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  "type": "article",
  "title": "मध्य प्रदेश के बगलामुखी मंदिर में दान घोटाले का पर्दाफाश, निजी खातों में जमा हो रहा था चढ़ावा",
  "summary": "आगर-मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में चंदा वसूली को लेकर एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। आधिकारिक समिति को दरकिनार कर एक निजी गुट मंदिर का चढ़ावा अपने बैंक खातों में ले रहा था।",
  "content": "राम मंदिर में चंदे की चोरी से जुड़ी हालिया घटनाओं के बाद अब देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां भक्तों द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य धातुओं की हेराफेरी की गई है।\n\nअनियमितताओं का बड़ा खुलासा\nमां बगलामुखी मंदिर में हुई धांधली तब प्रकाश में आई जब कलेक्टर प्रीति यादव ने अचानक वहां का निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मंदिर परिसर में सरकारी प्रबंधन समिति के अतिरिक्त एक अनधिकृत और निजी समिति सक्रिय थी। यह समिति न केवल श्रद्धालुओं से नगदी और सोने-चांदी के आभूषण स्वीकार कर रही थी, बल्कि उस पैसे को सरकारी कोष में जमा करने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कर रही थी। गर्भगृह के सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों में भी इसी निजी गुट द्वारा वित्तीय लेन-देन करने की जानकारी मिली है, जिसका कोई अधिकृत हिसाब-किताब प्रशासन के पास मौजूद नहीं है।\n\nप्रशासन का सख्त एक्शन\nमंदिर की असली सरकारी देखरेख समिति को किनारे करके एक समानांतर व्यवस्था चलाने के इस कृत्य को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। भक्तों की आस्था के साथ हुए इस खिलवाड़ की जांच के लिए कलेक्टर प्रीति यादव ने 7 जुलाई 2026 को एक विशेष आदेश जारी किया है। इस मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है, जिसे एक सप्ताह की समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।\n\nजांच टीम की संरचना\nप्रशासन द्वारा गठित की गई टीम में जिले के तीन महत्वपूर्ण अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके:\n\n• बी.एस. सोलंकी: अध्यक्ष (सीईओ, जिला पंचायत, आगर-मालवा)\n• मनीष सोलंकी: सदस्य (जिला कोषालय अधिकारी, आगर-मालवा)\n• मिनी अग्रवाल: सदस्य (मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नलखेड़ा)\n\nयह जांच टीम अब उन सभी वित्तीय लेनदेन का बारीकी से परीक्षण करेगी जो कथित निजी समिति के माध्यम से किए गए थे। प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि यह अपंजीकृत समिति कब से और किसके इशारे पर मंदिर के चढ़ावे को सीधे अपने निजी खातों में ले रही थी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे और दान की सुरक्षा को लेकर प्रशासन भविष्य में डिजिटल ऑडिट और सख्त निगरानी लागू कर सकता है।\n\nआगर-मालवा में: मंदिर प्रबंधन में बदलाव की उम्मीद है, जिससे भविष्य में चढ़ावा देने वाले श्रद्धालुओं को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि वे रसीदें केवल सरकारी काउंटर से ही प्राप्त करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बगलामुखी मंदिर में क्या घोटाला हुआ है?\nमंदिर में एक अनधिकृत निजी समिति भक्तों से नगद दान और कीमती धातुएं लेकर उन्हें सरकारी खातों के बजाय अपने निजी बैंक खातों में जमा कर रही थी।\n\n2. इस मामले में जांच कौन कर रहा है?\nकलेक्टर प्रीति यादव द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम इस मामले की जांच कर रही है, जिसकी अध्यक्षता बी.एस. सोलंकी कर रहे हैं।\n\n3. जांच टीम को रिपोर्ट कब देनी है?\nटीम को 7 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।\n\n4. भक्त चंदे के पैसे की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें?\nभक्तों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर में कोई भी दान देने के बदले केवल अधिकृत सरकारी प्रबंधन समिति से रसीद जरूर मांगें।",
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  "category": "मध्य प्रदेश",
  "publishedAt": "2026-07-08",
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    "बगलामुखी मंदिर",
    "आगर-मालवा",
    "दान घोटाला",
    "भ्रष्टाचार",
    "मध्य प्रदेश",
    "प्रशासन"
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  "site": "TrendKia"
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