नदी पार कर रहे स्कूली बच्चे\nमध्य प्रदेश के खरगोन जिले के आदिवासी बाहुल्य भगवानपुरा क्षेत्र से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मानसून की शुरुआती बारिश के साथ ही इस पूरे इलाके की कुंदा नदी और पहाड़ी नाले पूरी तरह उफान पर हैं। इसके बावजूद, छोटे-छोटे स्कूली बच्चे और स्थानीय ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इन बहते नदी-नालों को पार करने के लिए मजबूर हैं। पीपलझोपा के अंतर्गत आने वाले राजमोहली गांव से एक ऐसा ही डरावना वीडियो सामने आया है, जिसमें माता-पिता अपने नन्हें बच्चों का हाथ पकड़कर उफनती हुई नदी के तेज बहाव के बीच से रास्ता बनाते हुए नजर आ रहे हैं।\n\nइसके अलावा, काबरी-सागमली मार्ग का भी एक अन्य वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ ग्रामीण बच्चों को अपनी पीठ पर बैठाकर तो कुछ अपनी बैलगाड़ियों के सहारे पानी से भरे पुल और पुलिया को पार कर रहे हैं। यद्यपि स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार यह अपील की जा रही है कि उफनते हुए नदी-नालों या पुलिया पर पानी होने की स्थिति में उसे पार न किया जाए, लेकिन मैदानी स्तर पर इस अपील का कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है। सुदूर आदिवासी अंचलों में पक्के पुलों के अभाव के कारण न केवल बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि किसानों के रोजमर्रा के काम भी ठप हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा के दावे पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं और स्थानीय लोगों की एक छोटी सी असावधानी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।\n\nसलकनपुर के प्रसिद्ध मां बिजासन देवी धाम के प्रबंधन की जांच की उठी मांग\nअयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे को लेकर पूर्व में उठे कथित विवादों के बाद अब मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां बिजासन देवी धाम सलकनपुर के प्रबंधन की कार्यप्रणाली भी विवादों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बुधनी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहे विक्रम शर्मा मस्ताल ने इस मुद्दे को उठाते हुए मंदिर प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए मां बिजासन देवी धाम के वित्तीय लेनदेन और प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है और इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।\n\nविक्रम मस्ताल ने आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले दान और वहां की व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो सकती हैं, इसलिए श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचने से बचाने के लिए इसकी गहन पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने की भी बात कही है ताकि भक्तों को सच्चाई का पता चल सके। इस मांग के बाद सीहोर जिले की स्थानीय राजनीति और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।\n\nइसका आप पर असर\n• मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में: बुनियादी सुविधाओं और समय पर मुआवजे की कमी के कारण किसानों और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जो स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।\n• राष्ट्रीय स्तर पर: यह मामला धार्मिक स्थलों में वित्तीय पारदर्शिता और सुदूर क्षेत्रों में विदेशी फंडिंग की निगरानी के लिए सख्त नियमन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खंडवा में किसान रविंद्र सिंह टावर पर क्यों चढ़े हैं?\nकिसान रविंद्र सिंह अपने खेत में लगाए जा रहे बिजली के टावर का उचित मुआवजा न मिलने के विरोध में पिछले 72 घंटों से टावर पर खटिया बांधकर बैठे हैं।\n\n2. धार के इमामबाड़े को दोबारा क्यों सील किया गया?\nइंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर मोहर्रम मनाने के लिए इस इमामबाड़े को 5 दिनों के लिए खोला गया था, जिसकी अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन ने इसे दोबारा सील कर दिया।\n\n3. मनीष कुंजाम ने बस्तर में चर्च निर्माण को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?\nबस्तर राज मोर्चा के अध्यक्ष मनीष कुंजाम का आरोप है कि बस्तर संभाग में बन रहे नए चर्चों के लिए अमेरिका से फंड आ रहा है और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जा रहा है।\n\n4. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए किस पत्र का खंडन किया है?\nउन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे गए उस कथित पत्र को पूरी तरह खारिज किया है जिसमें ढाई साल से उनके साथ असहयोग और उपेक्षा होने का दावा किया गया था।\n\n5. खरगोन के भगवानपुरा क्षेत्र में मानसून के दौरान क्या खतरा सामने आया है?\nयहां उफनती कुंदा नदी और नालों पर पक्के पुल न होने के कारण स्कूली बच्चे और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर पानी के तेज बहाव के बीच से रास्ता पार कर रहे हैं।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-01",
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