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  "type": "article",
  "title": "मध्य प्रदेश का राशन घोटाला: गरीबों के नाम पर लाखों फर्जी थालियां, और अब निगम दफ्तर से अहम सबूत गायब",
  "summary": "भोपाल में दीनदयाल रसोई योजना के तहत 59 लाख थालियों के फर्जीवाड़े की जांच उस वक्त और उलझ गई, जब नगर निगम मुख्यालय से सरकारी अनुदान से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण ओरिजिनल फाइल ही अचानक गायब हो गई।",
  "content": "भोपाल में गरीबों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई दीनदयाल रसोई योजना में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यह मामला अब सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सबूत मिटाने की एक बड़ी साजिश की तरफ भी इशारा कर रहा है। दरअसल, जब इस योजना में हुए बड़े स्तर के घोटाले की जांच शुरू हुई, तो भोपाल नगर निगम के दफ्तर से सरकारी अनुदान और रिकॉर्ड से जुड़ी सबसे जरूरी फाइल ही रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। यह अहम फाइल ठीक उसी वक्त गायब हुई है, जब राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों ने जांच के लिए पूरे दस्तावेज तलब किए थे। इससे यह अंदेशा गहरा गया है कि घोटालेबाजों को बचाने के लिए विभाग के अंदर से ही बड़ी मिलीभगत की जा रही है।\n\nफर्जी लाभार्थियों का बड़ा नेटवर्क\nइस पूरे घोटाले का पैमाना यह बताता है कि गरीबों के हक का पैसा एक बेहद संगठित तरीके से लूटा गया है। 25 अक्टूबर 2024 को सामने आई जानकारियों के अनुसार, सब्सिडी वाले भोजन का लाभ उठाने के लिए एक ही तरह के मोबाइल नंबरों का बार-बार इस्तेमाल किया गया। हैरानी की बात यह है कि महज तीन महीने के छोटे से अंतराल में, एक ही फोन नंबर को 150 से 160 बार तक रजिस्टर करके भोजन बांटे जाने की एंट्री की गई। जब इस पैटर्न को और बारीकी से देखा गया, तो पता चला कि अकेले भोपाल शहर में 35 हजार से ज्यादा अलग-अलग मोबाइल नंबरों को फर्जी तरीके से सिस्टम में फीड किया गया था। इस तरह नंबरों का गोलमाल करके, एक साल के भीतर लगभग 59 लाख थालियों का फर्जी वितरण दिखाया गया। इन कागजी थालियों के जरिए, योजना को मिलने वाले सरकारी अनुदान की एक बहुत बड़ी रकम का दुरुपयोग किया गया।\n\nजांच शुरू होते ही मुख्य दस्तावेज हुए गायब\nइस बड़े पैमाने पर हुई धांधली को देखते हुए, राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने सख्त रुख अपनाया। विभाग ने इस पूरे फर्जीवाड़े की तह तक जाने के लिए एक विस्तृत जांच का आदेश दिया। इसी प्रक्रिया के तहत, नगरीय प्रशासन विभाग ने भोपाल नगर निगम से दीनदयाल रसोई योजना के सभी मूल रिकॉर्ड, बिल और अनुदान से जुड़ी फाइलें पेश करने को कहा। लेकिन जब नगर निगम के अधिकारी इन दस्तावेजों को इकट्ठा करने लगे, तो उन्हें पता चला कि अनुदान से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण ओरिजिनल फाइल दफ्तर में है ही नहीं। ठीक ऑडिट के समय मुख्य सबूत का गायब हो जाना साफ तौर पर यह दिखाता है कि इस बड़े घोटाले से जुड़े लोगों को बचाने के लिए दस्तावेजों को जानबूझकर खुर्द-बुर्द किया गया है।\n\nअधिकारियों का सख्त रुख और रिकॉर्ड जुटाने की कोशिश\nसबूतों के गायब होने जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे नगर निगम प्रशासन ने अब इस मामले में डैमेज कंट्रोल और कानूनी कदम उठाना शुरू कर दिया है। भोपाल नगर निगम की अपर आयुक्त (राजस्व) अंजू अरुण कुमार ने फाइल चोरी होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने इस लापरवाही और संदिग्ध चोरी की जांच कराने के लिए टीटी नगर थाने में एक लिखित आवेदन दिया है। इसके साथ ही, अपर आयुक्त ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मुख्य जांच किसी भी कीमत पर न रुके। इसके लिए विभाग में मौजूद अन्य डिजिटल और सेकेंडरी सोर्स से दोबारा सारा रिकॉर्ड इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया गया है। अंजू अरुण कुमार ने यह सख्त चेतावनी भी जारी की है कि अगर इस पूरे प्रकरण में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बेहद कठोर दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।\n\nपुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई की तैयारी\nअब यह पूरा मामला स्थानीय पुलिस के हाथों में आ चुका है, जो सरकारी रिकॉर्ड के गायब होने को एक गंभीर अपराध मानकर चल रही है। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें नगर निगम की तरफ से फाइल गायब होने की लिखित शिकायत मिल गई है। पुलिस ने अपनी तरफ से मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर फाइल दफ्तर से कैसे और किसने निकाली। शुरुआती जांच और सुरागों के आधार पर बहुत जल्द इस मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद न सिर्फ फाइल गायब करने वालों पर, बल्कि रसोई योजना में लाखों थालियों का घपला करने वालों पर भी कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: इस तरह के घोटाले बताते हैं कि कैसे गरीबों के लिए बने सरकारी फंड का दुरुपयोग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर किया जाता है, जिससे करदाताओं के पैसे का भारी नुकसान होता है।\n• भोपाल में: स्थानीय नागरिकों और जरूरतमंदों को अब सब्सिडी वाले भोजन के लिए अधिक सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जबकि जांच के कारण निगम के प्रशासनिक कामकाज में भी सख्ती देखने को मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भोपाल में दीनदयाल रसोई योजना को लेकर क्या विवाद है?\nइस योजना में फर्जी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके 59 लाख सब्सिडी वाली थालियों का फर्जी तरीके से लाभ उठाने का खुलासा हुआ है।\n\n2. फर्जीवाड़े को अंजाम कैसे दिया गया?\nमहज तीन महीने के भीतर एक ही मोबाइल नंबर का 150 से 160 बार तक रजिस्ट्रेशन किया गया। ऐसे कुल 35 हजार नंबरों का इस्तेमाल हुआ।\n\n3. जांच के दौरान नगर निगम दफ्तर से क्या गायब हुआ?\nराज्य सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर नगर निगम दफ्तर से सरकारी अनुदान से जुड़ी मुख्य ओरिजिनल फाइल ही गायब मिली।\n\n4. फाइल गायब होने के बाद क्या कानूनी कदम उठाए गए?\nनगर निगम की अपर आयुक्त (राजस्व) अंजू अरुण कुमार ने टीटी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।\n\n5. घोटाले के खुलासे की शुरुआत कब हुई?\n25 अक्टूबर 2024 को सामने आई जानकारियों से पहली बार इस व्यापक फर्जीवाड़े और मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग का पर्दाफाश हुआ।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-20",
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