मध्य प्रदेश में लोकायुक्त का बड़ा छापा, हेड कांस्टेबल के पास मिली 29 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति इंदौर पुलिस के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी में 33 संपत्तियों और 21 बैंक खातों का पता चला है, जहां खर्च वैध आय से 568 प्रतिशत अधिक पाया गया। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के तहत इंदौर पुलिस में तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ भारी अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त की विशेष जांच टीमों ने जब उनके देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, तो सामने आई संपत्तियों के ब्योरे ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। अब तक के तलाशी अभियान में प्रधान आरक्षक के पास 29 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति होने के दस्तावेज मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों शहरों में तलाशी अभियान जारी है और आगे संपत्ति का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की एक साथ छापेमारी लोकायुक्त इंदौर और लोकायुक्त उज्जैन की संयुक्त टीमों ने 14 अक्टूबर की सुबह फिरोज खान के देवास स्थित निवास और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर सुनियोजित तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दायरे में कुल 15 अलग-अलग ठिकाने शामिल किए गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि प्रधान आरक्षक का कुल व्यय लगभग ₹12.95 करोड़ दर्ज किया गया है। यह राशि उनकी ज्ञात और वैध आय से करीब ₹11.01 करोड़ अधिक बैठती है। अनुपातहीनता के लिहाज से यह उनकी वास्तविक वैध आमदनी से करीब 568 प्रतिशत अधिक पाई गई है। 33 अचल संपत्तियों और 21 बैंक खातों का खुलासा दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान कुल 33 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है, जिनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब ₹29.73 करोड़ आंका गया है। इसके अलावा जांच में एक परिचित महिला रोशनी वर्मा के नाम पर दर्ज संपत्तियों, कई कंपनियों और विभिन्न कारोबारी फर्मों से जुड़े लेन-देन की कड़ियां भी मिली हैं। मामले में लगभग 21 बैंक खातों का पता चलने के बाद अधिकारियों ने किसी भी संभावित वित्तीय हेरफेर को रोकने के लिए इन सभी खातों से रकम निकासी पर तत्काल रोक लगा दी है। फिलहाल देवास और इंदौर में संबंधित परिसरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है। पुलिस पृष्ठभूमि से जुड़ा है परिवार जांच के बीच फिरोज खान की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। उनके पिता गफ्फार भी पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे चुके थे और सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिनका अब निधन हो चुका है। इसके अलावा फिरोज के जुड़वां भाई जावेद भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और इस समय आगर मालवा में पदस्थ हैं। विभाग से मिले रिकॉर्ड के मुताबिक, फिरोज खान पिछले कई दिनों से बिना ड्यूटी के अवकाश पर चल रहे थे। पुलिस विभाग में एक प्रधान आरक्षक के स्तर पर इतनी भारी संपत्ति अर्जित करने के मामले ने सभी को चौंका दिया है। इसका आप पर असर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी एजेंसियों की सख्त कार्रवाई का सीधा संदेश लोक सेवकों और आम नागरिकों तक पहुंचता है। • मध्य प्रदेश में: लोकायुक्त की इस कार्रवाई से अवैध संपत्ति जमा करने वाले भ्रष्ट कर्मचारियों पर कानूनी शिकंजा कसा है। आम नागरिकों के लिए यह सुनिश्चित होता है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सख्त जांच और बैंक खाते सीज करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। • प्रशासनिक सेवा पर: पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर आंतरिक निगरानी तेज होने की उम्मीद है। ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर या अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स की भी गहन समीक्षा की जा सकती है। • वित्तीय जांच के नियम: 21 बैंक खातों से निकासी रोके जाने से बेनामी संपत्तियों के ट्रांसफर पर तत्काल लगाम लगी है। जांच पूरी होने तक किसी भी संबंधित फर्म या खाते से लेन-देन नहीं किया जा सकेगा। • जनता के लिए सीख: सरकारी कर्मचारियों द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जानकारी मिलने पर नागरिक सतर्कता एजेंसियों में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ऐसी शिकायतों पर ठोस जांच संभव होती है। ऐसा क्यों हुआ इंदौर पुलिस के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने की जानकारी मिलने के बाद लोकायुक्त ने यह सुनियोजित तलाशी अभियान चलाया। • आय और व्यय में भारी अंतर: जांच में सामने आया कि फिरोज खान का कुल व्यय ₹12.95 करोड़ था, जो उनकी ज्ञात वैध आय से ₹11.01 करोड़ ज्यादा पाया गया। यह अंतर 568 प्रतिशत अधिक होने के कारण प्रथम दृष्टया अनुपातहीन संपत्ति का मामला बना। • बेनामी निवेश और संदिग्ध फर्म: प्राथमिक सूचनाओं में परिचित महिला रोशनी वर्मा के नाम संपत्तियों और कई कारोबारी फर्मों के जरिए लेन-देन के संकेत मिले। इस वित्तीय जाल की पुष्टि के लिए बैंक खातों और अचल संपत्तियों की मौके पर पड़ताल जरूरी हो गई थी। • संयुक्त टीम का तलाशी अभियान: वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि के बाद लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की विशेष टीमों ने देवास और इंदौर में एक साथ 15 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच दल अभी दस्तावेजों और अचल संपत्तियों के मालिकाना हक की तस्दीक करने में जुटा है। सवाल-जवाब 1. लोकायुक्त ने किसके ठिकानों पर छापेमारी की है? लोकायुक्त टीमों ने इंदौर पुलिस के प्रधान आरक्षक फिरोज खान के देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर तलाशी ली है। 2. जांच में अब तक कुल कितनी संपत्ति का पता चला है? कार्रवाई में 33 अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹29.73 करोड़ आंका गया है। 3. प्रधान आरक्षक की आय और व्यय में कितना अंतर मिला? जांच में करीब ₹12.95 करोड़ का व्यय सामने आया है, जो उनकी ज्ञात वैध आय से ₹11.01 करोड़ अधिक यानी 568 प्रतिशत अनुपातहीन है। 4. कार्रवाई के दौरान वित्तीय लेन-देन पर क्या कदम उठाया गया है? जांच में सामने आए करीब 21 बैंक खातों से निकासी पर तत्काल रोक लगा दी गई है। 5. फिरोज खान के परिवार में कौन-कौन पुलिस सेवा से जुड़ा रहा है? उनके दिवंगत पिता गफ्फार सब इंस्पेक्टर पद से रिटायर हुए थे, जबकि उनके जुड़वां भाई जावेद आगर मालवा में पुलिस विभाग में पदस्थ हैं। https://trendkia.com/madhya-pradesh/madhya-pradesh-men-lokayukta-ka-bara-chhapa-head-constable-ke-pasa-mili-29-karora-se-jyada-ki-achala-snpatti-47533 TrendKia — Har trend, sabse pehle.